Russia 7 класс Informatics (basic)
अध्याय: 3
1. Digital literacy
Computer as a universal device · Software and data · Files and folders · Computer networks · Online safety and ethics
- कंप्यूटर का मूल संगठन – कंप्यूटर प्रणाली में हार्डवेयर (जिसे छू सकें) और सॉफ़्टवेयर (निर्देश) दोनों होते हैं। इनपुट उपकरण डेटा अंदर लाते हैं, CPU (ALU + कंट्रोल यूनिट + रजिस्टर) उस पर काम करता है, और आउटपुट उपकरण परिणाम देते हैं। मेमोरी एक सीढ़ी जैसी है: रजिस्टर और कैश छोटे पर सबसे तेज़, प्राथमिक मेमोरी (RAM, ROM) चलते प्रोग्राम रखती है, और द्वितीयक भंडारण (HDD, SSD, पेन ड्राइव) डेटा हमेशा के लिए रखता है। 8 बिट = 1 बाइट, और KB से आगे हर इकाई पिछली की 1024 गुना है।
- फ़ाइल प्रबंधन: फ़ाइल, फ़ोल्डर, पाथ और बैकअप – फ़ाइल नाम वाला डेटा है; उसका एक्सटेंशन प्रकार बताता है। ऑपरेटिंग सिस्टम फ़ाइलों को फ़ोल्डरों में रखता है जो एक पेड़ बनाते हैं, और पाथ ड्राइव से फ़ाइल तक का रास्ता है। अच्छे फ़ाइल प्रबंधन का मतलब: साफ़ नाम, सोची-समझी फ़ोल्डर योजना, सही ड्राइव (लोकल, बाहरी, नेटवर्क या क्लाउड), नियमित बैकअप (3-2-1 नियम), पुराने काम का आर्काइव और मैलवेयर से बचाव।
- कंप्यूटर नेटवर्क और इंटरनेट कैसे चलता है – नेटवर्क यानी आपस में जुड़े उपकरण जो डेटा बाँटते हैं। हर उपकरण का एक IP पता होता है। डेटा छोटे क्रमांकित पैकेटों में कटता है। राउटर हर पैकेट को एक-एक कदम उसके पते की ओर भेजते हैं, और TCP अंत में पैकेटों को क्रम से जोड़ता है। DNS वेबसाइट के नाम को IP पते में बदलता है। क्लाइंट माँगता है, सर्वर देता है। फ़ायरवॉल, पासवर्ड, अपडेट और एन्क्रिप्शन नेटवर्क को सुरक्षित रखते हैं।
- नेटवर्क कैसे बढ़े और डेटा कैसे चलता है – कंप्यूटर नेटवर्क जुड़े हुए उपकरणों का समूह है जो डेटा साझा करते हैं। नेटवर्किंग ARPANET (1969) से शुरू हुई, 1980 के दशक में विश्वविद्यालयों के लिए NSFNET बना, और दूसरे नेटवर्कों से जुड़कर इंटरनेट बना — नेटवर्कों का नेटवर्क। हर डेटा संचार के पाँच भाग हैं: प्रेषक, प्राप्तकर्ता, संदेश, संचार माध्यम और प्रोटोकॉल। बैंडविड्थ वह आवृत्ति-सीमा है जो चैनल ले जा सकता है (Hz में); डेटा दर प्रति सेकंड जाने वाले बिट (bps) हैं। नेटवर्क के हर उपकरण का IP एड्रेस होता है। डेटा सर्किट स्विचिंग (पहले पक्का रास्ता बुक) या पैकेट स्विचिंग (डेटा पैकेटों में कटकर अलग-अलग चलता है) से जाता है।
- साइबर अपराध और साइबर सुरक्षा – साइबर अपराध वह अपराध है जिसमें कंप्यूटर, फ़ोन या इंटरनेट साधन या निशाना हो। आम रूप: हैकिंग (बिना अनुमति सिस्टम में घुसना; एथिकल हैकर अनुमति से सुरक्षा जाँचते हैं), ईव्सड्रॉपिंग (चुपके से बातचीत पकड़ना), फ़िशिंग (नकली ईमेल, SMS या वेबसाइट जो पासवर्ड, OTP या कार्ड की जानकारी चुराएँ), रैंसमवेयर (फ़ाइलें बंद करके पैसे माँगने वाला मालवेयर), साइबर ट्रोल (भड़काने वाले अपमानजनक संदेश) और साइबर बुलिंग (ऑनलाइन परेशान करना, धमकाना, अपमानित करना)। मालवेयर: वायरस (फ़ाइलों से फैलता है), वर्म (अपने-आप फैलता है), ट्रोजन (उपयोगी दिखकर पिछला दरवाज़ा खोलता है), स्पाइवेयर और एडवेयर (अनचाहे पॉप-अप विज्ञापन)। सुरक्षित ब्राउज़िंग: https, अपडेट, एंटीवायरस, फ़ायरवॉल, अनजान लिंक नहीं। पहचान सुरक्षा: मज़बूत अलग-अलग पासवर्ड, टू-फ़ैक्टर ऑथेंटिकेशन, OTP कभी साझा नहीं, सोच-समझकर जानकारी देना, साझा उपकरण पर लॉग आउट।
2. Theoretical foundations
Information and processes · Alphabets and binary code · Information volume · Text encoding · Image and sound encoding
