प्रतीकवाद क्या है?
प्रतीकवाद (Symbolism) कविता का एक आंदोलन है, जो बाद में कला और रंगमंच में भी आया। यह 1800 के उत्तरार्ध में फ़्रांस में शुरू हुआ और लगभग 1910 तक ज़ोर में रहा।
कवियों को लगा कि सीधी, साफ़ भाषा जीवन के गहरे और धुँधले हिस्सों को नहीं पकड़ पाती: सपने, डर, तड़प, मृत्यु, आत्मा। इसलिए उन्होंने इशारा करना चुना। वे चाहते थे कि पाठक पहले महसूस करे, फिर धीरे-धीरे समझे।
प्रतीक (symbol) वह चीज़ है (हंस, गुलाब, मीनार, समुद्र) जो अपने से बड़े किसी भाव या विचार की जगह खड़ी होती है। संकेत (sign) का एक ही पक्का अर्थ होता है। प्रतीक के कई अर्थ होते हैं, कुछ छिपे रहते हैं।
यह कहाँ से आया?
प्रतीकवाद से पहले रूमानीवाद (तेज़ भावनाएँ) और यथार्थवाद (सीधे तथ्य) आए। प्रतीकवादी कुछ नया चाहते थे: भीतर की दुनिया, छवियों के सहारे।
- शार्ल बोदलेयर (1821-1867): उनकी किताब The Flowers of Evil (1857) ने अँधेरे और शहरी जीवन में भी सुंदरता खोजी। उनका 'संवाद-सिद्धांत' (correspondences) कहता है कि रंग, ध्वनि और गंध एक-दूसरे को जवाब देते हैं। उन्हें प्रतीकवाद का जनक कहते हैं।
- पॉल वेरलेन: नरम, संगीतमय कविता लिखी। कविता की कला पर अपनी रचना में वे संगीत और थोड़े धुँधले शब्द माँगते हैं।
- आर्थर रैंबो: किशोर उम्र का प्रतिभाशाली कवि, रंगीन और बेलगाम कविताएँ लिखीं और कहा कि कवि को अनजाने की खोज करनी चाहिए।
- स्तेफ़ान मालार्मे: गहरी, स्वप्निल कविताएँ लिखीं और कहा कि चीज़ का नाम लेने से बेहतर है उसका इशारा करना।
शब्दों पर एक बात: आधुनिकतावाद (modernism) लगभग 1890 से 1930 तक नई शैलियों की बड़ी लहर है; प्रतीकवाद उसका शुरुआती हिस्सा है। चित्रकला में प्रभाववाद (impressionism) पल के बदलते रूप को पकड़ता था; प्रतीकवादी कविता पल के बदलते मूड को पकड़ती है।
प्रतीकवादी कविता की मुख्य बातें
- संकेत: इशारा करो, समझाओ मत।
- प्रतीक: रोज़ की चीज़ें भाव और विचार ढोती हैं।
- संगीत: लय, तुक और ध्वनि का खेल अर्थ जितना ज़रूरी है।
- इंद्रियों का मेल: रंग सुना जाता है, आवाज़ सूँघी जाती है। रैंबो ने तो हर स्वर को एक रंग दे दिया।
- मूड: सपने, रहस्य, उदासी, तड़प, ऐसी सुंदरता जो टिकती नहीं।
- खुला रूप: कई कवियों ने पुराने सख़्त छंद-नियम ढीले किए।
1886 में जाँ मोरेआस ने एक छोटा लेख छापा, जिसे अक्सर प्रतीकवादी घोषणा-पत्र कहते हैं। इसी से समूह को नाम मिला।
दूसरे देशों में प्रतीकवाद
आंदोलन पूरे यूरोप में फैला। हर देश ने विचार लिया और उसे अपना रंग दिया।
- इटली: जोवान्नी पास्कोली ने रोज़ की छोटी चीज़ों (पक्षी, बाड़, घंटी) को दुख और अचरज के इशारे बनाया। गाब्रिएले दन्नुंत्सियो ने रस भरी, ध्वनि से लदी कविता लिखी।
- रोमानिया: अलेक्ज़ांद्रू मकेडोन्स्की और जॉर्ज बाकोविया जैसे कवियों ने धूसर शहर, बारिश और अकेलेपन को भीतर के भाव का प्रतीक बनाया। रोमानियाई प्रतीकवादी कविता पढ़ते समय पूछो: मौसम किसकी जगह खड़ा है?
