समूह को संचालक की ज़रूरत क्यों है?
जब बहुत लोग साथ गाते या बजाते हैं, तो सबको एक ही ताल महसूस होनी चाहिए। संचालक हाथ से ताल दिखाता है, ताकि सब उसे सुनें ही नहीं, देखें भी।
ताल संगीत की स्थिर धड़कन है, दिल की धड़कन जैसी। मात्रा (metre) तालों को बार (खंड) में बाँटती है, जैसे एक खंड में ३ ताल या ४ ताल। संचालक हवा में उस खंड का आकार बनाता है।
ताल देना: २, ३ और ४ का पैटर्न
हर मात्रा के लिए हाथ का अपना रास्ता है। पहली ताल हमेशा सबसे नीचे होती है और आख़िरी ताल ऊपर उठकर अगली पहली ताल की तैयारी करती है।
- २ ताल: नीचे, ऊपर।
- ३ ताल: नीचे, दाएँ, ऊपर।
- ४ ताल: नीचे, अंदर (शरीर की ओर), बाहर (दाईं ओर), ऊपर।
हाथ चिकनी रेखाओं में चलता है। ताल ठीक नीचे या कोने पर पड़ती है, बीच रास्ते में नहीं। ५/८ या ७/८ जैसी मिली-जुली मात्राओं में २ और ३ के पैटर्न जोड़ते हैं, जैसे २+३।
तैयारी और संकेत (entry) देना
चेतावनी के बिना समूह ठीक साथ शुरू नहीं कर सकता। तैयारी (prep) पहली ताल से ठीक पहले की एक चाल है। यह दो बातें बताती है: कब शुरू करना है और कितनी तेज़। गायक इसके साथ साँस लेते हैं।
संकेत (cue) किसी एक समूह को बताता है कि अब उनके आने की बारी है। समूह की ओर देखो, हल्की तैयारी दो और इशारा करो या सिर हिलाओ। अच्छा संकेत प्रवेश से एक ताल पहले दिया जाता है।
समापन, ज़ोर (dynamics) और गति में बदलाव
समापन: संचालक आख़िरी स्वर साफ़ रोक से दिखाता है। अक्सर हाथ छोटा गोल घुमाकर स्वर को थामता है और फिर ठीक उस पल मुट्ठी बंद करता है जब आवाज़ रुकनी है। सब एक साथ रुकते हैं।
ज़ोर (dynamics) यानी कितना धीमा या तेज़। छोटी और पास की चाल का मतलब धीमा (piano) है। बड़ी और चौड़ी चाल का मतलब ज़ोरदार (forte) है। चेहरा और कंधे भी भाव दिखाने में मदद करते हैं।
गति (tempo) यानी रफ़्तार। हाथ तेज़ चले तो संगीत तेज़ होता है (accelerando)। हाथ धीमा चले तो संगीत धीमा होता है (ritardando)। हाथ की रफ़्तार धीरे-धीरे बदलो ताकि समूह साथ चल सके।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- २ ताल: नीचे, ऊपर
- ३ ताल: नीचे, दाएँ, ऊपर
- ४ ताल: नीचे, अंदर, बाहर, ऊपर
- तैयारी = पहली ताल से पहले की एक चाल (कब + कितनी तेज़)
- छोटी चाल = धीमा (p), बड़ी चाल = ज़ोर से (f)
- तेज़ हाथ = तेज़ गति; धीमा हाथ = धीमी गति
हल किए गए उदाहरण
1. एक गीत ३ ताल में है। संचालक के हाथ का रास्ता बताओ।
पहली ताल नीचे (सबसे निचला बिंदु)। दूसरी ताल दाईं ओर। तीसरी ताल ऊपर। फिर हाथ दोबारा पहली ताल पर गिरता है। हम गिनते हैं १ २ ३।
2. धीमे गीत में कोरस को साथ शुरू करना है। पहली ताल से पहले संचालक क्या करता है?
संचालक कोरस की ओर देखता है, साँस लेता है और हाथ को धीरे से ऊपर उठाता है (तैयारी)। इस चाल की धीमी रफ़्तार गीत की धीमी गति बताती है। नीचे की चाल पर कोरस साथ शुरू करता है।
3. संगीत धीमे से ज़ोरदार होना है। संचालक यह कैसे दिखाता है?
हर खंड के साथ पैटर्न बड़ा और चौड़ा होता जाता है और चेहरे का भाव मज़बूत होता है। इससे समूह समझता है कि ज़ोर बढ़ाना है (crescendo)।
आम गलतियाँ
- ताल को चाल के बीच में देना। ताल आकार के सबसे नीचे या कोने पर होती है।
- तैयारी के बिना शुरू करना। तब समूह अलग-अलग समय पर शुरू करता है।
- सिर्फ़ तेज़ करना हो तो पैटर्न को बड़ा कर देना। आकार का मतलब ज़ोर है, रफ़्तार का मतलब गति है।
- सिर्फ़ स्वरलिपि देखना। संचालक को गायकों और वादकों को देखना चाहिए, ख़ासकर संकेत देते समय।