सेचेनोव और पावलोव: मस्तिष्क प्रतिवर्त से काम करता है
प्रतिवर्त (reflex) किसी संकेत पर शरीर का अपने-आप होने वाला उत्तर है। सन् 1863 में रूसी वैज्ञानिक इवान सेचेनोव ने लिखा कि विचार और भावनाएँ भी मस्तिष्क में प्रतिवर्त की तरह शुरू होती हैं। बाद में इवान पावलोव ने कुत्तों पर सावधानी से प्रयोग करके यह जाँचा। पाचन पर काम के लिए उन्हें 1904 में नोबेल पुरस्कार मिला, फिर उन्होंने सालों यह देखा कि जानवर कैसे सीखते हैं।
उच्च तंत्रिका गतिविधि यानी मस्तिष्क की बाहरी परत (प्रमस्तिष्क वल्कुट, कॉर्टेक्स) और उसके पास के भागों का काम, जो सीखना, स्मृति, वाणी, भावनाएँ और व्यवहार चलाता है। अकेली मेरुरज्जु (spinal cord) यह नहीं कर सकती।
जन्मजात और अनुबंधित प्रतिवर्त
अननुबंधित (जन्मजात) प्रतिवर्त: जन्म से मिलता है। उदाहरण: मुँह में भोजन आने पर लार, गर्म तवे से हाथ खींचना, पलक झपकना, बच्चे का दूध चूसना। यह प्रजाति में सबमें एक जैसा होता है, जीवन भर रहता है और मेरुरज्जु या निचले मस्तिष्क से चलता है।
अनुबंधित (सीखा हुआ) प्रतिवर्त: जीवन में बनता है। हर व्यक्ति में अलग होता है, कमज़ोर पड़ सकता है और कॉर्टेक्स चाहिए।
| जन्मजात | अनुबंधित | |
|---|---|---|
| शुरुआत | जन्म से | जीवन में सीखा |
| सबमें एक जैसा? | हाँ | नहीं, निजी |
| कब तक | पूरे जीवन | मिट सकता है |
| उदाहरण | भोजन पर लार | घंटी पर लार |
अनुबंधित प्रतिवर्त कैसे बनता और मिटता है
- जन्मजात प्रतिवर्त से शुरू करो: भोजन से लार।
- कोई तटस्थ संकेत लो, जैसे घंटी। अकेली घंटी से लार नहीं आती।
- भोजन से ठीक पहले घंटी बजाओ, कई बार। कॉर्टेक्स घंटी वाले और भोजन वाले भाग के बीच अस्थायी जोड़ बना देता है।
- अब अकेली घंटी से लार आती है। घंटी अनुबंधित संकेत बन गई।
विलोपन (extinction): अगर घंटी बजती रहे और भोजन न आए, तो जोड़ कमज़ोर होकर प्रतिवर्त रुक जाता है। यह भूलना नहीं है। मस्तिष्क नया नियम सीखता है: "घंटी के बाद अब भोजन नहीं आता"। भोजन लौटे तो पुराना जोड़ जल्दी वापस आ जाता है।
नियम: संकेत पहले आए और जोड़ी बार-बार दोहराई जाए। जो इनाम ज़रूरी हो (भोजन, खतरा) उससे जोड़ जल्दी बनता है।
वाणी, स्मृति और संवेग
वाणी (speech): शब्द किसी वस्तु का संकेत बन सकता है। पावलोव ने शब्दों को "संकेतों का संकेत" कहा। भाषा से सोचना और योजना बनाना केवल मनुष्य करता है। ज़्यादातर लोगों में वाणी के क्षेत्र कॉर्टेक्स के बाएँ भाग में होते हैं।
स्मृति (memory) सीखी हुई बातें रखती है। अल्पकालिक स्मृति कुछ चीज़ें कुछ सेकंड रखती है, जैसे अभी सुना फ़ोन नंबर। दीर्घकालिक स्मृति सालों तक रखती है। दोहराने और अर्थ से जोड़ने पर बात अल्पकालिक से दीर्घकालिक में जाती है। नींद भी इसमें मदद करती है।
संवेग (emotions) खुशी, डर, गुस्सा जैसी तेज़ भावनाएँ हैं। इन्हें मस्तिष्क के गहरे भाग (जैसे लिंबिक तंत्र) और कॉर्टेक्स मिलकर चलाते हैं। इनसे धड़कन, साँस और याद रखना बदल जाता है। कुत्ते के काटने का डर भी अनुबंधित प्रतिवर्त बन सकता है।
स्वभाव (temperament)
स्वभाव प्रतिक्रिया करने का हमारा प्राकृतिक ढंग है: कितनी जल्दी, कितनी तेज़, कितनी स्थिर। पावलोव ने इसे तंत्रिका क्रियाओं की ताकत, संतुलन और गतिशीलता से जोड़ा। पुराने चार प्रकार:
- रक्तप्रकृति (sanguine): चंचल, फुर्तीला, हँसमुख।
