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रूस की भूमि की खोज

रूस की ज़मीन की खोज धीरे-धीरे हुई, ज़्यादातर पश्चिम से पूर्व की ओर। पहले नदियों के रास्ते दल आगे बढ़े (1580 से 1640 के दशक), फिर समुद्री अभियानों ने उत्तरी और प्रशांत तट का नक्शा बनाया (1700 के दशक), फिर वैज्ञानिक सर्वेक्षण (1800 के दशक) और ध्रुवीय व हवाई काम (1900 के दशक) हुए।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. यह समतल ज़मीन की एक पट्टी है। पश्चिम बाईं ओर है, पूर्व दाईं ओर। यूराल पर्वत एक नीची दीवार हैं। सबसे दाईं ओर प्रशांत सागर है।
  2. पहली लहर, 1580 से 1650: छोटे दल नदियों के सहारे पूर्व बढ़ते हैं। लगभग 70 साल में वे पूरी ज़मीन पार करके प्रशांत तक पहुँचते हैं। नारंगी खंभे हर नई जगह दिखाते हैं।
  3. दूसरी लहर, 1700 के दशक: जहाज़ और स्लेज दल उत्तरी तट और कमचात्का का नक्शा बनाते हैं। नीले खंभे समुद्री यात्राएँ हैं जिन्होंने महाद्वीप का छोर खोजा।
  4. तीसरी लहर, 1800 के दशक: वैज्ञानिक पहाड़, नदियाँ और चट्टानें नापकर खाली नक्शा भरते हैं। हरे खंभे ये सर्वेक्षण हैं।
  5. चौथी लहर, 1900 के दशक: बर्फ़तोड़ जहाज़, हवाई जहाज़ और बहता बर्फ़ीला स्टेशन दूर उत्तर की खोज करते हैं। स्लेटी खंभे यह ध्रुवीय काम हैं।
  6. खेल: साल खींचो। हर खंभा अपने साल पर उभरता है। लाल रेखा को पूर्व की ओर बढ़ते देखो और जगहें गिनो।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

कहानी कहाँ से शुरू होती है?

पश्चिम में, यूराल के पास। पहले खोजकर्ता यहीं से पूर्व बढ़े। पट्टी का बायाँ सिरा शुरुआत है।

इतनी बड़ी ज़मीन 70 साल में कैसे पार हुई?

नदी-मार्गों और पोर्टेज से। देखो नारंगी खंभे कुछ दशकों में कितनी दूर कूदते हैं।

कुछ खंभे नीले क्यों हैं?

नीला समुद्री यात्रा दिखाता है। सागरों और तटों के लिए जहाज़ चाहिए थे, और इन यात्राओं ने महाद्वीप का उत्तर-पूर्वी छोर खोजा।

1700 के दशक के बाद क्या खोजना बाकी था?

ब्यौरा: ऊँचाई, चट्टानें, पौधे और जानवर। वैज्ञानिकों ने 1800 के दशक में इन्हें भरा।

क्या खोज अब ख़त्म हो गई?

बड़ा नक्शा पूरा है, पर हम अब भी गहरी बर्फ़, समुद्र की तली और समय के साथ बदलाव को उपग्रहों और सेंसरों से खोजते हैं।

बाद के सालों में लाल रेखा आगे क्यों नहीं बढ़ती?

क्योंकि पूर्वी तट 1650 तक पहुँचा जा चुका था। बाद की लहरों ने ज़मीन के भीतर और उत्तर में ब्यौरा जोड़ा, और पूर्व नहीं बढ़ीं।

ज़मीन की खोज क्यों करते हैं?

लोग तीन कारणों से खोज करते हैं: संसाधन ढूँढने (खाल, धातु, मछली), रास्ते ढूँढने (यात्रा और व्यापार के लिए नदियाँ और सागर) और ज़मीन को जानने (नक्शे और विज्ञान)। बहुत बड़ी ज़मीन एक बार में नहीं खोजी जाती। यह लहरों में होता है।

अभियान (expedition) किसी लक्ष्य वाले दल की योजना बनाकर की गई यात्रा है। खोजकर्ता वह व्यक्ति है जो ऐसी जगह जाता है जो अपने देश के नक्शों में नई हो।

पहली लहर: नदियों से पूर्व की ओर (1580 से 1640 के दशक)

साइबेरिया की बड़ी नदियाँ (ओब, येनिसेई, लेना) उत्तर की ओर बहती हैं, पर उनके बीच छोटे नीचे ज़मीनी पुल हैं। दल अपनी नावें इन पुलों के ऊपर से उठाकर ले जाते थे (पोर्टेज) और एक नदी से दूसरी में पहुँचते थे। इस तरह नदियाँ पूर्व की "सड़कें" बन गईं।

दूसरी लहर: सागर और महान उत्तरी अभियान (1700 के दशक)

