Spain 1º Bachillerato Physical Education
अध्याय: 6
1. Active and healthy life
Physical health and personal fitness programme · Social health and physical activity · Mental health and physical activity
- शारीरिक फिटनेस (Physical Fitness) – शारीरिक फिटनेस शरीर की वह क्षमता है जिससे रोज़ का काम, खेल और स्पर्धा ऊर्जा बचाकर की जा सके। इसके पाँच स्वास्थ्य संबंधी घटक (हृदय-श्वसन सहनशक्ति, पेशीय शक्ति, पेशीय सहनशक्ति, लचीलापन, शरीर संरचना) और छह कौशल संबंधी घटक (गति, फुर्ती, विस्फोटक शक्ति, संतुलन, तालमेल, प्रतिक्रिया समय) हैं। इसे FITT (आवृत्ति, तीव्रता, समय, प्रकार) और अधिभार, प्रगति, विशिष्टता, विश्राम, उत्क्रमणीयता जैसे सिद्धांतों वाली योजना से बढ़ाते हैं।
- शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य – शारीरिक गतिविधि शरीर की कोई भी हरकत है जिसमें ऊर्जा लगती है: चलना, खेलना, साइकिल चलाना, नाचना, घर का काम। बच्चों और किशोरों को रोज़ लगभग 60 मिनट मध्यम से तीव्र गतिविधि चाहिए; बड़ों को हफ़्ते में लगभग 150 से 300 मिनट। तीव्रता हल्की, मध्यम या तीव्र होती है, और बात-परीक्षण से पता चलता है। अच्छी योजना FITT (आवृत्ति, तीव्रता, समय, प्रकार) से बनती है, और स्टेप काउंटर व नक्शा ऐप जैसी तकनीक मदद करती है। गतिविधि शरीर, मन और सामाजिक जीवन को स्वस्थ बनाती है। बहुत कम (गतिहीन जीवन) और बिना आराम बहुत ज़्यादा (अति-प्रशिक्षण), दोनों नुक़सानदेह हैं, इसलिए गतिविधि, आराम और नींद में संतुलन रखें।
- मानसिक स्वास्थ्य: भावनाएँ, तनाव और सहारा – मानसिक स्वास्थ्य यानी हम कैसे सोचते, महसूस करते, मुश्किलें सँभालते और दूसरों से जुड़ते हैं। शारीरिक स्वास्थ्य की तरह यह सबके पास है और ऊपर-नीचे होता है। भावनाएँ काम के संकेत हैं। तनाव बाल्टी में पानी की तरह जमा होता है; अच्छे तरीके (नींद, व्यायाम, बात करना, धीमी साँस, योजना) उसे बाहर निकालते हैं। आत्म-सम्मान और अच्छे रिश्ते हमें बचाते हैं। अगर भारी भावनाएँ दो हफ़्ते या ज़्यादा रहें, या रोज़ का जीवन रुकने लगे, तो भरोसेमंद बड़े या विशेषज्ञ से बात करें — मदद माँगना हिम्मत है।
2. Organising and managing physical activity
Planning physical and sporting activity · Responsible sports equipment and advertising · Self-managed motor projects · Injury prevention and risk management · First aid and emergency response · School emergency protocols
- शारीरिक फिटनेस (Physical Fitness) – शारीरिक फिटनेस शरीर की वह क्षमता है जिससे रोज़ का काम, खेल और स्पर्धा ऊर्जा बचाकर की जा सके। इसके पाँच स्वास्थ्य संबंधी घटक (हृदय-श्वसन सहनशक्ति, पेशीय शक्ति, पेशीय सहनशक्ति, लचीलापन, शरीर संरचना) और छह कौशल संबंधी घटक (गति, फुर्ती, विस्फोटक शक्ति, संतुलन, तालमेल, प्रतिक्रिया समय) हैं। इसे FITT (आवृत्ति, तीव्रता, समय, प्रकार) और अधिभार, प्रगति, विशिष्टता, विश्राम, उत्क्रमणीयता जैसे सिद्धांतों वाली योजना से बढ़ाते हैं।
