China 八年级(初二) Arts: Fine Art
अध्याय: 8
1. Sem.1 U1 Traditional Chinese colours
Beauty, charm and new uses of national colours
- रंग सिद्धांत: रंग-चक्र, रंगों का मेल, मिश्रण और अर्थ – रंग सिद्धांत रंग मिलाने और साथ रखने के सरल नियम हैं। पेंट में लाल, पीला और नीला प्राथमिक रंग हैं; दो प्राथमिक से द्वितीयक (नारंगी, हरा, बैंगनी) बनता है; प्राथमिक + पास वाला द्वितीयक = तृतीयक, और इस तरह 12 रंगों का चक्र बनता है। हर रंग के तीन आयाम हैं: वर्ण/ह्यू (नाम), मान (हल्का-गहरा: टिंट, शेड, टोन) और संतृप्ति (चटक-फीका)। पूरक, सजातीय, त्रिक और एकवर्णी जैसे सामंजस्य रंगों को साथ अच्छा दिखाते हैं। गर्म रंग आगे आते लगते हैं, ठंडे पीछे जाते। प्रकाश जुड़कर सफ़ेद बनता है (RGB); पेंट और स्याही प्रकाश घटाते हैं (CMY से लगभग काला)। रंग भावना और संस्कृति के अर्थ भी रखते हैं।
2. Sem.1 U2 Chinese garden art
Using the site; layout; rockeries and water
- बाग़ का डिज़ाइन: जगह, नक्शा, पत्थर और पानी – क्लासिकल बाग़ एक छोटी-सी दुनिया है जिसमें घूमा जाता है। डिज़ाइनर पहले जगह को पढ़ता है, दूर के दृश्य को अपनाता है, टेढ़े रास्ते, मंडप, पत्थर और पानी रखता है ताकि हर मोड़ पर नई तस्वीर दिखे।
3. Sem.1 U3 Chinese landscape painting
Copying, depicting forms, spirit resonance
जल्द आ रहा है
4. Sem.1 U4 Book design
History of books; cover design
- ग्राफ़िक डिज़ाइन (Graphic Design) – ग्राफ़िक डिज़ाइन चित्र, शब्द और आकृतियों को इस तरह सजाना है कि संदेश साफ़, काम का और सुंदर लगे। डिज़ाइनर तत्वों (रेखा, आकृति, रंग, अक्षर, चित्र, खाली जगह) और सिद्धांतों (ग्रिड व संरेखण, पदानुक्रम, कंट्रास्ट, निकटता, दोहराव, संतुलन, खाली जगह) का उपयोग करते हैं। प्रक्रिया: ब्रीफ़, खोज, विचार, स्केच, डिजिटल ड्राफ़्ट, राय और अंतिम कलाकृति। पोस्टर, लोगो, किताब के कवर, पैकेट, साइन बोर्ड, वेबसाइट और ऐप सब इसी से बनते हैं।
5. Sem.2 U1 Modern fibre art
Weaving traditions; structure; mixed expression
- फाइबर आर्ट: बुनाई, गाँठें और मिली-जुली सामग्री – फाइबर आर्ट में धागों से कला बनती है। बुनाई में खड़े ताने के धागों को आड़े बाने के धागे काटते हैं। ऊपर-नीचे का नियम ही बुनाई की बनावट है। गाँठें और फंदे उभार देते हैं, और मोती, रिबन या कागज़ मिलाने से बनावट बढ़ती है।
6. Sem.2 U2 Clothing appreciation and styling
Beauty of dress; colour; outfit coordination
- पहनावे की सुंदरता: रंग, पैटर्न और मेल – पहनावा ऐसी कला है जिसे हम पहनते हैं। पारंपरिक पहनावा जगह और लोगों की कहानी कहता है; आधुनिक पहनावा आराम और फ़ैशन देखता है। रंग-चक्र में पास-पास के रंग शांत लगते हैं, आमने-सामने वाले जोशीले। एक ही पैटर्न को मुख्य रखो और मौक़े के हिसाब से पोशाक चुनो।
7. Sem.2 U3 Dyeing design
Blue-and-white prints; tie-dye
- टेक्सटाइल डिज़ाइन: रेशे से डिज़ाइनदार कपड़े तक – टेक्सटाइल डिज़ाइन का मतलब है तय करना कि कपड़ा कैसे बनेगा, कैसा दिखेगा और कैसा लगेगा। रेशों को कातकर धागा बनता है; धागे से बुनकर, बुनाई (निटिंग) से या जोड़कर कपड़ा बनता है; फिर रंगाई, छपाई या कढ़ाई से रंग और डिज़ाइन आता है; और फ़िनिश कपड़े को खास गुण देती है, जैसे पानी-रोधी या सिलवट-रोधी।
8. Sem.2 U4 Space design
Campus and room design
- परिसर और कमरे का डिज़ाइन: काम की और अच्छी लगने वाली जगह बनाना – अच्छा डिज़ाइन इस सवाल से शुरू होता है: इस जगह में क्या-क्या काम होंगे? कमरे को सोने, पढ़ने और सामान रखने के ज़ोन में बाँटा जाता है। फ़र्नीचर ऐसे रखा जाता है कि दरवाज़े से रास्ता खाली रहे। खिड़की की दिन की रोशनी पढ़ने में मदद करती है, इसलिए मेज़ खिड़की के पास रखने से बिजली बचती है। हल्के रंग कमरे को बड़ा और उजला दिखाते हैं, गहरे रंग छोटा और शांत। स्कूल परिसर भी ऐसे ही बनता है: छाँव के पेड़, बेंच, खेल की जगह और पक्की पगडंडी। बनाने से पहले स्केल पर नक्शा बनाते हैं, जैसे कागज़ पर 1 सेमी = असली 50 सेमी।
- कला अभ्यास: चित्रकला, मूर्तिकला, वास्तुकला और परिसर डिज़ाइन – इस पाठ में चार कला अभ्यास जुड़ते हैं। चित्रकला: स्याही-ब्रश में रेखा और खाली जगह बोलती है, तैल रंग में रंग परत दर परत चढ़ता है। मूर्तिकला: मिट्टी गढ़ी जाती है, पत्थर और लकड़ी तराशे जाते हैं, धातु ढाली जाती है। वास्तुकला: विचार नक्शे, सामने के दृश्य और पैमाने वाले मॉडल बनते हैं। परिसर डिज़ाइन में ये सब जुड़कर शोर, धूप और चलने की दूरी जाँचते हैं।