CBSE कक्षा 12 पर्यटन
अध्याय: 9
1. भाग क: रोज़गार कौशल
संचार कौशल · स्व-प्रबंधन कौशल · आईसीटी कौशल · उद्यमशीलता कौशल · हरित कौशल
- संचार कौशल: अपनी बात साफ़ और प्यार से कैसे पहुँचाएँ – संचार यानी लोगों के बीच अर्थ बाँटना। प्रेषक (भेजने वाला) विचार को संदेश में बदलता है, उसे माध्यम से भेजता है, और प्राप्तकर्ता उसे समझकर प्रतिपुष्टि (फ़ीडबैक) देता है। शोर, कठिन शब्द, तेज़ भावनाएँ और सांस्कृतिक अंतर जैसी बाधाएँ संदेश को रोक या मोड़ सकती हैं। हम अर्थ शब्दों से (शाब्दिक), चेहरे, आँखों, हाव-भाव, मुद्रा और आवाज़ के लहजे से (अशाब्दिक), और चित्रों से (दृश्य) भेजते हैं। सक्रिय श्रवण — ध्यान, धैर्य, सवाल और अपने शब्दों में दोहराना — साबित करता है कि संदेश पहुँचा। अच्छा वक्ता संदर्भ के हिसाब से बदलता है: औपचारिक या अनौपचारिक, बोलकर या लिखकर, और विनम्र अनुरोध, सलीके से मना करना, सच्ची माफ़ी और दृढ़ (न दब्बू, न आक्रामक) भाषा अपनाता है।
- आत्म-प्रबंधन: अपनी भावनाओं, लक्ष्यों और समय की कमान अपने हाथ में – आत्म-प्रबंधन (self-management) यानी अपनी भावनाओं, विचारों और कामों को ख़ुद दिशा देना ताकि आप अपने लक्ष्य तक पहुँचें। इसकी शुरुआत आत्म-जागरूकता से होती है: आप क्या महसूस कर रहे हैं और कितना तेज़। फिर प्रतिक्रिया से पहले ठहराव (रुको, सोचो, करो) और धीमी साँस जैसे उपाय। विचार भावनाओं को और भावनाएँ कामों को बनाती हैं, इसलिए 'मैं बेकार हूँ' को 'मैं अभी नहीं कर पाता' में बदलने से काम बदल जाता है। अच्छे आत्म-प्रबंधक SMART लक्ष्य बनाते हैं, ज़रूरी-महत्वपूर्ण देखकर समय बाँटते हैं, अच्छी आदतें बनाते हैं और असफलता के बाद फिर खड़े होते हैं (लचीलापन)।
- आईसीटी कौशल: ऑफ़िस टूल, इंटरनेट, ई-मेल और सुरक्षित रहना – ICT का मतलब है सूचना और संचार तकनीक (Information and Communication Technology)। यानी वे सब औज़ार जिनसे हम जानकारी बनाते, रखते और भेजते हैं: कंप्यूटर, फ़ोन, सॉफ़्टवेयर और इंटरनेट। मुख्य कौशल हैं: वर्ड प्रोसेसर में लिखना, स्प्रेडशीट में गिनती, प्रेज़ेंटेशन से बात समझाना, इंटरनेट पर खोजना, ई-मेल भेजना और ऑनलाइन सुरक्षित रहना।
- हरित कौशल: सतत विकास, हरित अर्थव्यवस्था और हरित नौकरियाँ – हरित कौशल वह ज्ञान, आदतें और काम के हुनर हैं जिनसे हम धरती को नुकसान पहुँचाए बिना जी और काम कर सकें। इनकी नींव है सतत विकास: आज की ज़रूरतें पूरी करना और आने वाली पीढ़ी के लिए भी छोड़ना। हरित अर्थव्यवस्था प्रदूषण और कचरा घटाते हुए बढ़ती है, अक्सर घेरे में चलकर: बनाओ, इस्तेमाल करो, मरम्मत करो, रीसायकल करो। इससे सोलर तकनीशियन जैसी हरित नौकरियाँ बनती हैं। हर कोई 5R से हरित कौशल अपना सकता है।
2. यात्रा और टूर संचालन व्यवसाय
यात्रा व्यवसाय
