ज़मीन की खोज क्यों करते हैं?
लोग तीन कारणों से खोज करते हैं: संसाधन ढूँढने (खाल, धातु, मछली), रास्ते ढूँढने (यात्रा और व्यापार के लिए नदियाँ और सागर) और ज़मीन को जानने (नक्शे और विज्ञान)। बहुत बड़ी ज़मीन एक बार में नहीं खोजी जाती। यह लहरों में होता है।
अभियान (expedition) किसी लक्ष्य वाले दल की योजना बनाकर की गई यात्रा है। खोजकर्ता वह व्यक्ति है जो ऐसी जगह जाता है जो अपने देश के नक्शों में नई हो।
पहली लहर: नदियों से पूर्व की ओर (1580 से 1640 के दशक)
साइबेरिया की बड़ी नदियाँ (ओब, येनिसेई, लेना) उत्तर की ओर बहती हैं, पर उनके बीच छोटे नीचे ज़मीनी पुल हैं। दल अपनी नावें इन पुलों के ऊपर से उठाकर ले जाते थे (पोर्टेज) और एक नदी से दूसरी में पहुँचते थे। इस तरह नदियाँ पूर्व की "सड़कें" बन गईं।
- 1581 से 1582: यरमाक ने कज़ाकों के दल के साथ यूराल पार करके पश्चिमी साइबेरिया में प्रवेश किया।
- 1619 और 1632: येनिसेइस्क और याकुत्स्क में किले (ओस्त्रोग) बने। ये अगले कदम के अड्डे थे।
- 1639: इवान मॉस्किविटिन का दल ओखोत्स्क सागर यानी प्रशांत तट तक पहुँचा।
- 1648: सेम्योन देझनेव उत्तर-पूर्वी छोर का चक्कर लगाकर एशिया और अमेरिका के बीच की जलडमरूमध्य से निकला। यह बेरिंग से 80 साल पहले हुआ।
- 1649 से 1653: येरोफ़ेई खबारोव अमूर नदी से नीचे गया।
दूसरी लहर: सागर और महान उत्तरी अभियान (1700 के दशक)
1697 में व्लादिमीर एटलासोव ने कमचात्का की खोज की। फिर ज़ार पीटर प्रथम जानना चाहते थे कि एशिया और अमेरिका जुड़े हैं या नहीं। रूसी सेवा में डेनमार्क में जन्मे नौसेना अफ़सर वितुस बेरिंग 1728 में उत्तर गए और वह जलडमरूमध्य खोजा (जिसका नाम अब उनके नाम पर है)। 1741 में वे उत्तर अमेरिका के तट तक पहुँचे और लौटते समय उनकी मृत्यु हो गई।
महान उत्तरी अभियान (1733 से 1743) अब तक की सबसे बड़ी नक्शा-निर्माण योजनाओं में से एक था। कई छोटे दलों ने लंबे आर्कटिक तट का नक्शा बनाया। 1742 में सेम्योन चेल्यूस्किन एशिया की मुख्य भूमि के सबसे उत्तरी बिंदु तक पहुँचे, जिसे अब केप चेल्यूस्किन कहते हैं।
तीसरी लहर: वैज्ञानिक सर्वेक्षण (1800 के दशक)
1820 में बेलिंग्सहाउज़ेन और लाज़ारेव के जहाज़ों ने अंटार्कटिका का चक्कर लगाया और उसका बर्फ़ीला तट देखा। घर के पास, 1845 में रूसी भौगोलिक समाज बना। उसने वैज्ञानिकों को ऊँचाई नापने, चट्टानें और पौधे इकट्ठा करने और नक्शे बनाने भेजा।
- प्योत्र सेम्योनोव ने 1856 और 1857 में तियान शान पर्वतों का अध्ययन किया।
- निकोलाई प्रेज़ेवाल्स्की ने 1870 और 1880 के दशकों में मध्य एशिया की लंबी यात्राएँ कीं और उसके रेगिस्तान, झीलें और जानवर बताए।
चौथी लहर: ध्रुव, हवाई जहाज़ और उपग्रह (1900 के दशक)
1932 में बर्फ़तोड़ जहाज़ सिबिर्याकोव ने एक ही गर्मी में पूरा आर्कटिक तट पार किया। इससे उत्तरी समुद्री मार्ग खुला। 1937 में चार लोगों का दल उत्तरी ध्रुव के पास बहती बर्फ़ पर रहा (स्टेशन "नॉर्थ पोल-1")। बाद में हवाई तस्वीरों और उपग्रहों ने नक्शा पूरा किया। आज खोजकर्ता जीपीएस, रडार और सुदूर संवेदन (remote sensing) इस्तेमाल करते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- खोज की लहरें: नदी (1580-1640 के दशक) → सागर (1700 के दशक) → विज्ञान (1800 के दशक) → ध्रुव और अंतरिक्ष (1900 के दशक)
- यरमाक (1582) से प्रशांत (लगभग 1639): लगभग 57 साल
- मुख्य शब्द: अभियान, पोर्टेज, ओस्त्रोग (किला), सर्वेक्षण, जलडमरूमध्य
हल किए गए उदाहरण
1. यरमाक के यूराल पार करने (1582) और मॉस्किविटिन के प्रशांत तट पहुँचने (1639) के बीच कितने साल हुए?
1639 − 1582 = 57 साल। इतनी बड़ी ज़मीन में बहुत तेज़ चाल, क्योंकि नदियाँ सड़कों का काम करती थीं।
2. खोजकर्ताओं ने जंगलों या पहाड़ों की जगह नदियों से यात्रा क्यों की?
नदी खुला रास्ता है। नावों में भारी सामान जाता है और नदी दिशा नहीं भूलती। घने जंगल और दलदल में सड़कें नहीं थीं, और पहाड़ पार करना धीमा है।
3. देझनेव की 1648 की यात्रा उस समय मशहूर क्यों नहीं हुई?
उसकी रिपोर्ट दूर के दफ़्तर में पड़ी रही और 1700 के दशक में मिली। बेरिंग ने 1728 में जलडमरूमध्य को दुनिया में मशहूर किया, इसलिए नाम उसका पड़ा।
4. 1700 के नक्शे में सिर्फ़ नदियाँ और किले हैं। 1900 के नक्शे में ऊँचाई, चट्टानें और पौधे भी हैं। यह बदलाव किस लहर ने किया?
1800 के दशक के वैज्ञानिक सर्वेक्षणों ने। उन्होंने ऊँचाई नापी और चट्टानें-पौधे इकट्ठे किए, जिससे पुराने रास्ते वाले नक्शों में ब्यौरा आया।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि पूरी ज़मीन एक व्यक्ति ने खोजी। इसमें चार लहरें और सैकड़ों दल लगे।
- देझनेव (1648, जलडमरूमध्य खोजा) और बेरिंग (1728, नाम उसके नाम पर) को मिला देना।
- यह मानना कि यरमाक प्रशांत तक पहुँचा। उसने 1581 से 1582 में सिर्फ़ यूराल पार करके पश्चिमी साइबेरिया में प्रवेश किया।
- भूल जाना कि खोज 1700 के दशक में रुकी नहीं। विज्ञान और ध्रुवीय काम 1800 और 1900 के दशकों में भी चले।