Russia 11 класс Informatics (advanced)
अध्याय: 3
1. Theoretical foundations
Measuring information · Data compression · Error-correcting codes · Systems and models · Graphs and trees · Artificial intelligence
- सूचना सिद्धांत – सूचना वह चीज़ है जो अनिश्चितता को घटाती है। हम इसे बिट में मापते हैं: एक बिट एक सही हाँ/ना सवाल का जवाब है। अगर N नतीजे बराबर संभावना वाले हों तो सूचना I = log2 N बिट (हार्टले)। अगर संभावनाएँ अलग हों तो औसत सूचना H = −Σ p log2 p बिट (शैनन)। सूचना बनती है, संचित होती है, संसाधित होती है और चैनल से भेजी जाती है, जिसमें शोर आ सकता है।
- डेटा कंप्रेशन (Data Compression) – कंप्रेशन फ़ाइल को छोटा करता है, ताकि वह कम जगह ले और जल्दी भेजी जा सके। लॉसलेस कंप्रेशन (RLE, हफ़मैन, डिक्शनरी तरीके, ZIP, PNG) बिल्कुल वही मूल डेटा वापस देता है। लॉसी कंप्रेशन (JPEG, MP3, MP4) वह बारीकी हटाता है जो हमें मुश्किल से दिखती-सुनाई देती है; फ़ाइल बहुत छोटी होती है पर हटी बारीकी वापस नहीं आती। कंप्रेशन अनुपात = मूल साइज़ ÷ कंप्रेस्ड साइज़।
- कंप्यूटर सिमुलेशन – मॉडल किसी असली चीज़ का सरल रूप है जिसमें सिर्फ़ ज़रूरी बातें रहती हैं। कंप्यूटर सिमुलेशन उस मॉडल को समय के साथ कदम-दर-कदम चलाकर देखता है कि क्या होगा। इसमें चर (स्थिति), नियम (स्थिति कैसे बदलती है), पैरामीटर (हमारी चुनी संख्याएँ) और अक्सर संयोग होता है, इसलिए कई बार चलाकर औसत लेते हैं। असली आँकड़ों से मिलाकर जाँचते हैं (वैलिडेशन)। मौसम, ट्रैफ़िक, बीमारी, उड़ान प्रशिक्षण में इसका उपयोग होता है क्योंकि यह सस्ता, सुरक्षित और तेज़ है, पर उतना ही सही है जितना उसका मॉडल।
- ग्राफ़ सिद्धांत: बिंदु, रेखाएँ और नेटवर्क – ग्राफ़ शीर्षों (बिंदुओं) का समूह है जिन्हें किनारे (रेखाएँ) जोड़ते हैं। किसी शीर्ष की घात उसे छूने वाले किनारों की संख्या है, और सभी घातों का योग किनारों का दुगुना होता है। ऑयलर पथ हर किनारे का एक बार उपयोग करता है और तभी संभव है जब 0 या 2 शीर्ष विषम घात के हों। वृक्ष ऐसा जुड़ा ग्राफ़ है जिसमें चक्र नहीं और n − 1 किनारे हैं। भारित ग्राफ़ सड़कें और नेटवर्क दिखाते हैं; क्रुस्कल और प्रिम विधियाँ न्यूनतम विस्तृत वृक्ष ढूँढती हैं।
- उभरती प्रवृत्तियाँ: AI, IoT, क्लाउड और ब्लॉकचेन – उभरती प्रौद्योगिकियाँ वे नई तकनीकें हैं जो हमारे जीने और काम करने का तरीका बदल रही हैं। AI से मशीन समझदारी वाला काम करती है; मशीन लर्निंग से वह डेटा से सीखती है; NLP से वह इंसानी भाषा समझती है। AR असली दुनिया में आभासी चीज़ जोड़ता है, VR पूरी नई दुनिया दिखाता है। रोबोट महसूस करते, सोचते और काम करते हैं। IoT के सेंसर बिग डेटा बनाते हैं, जिसे स्मार्ट सिटी इस्तेमाल करती है। क्लाउड इंटरनेट से IaaS, PaaS, SaaS किराए पर देता है; ग्रिड कई कंप्यूटर जोड़कर बड़ा काम करता है। ब्लॉकचेन एक साझा रिकॉर्ड है जिसे चुपके से बदलना बहुत मुश्किल है।
2. Algorithms and programming
Theory of algorithms · Algorithms on numbers · Data structures · Graph algorithms · Dynamic programming · Object-oriented programming
