Russia 7 класс Informatics (advanced)
अध्याय: 4
1. Digital literacy
Computer · Software and files · Networks and safety
- कंप्यूटर का मूल संगठन – कंप्यूटर प्रणाली में हार्डवेयर (जिसे छू सकें) और सॉफ़्टवेयर (निर्देश) दोनों होते हैं। इनपुट उपकरण डेटा अंदर लाते हैं, CPU (ALU + कंट्रोल यूनिट + रजिस्टर) उस पर काम करता है, और आउटपुट उपकरण परिणाम देते हैं। मेमोरी एक सीढ़ी जैसी है: रजिस्टर और कैश छोटे पर सबसे तेज़, प्राथमिक मेमोरी (RAM, ROM) चलते प्रोग्राम रखती है, और द्वितीयक भंडारण (HDD, SSD, पेन ड्राइव) डेटा हमेशा के लिए रखता है। 8 बिट = 1 बाइट, और KB से आगे हर इकाई पिछली की 1024 गुना है।
- फ़ाइल प्रबंधन: फ़ाइल, फ़ोल्डर, पाथ और बैकअप – फ़ाइल नाम वाला डेटा है; उसका एक्सटेंशन प्रकार बताता है। ऑपरेटिंग सिस्टम फ़ाइलों को फ़ोल्डरों में रखता है जो एक पेड़ बनाते हैं, और पाथ ड्राइव से फ़ाइल तक का रास्ता है। अच्छे फ़ाइल प्रबंधन का मतलब: साफ़ नाम, सोची-समझी फ़ोल्डर योजना, सही ड्राइव (लोकल, बाहरी, नेटवर्क या क्लाउड), नियमित बैकअप (3-2-1 नियम), पुराने काम का आर्काइव और मैलवेयर से बचाव।
- कंप्यूटर नेटवर्क और इंटरनेट कैसे चलता है – नेटवर्क यानी आपस में जुड़े उपकरण जो डेटा बाँटते हैं। हर उपकरण का एक IP पता होता है। डेटा छोटे क्रमांकित पैकेटों में कटता है। राउटर हर पैकेट को एक-एक कदम उसके पते की ओर भेजते हैं, और TCP अंत में पैकेटों को क्रम से जोड़ता है। DNS वेबसाइट के नाम को IP पते में बदलता है। क्लाइंट माँगता है, सर्वर देता है। फ़ायरवॉल, पासवर्ड, अपडेट और एन्क्रिप्शन नेटवर्क को सुरक्षित रखते हैं।
- नेटवर्क कैसे बढ़े और डेटा कैसे चलता है – कंप्यूटर नेटवर्क जुड़े हुए उपकरणों का समूह है जो डेटा साझा करते हैं। नेटवर्किंग ARPANET (1969) से शुरू हुई, 1980 के दशक में विश्वविद्यालयों के लिए NSFNET बना, और दूसरे नेटवर्कों से जुड़कर इंटरनेट बना — नेटवर्कों का नेटवर्क। हर डेटा संचार के पाँच भाग हैं: प्रेषक, प्राप्तकर्ता, संदेश, संचार माध्यम और प्रोटोकॉल। बैंडविड्थ वह आवृत्ति-सीमा है जो चैनल ले जा सकता है (Hz में); डेटा दर प्रति सेकंड जाने वाले बिट (bps) हैं। नेटवर्क के हर उपकरण का IP एड्रेस होता है। डेटा सर्किट स्विचिंग (पहले पक्का रास्ता बुक) या पैकेट स्विचिंग (डेटा पैकेटों में कटकर अलग-अलग चलता है) से जाता है।
2. Theoretical foundations
Information and coding · Colour, image and sound coding
