वृद्धि और उसकी सीमाएँ
आर्थिक वृद्धि का मतलब है कि देश हर साल ज़्यादा पैदा करता है। ज़्यादा पैदा करने में आम तौर पर ज़्यादा ऊर्जा, पानी, ज़मीन और सामग्री लगती है, और ज़्यादा कचरा और कार्बन डाइऑक्साइड बनती है। धरती सीमित है। 1972 की एक मशहूर रिपोर्ट द लिमिट्स टू ग्रोथ ने चेताया कि सीमित दुनिया में अनंत वृद्धि का अंत तेज़ गिरावट में होगा। आज वैज्ञानिक ग्रहीय सीमाएँ (जलवायु, जैव विविधता आदि) नापते हैं और कहते हैं कि कुछ पार हो चुकी हैं।
डीग्रोथ क्या है?
डीग्रोथ कहता है कि अमीर देश योजना और न्याय के साथ ऊर्जा और सामग्री का इस्तेमाल घटाएँ। इसका मतलब धड़ाम से गिरना या सबके लिए अच्छी चीज़ें कम होना नहीं है। मुख्य विचार:
- जो चीज़ें नुकसान करती हैं और जीवन में कम जोड़ती हैं, उन्हें घटाना: फेंकने वाली चीज़ें, भारी विज्ञापन, फ़ास्ट फ़ैशन, कार और हवाई यात्रा का ज़्यादा इस्तेमाल।
- जो ज़रूरी है उसे मज़बूत करना: स्वास्थ्य, शिक्षा, सार्वजनिक परिवहन, देखभाल का काम, परिवार के साथ समय।
- काम और धन का बँटवारा ज़्यादा न्यायपूर्ण करना, जैसे हफ़्ते में कम कामकाजी दिन।
- सफलता नापने के लिए सिर्फ़ GDP नहीं, कल्याण (wellbeing) लेना।
दूसरा पक्ष: हरित वृद्धि
हरित वृद्धि के समर्थक कहते हैं कि तकनीक वृद्धि को नुकसान से अलग (decouple) कर सकती है: सौर और पवन ऊर्जा, बिजली से चलने वाला परिवहन और रीसायकल से हम कम नुकसान में ज़्यादा बनाते हैं। आलोचक कहते हैं कि अब तक यह अलगाव इतना तेज़ या पूरा नहीं हुआ, और नई चीज़ें बचत को खा जाती हैं (रिबाउंड प्रभाव)। ज़्यादातर विशेषज्ञ इतना मानते हैं: इस्तेमाल प्रकृति की सीमा के भीतर आना चाहिए। मतभेद इस पर है कि क्या ऐसा होते हुए वृद्धि चल सकती है।
गरीब और अमीर देश, और पूछने लायक सवाल
डीग्रोथ मुख्यतः अमीर देशों के लिए है, जो प्रति व्यक्ति सबसे ज़्यादा संसाधन इस्तेमाल करते हैं। ग़रीब देशों को अभी भोजन, घर, स्वास्थ्य और स्कूल में वृद्धि चाहिए। बहस के अच्छे सवाल: सबसे ज़्यादा कौन इस्तेमाल करता है? लोगों को सच में क्या चाहिए? क्या वृद्धि बेहतर जीवन दे रही है या सिर्फ़ ज़्यादा चीज़ें? बदलाव के दौरान रोज़गार और पेंशन कैसे बचें? दोनों पक्ष पढ़ाए गए हैं ताकि आप ख़ुद सोच सकें।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- संसाधन उपयोग = उत्पादन × प्रति इकाई उत्पादन में लगा संसाधन
- उपयोग में सालाना बदलाव ≈ वृद्धि दर − दक्षता लाभ
- t साल बाद उपयोग = शुरुआती × (1 + g)^t × (1 − e)^t
- सीमा में रहें यदि उपयोग ≤ प्रकृति की सालाना आपूर्ति
हल किए गए उदाहरण
1. उत्पादन हर साल 3% बढ़ता है और दक्षता हर साल 3% सुधरती है। संसाधन उपयोग का क्या होगा?
दोनों लगभग कट जाते हैं, इसलिए उपयोग क़रीब-क़रीब सपाट रहता है। वह घटता नहीं, और अगर पहले से सीमा के ऊपर है तो ऊपर ही रहता है।
2. उपयोग 90 है और सीमा 100। उत्पादन 3% सालाना बढ़ता है, दक्षता लाभ नहीं। लगभग कितने साल में उपयोग सीमा पार करेगा?
90 × 1.03^t = 100 से t लगभग 3.6 साल। यानी क़रीब चार साल में सीमा पार होगी।
3. उपयोग 120 से शुरू होता है पर सीमा 100 है। दक्षता लाभ 2% सालाना और वृद्धि 0% है। लगभग कितने साल बाद उपयोग 100 से नीचे आएगा?
120 × 0.98^t = 100 से t लगभग 9 साल।
4. एक देश में वृद्धि 2% और दक्षता लाभ 5% है। संसाधन उपयोग बढ़ रहा है या घट रहा है?
घट रहा है, लगभग 3% सालाना, क्योंकि दक्षता वृद्धि से बड़ी है।
5. डीग्रोथ के ज़्यादा क़रीब कौन-सा है: डिस्पोज़ेबल प्लास्टिक घटाना या ज़्यादा उड़ानों के लिए और हवाई अड्डे बनाना?
डिस्पोज़ेबल प्लास्टिक घटाना। डीग्रोथ हानिकारक, कम मूल्य वाला इस्तेमाल घटाता है।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि डीग्रोथ का मतलब ग़रीबी या पीछे लौटना है। इसका मतलब हानिकारक इस्तेमाल में योजनाबद्ध, न्यायपूर्ण कटौती है।
- यह सोचना कि डीग्रोथ ग़रीब देशों पर भी बराबर लागू होता है। यह मुख्यतः ज़्यादा उपयोग वाले अमीर देशों के लिए है।
- यह मानना कि अकेली दक्षता हमेशा समस्या सुलझा देती है। रिबाउंड प्रभाव बचत को काट सकता है।
- GDP को अच्छे जीवन का एकमात्र पैमाना मान लेना।