- सूचना सिद्धांत – सूचना वह चीज़ है जो अनिश्चितता को घटाती है। हम इसे बिट में मापते हैं: एक बिट एक सही हाँ/ना सवाल का जवाब है। अगर N नतीजे बराबर संभावना वाले हों तो सूचना I = log2 N बिट (हार्टले)। अगर संभावनाएँ अलग हों तो औसत सूचना H = −Σ p log2 p बिट (शैनन)। सूचना बनती है, संचित होती है, संसाधित होती है और चैनल से भेजी जाती है, जिसमें शोर आ सकता है।
- संख्या पद्धति और कूटन (Encoding) – संख्या पद्धति अंकों और आधार से संख्याएँ लिखने का तरीका है। दशमलव (आधार 10) में 0–9, बाइनरी (आधार 2) में 0 और 1, ऑक्टल (आधार 8) में 0–7, और हेक्साडेसिमल (आधार 16) में 0–9 और A–F। दशमलव से किसी आधार में: आधार से बार-बार भाग देकर शेष नीचे से ऊपर पढ़ें; भिन्न भाग के लिए आधार से गुणा करके पूर्णांक ऊपर से नीचे पढ़ें। दशमलव में: हर अंक × स्थानीय मान, फिर जोड़ें। बाइनरी ↔ ऑक्टल में 3 बिट के समूह, बाइनरी ↔ हेक्स में 4 बिट के। टेक्स्ट कूटन से रखा जाता है: ASCII (7 बिट, 128 अक्षर), ISCII (8 बिट, भारतीय लिपियाँ) और यूनिकोड (हर लिपि), जो UTF-8 (1–4 बाइट) या UTF-32 (4 बाइट) में सहेजा जाता है।
- डेटा निरूपण: कंप्यूटर संख्या, अक्षर, चित्र और आवाज़ कैसे रखता है – डेटा कच्चे तथ्य हैं; अर्थ मिलने पर वह सूचना (information) बनता है; जिस सूचना से हम काम ले सकें वह ज्ञान है। कंप्यूटर सारा डेटा बिट (0 या 1) में रखता है। 8 बिट = 1 बाइट; 1 kB = 1000 बाइट, 1 MB = 1000 kB, 1 GB = 1000 MB, 1 TB = 1000 GB। संख्याएँ बाइनरी में रहती हैं, जहाँ स्थानीय मान दोगुने होते जाते हैं: 1, 2, 4, 8… अक्षरों के लिए कैरेक्टर सेट होता है: ASCII में 'A' = 65; यूनिकोड में हर लिपि है। बिटमैप चित्र पिक्सेल का जाल है; साइज़ = चौड़ाई × ऊँचाई × कलर डेप्थ। ध्वनि के सैंपल लिए जाते हैं: साइज़ = सैंपल रेट × बिट डेप्थ × सेकंड। वेक्टर चित्र पिक्सेल की जगह आकृतियाँ रखता है। कम्प्रेशन फ़ाइल छोटी करता है: लॉसलेस हर बिट बचाता है, लॉसी कुछ बारीकी हटा देता है।
3. Information technologies
Text documents · Computer graphics · Multimedia presentations
- वर्ड प्रोसेसिंग: साफ़ और सुंदर दस्तावेज़ बनाना – वर्ड प्रोसेसर (जैसे LibreOffice Writer, Microsoft Word, Google Docs) एक प्रोग्राम है जिससे हम टेक्स्ट टाइप, एडिट, फ़ॉर्मेट, सेव और प्रिंट करते हैं। अक्षर फ़ॉर्मेटिंग से फ़ॉन्ट, साइज़, बोल्ड, रंग बदलते हैं; पैराग्राफ़ फ़ॉर्मेटिंग से अलाइनमेंट, लाइन स्पेसिंग, इंडेंट और लिस्ट; और पेज सेटअप व स्टाइल से पूरा दस्तावेज़। हेडिंग स्टाइल से विषय-सूची अपने-आप बनती है। टेबल, चित्र, हेडर-फ़ुटर, पेज नंबर, फ़ुटनोट, साइटेशन और संदर्भ-सूची जोड़ी जा सकती है, और मेल मर्ज से एक टेम्पलेट से कई निजी पत्र बनते हैं।
- डिजिटल प्रेज़ेंटेशन (Presentations) – डिजिटल प्रेज़ेंटेशन स्लाइडों का एक सेट है जो किसी बात को समझाते समय स्क्रीन पर दिखाया जाता है। अच्छी प्रेज़ेंटेशन पहले योजना से बनती है (उद्देश्य, श्रोता, स्टोरीबोर्ड)। हर स्लाइड पर एक विचार: छोटा शीर्षक, कुछ मुख्य शब्द, और मदद करने वाला चित्र, चार्ट या आरेख। एक-जैसा डिज़ाइन (स्लाइड मास्टर या थीम), अच्छा रंग कंट्रास्ट और बड़े अक्षर रखो। ग्राफ़िक्स, चार्ट, ऑडियो, वीडियो और हाइपरलिंक तभी जोड़ो जब वे संदेश में मदद करें, और दूसरों के चित्रों का स्रोत लिखो। ट्रांज़िशन और एनिमेशन कम रखो। अंत में स्पीकर नोट्स के साथ अभ्यास करो, स्लाइड शो चलाओ, और सही फ़ॉर्मेट (PDF, वीडियो, हैंडआउट) में साझा या प्रिंट करो।