National Year 11 Religious Studies
अध्याय: 8
1. Theme A: Relationships and families
Sex, marriage and divorce · Families and gender equality
- रिश्ते और परिवार: प्रकार, विवाह और समानता – परिवार कई रूपों में होते हैं: एकल, संयुक्त, एकल-अभिभावक, मिश्रित और समलैंगिक माता-पिता वाले। उद्देश्य है देखभाल, बच्चों का पालन, मूल्य सिखाना और सुरक्षा। प्रतिबद्ध रिश्तों में विवाह, सिविल पार्टनरशिप और साथ रहना आते हैं; विवाह के लिए दोनों की स्वतंत्र सहमति और न्यूनतम उम्र ज़रूरी है, और ज़बरदस्ती या बाल विवाह कई देशों में अपराध है। विवाह-पूर्व संबंध, गर्भनिरोध, समलैंगिक विवाह, तलाक़ और पुनर्विवाह पर धर्मों की राय अलग है। लैंगिक समानता का मतलब है बराबर सम्मान और काम का उचित बँटवारा। नियंत्रण, डर या हिंसा वाला रिश्ता असुरक्षित है और मदद उपलब्ध है।
2. Theme B: Religion and life
Origins and value of the universe · Origins and value of human life
- जैवनैतिकता: जीवविज्ञान और चिकित्सा में सही क्या है – जैवनैतिकता पूछती है कि जीवविज्ञान और चिकित्सा जो करने देते हैं, क्या हमें वह करना चाहिए। इसके चार सिद्धांत हैं: स्वायत्तता (पसंद का सम्मान), हितकारिता (भला करो), अहानिकारिता (नुक़सान न करो) और न्याय (बराबरी)। मानव गरिमा का अर्थ है कि इंसान कभी सिर्फ़ साधन नहीं, इसलिए सूचित सहमति ज़रूरी है। चिकित्सीय क्लोनिंग सख़्त नियमों से कहीं-कहीं मान्य है; इंसान की प्रजनन क्लोनिंग ज़्यादातर देशों में प्रतिबंधित है। जीवन की शुरुआत और अंत के सवाल फ़ायदों बनाम जोखिमों और मूल्यों पर तौले जाते हैं।
3. Theme C: The existence of God and revelation
Philosophical arguments for and against God · The nature of the divine and revelation
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4. Theme D: Religion, peace and conflict
Religion, violence, terrorism and war · Religion and belief in 21st-century conflict
- शांति और संघर्ष: युद्ध क्यों होते हैं और शांति कैसे बनती है – शांति सिर्फ़ लड़ाई न होना नहीं है: इसके लिए न्याय, क्षमा और मेल-मिलाप चाहिए। युद्ध लालच, आत्मरक्षा, बदले और कभी धर्म या पहचान के कारण होते हैं। न्यायपूर्ण युद्ध सिद्धांत शर्तें रखता है (सही कारण, वैध अधिकारी, अंतिम उपाय, सही इरादा, सफलता की संभावना, उचित मात्रा और आम लोगों की रक्षा)। धर्मयुद्ध आस्था के लिए लड़ा जाता है, जिसे आज अधिकतर आस्थावान नकारते हैं। शांतिवादी हर हिंसा को नकारते हैं; विरोध शांतिपूर्ण या हिंसक हो सकता है; आतंकवाद डर फैलाने के लिए आम लोगों को निशाना बनाता है। सामूहिक विनाश के हथियार आम लोगों को नहीं बख़्शते। शांतिदूत और धार्मिक समूह संघर्ष ख़त्म करने और पीड़ितों की मदद में लगे हैं।
5. Theme E: Religion, crime and punishment
Religion, crime and causes of crime · Religion and punishment
- अपराध और दंड: अपराध क्यों होते हैं और समाज क्या करता है – अपराध क़ानून के ख़िलाफ़ काम है। इरादा अच्छा या बुरा हो सकता है और यह फ़ैसले पर असर डालता है। अपराध के कारणों में ग़रीबी, परवरिश, नशा, मानसिक बीमारी, लालच, नफ़रत और अन्यायी क़ानून का विरोध हैं; घृणा अपराध पहचान के कारण निशाना बनाता है और हत्या सबसे गंभीर अपराध है। सज़ा के उद्देश्य: प्रतिशोध, निवारण, सुधार, सुरक्षा और क्षतिपूर्ति। सज़ाओं में जेल, सामुदायिक सेवा और शारीरिक दंड आते हैं; अधिकतर धर्म अपराधी से भी गरिमापूर्ण व्यवहार चाहते हैं। क्षमा बदला छोड़ती है पर न्याय नहीं हटाती। मृत्युदंड पर बहस है: समर्थक प्रतिशोध और निवारण, विरोधी जीवन की पवित्रता, ग़लती की संभावना और सुधार की आशा बताते हैं।
6. Theme F: Religion, human rights and social justice
Human rights · Wealth and poverty
- मानव अधिकार: अर्थ, इतिहास, प्रकार और संरक्षण – मानव अधिकार वे मूल स्वतंत्रताएँ और सुरक्षाएँ हैं जो हर व्यक्ति को मनुष्य होने के कारण मिलती हैं। ये सार्वभौमिक, अविच्छेद्य, अविभाज्य और गरिमा पर आधारित हैं। मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा (1948) ने सबके लिए एक साझा मानक बनाया, जिसे बाद में संधियों से बाध्यकारी बनाया गया। संविधान, न्यायालय, आयोग, संयुक्त राष्ट्र और नागरिक समाज इनकी रक्षा करते हैं, और केवल दूसरों की रक्षा के लिए बने उचित क़ानून ही इन्हें सीमित कर सकते हैं।
- धन, ग़रीबी और सामाजिक न्याय: सबके लिए उचित हिस्सा – धन मतलब पैसा और क़ीमती चीज़ें। अधिकतर धर्म कहते हैं कि धन ईश्वर या समाज की अमानत है: ईमानदारी से कमाया जाए और परिवार व अच्छे कामों में लगे, पर लालच और स्वार्थ ग़लत है। ग़रीबी के निजी और बड़े कारण हैं: बेरोज़गारी, कम वेतन, बीमारी, क़र्ज़, कम शिक्षा, आपदा, युद्ध, अनुचित व्यापार और भेदभाव। ग़रीबों का शोषण कम मज़दूरी, भारी ब्याज, बाल श्रम और तस्करी से होता है। धर्म देने को कर्तव्य बनाते हैं (ज़कात, दान, दशमांश, सेवा); आपात सहायता तुरंत ज़रूरत पूरी करती है और दीर्घकालीन सहायता आत्मनिर्भर बनाती है। सामाजिक न्याय मतलब सबको उचित अवसर, अधिकार और मूल ज़रूरतें।
7. Theme G: St Mark's Gospel - the life of Jesus (textual option)
Early and later ministry of Jesus
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8. Theme H: St Mark's Gospel as a source of spiritual truth (textual option)
Kingdom of God, marginalised people and discipleship
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