- खेल चोटें: कैसे लगती हैं, कैसे बचें, कैसे ठीक करें – खेल या व्यायाम से शरीर को हुआ नुकसान खेल चोट है। तीव्र (acute) चोट अचानक लगती है (टखना मुड़ना); दीर्घकालिक या अति-उपयोग चोट धीरे-धीरे बनती है (शिन स्प्लिंट)। कोमल ऊतक चोट मांसपेशी (खिंचाव), स्नायुबंधन (मोच) और त्वचा की होती है; कठोर ऊतक चोट हड्डी (अस्थिभंग) और जोड़ (विस्थापन) की। जोखिम अंदर से (फ़िटनेस, पुरानी चोट) और बाहर से (मौसम, उपकरण) आता है। वार्म-अप, सही तकनीक, सही सामान, नियम और समझदारी से बढ़ता अभ्यास ज़्यादातर चोटें रोकते हैं। मोच-खिंचाव पर RICE, फिर धीरे-धीरे पुनर्वास।
- प्राथमिक चिकित्सा: आपात स्थिति में क्या करें – प्राथमिक चिकित्सा वह मदद है जो प्रशिक्षित मदद आने तक घायल या बीमार व्यक्ति को दी जाती है। लक्ष्य: जान बचाना, हालत बिगड़ने से रोकना, ठीक होने में मदद। DRABC अपनाएँ: ख़तरा, प्रतिक्रिया, श्वास मार्ग, साँस, CPR/कॉल। बेहोश पर साँस चल रही → करवट स्थिति। सामान्य साँस नहीं → CPR 30:2, प्रति मिनट 100-120 दबाव, 5-6 सेमी गहरा, और AED। ख़ून → सीधा दबाव। जलना → 20 मिनट बहता पानी। गला अटकना → पीठ थपकी और पेट धक्के। मोच → RICE।
3. Problem solving in motor situations
Decision-making in motor situations · Perceptual-motor abilities · Training strength and endurance · Refining specific sport skills · Motor creativity
- मोटर कौशल (Motor Skills) – मोटर कौशल वह हरकत है जिसे हम सीखकर अच्छे से करते हैं, एक साफ़ लक्ष्य के साथ, जैसे दौड़ना, पकड़ना, लिखना या कार्टव्हील। स्थूल कौशल बड़ी मांसपेशियों से होते हैं (दौड़, कूद); सूक्ष्म कौशल छोटी मांसपेशियों से, बारीकी के साथ (लिखना, कैरम का शॉट)। कौशल के तीन परिवार हैं: चलने-फिरने वाले (locomotor), वस्तु संभालने वाले (manipulative) और संतुलन वाले (stability)। कौशल खुले (आसपास बदलता रहे, जैसे फ़ुटबॉल पास) या बंद (आसपास स्थिर, जैसे फ़्री थ्रो), सरल या जटिल भी होते हैं। हर हरकत एक चक्र है: इंद्रियाँ जानकारी लेती हैं, दिमाग़ तय करता है, मांसपेशियाँ काम करती हैं, और प्रतिपुष्टि (feedback) बताती है कैसा हुआ। प्रतिक्रिया समय = देखने और हिलना शुरू करने के बीच का समय। हम तीन चरणों में सीखते हैं: संज्ञानात्मक (समझना, कई ग़लतियाँ), साहचर्य (अभ्यास, कम ग़लतियाँ) और स्वायत्त (अपने-आप, सहज)। गति, ताक़त, सहनशक्ति, समन्वय, संतुलन, फुर्ती और लचीलापन जैसी मोटर क्षमताएँ हर कौशल की नींव हैं।
- शारीरिक फिटनेस (Physical Fitness) – शारीरिक फिटनेस शरीर की वह क्षमता है जिससे रोज़ का काम, खेल और स्पर्धा ऊर्जा बचाकर की जा सके। इसके पाँच स्वास्थ्य संबंधी घटक (हृदय-श्वसन सहनशक्ति, पेशीय शक्ति, पेशीय सहनशक्ति, लचीलापन, शरीर संरचना) और छह कौशल संबंधी घटक (गति, फुर्ती, विस्फोटक शक्ति, संतुलन, तालमेल, प्रतिक्रिया समय) हैं। इसे FITT (आवृत्ति, तीव्रता, समय, प्रकार) और अधिभार, प्रगति, विशिष्टता, विश्राम, उत्क्रमणीयता जैसे सिद्धांतों वाली योजना से बढ़ाते हैं।
4. Emotional self-regulation and social interaction in motor situations
