सहायक उद्यम क्या हैं और किसान को इनकी ज़रूरत क्यों है?
सहायक उद्यम खेत पर या पास में फसल के साथ चलने वाला अतिरिक्त व्यवसाय है। इसे संबद्ध गतिविधि भी कहते हैं।
ये क्यों ज़रूरी हैं
- नियमित आय: फसल केवल कटाई पर पैसा देती है; दूध और अंडे रोज़।
- कम जोखिम: बारिश न हो या कीट लग जाएँ, तब भी परिवार कमाता है।
- कचरे का उपयोग: भूसा, भूसी और डंठल पशुओं को या मशरूम उगाने में।
- खाद और ईंधन: गोबर और बीट खेत में या बायोगैस संयंत्र में।
- रोज़गार: महिलाएँ, युवा और बुज़ुर्ग साल भर घर पर काम कर सकते हैं।
- बेहतर पोषण: दूध, अंडे, शहद, मछली और मशरूम में प्रोटीन और विटामिन भरपूर।
डेयरी (दुग्ध व्यवसाय)
डेयरी यानी दूध के लिए गाय, भैंस या बकरी पालना।
- नस्लें: ज़्यादा दूध देने वाली गायें (भारत में साहीवाल, गिर, लाल सिंधी; दुनिया भर में होल्स्टीन फ्रीज़ियन, जर्सी) और भैंस (मुर्रा)।
- देखभाल: साफ, हवादार बाड़ा; हरा चारा, सूखा चारा और दाना; साफ पानी (एक गाय दिन में 40–80 L पीती है); टीकाकरण और साफ दुहाई।
- उत्पाद: दूध, दही, मक्खन, घी, पनीर, चीज़।
- उप-उत्पाद: गोबर से कम्पोस्ट और बायोगैस।
- बिक्री: गाँव के संग्रह केंद्र और सहकारी समितियाँ उचित दाम देती हैं।
मुर्गीपालन
मुर्गीपालन में अंडे और मांस के लिए मुर्गी, बत्तख, टर्की या बटेर पाले जाते हैं।
- लेयर: अंडों के लिए मुर्गियाँ; अच्छी लेयर साल में लगभग 250–300 अंडे देती है।
- ब्रॉयलर: तेज़ी से बढ़ने वाले चूज़े, लगभग 5–7 हफ्तों में मांस के लिए तैयार।
- आवास: डीप-लिटर पद्धति (भूसी या बुरादे पर) या पिंजरे; अच्छी हवा और रोशनी।
- स्वास्थ्य: टीके (जैसे रानीखेत रोग के), साफ पानी, जंगली पक्षियों को दूर रखना।
- उप-उत्पाद: बीट बढ़िया खाद है।
मधुमक्खी पालन (एपीकल्चर)
मधुमक्खी पालन में मधुमक्खियों के छत्ते लकड़ी के बक्सों में रखे जाते हैं।
- कॉलोनी: एक रानी (अंडे देती है), हज़ारों श्रमिक (मकरंद लाते, शहद बनाते हैं) और कुछ नर (ड्रोन)।
- प्रजातियाँ: एपिस मेलिफेरा (यूरोपीय, ज़्यादा शहद), एपिस सेराना इंडिका (भारतीय, शांत), जंगल में सारंग (रॉक बी) और छोटी मधुमक्खी।
- उत्पाद: शहद, मोम, पराग, रॉयल जेली, प्रोपोलिस।
- बड़ा फायदा: मधुमक्खियाँ सरसों, सूरजमुखी, सेब, बादाम जैसी फसलों का परागण करती हैं, जिससे उपज बढ़ती है।
- कम ज़मीन और कम पैसे में; बक्से फूल वाली फसल के पास रखें और फूलों पर कीटनाशक कभी न छिड़कें।
मशरूम उत्पादन और दूसरे सहायक उद्यम
मशरूम कवक हैं, इसलिए उन्हें धूप नहीं चाहिए। आम किस्में: बटन, ढींगरी (ऑयस्टर) और पुआल मशरूम।
- भूसा काटकर भिगोइए और गर्म पानी से पाश्चरीकृत कीजिए ताकि दूसरे सूक्ष्मजीव मरें।
- स्पॉन (मशरूम का 'बीज') मिलाकर थैलों में भरिए।
- अँधेरे, नम कमरे में रखिए (लगभग 20–28 °C, ज़्यादा नमी)।
