सवाल और यह कठिन क्यों है
इंसान जानवरों का उपयोग खाने, काम, कपड़े, दवा के परीक्षण, खेल और साथ के लिए करते हैं। पशु नैतिकता पूछती है कि क्या यह सही है और हम जानवरों के प्रति क्या ऋणी हैं।
दो बातें इसे कठिन बनाती हैं। पहली, बहुत से जानवर संवेदनशील (sentient) हैं: वे दर्द और सुख महसूस कर सकते हैं। दूसरी, वे हमारी बहस में अपनी बात खुद नहीं रख सकते। इसलिए हमें सिर्फ़ भावना या आदत नहीं, साफ़ कारण चाहिए।
दार्शनिक चार तरह के कारण देते हैं। हम एक-एक पढ़ेंगे, फिर एक ही केस पर तुलना करेंगे।
मुद्दा, दृष्टिकोण 1: उपयोगितावादी मत
उपयोगितावाद कहता है कि सही काम वह है जो प्रभावित सभी के लिए सबसे ज़्यादा सुख और सबसे कम दुख दे। पीटर सिंगर (Animal Liberation, 1975) की मुख्य बात: कौन गिना जाएगा, यह प्रजाति नहीं बल्कि दुख महसूस कर पाने की क्षमता तय करती है। किसी जानवर का दर्द इसलिए अनदेखा करना कि वह इंसान नहीं है, प्रजातिवाद (speciesism) है, जैसे नस्लवाद, पर प्रजाति के लिए।
तरीका: देखो कौन प्रभावित है, अंदाज़ा लगाओ कि हर एक को कितना फ़ायदा या दुख है, जोड़ो और तुलना करो। इंसान का छोटा-सा सुख (थोड़ा सस्ता खाना) जानवरों के बड़े दुख से भारी नहीं हो सकता। पर यही तरीका जानवरों के उपयोग की इजाज़त भी दे सकता है अगर फ़ायदा सच में बहुत बड़ा हो, जैसे कोई दवा जो कई जानें बचाए और दर्द कम से कम हो।
ताकत: जानवर के दर्द को गंभीरता से लेता है; व्यावहारिक है। कमज़ोरी: दर्द नापना और तुलना करना कठिन है; कुल जोड़ अच्छा दिखे तो भयानक काम भी मान सकता है; व्यक्ति के अधिकार अनदेखे हो सकते हैं।
दृष्टिकोण 2: कर्तव्य और पशु अधिकार
कर्तव्य (deontological) मत कहता है कि कुछ काम नतीजे की परवाह किए बिना गलत हैं। कांट मानते थे कि हमारे कर्तव्य सिर्फ़ विवेकशील प्राणियों के प्रति हैं, पर क्रूरता गलत है क्योंकि वह हमारे चरित्र को बिगाड़ती है और हमें इंसानों के प्रति कठोर बनाती है। यह अप्रत्यक्ष कर्तव्य है।
टॉम रीगन और आगे गए। उन्होंने कहा कि बहुत से जानवर जीवन के विषय (subjects-of-a-life) हैं: उनके पास विश्वास, इच्छाएँ, याददाश्त और ऐसा जीवन है जो उनके लिए अच्छा या बुरा जा सकता है। इससे उनका अंतर्निहित मूल्य और अधिकार बनते हैं, इसलिए उन्हें सिर्फ़ संसाधन नहीं समझा जाना चाहिए, चाहे फ़ायदा बड़ा हो। अधिकार हर व्यक्ति के चारों ओर ढाल की तरह हैं।
ताकत: समूह के लिए व्यक्ति की बलि से बचाता है; नियम साफ़ हैं। कमज़ोरी: किन जानवरों के अधिकार हैं और कहाँ तक? अधिकार टकराएँ या इंसान की जान दाँव पर हो तो?
