परिवार का कल्याण: आय और उससे मिलने वाली चीज़ें
कल्याण यानी कोई व्यक्ति या समूह कितना अच्छे हाल में है। एक परिवार (परिवार या गृहस्थी) के लिए सबसे पहला संकेत उसकी आय है: मज़दूरी, मुनाफ़ा, किराया, ब्याज और सरकारी मदद। ज़्यादा आय का मतलब आम तौर पर ज़्यादा ख़रीद, यानी ज़्यादा कल्याण।
पर आय और कल्याण एक ही चीज़ नहीं हैं। परिवार की कीमतें, बचत और खाली समय भी देखने पड़ते हैं। ऊँची आय पर भारी किराया देने वाले परिवार के पास कम आय और कम ख़र्च वाले परिवार से कम बच सकता है।
वास्तविक आय = कीमतों के हिसाब से ठीक की गई मुद्रा आय। कीमतें दोगुनी हो जाएँ और आय वही रहे तो कल्याण गिरता है।
सामाजिक कल्याण: सब लोग मिलाकर
सामाजिक कल्याण पूरे समाज का कल्याण है। इसे जानने का आसान तरीक़ा है हर परिवार का कल्याण जोड़ देना। पर एक ही कुल वाले दो समाज बहुत अलग हो सकते हैं: एक में सबको ठीक हिस्सा मिलता है, दूसरे में थोड़े लोगों के पास ज़्यादातर होता है।
इसलिए अर्थशास्त्री वितरण (किसे कितना) भी देखते हैं। लॉरेंज वक्र और गिनी गुणांक बताते हैं कि आय कितनी बराबर बँटी है। कोई समाज थोड़ा कम कुल भी चुन सकता है अगर वह ज़्यादा बराबरी से बँटा हो। यह मूल्यों का चुनाव है, केवल हिसाब नहीं।
पैरेटो इष्टतम बनाम अधिकतम कल्याण
कोई बदलाव पैरेटो-सुधार है अगर कम से कम एक को फ़ायदा हो और किसी का नुक़सान न हो। कोई हालत पैरेटो इष्टतम (पैरेटो दक्ष) है जब और सुधार संभव न हों: एक की मदद के लिए दूसरे को चोट पहुँचानी पड़े।
ध्यान दो: पैरेटो इष्टतम हमेशा न्यायपूर्ण नहीं होता। अगर एक व्यक्ति के पास सब कुछ है तो वह भी पैरेटो इष्टतम हो सकता है, क्योंकि दूसरों को कुछ देने से उसका नुक़सान होगा।
अधिकतम कल्याण वह सबसे अच्छी हालत है जो समाज न्याय की अपनी सोच से चुनता है। यह पैरेटो-इष्टतम हालतों में से चुनी जाती है। यानी पैरेटो इष्टतम = दक्षता, अधिकतम कल्याण = दक्षता + न्याय। ग़रीबों की मदद करने वाले कर जैसी कई नीतियाँ पैरेटो-सुधार नहीं हैं, क्योंकि किसी को देना पड़ता है, फिर भी समाज उन्हें चुन सकता है।
पैसे से परे खुशहाली
खुशहाली आय से बड़ा विचार है। इसमें सेहत और लंबी उम्र, शिक्षा, खाली समय, सुरक्षा, साफ़ हवा-पानी, दोस्त-परिवार और देश चलाने में अपनी बात कहने का हक़ आता है। जीवन-संतुष्टि के सर्वे और मानव विकास सूचकांक जैसे माप इसे नापने की कोशिश करते हैं।
सिर्फ़ GDP क्यों नहीं? GDP वह गिनता है जो बना और बिका। वह बिना पैसे के काम (जैसे बच्चों की देखभाल), खाली समय और प्रकृति की सेहत छोड़ देता है। अमीर देशों में अक्सर एक सीमा के बाद आय बढ़ने से ख़ुशी थोड़ी ही बढ़ती है, जबकि सेहत और रिश्ते बहुत बढ़ाते हैं।
ग्रीन GDP