- यूक्रेन: मिकोला वोरोनी ने नई, आधुनिक कविता की पुकार लगाई। ओलेक्सांद्र ओलेस ने प्रेम और मातृभाषा पर प्रतीकवादी गीत लिखे। पावलो तीचीना की शुरुआती कविताएँ ध्वनि और रंग से भरी हैं। गद्य-लेखक वोलोदिमिर विन्निचेंको ने भी अपनी कहानियों में प्रतीक बरते।
पैटर्न देखो: मूड और तरीक़ा एक है, पर प्रतीक हर देश की अपनी ज़मीन और जीवन से आते हैं।
प्रतीकवादी कविता कैसे पढ़ें
- एक बार ज़ोर से पढ़ो। अर्थ से पहले ध्वनि सुनो।
- बार-बार आने वाली चीज़ों पर गोला लगाओ (पक्षी, बारिश, मीनार, कोई रंग)।
- पूछो: यह चीज़ कौन-सा भाव ढो रही है?
- दो-तीन संभव अर्थ लिखो, सिर्फ़ एक नहीं।
- पूरी कविता का मूड देखो।
- यह मत कहो कि 'कवि का मतलब बस X है'। अक्सर एक से ज़्यादा उत्तर होते हैं, पर हर उत्तर को कविता से सुराग़ चाहिए।
करके देखो (Try it)
घर पर करो: अपने पास की कोई रोज़ की चीज़ चुनो (दीया, खिड़की, घड़ी)। उस पर तीन पंक्तियाँ लिखो, बिना बताए कि वह कैसा महसूस कराती है। किसी दोस्त को दो और पूछो उसे कौन-सा भाव मिला। अगर दोस्त ने कोई भाव बताया, तो तुमने प्रतीक बना लिया। फिर मिलाओ: दोनों को एक ही अर्थ मिला या अलग-अलग?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- प्रतीक = एक चीज़ + उसके इशारे वाले भाव या विचार
- संकेत = एक पक्का अर्थ; प्रतीक = कई अर्थ
- प्रतीकवाद = संकेत + प्रतीक + संगीत + इंद्रियों का मेल + मूड
- मुख्य नाम: बोदलेयर (राह खोली), वेरलेन, रैंबो, मालार्मे
- समय: 1800 का उत्तरार्ध से लगभग 1910, शुरुआत फ़्रांस में
हल किए गए उदाहरण
1. एक कविता में बार-बार बारिश में भीगी धूसर मीनार आती है। दो संभव प्रतीकात्मक अर्थ बताओ।
मीनार अकेलेपन की जगह खड़ी हो सकती है (वह अलग खड़ी है) और जीवन से ऊपर उठने की चाह की भी (वह ऊँची है)। बारिश उदासी जोड़ती है। हर अर्थ का आधार कविता में है: दोहराव, धूसर रंग, बारिश।
2. प्राथमिक उपचार के डिब्बे पर बना लाल क्रॉस संकेत है या प्रतीक? समझाओ।
यह ज़्यादातर संकेत है: इसका एक पक्का, साफ़ अर्थ है (यहाँ मदद है)। कविता का प्रतीक कई भाव या विचार सुझाता है और उन्हें समझाता नहीं।
3. यह बनाई हुई पंक्ति पढ़ो: 'शाम की घंटी नीले में चाँदी टपकाती है।' इसमें प्रतीकवाद की कौन-सी बातें हैं?
इंद्रियों का मेल (घंटी की ध्वनि को चाँदी की बूँद और रंग कहा गया), संकेत (भाव सीधे नहीं कहा गया) और संगीत (शब्दों की नरम ध्वनि)। मूड शांत और स्वप्निल है।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि प्रतीक का एक ही सही अर्थ होता है। कविता में सुराग़ हों तो कई अर्थ ठीक हो सकते हैं।
- प्रतीकवाद और बिंब (imagery) को एक समझना। बिंब चित्र बनाता है; प्रतीक उस चित्र को किसी बड़ी चीज़ की जगह खड़ा करता है।
- प्रतीकवाद को सिर्फ़ फ़्रांसीसी मान लेना। यह इटली, रोमानिया, यूक्रेन, रूस, बेल्जियम और कई जगह फैला।
- यह मानना कि प्रतीकवादी अर्थ की परवाह नहीं करते थे। वे बहुत परवाह करते थे, बस उसे ध्वनि और छवि से सुझाना चाहते थे।