Handling success and fame in sport · Social skills in group activities · Rules for equality in sport · Roles in sport · Rejecting harmful behaviour in sport
- खेल मनोविज्ञान: खेल के पीछे का दिमाग़ – खेल मनोविज्ञान बताता है कि मन खेल पर कैसे असर डालता है। व्यक्तित्व से पता चलता है कि हमें कैसा खेल पसंद है। प्रेरणा ईंधन है: अंदर से (मज़ा) या बाहर से (इनाम)। उत्तेजना (arousal) यानी आप कितने "चालू" हैं: बहुत कम या बहुत ज़्यादा दोनों नुकसान करते हैं, बीच में सबसे अच्छा (उल्टा U)। चिंता को साँस, कल्पना और अच्छी आत्म-बातचीत से शांत करते हैं। SMART लक्ष्य साफ़ सीढ़ी देते हैं। आक्रामकता पर काबू और टीम में मिलकर मेहनत ज़रूरी है।
- समावेशी खेल: सबको खेलने का मौका कैसे मिले – समावेशी खेल यानी हर कोई भाग ले सके — क्षमता, लिंग, शरीर, पृष्ठभूमि या पैसा कुछ भी हो। रुकावटें शारीरिक (सीढ़ियाँ, रैम्प नहीं), नियमों या सामान में, या लोगों की सोच में (मज़ाक, बाहर करना, हिंसा) हो सकती हैं। हम इन्हें पहुँच बनाकर, STEP मॉडल (जगह, काम, सामान, लोग) से खेल बदलकर, सबके लिए बराबर नियम बनाकर और बुरे व्यवहार के ख़िलाफ़ बोलकर हटाते हैं। पैरालंपिक और अनुकूलित खेल दिखाते हैं कि यह कितना आगे जा सकता है।
5. Expressions of movement culture
Traditional and local games and sports · Body expression techniques · Rhythmic and musical activities · Good professional practice in sport · Sport and gender · Sport, politics and economy
- शारीरिक अभिव्यक्ति: जब शरीर बोलता है – शारीरिक अभिव्यक्ति का मतलब है शब्दों के बिना, शरीर से अपनी बात और भावना दिखाना। मुद्रा, इशारे, चेहरा, आँखें और चाल – ये सब संदेश भेजते हैं। खुली मुद्रा कहती है 'मैं तैयार हूँ', बंद मुद्रा कहती है 'मैं परेशान हूँ'। खेल में रेफ़री और खिलाड़ी तय किए हुए संकेतों से बात करते हैं। माइम, फ़्रीज़, धीमी गति, बढ़ा-चढ़ाकर दिखाना और नकल (मिररिंग) जैसी तकनीकें बात को साफ़ दिखाने में मदद करती हैं।
- नृत्य: तत्व, नृत्य-रचना और शैलियाँ – नृत्य शरीर की वह गति है जो स्थान और समय में, ऊर्जा के साथ, भावना जताने, कहानी सुनाने या उत्सव मनाने के लिए होती है। हर नृत्य को चार तत्वों से समझ सकते हैं: शरीर (क्या हिलता है), स्थान (कहाँ: स्तर, दिशा, रास्ते), समय (कब: ताल, लय, ठहराव) और ऊर्जा (कैसे: तीखी या कोमल, ज़ोरदार या हल्की)। नृत्य-रचना (कोरियोग्राफ़ी) मोटिफ़, दोहराव, कैनन, एकस्वरता, विरोधाभास और बनावट जैसे तरीक़ों से गतियाँ सजाने की कला है। अच्छे कलाकार तकनीक, सुरक्षा और भाव सीखते हैं, और अच्छे दर्शक देखी चीज़ का वर्णन, विश्लेषण, अर्थ और मूल्यांकन करते हैं। शास्त्रीय, लोक, बैले, हिप-हॉप – हर शैली अपनी संस्कृति और इतिहास से निकलती है।
- समावेशी खेल: सबको खेलने का मौका कैसे मिले – समावेशी खेल यानी हर कोई भाग ले सके — क्षमता, लिंग, शरीर, पृष्ठभूमि या पैसा कुछ भी हो। रुकावटें शारीरिक (सीढ़ियाँ, रैम्प नहीं), नियमों या सामान में, या लोगों की सोच में (मज़ाक, बाहर करना, हिंसा) हो सकती हैं। हम इन्हें पहुँच बनाकर, STEP मॉडल (जगह, काम, सामान, लोग) से खेल बदलकर, सबके लिए बराबर नियम बनाकर और बुरे व्यवहार के ख़िलाफ़ बोलकर हटाते हैं। पैरालंपिक और अनुकूलित खेल दिखाते हैं कि यह कितना आगे जा सकता है।