- डेटा निरूपण: कंप्यूटर संख्या, अक्षर, चित्र और आवाज़ कैसे रखता है – डेटा कच्चे तथ्य हैं; अर्थ मिलने पर वह सूचना (information) बनता है; जिस सूचना से हम काम ले सकें वह ज्ञान है। कंप्यूटर सारा डेटा बिट (0 या 1) में रखता है। 8 बिट = 1 बाइट; 1 kB = 1000 बाइट, 1 MB = 1000 kB, 1 GB = 1000 MB, 1 TB = 1000 GB। संख्याएँ बाइनरी में रहती हैं, जहाँ स्थानीय मान दोगुने होते जाते हैं: 1, 2, 4, 8… अक्षरों के लिए कैरेक्टर सेट होता है: ASCII में 'A' = 65; यूनिकोड में हर लिपि है। बिटमैप चित्र पिक्सेल का जाल है; साइज़ = चौड़ाई × ऊँचाई × कलर डेप्थ। ध्वनि के सैंपल लिए जाते हैं: साइज़ = सैंपल रेट × बिट डेप्थ × सेकंड। वेक्टर चित्र पिक्सेल की जगह आकृतियाँ रखता है। कम्प्रेशन फ़ाइल छोटी करता है: लॉसलेस हर बिट बचाता है, लॉसी कुछ बारीकी हटा देता है।
3. Algorithms and programming
Algorithms and constructions · Algorithm analysis for executors
- समस्या समाधान का परिचय – कंप्यूटर से समस्या हल करने के चरण: समस्या का विश्लेषण (इनपुट, आउटपुट, नियम), एल्गोरिद्म बनाना (सीमित, स्पष्ट, क्रमबद्ध चरण), प्रोग्रामिंग भाषा में कोड करना, अलग-अलग इनपुट से जाँचना (टेस्ट), और डीबग (गलतियाँ ढूँढकर हटाना)। एल्गोरिद्म को फ़्लोचार्ट (अंडाकार = शुरू/रुको, समांतर चतुर्भुज = इनपुट/आउटपुट, आयत = प्रक्रिया, हीरा = निर्णय, तीर = दिशा) या स्यूडोकोड (सरल संरचित भाषा) में दिखाते हैं। विघटन बड़ी समस्या को छोटी उप-समस्याओं में तोड़ता है।
4. Information technologies
Text documents · Graphics and presentations
- वर्ड प्रोसेसिंग: साफ़ और सुंदर दस्तावेज़ बनाना – वर्ड प्रोसेसर (जैसे LibreOffice Writer, Microsoft Word, Google Docs) एक प्रोग्राम है जिससे हम टेक्स्ट टाइप, एडिट, फ़ॉर्मेट, सेव और प्रिंट करते हैं। अक्षर फ़ॉर्मेटिंग से फ़ॉन्ट, साइज़, बोल्ड, रंग बदलते हैं; पैराग्राफ़ फ़ॉर्मेटिंग से अलाइनमेंट, लाइन स्पेसिंग, इंडेंट और लिस्ट; और पेज सेटअप व स्टाइल से पूरा दस्तावेज़। हेडिंग स्टाइल से विषय-सूची अपने-आप बनती है। टेबल, चित्र, हेडर-फ़ुटर, पेज नंबर, फ़ुटनोट, साइटेशन और संदर्भ-सूची जोड़ी जा सकती है, और मेल मर्ज से एक टेम्पलेट से कई निजी पत्र बनते हैं।
- डिजिटल प्रेज़ेंटेशन (Presentations) – डिजिटल प्रेज़ेंटेशन स्लाइडों का एक सेट है जो किसी बात को समझाते समय स्क्रीन पर दिखाया जाता है। अच्छी प्रेज़ेंटेशन पहले योजना से बनती है (उद्देश्य, श्रोता, स्टोरीबोर्ड)। हर स्लाइड पर एक विचार: छोटा शीर्षक, कुछ मुख्य शब्द, और मदद करने वाला चित्र, चार्ट या आरेख। एक-जैसा डिज़ाइन (स्लाइड मास्टर या थीम), अच्छा रंग कंट्रास्ट और बड़े अक्षर रखो। ग्राफ़िक्स, चार्ट, ऑडियो, वीडियो और हाइपरलिंक तभी जोड़ो जब वे संदेश में मदद करें, और दूसरों के चित्रों का स्रोत लिखो। ट्रांज़िशन और एनिमेशन कम रखो। अंत में स्पीकर नोट्स के साथ अभ्यास करो, स्लाइड शो चलाओ, और सही फ़ॉर्मेट (PDF, वीडियो, हैंडआउट) में साझा या प्रिंट करो।