- पर्यटन भूगोल: संसाधन, प्रकार, प्रभाव और नियोजन – पर्यटन का अर्थ है घर से दूर कम से कम एक रात के लिए घूमने, व्यापार, इलाज या रिश्तेदारों से मिलने जाना। पर्यटन भूगोल पूछता है कि लोग कहाँ जाते हैं, क्यों, और पर्यटन जगहों पर क्या असर डालता है। जगहें प्राकृतिक संसाधनों (पर्वत, तट, वन्यजीव) और सांस्कृतिक संसाधनों (धरोहर, उत्सव, भोजन) से लोगों को खींचती हैं। लोग घर से धकेले और गंतव्य की ओर खींचे जाते हैं। पर्यटन घरेलू या अंतरराष्ट्रीय होता है, और इसके कई प्रकार हैं: इको, साहसिक, सांस्कृतिक, चिकित्सा और समुद्री। रिसॉर्ट अक्सर खोज से ठहराव और फिर पतन या पुनर्जीवन तक एक जीवन-चक्र से गुज़रते हैं। पर्यटन रोज़गार और पैसा लाता है, पर वहन क्षमता से ज़्यादा पर्यटक प्रकृति और संस्कृति को नुक़सान पहुँचाते हैं, इसलिए अच्छा नियोजन टिकाऊ पर्यटन चाहता है।
3. ट्रैवल एजेंसी का संचालन
एजेंसी संचालन
- ट्रैवल एजेंसी का संचालन: कार्य, प्रकार और सेवाएँ – ट्रैवल एजेंसी वह व्यवसाय है जो यात्रियों को यात्रा सप्लायरों से जोड़ता है, जैसे एयरलाइन, रेलवे, बस और क्रूज़ कंपनियाँ, होटल, कार रेंटल और गाइड। यह सलाह देती है, आरक्षण और टिकट करती है, ठहरने की बुकिंग करती है, पासपोर्ट, वीज़ा और बीमा में मदद करती है, विदेशी मुद्रा दिलाती है और टूर पैकेज बेचती है। एजेंसियाँ खुदरा एजेंट, टूर ऑपरेटर (थोक में पैकेज बनाने वाले), ऑनलाइन एजेंसी या विशेषज्ञ हो सकती हैं। आय मुख्य रूप से सप्लायर के कमीशन और यात्री के सेवा शुल्क से होती है। हर बुकिंग एक रास्ते चलती है: पूछताछ, परामर्श, कोटेशन, बुकिंग, भुगतान, दस्तावेज़ और बिक्री-बाद सेवा।
4. परिवहन नेटवर्क
परिवहन नेटवर्क
- पर्यटन में परिवहन नेटवर्क: हवाई, रेल, सड़क और जल यात्रा – परिवहन से ही पर्यटन संभव है: यह पर्यटकों को घर से गंतव्य तक और वहाँ घुमाने ले जाता है। चार मुख्य साधन हैं। हवाई यात्रा लंबी दूरी में सबसे तेज़ है; एयरलाइन फ़ुल-सर्विस और लो-कॉस्ट होती हैं और हब से शहरों को जोड़ती हैं। रेल मध्यम दूरी के लिए आरामदायक और सस्ती है, और इसमें ख़ास पर्यटक ट्रेनें, पहाड़ी रेल और मेट्रो हैं। सड़क सबसे लचीली है और वहाँ भी पहुँचती है जहाँ स्टेशन या हवाई अड्डा नहीं: कार, किराये की कार, मिनी-वैन या कोच। जल यात्रा में फ़ेरी, क्रूज़ और हाउसबोट आते हैं। योजनाकार दूरी, समय, ख़र्च, आराम, समूह के आकार और अनुभव देखकर साधन चुनते हैं, और अक्सर एक यात्रा में कई साधन जोड़ते हैं।
5. यात्रा-कार्यक्रम नियोजन
यात्रा-कार्यक्रम
- यात्रा-कार्यक्रम नियोजन: अर्थ, प्रकार और टूर की योजना कैसे बनाएँ – यात्रा-कार्यक्रम (इटिनररी) यात्रा की लिखित दिन-ब-दिन योजना है। यह बताता है यात्री कहाँ जाएँगे, कब, कैसे, कहाँ रुकेंगे और खाएँगे, और क्या शामिल है। अलग उपयोगकर्ताओं के लिए अलग कार्यक्रम बनते हैं: पर्यटक (ग्राहक), टूर मैनेजर या एस्कॉर्ट, ड्राइवर, और होटल व गाइड जैसे सप्लायर। बनाने के लिए ग्राहक को समझिए, स्थलों की खोज कीजिए, तर्कसंगत रास्ता तय कीजिए, यात्रा और आराम सहित सही समय रखिए, सेवाएँ बुक कीजिए और फिर अंतिम कार्यक्रम लिखिए। अच्छा कार्यक्रम साफ़, व्यावहारिक, संतुलित और लचीला होता है और आगे-पीछे भटकने से बचाता है।
