इनपुट, प्रोसेस, आउटपुट: कंट्रोल सिस्टम कैसे काम करता है
कंट्रोल सिस्टम किसी चीज़ पर नज़र रखता है और उसके हिसाब से काम करता है। इसके तीन भाग हैं।
- इनपुट: सेंसर या स्विच। यह रोशनी, गर्मी, छूना या दूरी को वोल्टेज में बदलता है।
- प्रोसेस: माइक्रोकंट्रोलर (एक चिप पर छोटा कंप्यूटर) या PC। यह प्रोग्राम चलाकर तय करता है कि क्या करना है।
- आउटपुट: LED, बज़र, डिस्प्ले, मोटर या सर्वो। यह काम करता है।
रोबोट वह कंट्रोल सिस्टम है जो हिल-डुल सकता है। सेंसर इनपुट हैं, कंट्रोलर दिमाग़ है, मोटर आउटपुट हैं।
आम इनपुट डिवाइस
- पुश स्विच: डिजिटल सिग्नल, 0 V (बंद) या 5 V (चालू)।
- LDR (प्रकाश-निर्भर प्रतिरोधक): रोशनी बढ़ने पर इसका प्रतिरोध घटता है। यह एनालॉग सिग्नल देता है।
- थर्मिस्टर: तापमान से प्रतिरोध बदलता है।
- अल्ट्रासोनिक सेंसर: ध्वनि भेजकर गूँज का समय नापता है और दूरी बताता है।
- पोटेंशियोमीटर: घुमाने वाला नॉब, बदलता वोल्टेज देता है।
आम आउटपुट डिवाइस
- LED, बज़र, LCD स्क्रीन, DC मोटर, सर्वो मोटर (ठीक कोण तक घूमती है), स्टेपर मोटर (ठीक कदमों में), सोलेनॉइड (छड़ धकेलता है)।
स्पेसिफ़िकेशन के शब्द
डेटा शीट में रेटेड वोल्टेज, अधिकतम धारा, पावर रेटिंग (वाट), टॉलरेंस (प्रतिरोधक कितना सटीक है, जैसे ±5%) और फ़ॉरवर्ड वोल्टेज (LED या डायोड जितना वोल्टेज लेती है) जैसे शब्द होते हैं।
इलेक्ट्रॉनिक पुर्ज़े और उनके मान कैसे चुनें
- प्रतिरोधक (रेज़िस्टर): धारा को सीमित करता है। मात्रक ओम (Ω)।
- संधारित्र (कैपेसिटर): थोड़ी देर आवेश जमा करता है; वोल्टेज को समतल करता है या समय की देरी बनाता है। मात्रक फ़ैरड (F), अक्सर µF।
- डायोड: धारा को एक ही दिशा में जाने देता है। LED रोशनी देने वाला डायोड है।
- ट्रांज़िस्टर: इलेक्ट्रॉनिक स्विच या एम्प्लीफ़ायर। छोटी बेस धारा बड़ी कलेक्टर धारा को नियंत्रित करती है।
- रिले: विद्युत चुंबक से चलने वाला स्विच। छोटा सर्किट अलग बड़े सर्किट को सुरक्षित रूप से चालू करता है।
- IC (एकीकृत परिपथ): एक चिप पर बहुत से पुर्ज़े, जैसे 555 टाइमर, लॉजिक गेट चिप, माइक्रोकंट्रोलर।
नियमों का उपयोग
ओम का नियम: V = I × R। शक्ति: P = V × I। श्रेणी में: R = R1 + R2। वोल्टेज डिवाइडर: Vout = Vin × R2 ÷ (R1 + R2) (इसी से LDR बदलता वोल्टेज देता है)।
LED प्रतिरोधक: R = (सप्लाई − LED वोल्टेज) ÷ LED धारा। 5 V, लाल LED (2 V), 20 mA: R = 3 ÷ 0.02 = 150 Ω। अगला मानक मान लें (150 Ω या 220 Ω)। शक्ति: P = 3 × 0.02 = 0.06 W, तो 0.25 W का प्रतिरोधक ठीक है।
इंटरफ़ेसिंग: डेस्कटॉप कंप्यूटर या माइक्रोकंट्रोलर?
