कवायद (ड्रिल) क्या है और क्यों सीखें?
कवायद यानी साथ-साथ चाल का अभ्यास, जब तक पूरा समूह एक होकर न चलने लगे. इसमें किसी को चोट नहीं लगती और किसी सामान की ज़रूरत नहीं होती. इससे तीन काम की बातें आती हैं: आदेश सुनना, साथ चलना और भीड़ में शांत रहना.
- आदेश (कमांड) नेता का छोटा, ज़ोरदार और साफ़ हुक्म है.
- कैडेट वह विद्यार्थी है जो स्कूल या युवा समूह में प्रशिक्षण ले रहा है.
- नेता पहले चेतावनी वाला भाग ("बाएँ...") बोलता है, फिर क्रिया वाला भाग ("...मुड़!"). हरकत सिर्फ़ क्रिया वाले भाग पर होती है.
फॉर्मेशन: लाइन और कॉलम
फॉर्मेशन वह आकार है जिसमें समूह खड़ा होता है या चलता है.
- लाइन (पंक्ति): लोग अगल-बगल, सब एक ही दिशा में मुँह करके. यह चौड़ी और छोटी होती है. गिनती और आदेश देने के लिए अच्छी है.
- कॉलम (स्तंभ): लोग एक के पीछे एक. यह पतला और लंबा होता है. तंग सड़क, दरवाज़े और सीढ़ियों के लिए अच्छा है.
- तीर (V): नेता आगे और बाकी दोनों तरफ़ पीछे. सब नेता को देख सकते हैं.
वही लोग आदेश पर आकार बदल सकते हैं. 3D के चरण 1 और 2 में आठ कैडेट वही रहे, सिर्फ़ आकार बदला.
सावधान तैयार मुद्रा है: सीधे खड़े, एड़ियाँ मिली हुई, बाँहें बगल में, नज़र सामने. विश्राम आराम की मुद्रा है.
मुड़ना और साथ चलना
जब नेता मुड़ने का आदेश देता है, सब एक ही गिनती पर मुड़ते हैं. जगह पर मुड़ने से मुँह की दिशा बदलती है, खड़े होने की जगह नहीं. इसलिए बाएँ मुड़ा हुआ कॉलम लाइन बन जाता है (3D का चरण 3).
- बाएँ मुड़ / दाएँ मुड़: चौथाई चक्कर (90 डिग्री).
- पीछे मुड़: आधा चक्कर (180 डिग्री).
- तेज़ चल: पहले बायाँ पैर उठाकर चलना शुरू करो.
- थम: रुको और सावधान हो जाओ.
चलते समय कदम बराबर और दूरी बराबर रखें. अगर एक व्यक्ति बड़ा कदम ले, तो दूरी बदलती है और समूह सिकुड़ता या खिंचता है. कदम मिलाना बस एक ही ताल पर चलना है.
बुनियादी रणनीति: खुले में सुरक्षित चलना
रणनीति (टैक्टिक्स) यानी खुले में टीम बनकर समझदारी से चलने और काम करने का तरीका. यहाँ हम सिर्फ़ सुरक्षित बातें लेते हैं जो पर्वतारोहण, बचाव कार्य और नागरिक सुरक्षा में भी काम आती हैं.
- दूरी: खुले में ज़्यादा दूरी रखें. एक जगह कुछ बुरा हो तो सब प्रभावित नहीं होते.
- आड़ (कवर): कोई ठोस चीज़, जैसे मोटी दीवार, जो नुकसान रोक सके. छिपाव (कंसीलमेंट) सिर्फ़ नज़र से छिपाता है (झाड़ी), बचाता नहीं. आड़ और छिपाव एक नहीं हैं.
- देखो और दौड़ो: एक टोली आड़ के पीछे रहकर चारों ओर देखती है. दूसरी टोली छोटी दूरी दौड़कर अगली आड़ तक जाती है. फिर बदलते हैं (3D का चरण 5).
- क्षेत्र (सेक्टर): हर व्यक्ति दृश्य का एक हिस्सा देखता है, तो मिलकर सब कुछ देख लिया जाता है.
- संकेत: नेता हाथ के इशारे और छोटे शब्द इस्तेमाल करता है. सब दोहराकर पक्का करते हैं.
- दिशा-ज्ञान: उत्तर कहाँ है (कम्पास या सूरज से) और मिलने की जगह कहाँ है, यह जानें.
करके देखिए
घर या स्कूल में: पाँच दोस्तों को एक लाइन में खड़ा करें. बोलिए "कॉलम!" देखिए कितना समय लगा. तब तक अभ्यास करें जब तक सब क्रिया वाले शब्द पर ही हिलें. फिर "बाएँ मुड़" बोलिए और देखिए कॉलम लाइन बन जाता है, जैसे 3D में.
3D में: आख़िरी चरण में पहले अंदाज़ा लगाइए: कॉलम चुनकर बाएँ मुड़ दबाऊँ तो कौन सा आकार दिखेगा? फिर दबाकर जाँचिए.
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- आदेश = चेतावनी वाला भाग + क्रिया वाला भाग. हरकत सिर्फ़ क्रिया वाले भाग पर.
- बाएँ/दाएँ मुड़ = 90 डिग्री. पीछे मुड़ = 180 डिग्री.
- बराबर कदम = बराबर दूरी. अलग कदम = समूह सिकुड़ता या खिंचता है.
- आड़ बचाती है, छिपाव सिर्फ़ छिपाता है. देखने वाली टोली + दौड़ने वाली टोली, फिर बदलना.
हल किए गए उदाहरण
1. 6 लोगों का एक कॉलम जगह पर बाएँ मुड़ता है. अब कौन सा आकार है?
जगह पर मुड़ने से सिर्फ़ मुँह की दिशा बदलती है, खड़े होने की जगह नहीं. जो लोग आगे-पीछे की रेखा में एक के पीछे एक थे, वे उसी रेखा में हैं, पर अब सब बाएँ देख रहे हैं. बग़ल से देखें तो वे अगल-बगल एक ही दिशा में मुँह करके हैं, इसलिए यह बाएँ देखती हुई लाइन है.
2. नेता कहता है "दाएँ... मुड़!" रवि पहले शब्द पर ही मुड़ गया. उसने क्या ग़लती की?
पहला शब्द सिर्फ़ चेतावनी है. क्रिया वाला भाग आख़िर में आता है. रवि को "मुड़" सुनने तक रुकना चाहिए था और सबके साथ मुड़ना चाहिए था.
3. आप 8 दोस्तों के साथ पैदल जा रहे हैं और एक खुला मैदान पार करना है जिसके दूसरे छोर पर दीवार है. देखो-और-दौड़ो से कैसे पार करेंगे?
चार-चार की दो टोलियाँ बनाइए. टोली A पास की दीवार के पीछे रुककर नज़र रखे. टोली B बड़ी दूरी रखकर जल्दी से दूर वाली दीवार तक जाए. जब B दीवार के पीछे पहुँचकर निगरानी करने लगे, तब A पार करे. हर समय एक टोली निगरानी में रहती है.
आम गलतियाँ
- चेतावनी वाले शब्द पर ही हिल जाना, क्रिया वाले शब्द का इंतज़ार न करना.
- झाड़ी को आड़ समझना. झाड़ी सिर्फ़ छिपाती है, बचाती नहीं. वह छिपाव है.
- दूसरों से बड़ा कदम लेना, जिससे दूरी बदल जाती है और समूह का आकार बिगड़ता है.
- खुले में सटकर चलना. खुली जगह पर ज़्यादा दूरी सुरक्षित होती है.