धन और कीमतें
धन (पैसा) वह है जिसे लोग चीज़ों और सेवाओं के बदले में स्वीकार करते हैं। इससे वस्तु-विनिमय के बिना व्यापार होता है। कीमत बताती है कि कोई चीज़ कितने धन की है। कीमतें इस पर बदलती हैं कि कितने लोग चीज़ चाहते हैं (माँग) और कितनी उपलब्ध है (आपूर्ति)।
महँगाई समय के साथ कीमतों का सामान्य बढ़ना है। साल में 5% कीमतें बढ़ें तो अगले साल 100 सिक्के कम खरीदते हैं। यानी धन की क्रय-शक्ति घटती है।
उपभोग: ज़रूरतें, शौक़ और बजट
उपभोग यानी वस्तुओं और सेवाओं का उपयोग। ज़रूरतें वे हैं जो ज़रूर चाहिए, जैसे खाना, कपड़े, घर और इलाज। शौक़ जीवन को अच्छा बनाने वाली चीज़ें हैं, जैसे खेल और मिठाई।
बजट वह योजना है जो आय को ज़रूरतों, शौक़ और बचत में बाँटती है। सरल तरीका: पहले ज़रूरतें, फिर बचत, फिर शौक़। करके देखो: अपनी पॉकेट मनी लिखो और तीन हिस्सों में बाँटो।
वित्तीय बाज़ार: बचत, बैंक, शेयर और बॉन्ड
वित्तीय बाज़ार वह जगह है जहाँ बचत करने वाले और पैसे की ज़रूरत वाले मिलते हैं। बैंक में बचत करने वाले ब्याज पाते हैं और बैंक दूसरों को क़र्ज़ देता है। शेयर आपको कंपनी का छोटा मालिक बनाता है; मुनाफ़े का हिस्सा मिल सकता है पर दाम गिर भी सकता है। बॉन्ड कंपनी या सरकार को दिया क़र्ज़ है जो ब्याज देता है।
जोखिम और लाभ साथ चलते हैं: ज़्यादा संभावित लाभ का मतलब आमतौर पर नुक़सान की ज़्यादा संभावना। जोखिम घटाने के लिए पैसा अलग-अलग जगह लगाओ। वास्तविक लाभ = लाभ − महँगाई।
उद्यम और रोज़गार
उद्यम (व्यवसाय) बेचने के लिए वस्तुएँ या सेवाएँ बनाता है। उसे शुरू करने और बढ़ने के लिए धन चाहिए: मालिकों से, बैंक से, या शेयर और बॉन्ड खरीदने वालों से। इस धन से वह मशीनें खरीदता है, जगह किराये पर लेता है और कामगारों को रखता है। कामगार वेतन पाते हैं और खर्च करते हैं, जिससे दूसरे व्यवसायों की आय बनती है। इसी चक्र में बचत, निवेश और रोज़गार जुड़ते हैं। रोज़गार कर्मचारी बनकर या अपना उद्यम चलाकर हो सकता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- आय = ज़रूरतें + शौक़ + बचत
- नया दाम = पुराना दाम × (1 + महँगाई दर)
- वास्तविक लाभ ≈ लाभ दर − महँगाई दर
- साधारण ब्याज = मूलधन × दर × समय
- जोखिम और लाभ साथ बढ़ते हैं
हल किए गए उदाहरण
1. एक विद्यार्थी के पास महीने में 500 सिक्के हैं। 60% ज़रूरतों में और 20% बचत में जाता है। शौक़ के लिए कितना बचा?
ज़रूरतें 60% + बचत 20% = 80%। शौक़ = 500 का 20% = 100 सिक्के।
2. कॉपी 40 सिक्के की है। एक साल में महँगाई 10% है। अगले साल दाम?
40 × 1.10 = 44 सिक्के।
3. तुम 1000 सिक्के साल में 8% लाभ पर लगाते हो और महँगाई 5% है। वास्तविक लाभ लगभग कितना?
8% − 5% = लगभग 3% प्रति वर्ष। पैसा 8% बढ़ा पर खरीदने की ताक़त लगभग 3% बढ़ी।
आम गलतियाँ
- बचत और निवेश को एक समझना। बचत सुरक्षित रखना है; निवेश पैसे को काम पर लगाना है और उसमें जोखिम है।
- बजट बनाते समय शौक़ को ज़रूरत मान लेना।
- लाभ गिनते समय महँगाई भूल जाना।
- सारा पैसा एक ही जोखिम भरी चीज़ में लगाना।