6. Efficient and sustainable interaction with the environment
Active and sustainable mobility · Natural and urban spaces for activity · Improving urban spaces for movement · Anticipating risks in activities · Sustainable use of activity spaces · Caring for the local environment
- बाहरी गतिविधियाँ: ओरिएंटियरिंग, चढ़ाई और सुरक्षित रहना – बाहरी और साहसिक गतिविधियाँ, जैसे ओरिएंटियरिंग, ट्रेकिंग, चढ़ाई और पानी के खेल, बदलती प्राकृतिक जगहों पर की जाती हैं। इनमें कौशल (नक्शा पढ़ना, कम्पास चलाना, चढ़ने की तकनीक), सही फ़ैसले (रास्ता चुनना, अपनी सीमा जानना) और सुरक्षा की आदतें (योजना, सामान, टीमवर्क) चाहिए। साथ ही कोई निशान न छोड़कर प्रकृति की रक्षा करनी होती है।
- नगर नियोजन और नगरीय जीवन की गुणवत्ता – नगर नियोजन का अर्थ है पहले से तय करना कि शहर की ज़मीन कैसे इस्तेमाल होगी: सड़कें, घर, काम, पार्क और सेवाएँ कहाँ होंगी और शहर कैसे बढ़ेगा। योजना के बिना शहर खेतों पर फैलता है, जाम बढ़ता है और झुग्गियों में पानी व नाली नहीं होती। नियोजक भूमि-उपयोग क्षेत्रीकरण, सार्वजनिक परिवहन, सही घनत्व और हरियाली से जीवन की गुणवत्ता बढ़ाते हैं, जिसे आवास, रोज़गार, साफ़ हवा, सेवाएँ, परिवहन और सुरक्षा से मापा जाता है। नए विचार हैं: रहने योग्य शहर, 15-मिनट पड़ोस, स्मार्ट शहर और शहर की ब्रांडिंग। गाँव और छोटे नगर भी मिलकर नियोजित किए जाते हैं।
- खेल चोटें: कैसे लगती हैं, कैसे बचें, कैसे ठीक करें – खेल या व्यायाम से शरीर को हुआ नुकसान खेल चोट है। तीव्र (acute) चोट अचानक लगती है (टखना मुड़ना); दीर्घकालिक या अति-उपयोग चोट धीरे-धीरे बनती है (शिन स्प्लिंट)। कोमल ऊतक चोट मांसपेशी (खिंचाव), स्नायुबंधन (मोच) और त्वचा की होती है; कठोर ऊतक चोट हड्डी (अस्थिभंग) और जोड़ (विस्थापन) की। जोखिम अंदर से (फ़िटनेस, पुरानी चोट) और बाहर से (मौसम, उपकरण) आता है। वार्म-अप, सही तकनीक, सही सामान, नियम और समझदारी से बढ़ता अभ्यास ज़्यादातर चोटें रोकते हैं। मोच-खिंचाव पर RICE, फिर धीरे-धीरे पुनर्वास।
- स्वयंसेवा: अपना समय देकर दुनिया बेहतर बनाना – स्वयंसेवा का अर्थ है अपनी मर्ज़ी से, बिना पैसे लिए, दूसरों या प्रकृति की मदद में अपना समय और हुनर देना। इसकी जड़ में परोपकार (दूसरों की भलाई की चिंता), मानवीय गरिमा (हर व्यक्ति सम्मान का हक़दार) और एकजुटता जैसे मूल्य हैं। इसके कई प्रकार हैं: लोगों की मदद, पर्यावरण, पशु कल्याण, संस्कृति और खेल, आपदा सहायता और ऑनलाइन सेवा। अच्छा प्रोजेक्ट एक चक्र अपनाता है: असली ज़रूरत पहचानो, प्रभावित लोगों के साथ योजना बनाओ, सुरक्षित काम करो, फिर सोचो और सुधारो। इससे समाज को भी लाभ होता है और स्वयंसेवक को भी: नए हुनर, दोस्त, आत्मविश्वास। यह नागरिक समाज में भाग लेने और स्थानीय फ़ैसलों पर असर डालने का एक तरीका है।