दृष्टिकोण 3: देखभाल की नैतिकता
देखभाल की नैतिकता (कैरल गिलिगन, नेल नोडिंग्स और जानवरों के लिए जोसफ़ीन डोनोवन व कैरल एडम्स जैसे विचारकों से) रिश्तों से शुरू होती है, नियमों या जोड़-घटाव से नहीं। हम निर्लिप्त गणक नहीं हैं। हम उनके साथ रहते हैं जो हम पर निर्भर हैं।
मुख्य विचार: ध्यान (सच में देखना कि जानवर को क्या चाहिए), ज़िम्मेदारी (जो हम पर निर्भर हैं, जैसे पालतू और फ़ार्म के जानवर, उनका ख़याल रखना) और प्रतिक्रिया (उनके दुख या आराम के संकेत सुनना और जवाब देना)।
ताकत: रोज़ के नैतिक जीवन से मेल खाती है; भावना और नज़दीकी को महत्व देती है। कमज़ोरी: पास के जानवर (पालतू) को दूर के जानवरों (दूर कारख़ानों में) से ज़्यादा महत्व दे सकती है, और साफ़ नियम कम देती है।
दृष्टिकोण 4: आधुनिक सद्गुण नैतिकता
सद्गुण नैतिकता पूछती है: अच्छे चरित्र वाला इंसान क्या करेगा? सद्गुण टिकाऊ अच्छी आदतें हैं, जैसे दया, न्याय, साहस और ईमानदारी। रोज़लिंड हर्स्टहाउस जैसे आधुनिक लेखक इसे जानवरों पर लगाते हैं: क्रूरता, लालच और लापरवाही दुर्गुण हैं; करुणा और निष्पक्षता सद्गुण।
हम बार-बार दयालु काम करके दयालु बनते हैं, जैसे सीढ़ी एक-एक पायदान से बनती है। सवाल सिर्फ़ "सही काम क्या है?" नहीं, बल्कि "मैं कैसा इंसान बन रहा हूँ?" भी है।
ताकत: भावनाओं और आदतों को समेटती है; रोज़ के जीवन से मेल खाती है। कमज़ोरी: "अच्छा इंसान क्या करेगा?" अस्पष्ट हो सकता है, और अलग संस्कृतियाँ अलग सद्गुण चुनती हैं।
एक ही केस पर चारों की तुलना और खुद करके देखो
| दृष्टिकोण | मुख्य सवाल | फ़ैक्ट्री फ़ार्मिंग पर |
|---|---|---|
| उपयोगितावादी | कुल मिलाकर सबसे ज़्यादा भलाई किसमें? | गलत, अगर दुख फ़ायदे से भारी हो |
| कर्तव्य और अधिकार | क्या एक जीव को सिर्फ़ औज़ार बनाया जा रहा है? | गलत: जानवर सिर्फ़ संसाधन बन जाते हैं |
| देखभाल | कौन हम पर निर्भर है; क्या हम जवाब दे रहे हैं? | गलत: अपनी देखभाल वाले जानवरों की अनदेखी |
| सद्गुण | दयालु, न्यायप्रिय इंसान क्या करेगा? | उदासीनता जैसे दुर्गुण दिखते हैं |
क्रूर मामलों में चारों अक्सर सहमत होते हैं, पर बीच के मामलों में अलग हो जाते हैं, जैसे जीवन बचाने वाली दवा के लिए जानवरों पर परीक्षण।
खुद करो: अपनी खाने या इस्तेमाल की एक चीज़ चुनो। हर दृष्टिकोण के लिए एक वाक्य लिखो। 3D में जानवर 8 और फ़ायदा 2 करो, फिर जानवर 2 और फ़ायदा 9, और तराज़ू देखो। क्या अधिकार वाला मत बदलता है?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- उपयोगितावादी जाँच: महसूस कर सकने वाले सबका कुल फ़ायदा − कुल दुख
- अधिकार जाँच: क्या किसी व्यक्ति को सिर्फ़ साधन बनाया जा रहा है?
- देखभाल जाँच: कौन मुझ पर निर्भर है, क्या मैं ध्यान देता और जवाब देता हूँ?
- सद्गुण जाँच: दयालु, न्यायप्रिय, ईमानदार इंसान क्या करेगा?
- मुख्य शब्द: संवेदनशीलता, प्रजातिवाद, अंतर्निहित मूल्य, जीवन का विषय, अप्रत्यक्ष कर्तव्य
हल किए गए उदाहरण
1. उपयोगितावादी दृष्टि से: एक फ़ार्म 100 मुर्गियों को छोटे पिंजरों में रखता है ताकि अंडे थोड़े सस्ते हों। क्या यह सही है?
