Spain 4º ESO Physical Education
अध्याय: 6
1. Active and healthy life
Physical health and training · Supplements and doping · Mental health and body image
- स्वस्थ जीवनशैली: रोज़ की आदतें जो तुम्हें ठीक रखें – स्वस्थ जीवनशैली रोज़ की अच्छी आदतों का नाम है: पाँच भोजन-समूहों वाला संतुलित आहार, भरपूर पानी, स्कूली बच्चों के लिए 9–11 घंटे और किशोरों के लिए लगभग 8–10 घंटे नींद, रोज़ कम से कम 60 मिनट खेल-कूद, सही मुद्रा, साफ-सुरक्षित भोजन, और तंबाकू, शराब व नशे से दूरी। इनसे टाइप 2 मधुमेह, हृदय रोग और कुछ कैंसर जैसे जीवनशैली रोगों का खतरा घटता है।
- खेल पोषण: ऊर्जा, आहार और जल-संतुलन – खिलाड़ी को सही समय पर सही खाना और पानी चाहिए। वज़न स्थिर रखने के लिए ऊर्जा अंदर (खाना) और ऊर्जा बाहर (कसरत + शरीर का काम) बराबर होनी चाहिए। कार्बोहाइड्रेट मुख्य ईंधन है और ग्लाइकोजन बनकर जमा होता है; प्रोटीन मांसपेशी की मरम्मत करता है; वसा लंबी धीमी कसरत का ईंधन है; विटामिन, खनिज और रेशे शरीर चलाते हैं। पसीने से शरीर के वज़न का 2% पानी जाते ही प्रदर्शन गिरता है। अच्छे आहार के साथ ज़्यादातर सप्लीमेंट ज़रूरी नहीं, और प्रतिबंधित दवाएँ (डोपिंग) ख़तरनाक और नियम के ख़िलाफ़ हैं।
- मानसिक स्वास्थ्य: भावनाएँ, तनाव और सहारा – मानसिक स्वास्थ्य यानी हम कैसे सोचते, महसूस करते, मुश्किलें सँभालते और दूसरों से जुड़ते हैं। शारीरिक स्वास्थ्य की तरह यह सबके पास है और ऊपर-नीचे होता है। भावनाएँ काम के संकेत हैं। तनाव बाल्टी में पानी की तरह जमा होता है; अच्छे तरीके (नींद, व्यायाम, बात करना, धीमी साँस, योजना) उसे बाहर निकालते हैं। आत्म-सम्मान और अच्छे रिश्ते हमें बचाते हैं। अगर भारी भावनाएँ दो हफ़्ते या ज़्यादा रहें, या रोज़ का जीवन रुकने लगे, तो भरोसेमंद बड़े या विशेषज्ञ से बात करें — मदद माँगना हिम्मत है।
2. Organising and managing physical activity
Purposes of physical activity · Maintaining sports equipment · Hygiene in physical activity · Planning group motor projects · Accident prevention and risk · Emergency response and CPR
- शारीरिक शिक्षा: कौशल सीखो, परखो और सुधारो – शारीरिक शिक्षा (PE) अच्छी तरह चलना-फिरना, जीवनभर सक्रिय रहना और अपना प्रदर्शन समझना सिखाती है। हर खेल कौशल के तीन चरण हैं: तैयारी, क्रियान्वयन और अनुसरण। सुधार के लिए कौशल देखो, मॉडल से तुलना करो, ताकत और कमज़ोरी पहचानो, प्रतिक्रिया लो और अभ्यास की योजना बनाओ: योजना → अभ्यास → समीक्षा → प्रतिक्रिया। लोग स्वास्थ्य, फ़िटनेस, मज़े, दोस्ती, प्रतियोगिता और मन की शांति के लिए खेलते हैं। नए खेल, क्लब, सुरक्षा और उपकरण की देखभाल जीवनभर खेलने में मदद करते हैं।
