देश और दुनिया की खेती
खेती बढ़ती दुनिया को खाना, रेशा और ईंधन की फसलें देती है। जगहें अलग हैं: कहीं बहुत से छोटे पारिवारिक खेत हैं, कहीं कुछ विशाल खेत। कहीं ज़्यादातर चावल या गेहूँ उगता है, कहीं पशुपालन या सब्ज़ी।
- लोग ज़्यादा, ज़मीन सीमित: खेती की ज़मीन सीमित है, इसलिए हर हेक्टेयर से ज़्यादा उपज चाहिए।
- व्यापार देशों को जोड़ता है: कई जगहें कुछ खाना मँगाती और कुछ बेचती हैं।
- खाद्य आत्मनिर्भरता यानी देश का कितना खाना उसके अपने खेतों से आता है।
- जलवायु और मौसम के जोखिम जैसे सूखा और बाढ़ हर जगह खेतों पर असर डालते हैं।
अपने इलाक़े की दुनिया से तुलना करो: क्या उगता है, खेत कितने बड़े हैं और खेती कौन करता है?
कृषि प्रबंधन के रुझान
- कम पर बड़े खेत। कुछ किसान खेती छोड़ते हैं और दूसरे उनकी ज़मीन किराये पर या ख़रीदकर लेते हैं। कुल संख्या घटती है और औसत आकार बढ़ता है।
- बुज़ुर्ग होते किसान। औसत उम्र बढ़ती है क्योंकि कम युवा खेती शुरू करते हैं। इसे उत्तराधिकारी की समस्या कहते हैं।
- ज़्यादा तकनीक। ट्रैक्टर, ड्रोन, सेंसर और खेती के सॉफ़्टवेयर मेहनत बचाते हैं और पानी-खाद सोच-समझकर देते हैं (स्मार्ट खेती)।
- खेत एक कारोबार। खेत हिसाब रखते हैं, खर्च की योजना बनाते हैं, सीधे दुकान या ऑनलाइन बेचते हैं और प्रसंस्करण (जैम, पनीर, आटा) से कीमत बढ़ाते हैं। उगाना, बनाना और बेचना मिलाकर कभी-कभी इसे छठा उद्योग कहते हैं।
- समूह और कंपनियाँ। पड़ोसी सहकारी समितियाँ या कृषि कंपनियाँ बनाकर मशीनें और काम बाँटते हैं।
- पर्यावरण का ध्यान। रसायन कम, जैविक और टिकाऊ तरीक़े ज़्यादा।
खाद्य, कृषि और ग्रामीण नीति और कानून
सरकारें नीति बनाती हैं क्योंकि खाना बुनियादी ज़रूरत है और खेती अकेले करना कठिन है। तीन बड़े उद्देश्य:
- स्थिर खाद्य आपूर्ति: दाम का सहारा, भंडार, आपदा में किसानों की मदद और देश में ज़्यादा अन्न उगाने के लक्ष्य।
- सुरक्षित खाना: लेबल, स्वच्छता और कीटनाशक की सीमा के कानून।
- जीवंत गाँव: सड़क, स्कूल और रोज़गार वाला ग्रामीण विकास तथा खेती की ज़मीन और देहात की रक्षा।
दूसरे साधन: अनुदान और कर्ज़, ज़मीन के उपयोग के नियम, युवा किसानों को सहायता और प्रशिक्षण। कानून हर देश में अलग हैं, इसलिए अपने देश का मुख्य कानून खोजो और पूछो कि वह किसलिए है।
खपत के रुझान और सामाजिक-आर्थिक माहौल
- थाली बदलती है। आय बढ़ने पर लोग अक्सर अनाज कम और सब्ज़ी, फल, दूध, अंडे और मांस ज़्यादा खाते हैं, और तैयार खाना भी।
- छोटे परिवार और व्यस्त जीवन से तैयार खाने और बाहर खाने की माँग बढ़ती है।
- सेहत और पर्यावरण सुरक्षित, स्थानीय, जैविक और कम कचरे वाले खाने की माँग बढ़ाते हैं।
- बूढ़ी होती या घटती आबादी कहीं बाज़ार छोटा करती है, तो बढ़ते शहर कहीं उसे बड़ा करते हैं।
- दाम और व्यापार: विश्व बाज़ार के दाम, ईंधन और खाद की लागत और मुद्रा की दर किसान की आय पर असर डालते हैं।
- खाने की बर्बादी बड़ा नुकसान है: उसे घटाना अच्छी खाद्य नीति का हिस्सा है।
खुद करके देखो
दादा-दादी या बड़े पड़ोसी से पूछो: जब तुम्हारी उम्र के थे तब गाँव में कितने खेत थे और अब कितने हैं? तब क्या खाते थे और अब क्या? दो रुझान लिखो। 3D में साल का स्लाइडर शुरू से अंत तक चलाओ और अपने उत्तरों से मिलाओ।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- औसत खेत का आकार = कुल खेती की ज़मीन / खेतों की संख्या
- खाद्य आत्मनिर्भरता (%) = देश में उगा खाना / खाया गया खाना x 100
- चार रुझान: कम खेत, बुज़ुर्ग किसान, बदलती थाली, नीति का सहारा
हल किए गए उदाहरण
1. एक ज़िले में 1000 हेक्टेयर खेती की ज़मीन और 100 खेत हैं। औसत खेत कितना बड़ा है?
1000 / 100 = 10 हेक्टेयर प्रति खेत।
2. सालों बाद वही 1000 हेक्टेयर 40 खेतों के पास है। नया औसत आकार क्या है और वह कितने गुना बड़ा है?
1000 / 40 = 25 हेक्टेयर। 25 / 10 = 2.5 गुना बड़ा।
3. एक देश साल में 200 इकाई का खाना खाता है और घर में 120 इकाई उगाता है। उसकी आत्मनिर्भरता कितनी है?
120 / 200 x 100 = 60 प्रतिशत।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि खेत कम हुए तो खेती की ज़मीन भी घटी। ज़मीन वही रह सकती है और खेत बड़े हो जाते हैं।
- समझाने वाले अंकों को असली आँकड़े मान लेना। हमेशा अपने देश के आँकड़े देखो।
- यह मानना कि हर जगह रुझान एक ही रफ़्तार से चलते हैं।
- भूल जाना कि नीति और कानून खाना सुरक्षित और आपूर्ति स्थिर रखने के लिए भी हैं, सिर्फ़ किसानों की मदद के लिए नहीं।