चरण 1: कौन प्रभावित है? 100 मुर्गियाँ और बहुत से खरीदार। चरण 2: मुर्गियाँ हर दिन बहुत दुख सहती हैं; खरीदारों को छोटी बचत होती है। चरण 3: जोड़ो। बड़ा, लंबा दुख छोटे फ़ायदे से भारी है। इसलिए उपयोगितावादी इसे गलत कहेगा और बेहतर खेती माँगेगा।
2. वही केस, अधिकार के मत से। यह क्या कहता है?
चरण 1: पूछो कि क्या मुर्गियाँ जीवन के विषय हैं जिनका अंतर्निहित मूल्य है। रीगन कहते हैं हाँ। चरण 2: पिंजरे उन्हें सिर्फ़ अंडा-मशीन बना देते हैं। चरण 3: अधिकार इसे रोकते हैं, चाहे खरीदारों की बचत हो। इसलिए संख्या कुछ भी हो, यह गलत है।
3. एक दवा कई लोगों की जान बचा सकती है, पर परीक्षण से कुछ चूहों को चोट लगती है। उपयोगितावादी और अधिकार मत की तुलना करो।
उपयोगितावादी: चूहों के दर्द की तुलना कई जानों के फ़ायदे से करो। अगर दर्द कम रखा जाए और कोई और तरीका न हो तो अनुमति मिल सकती है। अधिकार: चूहों को सिर्फ़ औज़ार नहीं बना सकते, इसलिए परीक्षण गलत है, या तभी ठीक जब सचमुच कोई और रास्ता न हो और चूहों का सम्मान हो। यहाँ दोनों अलग होते हैं।
4. कांट के अप्रत्यक्ष कर्तव्य को एक उदाहरण से समझाओ।
जो बच्चा बिल्ली को सताता है, वह क्रूरता का अभ्यास कर रहा है। कांट कहते हैं इससे इंसानों के प्रति उसकी दया घिस जाती है। इसलिए जानवरों के प्रति क्रूर नहीं होना चाहिए, पर कारण हमारे अपने चरित्र और इंसानों के प्रति कर्तव्य का है, जानवर के अपने अधिकार का नहीं।
5. एक महिला अपने कुत्ते से बहुत प्यार करती है पर बेकन के पीछे के सूअरों के बारे में नहीं सोचती। देखभाल नैतिकता और सद्गुण नैतिकता से एक-एक टिप्पणी दो।
देखभाल: देखभाल पास वालों के लिए मज़बूत और दूर वालों के लिए कमज़ोर होती है, इसलिए उसे अपना ध्यान उन जानवरों तक बढ़ाना होगा जो इंसानी व्यवस्था पर निर्भर हैं। सद्गुण: करुणा जो सिर्फ़ एक पालतू तक रुके, अधूरी है; सच में दयालु इंसान दूसरे जानवरों के प्रति भी न्यायप्रिय और विचारशील होता है।
6. जानवरों पर उपयोगितावाद के खिलाफ़ एक आपत्ति और उसका एक उत्तर दो।
आपत्ति: कुल फ़ायदा बड़ा हो तो यह एक जानवर को चोट पहुँचाने की इजाज़त दे सकता है, यह भूलकर कि जानवर एक व्यक्ति है। उत्तर: सावधान उपयोगितावादी सारा दुख गिनता है, जिससे इंसानों के असली फ़ायदे शायद ही इतने बड़े निकलते हैं, और कई उपयोगितावादी व्यक्तियों की रक्षा के नियम भी जोड़ते हैं।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि उपयोगितावाद सिर्फ़ इंसानों को गिनता है। सिंगर का रूप हर उस जीव को गिनता है जो दुख महसूस करे।
- कल्याण (जानवरों से अच्छा बर्ताव) और अधिकार (उन्हें कभी सिर्फ़ औज़ार न बनाना) को मिला देना।
- यह सोचना कि कांट ने जानवरों को अधिकार दिए। उन्होंने सिर्फ़ अप्रत्यक्ष कर्तव्य दिए।
- देखभाल नैतिकता को "सिर्फ़ भावना" समझना। वह ध्यान और ज़िम्मेदारी भी माँगती है।