इतिहास और पुराण: ये क्या हैं?
इतिहास का अर्थ है 'ऐसा ही हुआ था'। दो इतिहास या महाकाव्य हैं: रामायण और महाभारत। महाकाव्य नायकों, परिवारों और बड़ी घटनाओं पर बहुत लंबी कविता है।
पुराण का अर्थ है 'पुराना'। पुराणों में सृष्टि, देवताओं, ऋषियों और राजाओं की पुरानी कथाएँ हैं।
ये स्मृति ('याद रखे गए') ग्रंथ हैं, जबकि वेद श्रुति ('सुने गए') कहलाते हैं। ये कई सदियों में रचे और बढ़े, मोटे तौर पर ईसा-पूर्व पहली सहस्राब्दी के मध्य से ईसवी पहली सहस्राब्दी तक; सटीक तिथियों पर विद्वानों में चर्चा है।
अधिकतर श्लोक अनुष्टुप् छंद में हैं: चार चरण, हर चरण में आठ अक्षर।
रामायण
रचयिता वाल्मीकि, जिन्हें आदिकवि कहते हैं, और रामायण को आदिकाव्य। लगभग 24 000 श्लोक, 7 कांड:
- बालकांड: राम और भाइयों का जन्म, बचपन; सीता से विवाह।
- अयोध्याकांड: पिता का वचन निभाने के लिए राम 14 वर्ष का वनवास स्वीकारते हैं।
- अरण्यकांड: वन-जीवन; रावण सीता को ले जाता है।
- किष्किंधाकांड: सुग्रीव और हनुमान से मित्रता।
- सुंदरकांड: हनुमान समुद्र पार कर सीता को खोजते हैं।
- युद्धकांड: लंका में युद्ध; राम की वापसी।
- उत्तरकांड: बाद की घटनाएँ, लव-कुश की कथा।
मुख्य मूल्य: सत्य, वचन निभाना, परिवार और प्रजा के प्रति कर्तव्य, निष्ठा और साहस।
महाभारत और भगवद्गीता
रचयिता व्यास (कृष्ण द्वैपायन)। लगभग 1 लाख श्लोक, 18 पर्व, और हरिवंश परिशिष्ट। इसे दुनिया की सबसे लंबी कविता कहा जाता है।
कथा: कौरव (धृतराष्ट्र के 100 पुत्र) और पांडव (पांडु के पाँच पुत्र) हस्तिनापुर के राज्य को लेकर झगड़ते हैं; द्यूत (जुए) से वनवास होता है, फिर कुरुक्षेत्र में 18 दिन का युद्ध।
भगवद्गीता (700 श्लोक, 18 अध्याय) भीष्म पर्व में है। युद्ध से पहले कृष्ण अर्जुन को फल की आसक्ति के बिना कर्तव्य करने (निष्काम कर्म) की शिक्षा देते हैं।
यह महाकाव्य कठिन नैतिक प्रश्नों के लिए प्रसिद्ध है: इसके अनुसार धर्म सूक्ष्म है, और इसके पात्र न पूरी तरह अच्छे हैं, न पूरी तरह बुरे।
पुराण
18 महापुराण हैं, जैसे विष्णु, भागवत, शिव, मार्कंडेय, मत्स्य, वायु, अग्नि, पद्म, स्कंद, गरुड़, ब्रह्मांड और भविष्य, और अनेक उपपुराण। परंपरा इन्हें व्यास से जोड़ती है।
पंचलक्षण (पाँच लक्षण)
- सर्ग: सृष्टि की रचना।
- प्रतिसर्ग: प्रलय और पुनः सृष्टि।
- वंश: देवताओं और ऋषियों की वंशावली।
- मन्वंतर: अलग-अलग मनुओं के युग।
- वंशानुचरित: राजवंशों की कथाएँ।
पुराणों में त्योहार, तीर्थ, पौराणिक भूगोल और भक्ति का भी वर्णन है। सावधानी से पढ़ें तो ये बाद के इतिहास और संस्कृति के उपयोगी स्रोत हैं।