- पायथन में स्टैक: जो आख़िर में आया, वह पहले निकला – स्टैक ऐसी डेटा संरचना है जिसमें आइटम केवल एक सिरे से जोड़े और हटाए जाते हैं, जिसे टॉप (शीर्ष) कहते हैं। यह LIFO नियम मानता है: Last In, First Out। जोड़ना push, हटाना pop, और बिना हटाए टॉप देखना peek है। ख़ाली स्टैक से pop करना अंडरफ़्लो है; भरे हुए तय आकार के स्टैक में push करना ओवरफ़्लो है। पायथन में लिस्ट स्टैक का काम करती है: append() अंत (टॉप) पर push करता है और pop() अंत से हटाता है।
- डायनामिक प्रोग्रामिंग (Dynamic Programming) – डायनामिक प्रोग्रामिंग (DP) बड़ी समस्या को हल करते समय हर छोटी उपसमस्या को केवल एक बार हल करके उत्तर सहेज लेती है। यह तब काम करती है जब उपसमस्याएँ दोहराती हों और बड़ा सबसे अच्छा उत्तर छोटे सबसे अच्छे उत्तरों से बने (इष्टतम उपसंरचना)। ऊपर से नीचे DP मेमोइज़ेशन है; नीचे से ऊपर DP तालिका भरती है। DP अक्सर घातांकी समय को बहुपद समय बना देती है।
3. Information technologies
Computer modelling · Databases · Web applications
- कंप्यूटर सिमुलेशन – मॉडल किसी असली चीज़ का सरल रूप है जिसमें सिर्फ़ ज़रूरी बातें रहती हैं। कंप्यूटर सिमुलेशन उस मॉडल को समय के साथ कदम-दर-कदम चलाकर देखता है कि क्या होगा। इसमें चर (स्थिति), नियम (स्थिति कैसे बदलती है), पैरामीटर (हमारी चुनी संख्याएँ) और अक्सर संयोग होता है, इसलिए कई बार चलाकर औसत लेते हैं। असली आँकड़ों से मिलाकर जाँचते हैं (वैलिडेशन)। मौसम, ट्रैफ़िक, बीमारी, उड़ान प्रशिक्षण में इसका उपयोग होता है क्योंकि यह सस्ता, सुरक्षित और तेज़ है, पर उतना ही सही है जितना उसका मॉडल।
- संबंधपरक डेटाबेस: तालिकाएँ, पंक्तियाँ, स्तंभ और कीज़ – डेटा को कई अलग फ़ाइलों में रखने से डेटा दोहराता है, कॉपियाँ आपस में मेल नहीं खातीं और खोजना कठिन होता है, इसलिए हम DBMS से चलने वाला डेटाबेस उपयोग करते हैं। संबंधपरक मॉडल में डेटा रिलेशन कहलाने वाली तालिकाओं में रहता है। स्तंभ एट्रिब्यूट है, पंक्ति ट्यूपल है, और किसी स्तंभ के मान्य मानों का समूह उसका डोमेन है। स्तंभों की संख्या डिग्री है; पंक्तियों की संख्या कार्डिनैलिटी। कैंडिडेट की वह स्तंभ (या समूह) है जो हर पंक्ति को अलग पहचान सके; चुनी गई प्राइमरी की है और बाकी अल्टरनेट की। फ़ॉरेन की एक तालिका का वह स्तंभ है जो दूसरी तालिका की प्राइमरी की की ओर इशारा करके उन्हें जोड़ता है।
- वेब सेवाएँ: वेबसाइट खोलने पर क्या होता है – वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) इंटरनेट पर रखे आपस में जुड़े वेब पेजों की व्यवस्था है, जिन्हें ब्राउज़र से खोलते हैं। वेब पेज HTML में लिखे जाते हैं, जो तय टैग से सामग्री दिखाता है; XML अपने बनाए टैग से डेटा रखता और ले जाता है। हर वेबसाइट का डोमेन नेम होता है, जैसे example.org, जिसे DNS IP एड्रेस में बदलता है। URL किसी एक संसाधन का पूरा पता है: प्रोटोकॉल, डोमेन और पाथ। वेबसाइट जुड़े वेब पेजों का समूह है। वेब ब्राउज़र पेज माँगकर दिखाता है; वेब सर्वर उन्हें रखकर भेजता है; वेब होस्टिंग ऐसे सर्वर पर जगह किराए पर लेना है ताकि साइट हमेशा ऑनलाइन रहे।