- जीवन भर की सेहत: आपकी सेहत किससे बनती है और वेलनेस कैसे बढ़ाएँ – आपकी सेहत कई निर्धारकों से बनती है: निजी (जीन, लचीलापन, आदतें, जानकारी), सामाजिक (परिवार, दोस्त, आय, शिक्षा, लिंग) और पर्यावरण (हवा, पानी, स्कूल या काम की जगह)। वेलनेस के छह आयाम हैं: शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक, सामाजिक, आध्यात्मिक और पर्यावरणीय। आदत बदलना पाँच चरणों में होता है: सोचा नहीं, सोच रहे, तैयारी, कदम उठाना और बनाए रखना। अपनी वेलनेस योजना में SMART लक्ष्य और जाँच के साधन काम आते हैं। स्वस्थ समुदाय साफ़ पानी, अस्पताल, पार्क, स्कूल और सहायता सेवाएँ देता है।
- शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य – शारीरिक गतिविधि शरीर की कोई भी हरकत है जिसमें ऊर्जा लगती है: चलना, खेलना, साइकिल चलाना, नाचना, घर का काम। बच्चों और किशोरों को रोज़ लगभग 60 मिनट मध्यम से तीव्र गतिविधि चाहिए; बड़ों को हफ़्ते में लगभग 150 से 300 मिनट। तीव्रता हल्की, मध्यम या तीव्र होती है, और बात-परीक्षण से पता चलता है। अच्छी योजना FITT (आवृत्ति, तीव्रता, समय, प्रकार) से बनती है, और स्टेप काउंटर व नक्शा ऐप जैसी तकनीक मदद करती है। गतिविधि शरीर, मन और सामाजिक जीवन को स्वस्थ बनाती है। बहुत कम (गतिहीन जीवन) और बिना आराम बहुत ज़्यादा (अति-प्रशिक्षण), दोनों नुक़सानदेह हैं, इसलिए गतिविधि, आराम और नींद में संतुलन रखें।
- खेल प्रबंधन: खेल का आयोजन – खेल प्रबंधन का मतलब है खेल की योजना बनाना, व्यवस्था करना, नेतृत्व करना और जाँचना, ताकि लोग सुरक्षित और मज़े से खेलें। प्रतियोगिता के लिए: साफ़ लक्ष्य तय करो और कौन, क्या, कब, कहाँ का जवाब दो; ढाँचा चुनो (नॉकआउट, राउंड-रॉबिन, लीग या मिला-जुला) और मैच व समय निकालो; भूमिकाएँ बाँटो और काम सूची या ऐप पर टिक करो; बजट और जोखिम योजना बनाओ; आयोजन करो; फिर मूल्यांकन और रिपोर्ट करो (योजना → करना → जाँच → सुधार)। खेल खुद भी कई स्तरों पर संगठित है: स्कूल और क्लब से ज़िला, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महासंघ तक, साथ में सरकार की खेल नीति और क्लब, व्यावसायिक जिम, स्कूल खेल व अनौपचारिक खेल जैसे रूप।
- खेल चोटें: कैसे लगती हैं, कैसे बचें, कैसे ठीक करें – खेल या व्यायाम से शरीर को हुआ नुकसान खेल चोट है। तीव्र (acute) चोट अचानक लगती है (टखना मुड़ना); दीर्घकालिक या अति-उपयोग चोट धीरे-धीरे बनती है (शिन स्प्लिंट)। कोमल ऊतक चोट मांसपेशी (खिंचाव), स्नायुबंधन (मोच) और त्वचा की होती है; कठोर ऊतक चोट हड्डी (अस्थिभंग) और जोड़ (विस्थापन) की। जोखिम अंदर से (फ़िटनेस, पुरानी चोट) और बाहर से (मौसम, उपकरण) आता है। वार्म-अप, सही तकनीक, सही सामान, नियम और समझदारी से बढ़ता अभ्यास ज़्यादातर चोटें रोकते हैं। मोच-खिंचाव पर RICE, फिर धीरे-धीरे पुनर्वास।
- प्राथमिक चिकित्सा: आपात स्थिति में क्या करें – प्राथमिक चिकित्सा वह मदद है जो प्रशिक्षित मदद आने तक घायल या बीमार व्यक्ति को दी जाती है। लक्ष्य: जान बचाना, हालत बिगड़ने से रोकना, ठीक होने में मदद। DRABC अपनाएँ: ख़तरा, प्रतिक्रिया, श्वास मार्ग, साँस, CPR/कॉल। बेहोश पर साँस चल रही → करवट स्थिति। सामान्य साँस नहीं → CPR 30:2, प्रति मिनट 100-120 दबाव, 5-6 सेमी गहरा, और AED। ख़ून → सीधा दबाव। जलना → 20 मिनट बहता पानी। गला अटकना → पीठ थपकी और पेट धक्के। मोच → RICE।
