शूरवीर महाकाव्य क्या है?
शूरवीर महाकाव्य (chivalric epic) नाइट यानी शूरवीरों की लंबी कथा-कविता है। वे लड़ते हैं, प्रेम में पड़ते हैं, जादूगरों से मिलते हैं और अजीब जगहों पर जाते हैं। ये कथाएँ मध्यकाल की फ़्रांसीसी कहानियों से आईं, जिनमें सम्राट शार्लमेन और उसके वीर (जैसे रोलां, इतालवी में ओरलांडो) थे।
पुनर्जागरण में इतालवी कवियों ने, ख़ासकर फ़ेरारा के दरबार में, इन्हें सुंदर कला बना दिया। पहला बड़ा कदम बोयार्दो ने उठाया, जिन्होंने ओरलांडो इन्नामोराता ("प्रेम में ओरलांडो") लिखी और अधूरी छोड़ी। फिर अरियोस्तो ने कथा आगे बढ़ाई और बाद में तास्सो ने रूप बदला।
अरियोस्तो: ओरलांडो फुरियोसो
लोदोविको अरियोस्तो (1474–1533) फ़ेरारा में एस्ते परिवार के लिए काम करते थे। उनकी कविता ओरलांडो फुरियोसो ("पागल ओरलांडो") पहली बार 1516 में छपी और 1532 में अंतिम रूप में आई। इसमें 46 सर्ग (canto) हैं।
- एक साथ कई कथाएँ। ओरलांडो राजकुमारी आंजेलिका से प्रेम करता है, पर वह किसी और को चाहती है। रुजिएरो और ब्रादामांते की प्रेम-कथा दूसरा धागा है। कवि एक दृश्य रोमांचक मोड़ पर रोककर दूसरा शुरू करता है। इस बुनाई को इंटरलेस कहते हैं।
- पागलपन। जब ओरलांडो जानता है कि आंजेलिका ने किसी और को चुना है, वह पागल हो जाता है।
- चाँद। नाइट अस्तोल्फ़ो हिप्पोग्रिफ़ (उड़ने वाला घोड़ा-गरुड़) पर चाँद पर जाता है, जहाँ खोई चीज़ें मर्तबानों में रखी हैं। वह ओरलांडो की अक्ल मर्तबान में ले आता है।
- व्यंग्य (irony)। अरियोस्तो अपने वीरों पर मुस्कुराते हैं। प्रेम, सम्मान और जादू थोड़े भोले हैं। स्वर हल्का, चतुर और मानवीय है।
तास्सो: गेरुसालेम्मे लिबेराता
तोरक्वातो तास्सो (1544–1595) भी एस्ते दरबार में रहे। उनकी कविता गेरुसालेम्मे लिबेराता ("मुक्त हुआ येरुशलम"), 1581 में छपी, में 20 सर्ग हैं। यह मध्यकाल के पहले धर्मयुद्ध (First Crusade) और येरुशलम की घेराबंदी की कथा है।
- एक कथा, एक लक्ष्य। सेनापति गोफ्रेदो सेना को शहर लेने तक ले जाता है। सब कुछ उसी अंत की ओर जाता है। यह प्राचीन महाकाव्य के "क्रिया की एकता" वाले विचार से जुड़ता है।
- प्रेम और प्रलोभन। जादूगरनी आर्मीदा वीर रिनाल्दो को बहका ले जाती है। तानक्रेदी और क्लोरिंदा का दुखद द्वंद्व प्रसिद्ध दृश्य है। ये भटकाव वीरों की परीक्षा लेते हैं, फिर कथा मुख्य रास्ते पर लौटती है।
- गंभीर स्वर। तास्सो को धर्म और नैतिकता की चिंता थी, क्योंकि चर्च की कड़ी निगरानी (प्रति-सुधार, Counter-Reformation) का समय था। उन्होंने बाद में कविता को सख़्त रूप में दोबारा लिखा: गेरुसालेम्मे कोंक्विस्ताता (1593)।
- भीतर की भावना। उनके वीर शक, अपराध-बोध और उदासी महसूस करते हैं। कई पाठक इसमें अरियोस्तो से ज़्यादा आधुनिक, बेचैन मन देखते हैं।
रूप और शैली: ओत्ताव रीमा
दोनों कवि ओत्ताव रीमा (ottava rima) में लिखते हैं: आठ पंक्तियों का छंद, हर पंक्ति में ग्यारह मात्राएँ-अक्षर (hendecasyllable), तुकबंदी ABABABCC। आख़िरी दो पंक्तियाँ (CC) छंद को सुंदर ढंग से बंद करती हैं।
हर सर्ग एक छोटी प्रस्तावना (proem) से शुरू होता है, जहाँ कवि पाठक से बात करता है, संरक्षकों की प्रशंसा करता है और माहौल बनाता है। अरियोस्तो की शैली बहती है और मूड जल्दी बदलती है; तास्सो की शैली अधिक भव्य और संगीतमय है।
