सूक्ष्मदर्शी क्या है और इसके भाग
सूक्ष्मदर्शी (माइक्रोस्कोप) वह यंत्र है जो बहुत छोटी चीज़ों को बड़ा दिखाता है। इससे चीज़ों का अध्ययन करना सूक्ष्मदर्शिकी कहलाता है।
स्कूल के संयुक्त प्रकाश सूक्ष्मदर्शी के मुख्य भाग:
- नेत्रिका (आईपीस): जिसमें आँख लगाते हैं। आमतौर पर 10×।
- अभिदृश्यक लेंस (ऑब्जेक्टिव): नमूने के पास वाले लेंस, 4×, 10×, 40×, 100×। ये घूमने वाली डिस्क (नोज़पीस) पर लगे होते हैं।
- मंच (स्टेज): स्लाइड रखने का चपटा हिस्सा, क्लिप के साथ।
- प्रकाश स्रोत या दर्पण: नमूने में नीचे से रोशनी भेजता है।
- डायफ़्राम: कितनी रोशनी जाए, यह तय करता है।
- मोटी और बारीक फोकस घुंडी: तस्वीर साफ़ करती हैं।
- भुजा और आधार: सब कुछ सँभालते हैं; सूक्ष्मदर्शी इन्हीं से पकड़कर उठाओ।
दो लेंस एक के बाद एक लगे हैं, इसलिए इसे संयुक्त कहते हैं। एक अकेला आवर्धक लेंस सरल सूक्ष्मदर्शी है।
सूक्ष्मदर्शी के प्रकार
प्रकाश सूक्ष्मदर्शी
ये दिखने वाली रोशनी और काँच के लेंस से काम करते हैं। जीवित कोशिकाएँ और रंग दिखा सकते हैं। सबसे बारीक विवरण लगभग 200 nm (0.2 µm)। इनमें सरल, संयुक्त, स्टीरियो (कीड़े या पत्ती पूरी देखने के लिए) और फ़्लोरेसेंस सूक्ष्मदर्शी आते हैं।
इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी
ये रोशनी की जगह इलेक्ट्रॉन की किरण और चुंबक इस्तेमाल करते हैं। इलेक्ट्रॉन की तरंगदैर्ध्य बहुत छोटी है, इसलिए लगभग 0.1 nm तक का विवरण दिखता है।
- TEM (पारगमन इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी): इलेक्ट्रॉन बहुत पतली परत के आर-पार जाते हैं। कोशिका के अंदर माइटोकॉन्ड्रिया, राइबोसोम दिखते हैं।
- SEM (स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी): इलेक्ट्रॉन सतह से टकराकर लौटते हैं। परागकण, कीड़े की आँख की 3D जैसी तस्वीर।
सीमाएँ: नमूना मृत होना चाहिए और निर्वात में रखा जाता है, मशीन बहुत महँगी है, और तस्वीर श्वेत-श्याम आती है (रंग बाद में कंप्यूटर से भरते हैं)।
आवर्धन और विभेदन
आवर्धन बताता है कि प्रतिबिंब असली चीज़ से कितने गुना बड़ा दिखता है।
कुल आवर्धन = नेत्रिका की क्षमता × अभिदृश्यक की क्षमता
उदाहरण: 10× नेत्रिका और 40× अभिदृश्यक = 400×।
दूसरा सूत्र: आवर्धन = प्रतिबिंब का आकार ÷ असली आकार। दोनों एक ही इकाई में हों। 1 mm = 1000 µm, 1 µm = 1000 nm।
विभेदन (विभेदन क्षमता) वह सबसे छोटी दूरी है जिस पर दो बिंदु अभी भी अलग दिखें। यह संख्या जितनी छोटी, तस्वीर उतनी साफ़।
विभेदन बढ़ाए बिना सिर्फ़ बड़ा करने से बड़ा धब्बा ही मिलता है। इसे खाली आवर्धन कहते हैं। इसलिए प्रकाश सूक्ष्मदर्शी लगभग 1000–1500× के बाद काम का नहीं रहता।
स्लाइड बनाना और रंगना
स्कूल लैब में सबसे ज़्यादा अस्थायी गीली स्लाइड (वेट माउंट) बनाई जाती है।