3. Problem-solving in motor situations
Advanced tactical decisions · Perceptual-motor skills · Fitness training planning · Refining sport technique · Creating movement challenges · Architectural barriers to activity
- टीम खेल (Team Sports): आक्रमण, रक्षा और खेल भावना – टीम खेलों के तीन परिवार हैं: आक्रमण खेल, नेट और दीवार खेल, और मारना-फ़ील्डिंग खेल। जब गेंद आपकी टीम के पास हो तो आक्रमण करें: चौड़ाई और गहराई में फैलें, खाली जगह में जाएँ और जल्दी पास दें। जब विरोधी के पास हो तो रक्षा करें: पास-पास रहें, गोल की तरफ़ खड़े हों, खिलाड़ी को मार्क करें या क्षेत्र संभालें और सही तरीके से गेंद जीतें। हर खिलाड़ी की भूमिका है, टीम लगातार बात करती है और अधिकारी नियम लागू करते हैं।
- मोटर कौशल (Motor Skills) – मोटर कौशल वह हरकत है जिसे हम सीखकर अच्छे से करते हैं, एक साफ़ लक्ष्य के साथ, जैसे दौड़ना, पकड़ना, लिखना या कार्टव्हील। स्थूल कौशल बड़ी मांसपेशियों से होते हैं (दौड़, कूद); सूक्ष्म कौशल छोटी मांसपेशियों से, बारीकी के साथ (लिखना, कैरम का शॉट)। कौशल के तीन परिवार हैं: चलने-फिरने वाले (locomotor), वस्तु संभालने वाले (manipulative) और संतुलन वाले (stability)। कौशल खुले (आसपास बदलता रहे, जैसे फ़ुटबॉल पास) या बंद (आसपास स्थिर, जैसे फ़्री थ्रो), सरल या जटिल भी होते हैं। हर हरकत एक चक्र है: इंद्रियाँ जानकारी लेती हैं, दिमाग़ तय करता है, मांसपेशियाँ काम करती हैं, और प्रतिपुष्टि (feedback) बताती है कैसा हुआ। प्रतिक्रिया समय = देखने और हिलना शुरू करने के बीच का समय। हम तीन चरणों में सीखते हैं: संज्ञानात्मक (समझना, कई ग़लतियाँ), साहचर्य (अभ्यास, कम ग़लतियाँ) और स्वायत्त (अपने-आप, सहज)। गति, ताक़त, सहनशक्ति, समन्वय, संतुलन, फुर्ती और लचीलापन जैसी मोटर क्षमताएँ हर कौशल की नींव हैं।
- शारीरिक फिटनेस (Physical Fitness) – शारीरिक फिटनेस शरीर की वह क्षमता है जिससे रोज़ का काम, खेल और स्पर्धा ऊर्जा बचाकर की जा सके। इसके पाँच स्वास्थ्य संबंधी घटक (हृदय-श्वसन सहनशक्ति, पेशीय शक्ति, पेशीय सहनशक्ति, लचीलापन, शरीर संरचना) और छह कौशल संबंधी घटक (गति, फुर्ती, विस्फोटक शक्ति, संतुलन, तालमेल, प्रतिक्रिया समय) हैं। इसे FITT (आवृत्ति, तीव्रता, समय, प्रकार) और अधिभार, प्रगति, विशिष्टता, विश्राम, उत्क्रमणीयता जैसे सिद्धांतों वाली योजना से बढ़ाते हैं।