अरियोस्तो और तास्सो की तुलना
| अरियोस्तो | तास्सो | |
|---|---|---|
| कविता | ओरलांडो फुरियोसो (1516–32) | गेरुसालेम्मे लिबेराता (1581) |
| कथानक | कई धागे, बुने हुए | एक मुख्य कथा, एक लक्ष्य |
| स्वर | व्यंग्य-भरा, खेल-भरा, हल्का | गंभीर, धार्मिक, गरिमामय |
| जादू | मज़ेदार चमत्कार (चाँद, हिप्पोग्रिफ़) | गहरा जादू जो वीरों को बहकाता है |
| युग का एहसास | आत्मविश्वासी उच्च पुनर्जागरण | उत्तर पुनर्जागरण, बेचैन |
आज़माइए: अपना इंटरलेस
कागज़ पर बाएँ से दाएँ तीन रंगीन रेखाएँ खींचिए: तीन वीर। जहाँ दो रेखाएँ मिलें, एक घटना लिखिए (वे मिलते हैं)। अब कहानी ज़ोर से सुनाइए, पर हर वीर की कथा रोमांचक मोड़ पर रोककर दूसरे पर जाइए। यही अरियोस्तो की चाल है। फिर एक तारे की ओर एक सीधी रेखा खींचिए और हर भटकाव को वापस लाइए: यह तास्सो का ढंग है। 3D में स्लाइडर से यही करके देखिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ओत्ताव रीमा = 8 पंक्तियाँ × 11 अक्षर, तुक ABABABCC
- बोयार्दो → ओरलांडो इन्नामोराता (अधूरी)
- अरियोस्तो → ओरलांडो फुरियोसो: 46 सर्ग, 1516 / 1521 / 1532
- तास्सो → गेरुसालेम्मे लिबेराता: 20 सर्ग, 1581
- इंटरलेस (अरियोस्तो) = कई धागे बुनना; एकता (तास्सो) = एक लक्ष्य
हल किए गए उदाहरण
1. ओरलांडो के पागलपन की कथा किस कवि ने किस कविता में लिखी?
लोदोविको अरियोस्तो ने, ओरलांडो फुरियोसो में। जब ओरलांडो जानता है कि आंजेलिका किसी और को चाहती है, वह अपनी अक्ल खो देता है।
2. ओरलांडो फुरियोसो में चाँद क्या दिखाता है?
ऐसी जगह जहाँ खोई चीज़ें (समय, यश, अक्ल) मर्तबानों में रखी हैं। अस्तोल्फ़ो हिप्पोग्रिफ़ पर वहाँ जाकर ओरलांडो की अक्ल लाता है। यह अरियोस्तो की खेल-भरी कल्पना और व्यंग्य दिखाता है।
3. दो पंक्तियों में बताइए कि तास्सो की कथा अरियोस्तो से कैसे अलग है।
अरियोस्तो कई कहानियाँ बुनते हैं और बार-बार बदलते हैं। तास्सो एक मुख्य कथा रखते हैं, येरुशलम की घेराबंदी, और हर प्रसंग उसी लक्ष्य की ओर जाता है।
4. ओत्ताव रीमा की तुक-योजना लिखिए और पंक्तियों की संख्या बताइए।
आठ पंक्तियाँ, तुक ABABABCC। आख़िरी दो पंक्तियाँ आपस में तुक मिलाकर छंद बंद करती हैं।
5. तास्सो ने बाद में अपनी कविता क्यों दोबारा लिखी?
उनके समय का चर्च धर्म और नैतिकता पर सख़्त था (प्रति-सुधार)। तास्सो को चिंता थी, इसलिए उन्होंने अधिक गंभीर रूप गेरुसालेम्मे कोंक्विस्ताता (1593) लिखा।
6. तास्सो के किसी दृश्य का उदाहरण दीजिए जहाँ प्रेम वीर की परीक्षा लेता है।
जादूगरनी आर्मीदा वीर रिनाल्दो को मोह लेती है और सेना से दूर रखती है। दूसरा तानक्रेदी और क्लोरिंदा का द्वंद्व है, जहाँ प्रेम दुख में बदल जाता है।
आम गलतियाँ
- कविताएँ गड़बड़ा देना: फुरियोसो अरियोस्तो की है, लिबेराता तास्सो की।
- तास्सो को पहले का मान लेना। अरियोस्तो (1516) पहले हैं; तास्सो (1581) बाद में।
- सोचना कि पूरी कविता सिर्फ़ युद्ध की है। प्रेम, जादू और व्यंग्य भी उतने ही ज़रूरी हैं।
- बोयार्दो को भूल जाना। अरियोस्तो बोयार्दो की अधूरी ओरलांडो इन्नामोराता को आगे बढ़ाते हैं।