- काँच की स्लाइड साफ़ करो।
- बीच में पानी (या ग्लिसरीन) की एक बूँद रखो।
- बूँद में बहुत पतला नमूना रखो, जैसे प्याज़ की एक परत। रोशनी उसके आर-पार जानी चाहिए।
- रंजक (स्टेन) की एक बूँद डालो: पौधे की कोशिका के लिए आयोडीन या सेफ़्रानिन, गाल की कोशिका के लिए मेथिलीन ब्लू। रंजक केंद्रक जैसे भागों को रंग देता है।
- सुई की मदद से कवर स्लिप तिरछी करके धीरे नीचे करो। हवा बाहर निकल जाती है, बुलबुले नहीं बनते।
- फ़ालतू पानी ब्लॉटिंग पेपर से सोख लो।
- सबसे पहले कम क्षमता (4×) पर मोटी घुंडी से फोकस करो, फिर ऊँची क्षमता पर सिर्फ़ बारीक घुंडी इस्तेमाल करो।
स्थायी स्लाइड सुखाकर, रंगकर और सील करके बनती है, जो सालों चलती है।
करके देखें: पानी की बूँद वाला आवर्धक
अख़बार पर एक साफ़ प्लास्टिक शीट रखो। उस पर पानी की एक छोटी बूँद डालो। बूँद से अक्षरों को देखो। वे बड़े दिखेंगे! घुमावदार बूँद छोटे लेंस की तरह काम करती है। छोटी, ज़्यादा गोल बूँद ज़्यादा बड़ा दिखाती है। सबसे पहले के सरल सूक्ष्मदर्शी काँच के छोटे मोतियों से ऐसे ही बनते थे।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- कुल आवर्धन = नेत्रिका × अभिदृश्यक
- आवर्धन = प्रतिबिंब का आकार ÷ असली आकार
- असली आकार = प्रतिबिंब का आकार ÷ आवर्धन
- 1 mm = 1000 µm; 1 µm = 1000 nm
- विभेदन सीमा: प्रकाश ≈ 200 nm; इलेक्ट्रॉन ≈ 0.1 nm
हल किए गए उदाहरण
1. नेत्रिका 10× और अभिदृश्यक 100× है। कुल आवर्धन निकालो।
कुल = 10 × 100 = 1000×।
2. 10× नेत्रिका के साथ आवर्धन 400× है। कौन-सा अभिदृश्यक लगा है?
अभिदृश्यक = 400 ÷ 10 = 40×।
3. 400× पर ली गई फ़ोटो में एक कोशिका 8 mm चौड़ी दिखती है। असली चौड़ाई µm में?
असली = 8 mm ÷ 400 = 0.02 mm = 0.02 × 1000 = 20 µm।
4. एक जीवाणु 2 µm लंबा है, उसका प्रतिबिंब 10 mm लंबा है। आवर्धन निकालो।
एक इकाई करो: 10 mm = 10,000 µm। आवर्धन = 10,000 ÷ 2 = 5000×।
5. दो कोशिकांग 50 nm दूर हैं। क्या प्रकाश सूक्ष्मदर्शी उन्हें दो दिखाएगा?
नहीं। प्रकाश सूक्ष्मदर्शी लगभग 200 nm से कम दूरी नहीं अलग कर पाता। 50 nm छोटा है, तो वे एक दिखेंगे। इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी चाहिए।
6. कुछ स्लाइड में बुलबुले क्यों आते हैं और कैसे बचें?
कवर स्लिप सीधी गिराने पर हवा फँस जाती है। उसका एक किनारा बूँद से छुआकर सुई से धीरे-धीरे तिरछा नीचे करो, ताकि पानी हवा को बाहर धकेल दे।
आम गलतियाँ
- क्षमताओं को जोड़ देना (10 + 40 = 50) जबकि गुणा करना है (10 × 40 = 400)।
- यह मानना कि ज़्यादा आवर्धन यानी ज़्यादा विवरण। विभेदन के बिना यह बस बड़ा धब्बा है।
- प्रतिबिंब ÷ असली आकार में इकाइयाँ मिला देना। पहले mm को µm में बदलो।
- ऊँची क्षमता पर मोटी घुंडी घुमाना। स्लाइड टूट सकती है; 40× और 100× पर सिर्फ़ बारीक घुंडी।