CBSE कक्षा 12 कृषि
अध्याय: 4
1. भाग क: रोज़गार कौशल
संचार कौशल · स्व-प्रबंधन कौशल · आईसीटी कौशल · उद्यमशीलता कौशल · हरित कौशल
- संचार कौशल: अपनी बात साफ़ और प्यार से कैसे पहुँचाएँ – संचार यानी लोगों के बीच अर्थ बाँटना। प्रेषक (भेजने वाला) विचार को संदेश में बदलता है, उसे माध्यम से भेजता है, और प्राप्तकर्ता उसे समझकर प्रतिपुष्टि (फ़ीडबैक) देता है। शोर, कठिन शब्द, तेज़ भावनाएँ और सांस्कृतिक अंतर जैसी बाधाएँ संदेश को रोक या मोड़ सकती हैं। हम अर्थ शब्दों से (शाब्दिक), चेहरे, आँखों, हाव-भाव, मुद्रा और आवाज़ के लहजे से (अशाब्दिक), और चित्रों से (दृश्य) भेजते हैं। सक्रिय श्रवण — ध्यान, धैर्य, सवाल और अपने शब्दों में दोहराना — साबित करता है कि संदेश पहुँचा। अच्छा वक्ता संदर्भ के हिसाब से बदलता है: औपचारिक या अनौपचारिक, बोलकर या लिखकर, और विनम्र अनुरोध, सलीके से मना करना, सच्ची माफ़ी और दृढ़ (न दब्बू, न आक्रामक) भाषा अपनाता है।
- आत्म-प्रबंधन: अपनी भावनाओं, लक्ष्यों और समय की कमान अपने हाथ में – आत्म-प्रबंधन (self-management) यानी अपनी भावनाओं, विचारों और कामों को ख़ुद दिशा देना ताकि आप अपने लक्ष्य तक पहुँचें। इसकी शुरुआत आत्म-जागरूकता से होती है: आप क्या महसूस कर रहे हैं और कितना तेज़। फिर प्रतिक्रिया से पहले ठहराव (रुको, सोचो, करो) और धीमी साँस जैसे उपाय। विचार भावनाओं को और भावनाएँ कामों को बनाती हैं, इसलिए 'मैं बेकार हूँ' को 'मैं अभी नहीं कर पाता' में बदलने से काम बदल जाता है। अच्छे आत्म-प्रबंधक SMART लक्ष्य बनाते हैं, ज़रूरी-महत्वपूर्ण देखकर समय बाँटते हैं, अच्छी आदतें बनाते हैं और असफलता के बाद फिर खड़े होते हैं (लचीलापन)।
- आईसीटी कौशल: ऑफ़िस टूल, इंटरनेट, ई-मेल और सुरक्षित रहना – ICT का मतलब है सूचना और संचार तकनीक (Information and Communication Technology)। यानी वे सब औज़ार जिनसे हम जानकारी बनाते, रखते और भेजते हैं: कंप्यूटर, फ़ोन, सॉफ़्टवेयर और इंटरनेट। मुख्य कौशल हैं: वर्ड प्रोसेसर में लिखना, स्प्रेडशीट में गिनती, प्रेज़ेंटेशन से बात समझाना, इंटरनेट पर खोजना, ई-मेल भेजना और ऑनलाइन सुरक्षित रहना।
- हरित कौशल: सतत विकास, हरित अर्थव्यवस्था और हरित नौकरियाँ – हरित कौशल वह ज्ञान, आदतें और काम के हुनर हैं जिनसे हम धरती को नुकसान पहुँचाए बिना जी और काम कर सकें। इनकी नींव है सतत विकास: आज की ज़रूरतें पूरी करना और आने वाली पीढ़ी के लिए भी छोड़ना। हरित अर्थव्यवस्था प्रदूषण और कचरा घटाते हुए बढ़ती है, अक्सर घेरे में चलकर: बनाओ, इस्तेमाल करो, मरम्मत करो, रीसायकल करो। इससे सोलर तकनीशियन जैसी हरित नौकरियाँ बनती हैं। हर कोई 5R से हरित कौशल अपना सकता है।
2. उन्नत फ़सल उत्पादन और जैविक खेती
फ़सल उत्पादन
- जैविक खेती और उन्नत फसल उत्पादन पद्धतियाँ – जैविक खेती में रासायनिक उर्वरक, रासायनिक कीटनाशक और जीन-संशोधित (GM) बीज इस्तेमाल नहीं होते। मिट्टी को कम्पोस्ट, गोबर की खाद, वर्मीकम्पोस्ट, हरी खाद और जैव उर्वरकों से पोषण मिलता है; कीटों को मित्र कीट, नीम और जाल से रोका जाता है; और फसल चक्र व मिश्रित खेती से मिट्टी उपजाऊ रहती है। ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग, संरक्षित खेती और सटीक खेती जैसी उन्नत पद्धतियाँ पानी और लागत बचाती हैं। प्रमाणित जैविक भोजन तय नियमों से उगाया और जाँचा जाता है।
3. कटाई उपरांत प्रबंधन, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन
कटाई उपरांत और प्रसंस्करण
- खाद्य परिरक्षण, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन – भोजन तब खराब होता है जब उसमें सूक्ष्मजीव बढ़ते हैं और उसके अपने एंज़ाइम, हवा, रोशनी व कीट उसे नुकसान पहुँचाते हैं। परिरक्षण सूक्ष्मजीवों की ज़रूरत की चीज़ हटा देता है: पानी (सुखाना, नमक, चीनी), गर्माहट (फ्रिज, फ्रीज़र), हल्का pH (अम्ल, किण्वन) या स्वयं सूक्ष्मजीव (गर्मी, कैनिंग, पाश्चरीकरण, अनुमत परिरक्षक)। भोजन शीघ्र नाशवान, अर्ध-नाशवान या अनाशवान होते हैं, और कम, मध्यम या अधिक प्रसंस्कृत होते हैं। अच्छा भंडारण और प्रसंस्करण नुकसान घटाते हैं और मूल्य बढ़ाते हैं, जिससे किसान और खाद्य उद्योग ज़्यादा कमाते हैं।
4. कृषि के सहायक उद्यम
सहायक उद्यम
- कृषि के सहायक उद्यम – सहायक (संबद्ध) उद्यम वे काम हैं जो किसान परिवार फसल के साथ-साथ चलाता है: डेयरी, मुर्गीपालन, मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन, मछली पालन, बकरी-भेड़ पालन, रेशम कीट पालन आदि। ये साल भर आय देते हैं, खेत का कचरा काम में लाते हैं, खाद और भोजन देते हैं, परिवार को रोज़गार देते हैं और फसल खराब होने पर सहारा बनते हैं। समेकित कृषि प्रणाली में एक का कचरा दूसरे का कच्चा माल बनता है।