- कौशल अर्जन: हम गति कौशल कैसे सीखते हैं – कौशल एक सीखी हुई क्रिया है जो तय लक्ष्य के लिए कम से कम समय और मेहनत में की जाती है। कौशल को सातत्य पर बाँटते हैं (खुला–बंद, स्थूल–सूक्ष्म, असतत–क्रमिक–सतत, स्व-गति–बाह्य-गति, सरल–जटिल, निम्न–उच्च संगठन)। हम सूचना एक चक्र में संसाधित करते हैं: इनपुट, निर्णय (स्मृति से), आउटपुट और फ़ीडबैक; ज़्यादा विकल्प प्रतिक्रिया धीमी करते हैं (हिक का नियम)। सीखने वाले संज्ञानात्मक, साहचर्य और स्वायत्त चरणों से गुज़रते हैं। कोच कौशल और खिलाड़ी के हिसाब से अभ्यास, मार्गदर्शन और फ़ीडबैक चुनते हैं, और पहले सीखे कौशल से स्थानांतरण का उपयोग करते हैं। सीखने के सिद्धांत बताते हैं कि यह क्यों काम करता है।
- समावेशी खेल: सबको खेलने का मौका कैसे मिले – समावेशी खेल यानी हर कोई भाग ले सके — क्षमता, लिंग, शरीर, पृष्ठभूमि या पैसा कुछ भी हो। रुकावटें शारीरिक (सीढ़ियाँ, रैम्प नहीं), नियमों या सामान में, या लोगों की सोच में (मज़ाक, बाहर करना, हिंसा) हो सकती हैं। हम इन्हें पहुँच बनाकर, STEP मॉडल (जगह, काम, सामान, लोग) से खेल बदलकर, सबके लिए बराबर नियम बनाकर और बुरे व्यवहार के ख़िलाफ़ बोलकर हटाते हैं। पैरालंपिक और अनुकूलित खेल दिखाते हैं कि यह कितना आगे जा सकता है।
4. Emotional self-regulation and social interaction in motor situations
Emotional self-regulation · Negotiation and mediation in sport · Fair play · Rejecting discrimination in sport
- खेल मनोविज्ञान: खेल के पीछे का दिमाग़ – खेल मनोविज्ञान बताता है कि मन खेल पर कैसे असर डालता है। व्यक्तित्व से पता चलता है कि हमें कैसा खेल पसंद है। प्रेरणा ईंधन है: अंदर से (मज़ा) या बाहर से (इनाम)। उत्तेजना (arousal) यानी आप कितने "चालू" हैं: बहुत कम या बहुत ज़्यादा दोनों नुकसान करते हैं, बीच में सबसे अच्छा (उल्टा U)। चिंता को साँस, कल्पना और अच्छी आत्म-बातचीत से शांत करते हैं। SMART लक्ष्य साफ़ सीढ़ी देते हैं। आक्रामकता पर काबू और टीम में मिलकर मेहनत ज़रूरी है।
- खेल में निष्पक्ष खेल – निष्पक्ष खेल यानी नियमों के अनुसार और खेल की भावना से खेलना: विरोधियों, अधिकारियों, साथियों और खुद का सम्मान। नियम मैदान, समय, अंक और मना चीज़ें तय करते हैं ताकि सबको बराबर और सुरक्षित मौका मिले। खेल में भूमिकाएँ हैं: खिलाड़ी, कप्तान, रेफ़री या अंपायर, कोच और दर्शक। हाथ मिलाना, घायल विरोधी की मदद करना और फ़ैसला मानना खेल भावना है; बेईमानी, जान-बूझकर फ़ाउल, डोपिंग और मैच फ़िक्सिंग निष्पक्ष खेल तोड़ते हैं और उनकी सज़ा कार्ड या प्रतिबंध है। ओलंपिक आंदोलन के मूल्य हैं उत्कृष्टता, मित्रता और सम्मान। निष्पक्ष प्रतियोगिता बनाने के लिए प्रारूप (नॉकआउट या राउंड-रॉबिन), समय-सारणी, भूमिकाएँ और सुरक्षा की योजना चाहिए।
- समानता और भेदभाव: बराबर कीमत, निष्पक्ष मौक़े – हर इंसान की कीमत और अधिकार बराबर हैं, भले ही हम सब अलग हैं। भेदभाव का मतलब है किसी से सिर्फ़ इसलिए बुरा व्यवहार करना कि वह कौन है: लिंग, रंग, मूल, धर्म, जाति, विकलांगता, उम्र या यौन रुझान। भेदभाव काम, नियम या शब्दों से होता है। सबसे बिल्कुल एक जैसा व्यवहार हमेशा काफ़ी नहीं; असली समानता रुकावटें हटाती है और ज़रूरत के हिसाब से मदद देती है। लैंगिक हिंसा लैंगिक असमानता का सबसे गंभीर रूप है। खेल और रोज़ के जीवन में हम आवाज़ उठाकर और सबको शामिल करके भेदभाव को ठुकराते हैं।