कथाएँ कैसे फैलीं और क्यों ज़रूरी हैं
- मौखिक परंपरा: सूत और कथावाचक इन्हें सुनाते थे; परिवार और मंदिर इन्हें जीवित रखते थे।
- पांडुलिपियाँ: ताड़पत्र और कागज़ पर हाथ से लिखी गईं, इसलिए पाठ में अंतर हैं (विद्वान 'आलोचनात्मक संस्करण' में इनकी तुलना करते हैं)।
- पुनर्कथन: कंबन की रामावतारम् (तमिल), तुलसीदास का रामचरितमानस (अवधी), कृत्तिवासी रामायण (बांग्ला), पंप का कन्नड़ भारत और बहुत से; थाईलैंड, इंडोनेशिया, कंबोडिया आदि में भी रूप।
- कलाएँ: कथकली, यक्षगान, रामलीला, छाया-कठपुतली, मंदिर की मूर्तियाँ और चित्र।
ये संस्कृत सीखने, मूल्यों और धर्म पर बहस समझने और पूरे एशिया के साहित्य व कला के लिए महत्वपूर्ण हैं।
करके देखें: 3D में और घर पर
3D के आखिरी चरण में हर ग्रंथ चुनें और पट्टियों की तुलना करें। घर पर: किसी बड़े से एक कथा सुनें (जैसे हनुमान की छलाँग या रणभूमि में गीता)। पता करें कि वह किस कांड या पर्व की है और उससे मिलने वाला एक मूल्य लिखें।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- इतिहास ('ऐसा हुआ था') = दो महाकाव्य; पुराण ('पुराना') = पुरानी कथाएँ।
- रामायण: वाल्मीकि, 7 कांड, लगभग 24 000 श्लोक।
- महाभारत: व्यास, 18 पर्व + हरिवंश, लगभग 1 लाख श्लोक।
- भगवद्गीता: 700 श्लोक, 18 अध्याय, भीष्म पर्व में।
- पुराण: 18 महापुराण + उपपुराण; पंचलक्षण: सर्ग, प्रतिसर्ग, वंश, मन्वंतर, वंशानुचरित।
- श्लोक (अनुष्टुप्): 4 चरण × 8 अक्षर = 32 अक्षर।
हल किए गए उदाहरण
1. हनुमान सीता को किस कांड में खोजते हैं, और उसे 'सुंदर' क्यों कहते हैं?
सुंदरकांड (पाँचवाँ) में। 'सुंदर' यानी सुंदर; आम व्याख्या है कि इसमें कथा का सबसे सुंदर, आशा भरा हिस्सा है, और हनुमान को भी सुंदर कहा जाता था।
2. एक श्लोक में चार चरण, हर चरण में आठ अक्षर। 24 000 श्लोकों में कुल कितने अक्षर?
एक श्लोक = 4 × 8 = 32 अक्षर। 24 000 × 32 = 7 68 000 अक्षर।
3. एक ग्रंथ में सृष्टि की रचना, सूर्यवंशी राजाओं की वंशावली और मनुओं के युग हैं। यह महाकाव्य होगा या पुराण? क्यों?
पुराण: सर्ग, वंशानुचरित और मन्वंतर पुराण के पाँच लक्षणों में से तीन हैं।
आम गलतियाँ
- भगवद्गीता को महाभारत से अलग ग्रंथ कहना। वह भीष्म पर्व का भाग है।
- गिनती में भ्रम: रामायण के 7 कांड, महाभारत के 18 पर्व।
- सोचना कि हर महाकाव्य का एक ही रूप है। कई पांडुलिपि-पाठ और पुनर्कथन हैं।
- पुराणों को वेद कहना। वेद श्रुति हैं; महाकाव्य और पुराण स्मृति।