GDP एक साल में देश में बने सारे सामान और सेवाओं का मूल्य है। उत्पादन से प्रकृति को जो नुक़सान होता है (गंदी हवा, कटे जंगल), वह GDP में से घटता नहीं।
ग्रीन GDP = GDP − पर्यावरण के नुक़सान का मौद्रिक मूल्य (और प्राकृतिक संसाधनों की कमी)। कोई कारख़ाना GDP में 10 जोड़ता है पर प्रदूषण 4 का नुक़सान करता है, तो हरित लाभ सिर्फ़ 6 है।
ग्रीन GDP नापना कठिन है, क्योंकि साफ़ हवा जैसी चीज़ों की कीमत तय करनी पड़ती है। फिर भी यह याद दिलाती है कि प्रकृति को खा जाने वाली बढ़त मुफ़्त नहीं है।
खुद करो: अपने परिवार की सूची
दस चीज़ें लिखो जो आपके परिवार का जीवन अच्छा बनाती हैं। हर एक पर निशान लगाओ: क्या पैसे से सीधे ख़रीदी जा सकती है (हाँ) या नहीं? "नहीं" गिनो। फिर 3D के चरण 3 में देखो कि कौन सी गेंदें पैसे से नहीं मिलतीं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- वास्तविक आय = मुद्रा आय ÷ कीमत सूचकांक × 100
- सामाजिक कल्याण (सरल) = परिवारों के कल्याण का जोड़
- पैरेटो-सुधार: किसी को फ़ायदा, किसी का नुक़सान नहीं
- ग्रीन GDP = GDP − पर्यावरण का नुक़सान
हल किए गए उदाहरण
1. चार परिवारों की साप्ताहिक आय 30, 50, 20 और 40 है। कुल कितना है? कौन औसत से ऊपर है?
कुल = 30 + 50 + 20 + 40 = 140। औसत = 140 ÷ 4 = 35। 50 और 40 वाले परिवार औसत से ऊपर हैं।
2. सरकार 50 वाले परिवार से 5 लेकर 20 वाले को देती है। क्या यह पैरेटो-सुधार है? कुल बदला?
नहीं। 50 वाला परिवार 5 खोता है, यानी किसी की हालत बिगड़ी। कुल अब भी 140 है, सिर्फ़ बँटवारा बदला (45 और 25)।
3. नया कारख़ाना GDP 120 बढ़ाता है और 45 का प्रदूषण नुक़सान करता है। हरित लाभ निकालो।
हरित लाभ = 120 − 45 = 75।
4. देश की GDP 800 और पर्यावरण नुक़सान 150 है। ग्रीन GDP और नुक़सान का GDP में हिस्सा निकालो।
ग्रीन GDP = 800 − 150 = 650। हिस्सा = 150 ÷ 800 = 0.1875, लगभग 19%।
5. आय 10% बढ़ी और कीमतें भी 10% बढ़ीं। क्या वास्तविक आय बदली?
नहीं। वास्तविक आय वही रही, क्योंकि पैसा पहले जितना ही सामान ख़रीदता है।
6. शहर क: आय 40, साफ़ हवा। शहर ख: आय 44, गंदी हवा, लंबा सफ़र। किसकी खुशहाली ज़्यादा हो सकती है और क्यों?
शहर क की। ख की 10% ज़्यादा आय गंदी हवा और खोए समय की भरपाई नहीं करती। खुशहाली में सेहत, समय और पर्यावरण भी आते हैं।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि ज़्यादा GDP का मतलब हमेशा ज़्यादा कल्याण है। GDP वितरण, खाली समय और प्रकृति नहीं देखती।
- पैरेटो इष्टतम को हमेशा न्यायपूर्ण मान लेना। वह केवल इतना कहता है कि किसी को गिराए बिना किसी को बढ़ाया नहीं जा सकता।
- हर कर को पैरेटो-सुधार कह देना। कर देने वाले की हालत बिगड़ती है।
- ग्रीन GDP में उल्टा घटाना: ग्रीन GDP = GDP − नुक़सान, नुक़सान − GDP नहीं।