- लगभग 3–6 हफ्तों में तुड़ाई; बचा भूसा कम्पोस्ट बन जाता है।
दूसरे उद्यम
- मछली पालन: तालाब में कार्प; धान, बत्तख या मुर्गी के साथ जोड़ा जा सकता है।
- बकरी और भेड़ पालन: मांस, दूध, ऊन; झाड़ियाँ खाने वाले छोटे पशु।
- रेशम कीट पालन: शहतूत की पत्तियाँ खाकर रेशम कीट रेशम बनाते हैं।
- और: सूअर पालन, वर्मीकम्पोस्ट इकाई, पौधशाला, बायोगैस।
समेकित कृषि प्रणाली
समेकित कृषि प्रणाली में हिस्से एक-दूसरे की मदद करते हैं: फसल का भूसा → पशु और मशरूम; गोबर → बायोगैस → घोल खेत में; मुर्गी की बीट → मछली तालाब; तालाब की गाद → खेत।
करके देखिए: अपना समेकित खेत बनाइए
बीच में अपना फसल का खेत बनाइए। उसके चारों ओर कोई तीन उद्यम जोड़िए। हर एक के लिए तीर बनाइए कि वह खेत से क्या लेता है (चारा, भूसा) और क्या लौटाता है (खाद, परागण, घोल)। फिर 3D खुले खेल में देखिए कितने महीनों में आय है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- सहायक उद्यम = फसल के साथ चलने वाला अतिरिक्त कृषि व्यवसाय (संबद्ध गतिविधि)
- डेयरी: रोज़ दूध; गोबर → कम्पोस्ट या बायोगैस
- मुर्गीपालन: लेयर → अंडे (≈ 250–300/साल); ब्रॉयलर → ≈ 5–7 हफ्तों में मांस
- मधुमक्खी पालन: शहद + मोम + फसल का परागण
- मशरूम: पाश्चरीकृत भूसे + स्पॉन पर कवक, अँधेरा और नमी, ≈ 3–6 हफ्तों में तुड़ाई
- लाभ = आय − लागत; समेकित खेती में एक का कचरा दूसरे का आदान
हल किए गए उदाहरण
1. एक परिवार की 3 गायें रोज़ 10-10 L दूध देती हैं, जो ₹45/L बिकता है। चारे और देखभाल का खर्च ₹600 रोज़ है। महीने (30 दिन) का लाभ निकालिए।
रोज़ का दूध = 3 × 10 = 30 L। रोज़ की आय = 30 × 45 = ₹1,350। रोज़ का लाभ = 1,350 − 600 = ₹750। महीने का लाभ = 750 × 30 = ₹22,500।
2. 100 लेयर मुर्गियाँ 80% दिनों में अंडा देती हैं। 30 दिनों में कितने अंडे? ₹6 प्रति अंडे पर आय कितनी?
रोज़ के अंडे = 100 × 0.8 = 80। 30 दिनों में = 2,400 अंडे। आय = 2,400 × 6 = ₹14,400।
3. सरसों का किसान अपने खेत के किनारे मधुमक्खी पालक के बक्सों का स्वागत क्यों करेगा?
मधुमक्खियाँ सरसों के फूलों का परागण करती हैं, इसलिए ज़्यादा दाने बनते हैं और उपज बढ़ती है, और मधुमक्खी पालक को सरसों का शहद मिलता है। दोनों का फायदा; बस फूल आने के समय किसान कीटनाशक न छिड़के।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि सहायक उद्यम फसल की जगह लेते हैं। वे फसल के साथ चलते हैं और उसे सहारा देते हैं।
- लेयर और ब्रॉयलर में गड़बड़: लेयर अंडों के लिए, ब्रॉयलर मांस के लिए।
- मशरूम को धूप वाला पौधा समझना। वे कवक हैं और अँधेरे में उगते हैं।
- मधुमक्खी के बक्सों के पास फूल वाली फसल पर कीटनाशक छिड़कना; इससे वही मधुमक्खियाँ मरती हैं जो उपज बढ़ाती हैं।