सामग्री हटाकर आकार देना
लकड़ी और धातु के ज़्यादातर पुर्ज़े किसी ऐसे ब्लॉक, तख़्ते या छड़ से शुरू होते हैं जो अंतिम पुर्ज़े से बड़ा होता है। कारीगर सामग्री हटाते हैं जब तक सही आकार न बचे: आरी से, रंदे से, रेती से, छेद करके और खराद पर घुमाकर। लकड़ी में रेशे (ग्रेन) होते हैं, इसलिए उसे रेशों के साथ या आर-पार सावधानी से काटते हैं। धातु कठोर है, इसलिए मज़बूत औज़ार और अक्सर शीतलक चाहिए।
खराद (लेथ)
खराद गोल (बेलनाकार) पुर्ज़े बनाने की मशीन है। इसके मुख्य हिस्से:
- चक: काम का एक सिरा पकड़कर उसे घुमाता है।
- कटिंग टूल: कठोर, तेज़ टुकड़ा जो चलने वाले टूल पोस्ट में कसा रहता है। यह घूमता नहीं।
- बेड: मज़बूत आधार जो सब कुछ सीधा रखता है।
जब काम घूमता है और टूल उस पर दबाया जाता है, तो पतली परत निकलती है, जिसे चिप या छीलन कहते हैं। टूल को लंबाई में चलाने पर चिकना बेलन बनता है। उसे अंदर-बाहर करने पर व्यास (चौड़ाई) बदलता है। टूल को घुमाकर शंकु जैसा ढलान, खाँचा या मेज़ के पाये जैसा वक्र आकार बनाया जा सकता है। लकड़ी की खराद तेज़ गति पर तेज़ गॉज से चलती है। धातु की खराद कठोर स्टील या कार्बाइड टूल, धीमी कटाई और शीतलक इस्तेमाल करती है।
सुरक्षा: चश्मा पहनो, लंबे बाल बाँधो, ढीली आस्तीन और गहने हटाओ, घूमते काम से हाथ दूर रखो, और चक में चाबी कभी मत छोड़ो। हमेशा शिक्षक के साथ ही काम करो।
चूड़ियाँ (थ्रेड)
चूड़ी (थ्रेड) सर्पिल उभार है जो किसी छड़ पर (बोल्ट की बाहरी चूड़ी) या छेद के अंदर (नट की भीतरी चूड़ी) बनाया जाता है। नट घुमाने पर सर्पिल उसे बोल्ट पर आगे खिसकाता है और फिर कस देता है। चूड़ी को दो संख्याएँ बताती हैं:
- व्यास: बोल्ट की चौड़ाई।
- पिच: एक उभार से अगले उभार की दूरी। छोटी पिच = बारीक चूड़ी; बड़ी पिच = मोटी चूड़ी।
खराद पर टूल घूमती छड़ के साथ एक स्थिर गति से चलता है और सर्पिल काटता है। चूड़ी हाथ से भी काटी जा सकती है: डाई (बाहर) और टैप (अंदर) से। चूड़ियाँ हर जगह हैं: बोतल के ढक्कन, पेंच, जार और पाइप।
धातु के उत्पाद
धातु के उत्पाद कई चरणों की कड़ी से बनते हैं:
- स्क्राइबर और पैमाने से निशान लगाना।
- हैकसॉ या कैंची से काटना।
- चादर को मोड़ना और ढालना, जैसे डिब्बा बनाने के लिए।
- किनारे चिकने करने के लिए रेती और छेद करना।
- गोल पुर्ज़ों के लिए खराद पर घुमाना और चूड़ी काटना।
- बोल्ट, रिवेट, टाँके या वेल्डिंग से जोड़ना।
स्कूल की कार्यशाला में माइल्ड स्टील, एल्युमिनियम और पीतल इस्तेमाल होते हैं। उत्पादों के उदाहरण: कब्ज़े, हुक, ब्रैकेट, औज़ार के हत्थे और बोल्ट।
फ़िनिश
फ़िनिश आख़िरी चरण है। यह दो काम करती है: सतह को चिकना और सुंदर बनाती है और पुर्ज़े की रक्षा करती है।
- लकड़ी: धीरे-धीरे महीन होते रेगमाल से रेशों के साथ घिसो, फिर वार्निश, तेल या पेंट लगाओ। इससे नमी और कीड़े दूर रहते हैं।
- धातु: रेती से तेज़ किनारे हटाओ, पॉलिश करो, फिर पेंट, तेल या कोटिंग लगाओ। इससे ज़ंग रुकता है।
क्रम हमेशा वही: पहले मोटा औज़ार, फिर महीन, फिर कोटिंग।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- खराद: काम घूमता है, टूल स्थिर रहता है (और लंबाई या अंदर-बाहर चलता है)
- कटाई के बाद व्यास = शुरुआती व्यास − 2 × कटाई की गहराई
- पिच = दो उभारों के बीच की दूरी; किसी लंबाई में उभार = लंबाई ÷ पिच
- काम का क्रम: निशान, काटना/घुमाना, चूड़ी, फ़िनिश
हल किए गए उदाहरण
1. एक छड़ 26 मिमी चौड़ी है। टूल (हर तरफ़) 3 मिमी गहरा काटता है। नया व्यास क्या होगा?
हर तरफ़ से 3 मिमी जाता है, इसलिए व्यास 2 × 3 = 6 मिमी घटता है। नया व्यास = 26 − 6 = 20 मिमी।
2. एक बोल्ट की चूड़ी की पिच 1.5 मिमी है। 30 मिमी चूड़ी वाली लंबाई में कितने उभार हैं?
30 ÷ 1.5 = 20 उभार।
3. क्रम लगाओ: स्टील के ब्रैकेट को रँगना, चादर से काटना, किनारे रेतना, छेद करना।
चादर से काटो, छेद करो, किनारे रेतो, फिर रँगो। रँगना हमेशा आख़िर में होता है।
आम गलतियाँ
- सोचना कि खराद पर टूल घूमता है। काम घूमता है, टूल स्थिर रहता है।
- भूलना कि कटाई की गहराई दोनों तरफ़ से परत हटाती है, इसलिए व्यास गहराई से दुगुना घटता है।
- पिच और व्यास उलझाना। पिच उभारों के बीच की दूरी है; व्यास चौड़ाई है।
- रेतने और छेद करने से पहले रँग देना। फ़िनिश आख़िरी चरण है।