1697 में व्लादिमीर एटलासोव ने कमचात्का की खोज की। फिर ज़ार पीटर प्रथम जानना चाहते थे कि एशिया और अमेरिका जुड़े हैं या नहीं। रूसी सेवा में डेनमार्क में जन्मे नौसेना अफ़सर वितुस बेरिंग 1728 में उत्तर गए और वह जलडमरूमध्य खोजा (जिसका नाम अब उनके नाम पर है)। 1741 में वे उत्तर अमेरिका के तट तक पहुँचे और लौटते समय उनकी मृत्यु हो गई।

महान उत्तरी अभियान (1733 से 1743) अब तक की सबसे बड़ी नक्शा-निर्माण योजनाओं में से एक था। कई छोटे दलों ने लंबे आर्कटिक तट का नक्शा बनाया। 1742 में सेम्योन चेल्यूस्किन एशिया की मुख्य भूमि के सबसे उत्तरी बिंदु तक पहुँचे, जिसे अब केप चेल्यूस्किन कहते हैं।

तीसरी लहर: वैज्ञानिक सर्वेक्षण (1800 के दशक)

1820 में बेलिंग्सहाउज़ेन और लाज़ारेव के जहाज़ों ने अंटार्कटिका का चक्कर लगाया और उसका बर्फ़ीला तट देखा। घर के पास, 1845 में रूसी भौगोलिक समाज बना। उसने वैज्ञानिकों को ऊँचाई नापने, चट्टानें और पौधे इकट्ठा करने और नक्शे बनाने भेजा।

चौथी लहर: ध्रुव, हवाई जहाज़ और उपग्रह (1900 के दशक)

1932 में बर्फ़तोड़ जहाज़ सिबिर्याकोव ने एक ही गर्मी में पूरा आर्कटिक तट पार किया। इससे उत्तरी समुद्री मार्ग खुला। 1937 में चार लोगों का दल उत्तरी ध्रुव के पास बहती बर्फ़ पर रहा (स्टेशन "नॉर्थ पोल-1")। बाद में हवाई तस्वीरों और उपग्रहों ने नक्शा पूरा किया। आज खोजकर्ता जीपीएस, रडार और सुदूर संवेदन (remote sensing) इस्तेमाल करते हैं।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. यरमाक के यूराल पार करने (1582) और मॉस्किविटिन के प्रशांत तट पहुँचने (1639) के बीच कितने साल हुए?

1639 − 1582 = 57 साल। इतनी बड़ी ज़मीन में बहुत तेज़ चाल, क्योंकि नदियाँ सड़कों का काम करती थीं।

2. खोजकर्ताओं ने जंगलों या पहाड़ों की जगह नदियों से यात्रा क्यों की?

नदी खुला रास्ता है। नावों में भारी सामान जाता है और नदी दिशा नहीं भूलती। घने जंगल और दलदल में सड़कें नहीं थीं, और पहाड़ पार करना धीमा है।

3. देझनेव की 1648 की यात्रा उस समय मशहूर क्यों नहीं हुई?

उसकी रिपोर्ट दूर के दफ़्तर में पड़ी रही और 1700 के दशक में मिली। बेरिंग ने 1728 में जलडमरूमध्य को दुनिया में मशहूर किया, इसलिए नाम उसका पड़ा।

4. 1700 के नक्शे में सिर्फ़ नदियाँ और किले हैं। 1900 के नक्शे में ऊँचाई, चट्टानें और पौधे भी हैं। यह बदलाव किस लहर ने किया?

1800 के दशक के वैज्ञानिक सर्वेक्षणों ने। उन्होंने ऊँचाई नापी और चट्टानें-पौधे इकट्ठे किए, जिससे पुराने रास्ते वाले नक्शों में ब्यौरा आया।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. पहली लहर में "सड़कों" का काम कौन-से जलमार्ग करते थे?
2. 1581 से 1582 में यूराल पार करने वाले दल का नेता कौन था?
3. महान उत्तरी अभियान ने किसका नक्शा बनाया?
4. किस लहर ने ऊँचाई नापी और चट्टानें-पौधे इकट्ठे किए?
5. पोर्टेज क्या है?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

साइबेरिया की खोज सबसे पहले किसने की?

स्थानीय लोग इसे हज़ारों साल से जानते थे। रूसी नक्शों के लिए पूर्व की ओर बढ़त 1581 से 1582 में यरमाक के यूराल पार करने से शुरू हुई, फिर नदियों के साथ कई छोटे दल गए।

देझनेव ने पहले खोजा तो इसे बेरिंग जलडमरूमध्य क्यों कहते हैं?

देझनेव की 1648 की रिपोर्ट ज़्यादा लोगों तक नहीं पहुँची। बेरिंग 1728 में एक मशहूर सरकारी अभियान पर वहाँ गए, इसलिए उनका नाम नक्शे पर रह गया।

इतनी बड़ी ज़मीन इतनी तेज़ी से कैसे पार हुई?

दल नदियों के सहारे चले और नावें एक नदी से दूसरी तक उठाईं। नदियाँ सड़क जैसी थीं और किले आराम और खाना रखने की जगह देते थे।

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