5. Expressions of movement culture
Sport as cultural identity · Body expression techniques · Organising artistic performances · History of sport and gender · Sport, politics and economics
- खेल और समाज – खेल समाजशास्त्र देखता है कि खेल और समाज एक-दूसरे को कैसे बदलते हैं। शारीरिक गतिविधि खुले खेल-कूद से शुरू होकर शारीरिक मनोरंजन और फिर खेल (स्पोर्ट) तक जाती है, जिसमें तय नियम, संगठन और गंभीर मुकाबला होता है। आधुनिक खेल ढीले-ढाले स्थानीय लोक खेलों से बने: औद्योगिक युग में लिखित नियम, क्लब और शासी निकाय आए, और लगभग 1950 के बाद टीवी, पैसे और यात्रा ने खेल को वैश्विक और पेशेवर बना दिया। आज खेल, मीडिया और प्रायोजक एक "सुनहरे त्रिकोण" में बँधे हैं। हर समूह बराबर नहीं खेलता: पैसा, समय, सुविधा, भेदभाव और रूढ़ियाँ बाधा बनती हैं, इसलिए सरकारें और क्लब महिलाओं, दिव्यांगों, बुज़ुर्गों और कम आय वाले परिवारों की बराबर पहुँच के लिए काम करते हैं। खेल का अँधेरा पक्ष भी है, यानी विचलन, जैसे डोपिंग, हिंसा और मैच फ़िक्सिंग, जिसे नियम, जाँच और क़ानून रोकते हैं। खेल सेहत, पहचान और एकता बना सकता है, पर बाँट भी सकता है।
- नृत्य: तत्व, नृत्य-रचना और शैलियाँ – नृत्य शरीर की वह गति है जो स्थान और समय में, ऊर्जा के साथ, भावना जताने, कहानी सुनाने या उत्सव मनाने के लिए होती है। हर नृत्य को चार तत्वों से समझ सकते हैं: शरीर (क्या हिलता है), स्थान (कहाँ: स्तर, दिशा, रास्ते), समय (कब: ताल, लय, ठहराव) और ऊर्जा (कैसे: तीखी या कोमल, ज़ोरदार या हल्की)। नृत्य-रचना (कोरियोग्राफ़ी) मोटिफ़, दोहराव, कैनन, एकस्वरता, विरोधाभास और बनावट जैसे तरीक़ों से गतियाँ सजाने की कला है। अच्छे कलाकार तकनीक, सुरक्षा और भाव सीखते हैं, और अच्छे दर्शक देखी चीज़ का वर्णन, विश्लेषण, अर्थ और मूल्यांकन करते हैं। शास्त्रीय, लोक, बैले, हिप-हॉप – हर शैली अपनी संस्कृति और इतिहास से निकलती है।
- प्रदर्शन कलाएँ: संगीत, नृत्य और रंगमंच, जीवंत – प्रदर्शन कलाएँ वे कलाएँ हैं जो कलाकार के शरीर और आवाज़ से, समय में, जीवंत होती हैं: संगीत, नृत्य और रंगमंच (और ओपेरा, म्यूज़िकल, नुक्कड़ नाटक जैसे मिश्रित रूप)। हर प्रदर्शन को कलाकार, दर्शक और स्थान चाहिए। शो विचार से रिहर्सल, फिर प्रदर्शन और समीक्षा तक बढ़ता है।
6. Efficient and sustainable interaction with the environment
Road safety in active travel · Cycling as transport · Urban fitness practices · Managing risk outdoors · Sustainable use of resources · Organising outdoor activities · Caring for the environment
