लागत-लाभ विश्लेषण क्या है?
लागत (cost) वह है जो आप कुछ करने के लिए छोड़ते हैं। लाभ (benefit) वह है जो आपको उससे मिलता है। लागत-लाभ विश्लेषण सारी लागत और सारे लाभ को एक ही पैमाने, यानी पैसे, पर रखता है ताकि तुलना हो सके।
नियम सीधा है: शुद्ध लाभ = कुल लाभ − कुल लागत। शुद्ध लाभ शून्य से ऊपर हो तो फ़ैसला करने लायक है। दो विकल्प हों तो जिसका शुद्ध लाभ ज़्यादा हो, वह चुनिए।
विश्लेषण के चरण
- फ़ैसले का नाम लिखें और बाकी विकल्प भी।
- लागत की सूची: अभी दिया पैसा, बाद का चलाने का ख़र्च, और दूसरों या प्रकृति को नुकसान।
- लाभ की सूची: कमाया पैसा, बचाया पैसा, बचा समय, सेहत और सुरक्षा।
- हर चीज़ को पैसे में आँकें। समय और सेहत का भी सही अनुमान लगाएँ।
- भविष्य के पैसे को आज के बराबर करें। अगले साल के 100 रुपये आज के 100 रुपये से थोड़े कम माने जाते हैं। इसे बट्टा लगाना (discounting) कहते हैं।
- तुलना करें शुद्ध लाभ से या लाभ-लागत अनुपात (लाभ ÷ लागत) से। अनुपात 1 से ऊपर हो तो अच्छा है।
- फ़ैसला करें और देखें कि संख्याएँ थोड़ी ग़लत हों तो जवाब कितना बदलता है।
छिपी लागत और अवसर लागत
अच्छा विश्लेषण सिर्फ़ दाम नहीं गिनता। अवसर लागत (opportunity cost) वह सबसे अच्छी दूसरी चीज़ है जो आप छोड़ देते हैं। शहर अगर ज़मीन पर पार्किंग बनाए, तो वहाँ स्कूल नहीं बन सकता। बाहरी लागत उन लोगों पर पड़ती है जिन्होंने चुनाव नहीं किया, जैसे फ़ैक्टरी का शोर या धुआँ। इन्हें भी गिनना चाहिए। जो पैसा ख़र्च हो चुका और वापस नहीं आ सकता (डूबी लागत), वह आज के फ़ैसले को नहीं बदलना चाहिए।
कहाँ काम आता है और इसकी सीमाएँ
सरकारें सड़क, मेट्रो, स्कूल और साफ़ हवा के नियमों के लिए इसे इस्तेमाल करती हैं। कंपनियाँ नई मशीन या दुकान के लिए। पर इसकी सीमाएँ भी हैं: कुछ चीज़ों का दाम लगाना मुश्किल है (साफ़ नदी, इंसान की जान), लागत और लाभ अलग-अलग लोगों पर पड़ सकते हैं, और भविष्य अनिश्चित है। इसलिए CBA फ़ैसले में मदद करता है, पर न्याय और समझदारी की जगह नहीं लेता।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- शुद्ध लाभ = कुल लाभ − कुल लागत
- लाभ-लागत अनुपात = कुल लाभ ÷ कुल लागत (1 से ऊपर यानी करने लायक)
- वर्तमान मूल्य = भविष्य की राशि ÷ (1 + r)^t, जहाँ r बट्टा दर और t वर्ष है
- अवसर लागत = छोड़े गए सबसे अच्छे विकल्प का मूल्य
हल किए गए उदाहरण
1. एक बेकरी नया ओवन लेना चाहती है। लागत: 60,000 रुपये। अतिरिक्त मुनाफ़ा: 80,000 रुपये। शुद्ध लाभ और अनुपात निकालिए।
शुद्ध लाभ = 80,000 − 60,000 = 20,000 रुपये। अनुपात = 80,000 ÷ 60,000 = 1.33। यह 1 से ऊपर है, इसलिए ओवन ख़रीदें।
2. गाँव के स्कूल की बस 5 लाख की है। लाभ (ईंधन, समय, सुरक्षा) 4 लाख के हैं। सिर्फ़ इस जाँच से क्या गाँव को ख़रीदनी चाहिए?
शुद्ध लाभ = 4 − 5 = −1 लाख। अनुपात 0.8 है, यानी 1 से कम। सिर्फ़ पैसे से देखें तो नहीं। पर गाँव वे चीज़ें जोड़ सकता है जो अभी नहीं गिनी, जैसे ज़्यादा लड़कियों का स्कूल में रुकना, और फिर जाँचे।
3. एक साल बाद आपको 1,100 रुपये मिलेंगे। बट्टा दर 10% है। आज इसका मूल्य क्या है?
वर्तमान मूल्य = 1,100 ÷ 1.10 = 1,000 रुपये।
4. विकल्प A का शुद्ध लाभ 30,000 रुपये और विकल्प B का 45,000 रुपये है। लागत दोनों की बराबर है। कौन-सा बेहतर है?
B चुनिए। उसका शुद्ध लाभ ज़्यादा है।
5. एक फ़ैक्टरी 90 लाख कमाती है, पर उसके धुएँ से पास के लोगों को 1 करोड़ का स्वास्थ्य नुकसान होता है। क्या यह समाज के लिए ठीक है?
लाभ 90 लाख − लागत 100 लाख = −10 लाख। समाज के लिए यह ठीक नहीं, भले मालिक को फ़ायदा हो।
आम गलतियाँ
- सिर्फ़ दाम गिनना और छिपी, बाहरी या आगे की लागत भूल जाना।
- भविष्य का पैसा बिना बट्टा लगाए जोड़ देना।
- डूबी लागत को फ़ैसले में आने देना: "पैसा लग चुका है, तो चलाना ही पड़ेगा"।
- यह सोचना कि सबसे बड़ा लाभ जीतता है। लाभ में से लागत घटाकर तुलना करें, सिर्फ़ लाभ से नहीं।