प्रबंध के सिद्धांतों की प्रकृति
सिद्धांत एक बुनियादी सच है जो सोच और काम को दिशा देता है। प्रबंध के सिद्धांत निर्णय के लिए सामान्य दिशानिर्देश हैं, भौतिकी के नियमों जैसे कठोर नहीं।
- सार्वभौमिक: हर तरह की संस्था में लागू।
- सामान्य दिशानिर्देश: राह दिखाते हैं, बना-बनाया जवाब नहीं।
- अभ्यास और प्रयोग से बने: सालों के अनुभव से परखे गए।
- लचीले: ज़रूरत के हिसाब से बदले जा सकते हैं।
- मुख्यतः व्यवहारिक: लोगों से जुड़े।
- कारण और परिणाम: बताते हैं कि किसी काम का क्या नतीजा होगा।
- आकस्मिक (परिस्थिति-निर्भर): उपयोग हालात पर निर्भर।
प्रबंध के सिद्धांतों का महत्व
- प्रबंधकों को उपयोगी समझ: असली हालात बेहतर समझ आते हैं।
- संसाधनों का अधिकतम उपयोग: व्यक्ति, पैसा, सामग्री की कम बर्बादी।
- वैज्ञानिक निर्णय: तथ्यों पर आधारित, पक्षपात नहीं।
- बदलती ज़रूरतें पूरी करना: लचीले सिद्धांत बदलाव में ढलते हैं।
- सामाजिक उत्तरदायित्व पूरा करना: जैसे उचित वेतन और समता।
- प्रबंध प्रशिक्षण, शिक्षा और शोध में मदद।
फ़ेयोल के प्रबंध के 14 सिद्धांत
हेनरी फ़ेयोल (1841–1925), फ़्रांसीसी खनन इंजीनियर, सामान्य प्रबंध के जनक कहलाते हैं।
- कार्य विभाजन: काम छोटे हिस्सों में, हर व्यक्ति एक में माहिर।
- अधिकार और उत्तरदायित्व: आदेश देने की शक्ति, दी गई ज़िम्मेदारी के बराबर हो।
- अनुशासन: नियम और समझौते मानना; अच्छे अधिकारी और उचित दंड।
- आदेश की एकता: हर कर्मचारी को एक ही अधिकारी से आदेश।
- निर्देश की एकता: एक उद्देश्य वाले कामों के समूह के लिए एक प्रमुख और एक योजना।
- व्यक्तिगत हित पर सामूहिक हित: संस्था का लक्ष्य पहले।
- कर्मचारियों का पारिश्रमिक: उचित वेतन जिससे ठीक से गुज़ारा हो।
- केंद्रीकरण और विकेंद्रीकरण: ऊपर शक्ति रखने और बाँटने में संतुलन।
- सोपान श्रृंखला: ऊपर से नीचे अधिकार की औपचारिक रेखा। आपात में समतल संपर्क (गैंग प्लैंक) से एक स्तर के दो लोग सीधे बात कर सकते हैं।
- व्यवस्था: हर चीज़ और व्यक्ति की तय जगह, और हर चीज़ अपनी जगह पर।
- समता: सबसे दया और न्याय; जाति, लिंग, धर्म का भेद नहीं।
- कार्यकाल में स्थिरता: कर्मचारियों को बार-बार न हटाएँ, न बदलें।
- पहल क्षमता: कर्मचारियों को नए विचार देने के लिए प्रोत्साहन।
- सहयोग की भावना: टीम भावना; प्रबंधक "मैं" नहीं "हम" कहें।
आदेश की एकता बनाम निर्देश की एकता
आदेश की एकता = एक कर्मचारी, एक बॉस; आदेशों की उलझन रोकती है। निर्देश की एकता = कामों के एक समूह के लिए एक योजना; काम का दोहराव रोकती है।
टेलर का वैज्ञानिक प्रबंध: सिद्धांत
एफ. डब्ल्यू. टेलर (1856–1915), अमेरिकी इंजीनियर, वैज्ञानिक प्रबंध के जनक कहलाते हैं। वैज्ञानिक प्रबंध का मतलब है अध्ययन से खोजे गए सबसे अच्छे तरीके से काम करना, अंदाज़े से नहीं।
- विज्ञान, अंगूठा टेक नियम नहीं: अंदाज़े की जगह अध्ययन और प्रयोग से बने तरीके।
- सामंजस्य, मतभेद नहीं: प्रबंधक और कर्मचारी एक-दूसरे को साझेदार मानें। टेलर ने इस सोच के बदलाव को मानसिक क्रांति कहा।
- सहयोग, व्यक्तिवाद नहीं: दोनों साथ काम करें; कर्मचारियों के सुझावों का स्वागत।
