लेओपार्दी कौन थे? (साल की शुरुआत में पढ़ाए जाते हैं)
जाकोमो लेओपार्दी का जन्म 1798 में मध्य इटली के रेकानाती कस्बे में हुआ और 1837 में नेपल्स में निधन। बचपन में उन्होंने पिता के पुस्तकालय में यूनानी, लैटिन और दर्शन इतना पढ़ा कि उनकी सेहत बिगड़ गई। उन्हें कस्बा तंग लगता था और वे बाहर जाना चाहते थे। उनकी मुख्य रचनाएँ हैं Canti (गीत यानी कविता-संग्रह), Operette morali (छोटे गद्य-संवाद) और Zibaldone (हज़ारों पन्नों की विचारों की नोटबुक)। उन्हें अंतिम वर्ष की शुरुआत में पढ़ा जाता है। उन्हें सुख के सबसे बड़े सवाल पूछने वाला कवि समझो।
मुख्य विचार: सुख, प्रकृति और निराशावाद
लेओपार्दी कहते हैं कि इंसान को असीम सुख चाहिए, पर हर असली सुख सीमित है। इसलिए चाह कभी पूरी नहीं होती और दुख होता है। पहले वे इसे "ऐतिहासिक निराशावाद" कहते हैं: पुराने समय में लोग कल्पना के सहारे सुखी थे और तर्क ने वह बिगाड़ दिया। बाद में "ब्रह्मांडीय निराशावाद": प्रकृति हमारी परवाह ही नहीं करती, वह माँ नहीं, सौतेली माँ है। उनका उत्तर निराशा नहीं, ईमानदारी है: सच को देखो और साथ रहो।
मुख्य कविताएँ
- L'infinito (1819): झाड़ी, कल्पना का अनंत और "इस सागर में डूबना मीठा है"।
- A Silvia: एक युवती जल्दी चली जाती है, उसके साथ आशाएँ भी।
- Il sabato del villaggio: त्योहार का इंतज़ार त्योहार से ज़्यादा सुखद है।
- एशिया के भटकते गड़रिये का रात्रि-गीत: गड़रिया चाँद से पूछता है कि जीवन किसलिए है।
- La ginestra (1836): ज्वालामुखी पर झाड़ू-फूल। प्रकृति की शक्ति के विरुद्ध लोग "सामाजिक कड़ी" बनाएँ।
19वीं सदी के यूरोपीय साहित्य में स्थान
लेओपार्दी रोमांटिक काल में जिए, जब बायरन, ह्यूगो और हाइने लिख रहे थे। गहरी भावना और प्रकृति-प्रेम में वे उनके साथ हैं। पर वे अलग भी हैं। वे साफ़, शास्त्रीय रूप और शांत स्वर रखते हैं। उन्हें प्रगति पर भरोसा नहीं था, जबकि उस समय के कई रोमांटिक और उदारवादी उसकी तारीफ़ करते थे। इसलिए उन्हें "रोमांटिक होकर भी रोमांटिक नहीं" कहा जाता है और कई पाठक उन्हें पहला आधुनिक कवि मानते हैं। उनके बाद यथार्थवाद और वेरिस्मो आए, जो समाज के ज़रिए कठिन सच देखते हैं।
खुद करके देखो
एक मिनट किसी बंद दरवाज़े या दीवार को देखो। उसके पीछे जो कल्पना करो, उस पर तीन पंक्तियाँ लिखो। तुमने वही किया जो L'infinito करती है: सीमा कल्पना जगाती है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मुख्य शब्द: Canti (कविताएँ), Operette morali (गद्य-संवाद), Zibaldone (नोटबुक)
- ऐतिहासिक निराशावाद: अतीत सुखी था, तर्क ने बिगाड़ा
- ब्रह्मांडीय निराशावाद: प्रकृति हमारे प्रति उदासीन है
- सामाजिक कड़ी: प्रकृति के विरुद्ध लोग एकजुट हों (La ginestra)
हल किए गए उदाहरण
1. L'infinito में सीमा और कल्पना का रिश्ता कैसे दिखता है?
झाड़ी दूर का दृश्य रोकती है। आँख आगे नहीं जा सकती, तो मन अनंत आकाश और चुप्पी की कल्पना करता है। सीमा ही कल्पना की शुरुआत है।
2. "ऐतिहासिक" और "ब्रह्मांडीय" निराशावाद में क्या बदलता है?
पहले में दुख इसलिए है कि आधुनिक तर्क ने भ्रम मिटा दिया। दूसरे में प्रकृति ख़ुद उदासीन है और दुख हर युग में वही रहता है।
3. La ginestra पहले की कविताओं से ज़्यादा आशावान क्यों है?
वह कठिन सच दिखाती है, पर आगे का रास्ता भी देती है: लोग एकजुट रहें और एक-दूसरे पर दया करें, ख़ुद को धोखा न दें।
आम गलतियाँ
- लेओपार्दी को केवल उदास कवि कहना। वे मिठास, स्मृति और एकजुटता पर भी लिखते हैं।
- उन्हें साधारण रोमांटिक कहना। वे शास्त्रीय रूप रखते हैं और प्रगति पर शक करते हैं।
- Canti (कविताएँ) और Operette morali (गद्य) को मिला देना।
- यह सोचना कि L'infinito का विषय झाड़ी है। विषय वह अनंत है जो मन कल्पना करता है।