- पित्तप्रकृति (choleric): तेज़ और ज़ोरदार, जल्दी गुस्सा।
- कफप्रकृति (phlegmatic): शांत, धीमा, स्थिर।
- विषादी (melancholic): संवेदनशील, सावधान, ज़्यादा तनाव में थक जाता है।
ज़्यादातर लोग मिले-जुले होते हैं। कोई प्रकार बेहतर नहीं है। चरित्र (आदतें और मूल्य) जीवन से बनता है और बदल सकता है; स्वभाव बहुत कम बदलता है।
नींद
नींद का मतलब बंद हो जाना नहीं है। मस्तिष्क काम करता रहता है। लगभग हर 90 मिनट में दो मुख्य प्रकार दोहराते हैं:
- धीमी तरंग (गहरी) नींद: शरीर आराम करता है, साँस धीमी होती है और वृद्धि हार्मोन निकलता है।
- REM नींद: आँखें तेज़ घूमती हैं, ज़्यादातर साफ़ सपने आते हैं और मस्तिष्क यादें छाँटता है।
पावलोव ने नींद को सुरक्षात्मक निरोध माना: ज़्यादा काम के बाद तंत्रिका कोशिकाएँ आराम करती हैं। स्कूल के बच्चों को लगभग 8 से 10 घंटे नींद चाहिए। कम नींद से ध्यान और याददाश्त घटती है। सुझाव: सोने का तय समय, सोने से एक घंटा पहले फ़ोन नहीं, अँधेरा और शांत कमरा।
खुद करो: घर पर अनुबंधित संकेत
3D दृश्य में घंटी + भोजन चार बार दबाओ, फिर अकेले घंटी बजाओ। पहले अनुमान लगाओ: लार आएगी? फिर बिना भोजन के चार बार और घंटी बजाओ और जोड़ की पट्टी को गिरते देखो।
घर पर: दोस्त से कहो कि एक हफ़्ते तक हर नाश्ते से ठीक पहले सीटी बजाए। दूसरे हफ़्ते में सीटी सुनकर अपने मुँह का हाल देखो। (केवल तब, जब दोस्त राज़ी हो और नाश्ता सेहतमंद हो।)
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- जन्मजात प्रतिवर्त: उद्दीपन → मेरुरज्जु / निचला मस्तिष्क → उत्तर (सबमें एक जैसा)
- अनुबंधित प्रतिवर्त = तटस्थ संकेत + जन्मजात उद्दीपन, बार-बार (संकेत पहले) → कॉर्टेक्स में जोड़
- विलोपन = अनुबंधित संकेत बिना इनाम के दोहराना → जोड़ कमज़ोर
- चार स्वभाव: रक्त, पित्त, कफ, विषादी
- नींद का चक्र ≈ 90 मिनट: धीमी तरंग नींद + REM नींद
हल किए गए उदाहरण
1. गुब्बारा फूटने पर एक बच्ची उछल पड़ती है, पर जिस शिशु ने गुब्बारा कभी नहीं देखा वह नहीं उछलता। यह कौन-सा प्रतिवर्त है?
तेज़ धमाके पर चौंकना सबमें जन्मजात प्रतिवर्त हो सकता है। अगर बच्ची इसलिए उछली कि उसने सीखा है कि गुब्बारा फूटता है, तो वह भाग अनुबंधित है। यानी मिला-जुला: चौंकना जन्मजात, गुब्बारे का डर सीखा हुआ।
2. अनुबंधित प्रतिवर्त बनाने का क्रम लगाओ: (क) अकेली घंटी से लार, (ख) घंटी और भोजन की जोड़ी कई बार, (ग) भोजन से लार, (घ) अकेली घंटी से कुछ नहीं।
क्रम: (ग) → (घ) → (ख) → (क)। पहले जन्मजात प्रतिवर्त, फिर जाँच कि घंटी तटस्थ है, फिर जोड़ी बनाना, फिर अकेली घंटी की परीक्षा।
3. कुत्ते ने घंटी वाला प्रतिवर्त सीख लिया। फिर 10 बार बिना भोजन के घंटी बजी। क्या होगा और इसे क्या कहते हैं?
हर बार लार कम होती जाएगी और अंत में रुक जाएगी। इसे विलोपन कहते हैं। जोड़ कमज़ोर है, मिटा नहीं, इसलिए घंटी के साथ दोबारा भोजन देने पर प्रतिवर्त जल्दी लौट आएगा।
आम गलतियाँ
- सारे प्रतिवर्त जन्मजात मान लेना। अनुबंधित प्रतिवर्त सीखे जाते हैं।
- भोजन को घंटी से पहले देना। संकेत पहले आना चाहिए।
- विलोपन को भूलना कहना। असल में मस्तिष्क सीखता है कि घंटी अब भोजन नहीं बताती।
- स्वभाव और चरित्र को एक मानना। स्वभाव प्राकृतिक ढंग है; चरित्र जीवन से बनता है।