- हर व्यक्ति का अधिकतम कुशलता तक विकास: सही चयन और प्रशिक्षण।
वैज्ञानिक प्रबंध की तकनीकें
- क्रियात्मक फ़ोरमैनशिप: 8 विशेषज्ञ प्रभारी। नियोजन विभाग: मार्ग लिपिक, निर्देश कार्ड लिपिक, समय व लागत लिपिक, अनुशासक। उत्पादन विभाग: गति प्रभारी, टोली प्रभारी, मरम्मत प्रभारी, निरीक्षक। विशेषज्ञता मिलती है पर आदेश की एकता टूटती है।
- कार्य का मानकीकरण और सरलीकरण: औज़ार, तरीके और उत्पादन के मानक तय करना; उत्पादों और आकारों की बेकार किस्में घटाना।
- पद्धति अध्ययन: काम करने का सबसे अच्छा तरीका खोजना।
- गति अध्ययन: शरीर की हरकतें जाँचना, बेकार हरकतें हटाना।
- समय अध्ययन: स्टॉपवॉच से किसी काम का मानक समय तय करना।
- थकान अध्ययन: आराम के कितने और कितने लंबे अंतराल हों, यह तय करना।
- विभेदात्मक मज़दूरी पद्धति: दो दरें: मानक तक पहुँचने वालों को प्रति इकाई ऊँची दर, नीचे वालों को कम दर।
फ़ेयोल और टेलर की तुलना
फ़ेयोल ने ऊपर से देखा (सामान्य प्रबंध, हर संस्था)। टेलर ने कारख़ाने के फ़र्श से देखा (उत्पादन कुशलता)। फ़ेयोल ने आदेश की एकता पर ज़ोर दिया; टेलर की फ़ोरमैनशिप में कई बॉस हैं। दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- सिद्धांत = निर्णय और कार्य के लिए व्यापक, लचीला दिशानिर्देश।
- आदेश की एकता = एक बॉस; निर्देश की एकता = कामों के समूह के लिए एक योजना (एक प्रमुख)।
- सोपान श्रृंखला: ऊपर → नीचे औपचारिक रेखा; आपात में समतल संपर्क।
- विभेदात्मक मज़दूरी: इकाई ≥ मानक → ऊँची दर × इकाई; इकाई < मानक → कम दर × इकाई।
- क्रियात्मक फ़ोरमैनशिप: 4 नियोजन + 4 उत्पादन प्रभारी = 8।
हल किए गए उदाहरण
1. एक विक्रेता को विक्रय प्रबंधक और क्षेत्रीय प्रमुख दोनों से अलग-अलग आदेश मिलते हैं। कौन-सा सिद्धांत टूटा?
आदेश की एकता (एक कर्मचारी, एक बॉस)।
2. एक कंपनी शैम्पू और बिस्कुट दोनों बनाती है, हर एक का अलग प्रमुख और अलग योजना है। कौन-सा सिद्धांत माना गया?
निर्देश की एकता: कामों के हर समूह के लिए एक योजना और एक प्रमुख।
3. मानक उत्पादन रोज़ 20 इकाई। दर: मानक या ज़्यादा पर ₹6 प्रति इकाई, कम पर ₹5। रवि 21 इकाई, सीता 19 इकाई बनाती है। मज़दूरी?
रवि: 21 × 6 = ₹126। सीता: 19 × 5 = ₹95। दो इकाई के अंतर से ₹31 ज़्यादा।
4. ऊपर वाले उदाहरण में सीता एक इकाई और बनाए तो कितना कमाएगी?
20 इकाई = मानक, तो 20 × 6 = ₹120। यह ₹95 से ₹25 ज़्यादा है, मानक तक पहुँचने की बड़ी प्रेरणा।
5. एक कारख़ाना डिब्बे पैक करने वाले कर्मचारी की हर हरकत जाँचकर तीन बेकार हरकतें हटाता है। कौन-सी तकनीक?
गति अध्ययन।
6. एक प्रबंधक को बिक्री 20% बढ़ाने की ज़िम्मेदारी दी गई, पर कर्मचारी रखने या छूट देने का अधिकार नहीं। कौन-सा सिद्धांत टूटा?
अधिकार और उत्तरदायित्व: ज़िम्मेदारी के बराबर अधिकार नहीं।
आम गलतियाँ
- आदेश की एकता (एक बॉस) और निर्देश की एकता (एक योजना) को मिला देना।
- सिद्धांतों को विज्ञान के कठोर नियम मानना। ये लचीले और परिस्थिति-निर्भर हैं।
- कहना कि क्रियात्मक फ़ोरमैनशिप आदेश की एकता मानती है। यह उसे तोड़ती है (8 बॉस)।
- मानक से नीचे वाले कर्मचारी की मज़दूरी ऊँची दर से निकालना।