इंटरफ़ेसिंग यानी कंप्यूटर को असली दुनिया से जोड़ना, ताकि प्रोग्राम सेंसर पढ़ सके और आउटपुट चला सके।
| डेस्कटॉप PC | माइक्रोकंट्रोलर | |
|---|---|---|
| कीमत | ज़्यादा | बहुत कम |
| आकार, बिजली | बड़ा, मेन्स चाहिए | छोटा, बैटरी पर चलता है |
| कंप्यूटिंग शक्ति | बहुत ज़्यादा (वीडियो, AI) | कम, पर कंट्रोल के लिए काफ़ी |
| I/O पिन | सीधे नहीं; USB इंटरफ़ेस बोर्ड चाहिए | डिजिटल, एनालॉग, PWM पिन अंदर ही |
| चालू होना | धीमा (OS बूट होता है) | तुरंत, एक प्रोग्राम चलाता है |
कई रोबोट दोनों रखते हैं: माइक्रोकंट्रोलर मोटर और सेंसर संभालता है, और कंप्यूटर कैमरा और योजना।
अलग पुर्ज़े बनाम IC: अलग प्रतिरोधक और ट्रांज़िस्टर वाला सर्किट सीखने और ठीक करने में आसान है। IC में हज़ारों से अरबों ट्रांज़िस्टर एक चिप पर होते हैं, इसलिए वह छोटा, सस्ता और भरोसेमंद है।
इलेक्ट्रॉनिक्स की तरक्की क्यों ज़रूरी है
ट्रांज़िस्टर छोटे होते जा रहे हैं, तो चिप तेज़ और सस्ती हो रही हैं। इसी से फ़ोन, इलेक्ट्रिक कारें, चिकित्सा उपकरण और सस्ते रोबोट मिले। साथ में ई-कचरा भी बढ़ा, इसलिए रीसाइक्लिंग और मरम्मत ज़रूरी है।
डिज़ाइन, चित्र, सिमुलेशन, निर्माण और खराबी ढूँढना
डिज़ाइन प्रक्रिया
- समस्या और ज़रूरतें तय करें।
- ब्लॉक डायग्राम बनाएँ (इनपुट → प्रोसेस → आउटपुट)।
- मानक चिह्नों से सर्किट आरेख (स्कीमैटिक) बनाएँ और मान निकालें।
- पुर्ज़े खरीदने से पहले सॉफ़्टवेयर में सिमुलेट करें।
- ब्रेडबोर्ड पर बनाएँ, फिर PCB या स्ट्रिपबोर्ड पर सोल्डर करें।
- जाँचें, सुधारें और ज़रूरतों से मिलाएँ।
सुरक्षा
- तार बदलने से पहले बिजली बंद करें। स्कूल प्रोजेक्ट में कम वोल्टेज (5–12 V) रखें।
- हवादार जगह पर सोल्डर करें; आयरन स्टैंड में रखें; आँखों की सुरक्षा पहनें।
- मोटर को सीधे चिप पिन से न जोड़ें। मोटर और रिले कॉइल पर फ़्लाईबैक डायोड लगाएँ।
खराबी ढूँढना (ट्रबलशूटिंग)
- देखें: ढीले तार, उल्टी ध्रुवता (LED, कैपेसिटर), सोल्डर ब्रिज, जले पुर्ज़े।
- मल्टीमीटर से सप्लाई वोल्टेज नापें।
- इनपुट से आउटपुट तक सिग्नल को एक-एक चरण में देखें।
- बिजली बंद करके निरंतरता (कंटिन्युटी) जाँचें।
- शक वाले पुर्ज़े को अच्छे पुर्ज़े से बदलकर देखें।
करके देखें: कागज़ पर या 3D में नाइट-लाइट
3D में रोशनी वाला स्लाइडर खिसकाएँ। रोशनी 40% से कम होते ही प्रोग्राम LED जला देता है। घर पर: किसी अपने-आप चलने वाली चीज़ (जैसे फ़्रिज की लाइट या पानी की टंकी का अलार्म) का ब्लॉक डायग्राम बनाएँ और इनपुट, प्रोसेस, आउटपुट लिखें।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- V = I × R (ओम का नियम)
- P = V × I
- LED प्रतिरोधक: R = (Vsupply − VLED) ÷ ILED
- श्रेणी: R = R1 + R2
- वोल्टेज डिवाइडर: Vout = Vin × R2 ÷ (R1 + R2)
- 1 mA = 0.001 A
हल किए गए उदाहरण
1. 9 V बैटरी से नीली LED (3 V, 20 mA) जलानी है। श्रेणी प्रतिरोधक निकालें।
बचा वोल्टेज = 9 − 3 = 6 V। R = 6 ÷ 0.02 = 300 Ω। अगला मानक मान 330 Ω लें।
2. उस 300 Ω प्रतिरोधक में शक्ति निकालें और पावर रेटिंग चुनें।
P = V × I = 6 × 0.02 = 0.12 W। 0.25 W का प्रतिरोधक सुरक्षित है (ज़रूरत का लगभग दोगुना)।
3. वोल्टेज डिवाइडर में R1 = 10 kΩ और R2 एक LDR है। अँधेरे में LDR = 90 kΩ। 5 V इनपुट पर Vout निकालें।
Vout = 5 × 90 ÷ (10 + 90) = 4.5 V। तेज़ रोशनी में (LDR 1 kΩ): Vout = 5 × 1 ÷ 11 ≈ 0.45 V। यानी अँधेरे में वोल्टेज बढ़ता है।
4. माइक्रोकंट्रोलर पिन अधिकतम 20 mA देता है। 12 V मोटर को 0.5 A चाहिए। क्या पिन इसे चला सकता है?
नहीं। 0.5 A = 500 mA, यानी 25 गुना ज़्यादा, और वोल्टेज भी ज़्यादा है। अलग 12 V सप्लाई के साथ ट्रांज़िस्टर या रिले लगाएँ।
5. LED नहीं जल रही। बैटरी 5 V दिखा रही है। आगे क्या जाँचें?
LED की ध्रुवता (लंबी टाँग + पर), फिर प्रतिरोधक और LED के पार वोल्टेज, फिर बिजली बंद करके हर तार की निरंतरता।
आम गलतियाँ
- LED को बिना प्रतिरोधक लगाना। ज़्यादा धारा से वह जल जाती है।
- LED या इलेक्ट्रोलाइटिक कैपेसिटर उल्टा लगाना। दोनों की ध्रुवता होती है।
- मोटर को सीधे चिप पिन से चलाना। ट्रांज़िस्टर या रिले लगाएँ।
- बिजली चालू रखकर निरंतरता या प्रतिरोध नापना। पहले बंद करें।