6. टूर पैकेजिंग और कार्यक्रम
टूर पैकेज
- टूर पैकेज: अर्थ, घटक, प्रकार और इसे कैसे बनाएँ – टूर पैकेज दो या ज़्यादा यात्रा सेवाओं का बंडल है, जैसे परिवहन, आवास, भोजन, दर्शन, गाइड और ट्रांसफ़र, जो एक ही दाम में बेचा जाता है। पैकेज से यात्री का समय और अक्सर पैसा बचता है, क्योंकि टूर ऑपरेटर सेवाएँ थोक में ख़रीदते हैं। प्रकार: स्वतंत्र (FIT), एस्कॉर्ट सहित समूह (GIT), होस्टेड और सर्व-समावेशी, साथ में साहसिक, तीर्थ, वन्यजीव, स्वास्थ्य, हनीमून और व्यापार (MICE) जैसे विषय-आधारित पैकेज। पैकेज बनाने के चरण: बाज़ार शोध, गंतव्य और विषय चुनना, यात्रा-कार्यक्रम, सप्लायरों से सौदा, लागत और मूल्य, प्रचार, और अंत में टूर चलाना और फ़ीडबैक लेना। दाम आमतौर पर कुल लागत + मार्क-अप होता है।
7. पैकेज टूर लागत
टूर लागत
- टूर लागत: पैकेज टूर की कीमत तय करना – टूर लागत (कॉस्टिंग) का मतलब है पैकेज टूर के हर खर्च को जोड़कर प्रति व्यक्ति कीमत बनाना। परिवर्ती लागत (होटल, भोजन, टिकट) हर यात्री के लिए लगती है। स्थिर लागत (बस, गाइड, टूर लीडर) पूरे समूह के लिए एक बार लगती है और सब में बँटती है, इसलिए समूह बड़ा हो तो हर व्यक्ति का हिस्सा छोटा होता है। प्रति व्यक्ति कुल लागत + मार्कअप + कर = बिक्री मूल्य। ब्रेक-ईवन वह सबसे छोटा समूह है जिसमें सारी लागत निकल आए।
8. सरकारी और व्यावसायिक संस्थाएँ
पर्यटन संस्थाएँ
- पर्यटन संगठन और प्रवृत्तियाँ: पर्यटन कौन चलाता है और यह किधर जा रहा है – पर्यटन का मार्गदर्शन चार स्तरों पर होता है। विश्व स्तर पर UN Tourism (पहले UNWTO) और UNESCO जैसी UN एजेंसियाँ दिशा-निर्देश बनाती, आँकड़े साझा करती और धरोहर की रक्षा करती हैं। राष्ट्रीय स्तर पर पर्यटन मंत्रालय नीति बनाता, देश का प्रचार करता, ढाँचे के लिए धन देता और मानक तय करता है। राज्य बोर्ड और विकास निगम होटल, परिवहन और स्थानीय अभियान चलाते हैं। स्थानीय निकाय स्थलों को साफ़ और सुरक्षित रखते हैं और NGO प्रकृति, धरोहर और समुदायों की रक्षा करते हैं। सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) में सरकार और कंपनियाँ ख़र्च और काम बाँटती हैं। वैश्विक प्रवृत्तियों में आगमन में तेज़ बढ़त, डिजिटल बुकिंग, टिकाऊ और अनुभव-आधारित यात्रा, स्वास्थ्य पर्यटन और काम के साथ यात्रा शामिल हैं।
9. वैश्विक वितरण प्रणाली
जीडीएस
- वैश्विक वितरण प्रणाली (GDS) – कंप्यूटर आरक्षण प्रणाली (CRS) किसी एक कंपनी का अपना कंप्यूटर सिस्टम है, जिसमें उसकी सीटें, कमरे या कारें रहती हैं। वैश्विक वितरण प्रणाली (GDS) एक बड़ा नेटवर्क है जो बहुत-सी CRS को हज़ारों विक्रेताओं से जोड़ता है, जैसे ट्रैवल एजेंट, ऑनलाइन ट्रैवल साइट और कंपनियों की ट्रैवल डेस्क। विक्रेता लाइव सीटें और किराया देखता है, बुक करता है और PNR (बुकिंग रिकॉर्ड) पाता है। तीन बड़ी GDS कंपनियाँ हैं Amadeus, Sabre और Travelport। हर बुकिंग पर आपूर्तिकर्ता GDS को शुल्क देता है।