- सड़क सुरक्षा: रुकने का विज्ञान और सुरक्षित रहना – कोई भी गाड़ी तुरंत नहीं रुकती। पहले चालक को खतरा देखकर संभलने में समय लगता है, इसे प्रतिक्रिया समय कहते हैं (लगभग 1 सेकंड)। इस बीच गाड़ी पूरी गति से चलती रहती है: यह सोचने की दूरी है = चाल × प्रतिक्रिया समय। फिर ब्रेक गाड़ी को धीमा करते हैं: यह ब्रेकिंग दूरी है = चाल² ÷ (2 × मंदन)। रुकने की दूरी = सोचने की दूरी + ब्रेकिंग दूरी। चाल दोगुनी हो तो ब्रेकिंग दूरी चार गुनी हो जाती है। गीली या बर्फ़ीली सड़क और घिसे टायर पकड़ (घर्षण) कम करते हैं। टक्कर में सीट बेल्ट, हेलमेट, एयरबैग और क्रम्पल ज़ोन रुकने का समय बढ़ाते हैं, जिससे शरीर पर बल कम होता है। पैदल यात्री, साइकिल सवार, स्कूटर चालक और यात्री, सब नियम मानकर, दिखाई देकर और चलते समय फ़ोन न चलाकर सुरक्षित रहते हैं।
- शारीरिक फिटनेस (Physical Fitness) – शारीरिक फिटनेस शरीर की वह क्षमता है जिससे रोज़ का काम, खेल और स्पर्धा ऊर्जा बचाकर की जा सके। इसके पाँच स्वास्थ्य संबंधी घटक (हृदय-श्वसन सहनशक्ति, पेशीय शक्ति, पेशीय सहनशक्ति, लचीलापन, शरीर संरचना) और छह कौशल संबंधी घटक (गति, फुर्ती, विस्फोटक शक्ति, संतुलन, तालमेल, प्रतिक्रिया समय) हैं। इसे FITT (आवृत्ति, तीव्रता, समय, प्रकार) और अधिभार, प्रगति, विशिष्टता, विश्राम, उत्क्रमणीयता जैसे सिद्धांतों वाली योजना से बढ़ाते हैं।
- बाहरी गतिविधियाँ: ओरिएंटियरिंग, चढ़ाई और सुरक्षित रहना – बाहरी और साहसिक गतिविधियाँ, जैसे ओरिएंटियरिंग, ट्रेकिंग, चढ़ाई और पानी के खेल, बदलती प्राकृतिक जगहों पर की जाती हैं। इनमें कौशल (नक्शा पढ़ना, कम्पास चलाना, चढ़ने की तकनीक), सही फ़ैसले (रास्ता चुनना, अपनी सीमा जानना) और सुरक्षा की आदतें (योजना, सामान, टीमवर्क) चाहिए। साथ ही कोई निशान न छोड़कर प्रकृति की रक्षा करनी होती है।
- संधारणीयता (Sustainability) – संधारणीयता यानी आज अपनी ज़रूरतें ऐसे पूरी करना कि आने वाली पीढ़ियाँ भी अपनी ज़रूरतें पूरी कर सकें। यह तीन स्तंभों पर टिकी है — पर्यावरण, समाज और अर्थव्यवस्था। कोई संसाधन तभी टिकाऊ ढंग से इस्तेमाल होता है जब हम उसे उसके नवीकरण से तेज़ न लें। आज मानवता हर साल लगभग 1.7 पृथ्वी जितना इस्तेमाल करती है, और यह इस्तेमाल बहुत असमान है। देखभाल (stewardship), समझदार योजना और GIS जैसे औज़ार हमें संधारणीयता की ओर ले जाते हैं।
- पर्यावरण संरक्षण: तकनीक इस्तेमाल करते हुए धरती की देखभाल – पर्यावरण संरक्षण (environmental stewardship) का मतलब है धरती के संसाधनों को सोच-समझकर इस्तेमाल करना ताकि वे लंबे समय तक चलें, और जहाँ नुक़सान हुआ हो उसे ठीक करना। फ़ोन हो या अस्पताल की मशीन, हर उत्पाद का एक जीवन-चक्र होता है: कच्चा माल, निर्माण, परिवहन, उपयोग और जीवन का अंत। हर चरण में ऊर्जा लगती है और कचरा बनता है। अच्छा संरक्षक चीज़ें लंबे समय तक चलाता है, कम बिजली वाली मशीनें चुनता है, कचरा-पदानुक्रम मानता है, ई-कचरा सही जगह देता है और प्रकृति बचाने वाले नियमों का साथ देता है।