वर्ल्ड वाइड वेब (WWW)
वर्ल्ड वाइड वेब वेब पेजों का विशाल संग्रह है जो हाइपरलिंक से आपस में जुड़े हैं और इंटरनेट भर के कंप्यूटरों पर रखे हैं। इसे टिम बर्नर्स-ली ने 1989–91 में CERN में बनाया।
इंटरनेट नेटवर्क है (सड़कें और तार); वेब उस पर चलने वाली एक सेवा है (सड़कों किनारे की दुकानों जैसी)। ईमेल और VoIP उसी इंटरनेट पर दूसरी सेवाएँ हैं।
वेब तीन विचारों पर टिका है: HTML (पेज की भाषा), URL (हर पेज का पता) और HTTP (पेज माँगने-भेजने के नियम)।
HTML और XML
HTML (HyperText Markup Language) बताता है कि पेज कैसे दिखे। इसमें कोणीय कोष्ठक में तय टैग होते हैं, जैसे <h1>, <p>, <img>, <a href="…">।
<html>
<body>
<h1>My School</h1>
<p>Welcome!</p>
</body>
</html>XML (eXtensible Markup Language) डेटा रखने और ले जाने के लिए है। टैग आप ख़ुद बनाते हैं, और हर टैग बंद होना चाहिए।
<student> <roll>7</roll> <name>Asha</name> </student>
| HTML | XML |
|---|---|
| डेटा दिखाता है | डेटा रखता और ले जाता है |
| टैग तय (पहले से बने) | अपने टैग ख़ुद बनाते हैं |
| केस-सेंसिटिव नहीं; कुछ टैग बंद करने ज़रूरी नहीं | केस-सेंसिटिव; हर टैग बंद हो |
| ब्राउज़र अक्सर गलतियाँ अनदेखी करते हैं | सही ढाँचा (well-formed) न हो तो चलता नहीं |
डोमेन नेम और DNS
IP एड्रेस याद रखना कठिन है, इसलिए वेबसाइटों को डोमेन नेम मिलता है, पढ़ने में आसान नाम जैसे ncert.nic.in या wikipedia.org।
- आख़िरी भाग टॉप-लेवल डोमेन (TLD) है। सामान्य:
.com(व्यापार),.org(संगठन),.edu(शिक्षा),.gov(सरकार),.net(नेटवर्क)। देश-कोड:.in(भारत),.jp(जापान),.uk। - बाईं ओर के भाग उप-डोमेन हैं:
www.cbse.gov.inमेंinTLD,govदूसरा स्तर,cbseसंस्था औरwwwवेब सर्वर।
डोमेन नेम सिस्टम (DNS) दुनिया भर के सर्वरों का समूह है जो डोमेन नेम को IP एड्रेस में बदलता है, जैसे फ़ोन-बुक नाम से नंबर देती है। इसे नेम रिज़ॉल्यूशन कहते हैं।
URL: यूनिफ़ॉर्म रिसोर्स लोकेटर
URL वेब पर किसी एक संसाधन (पेज, चित्र, फ़ाइल) का पूरा पता है।
https://www.example.org/class12/notes.html
https://— प्रोटोकॉल (कैसे लाना है)www.example.org— डोमेन नेम (कौन-सा सर्वर)/class12/notes.html— पाथ (सर्वर पर फ़ोल्डर और फ़ाइल)
Absolute URL में सब भाग होते हैं। Relative URL जैसे notes.html या ../images/logo.png साइट के अंदर उपयोग होता है और मौजूदा पेज की जगह से समझा जाता है।
डोमेन नेम URL का केवल एक भाग है।
वेबसाइट, वेब पेज, वेब ब्राउज़र, वेब सर्वर
- वेब पेज: वेब का एक दस्तावेज़, आम तौर पर HTML फ़ाइल, जिसमें टेक्स्ट, चित्र और लिंक होते हैं।
- वेबसाइट: एक डोमेन के अंतर्गत आपस में जुड़े संबंधित वेब पेजों का समूह, जो होम पेज से शुरू होता है। स्थिर (static) साइटें सबको एक ही सामग्री दिखाती हैं; गतिशील (dynamic) साइटें उसी समय पेज बनाती हैं (जैसे आपके बैंक खाते का पेज)।
- वेब ब्राउज़र: सॉफ़्टवेयर जो वेब पेज माँगकर दिखाता है: Chrome, Firefox, Edge, Safari। यह HTML पढ़ता, चित्र दिखाता, स्क्रिप्ट चलाता, हिस्ट्री, बुकमार्क और कुकी रखता है। ऐड-ऑन/प्लग-इन नई सुविधाएँ जोड़ते हैं।
- वेब सर्वर: कंप्यूटर (और Apache या Nginx जैसा सॉफ़्टवेयर) जो वेबसाइट की फ़ाइलें रखता है और ब्राउज़र के माँगने पर HTTP/HTTPS से भेजता है। यह हमेशा चालू रहता है और इसका IP एड्रेस तय होता है।
वेब होस्टिंग
वेब होस्टिंग वह सेवा है जो आपकी वेबसाइट की फ़ाइलें 24×7 इंटरनेट से जुड़े वेब सर्वर पर रखती है, ताकि कोई भी उसे खोल सके। आप होस्टिंग प्रदाता को जगह, स्पीड और सुरक्षा के पैसे देते हैं।
वेबसाइट ऑनलाइन करने के कदम:
- पेज बनाइए (HTML, चित्र आदि)।
- रजिस्ट्रार से डोमेन नेम ख़रीदिए (पंजीकृत कीजिए)।
- वेब सर्वर पर होस्टिंग जगह ख़रीदिए।
- फ़ाइलें अपलोड कीजिए (अक्सर FTP से)।
- DNS में डोमेन नेम को सर्वर के IP एड्रेस से जोड़िए।
प्रकार: शेयर्ड होस्टिंग (एक सर्वर पर कई साइटें, सस्ती), डेडिकेटेड होस्टिंग (एक साइट के लिए पूरा सर्वर) और क्लाउड होस्टिंग (कई सर्वरों पर फैली)।
करके देखें: URL के टुकड़े कीजिए
अपनी उपयोग की तीन वेबसाइटें खोलिए। हर एक का URL एड्रेस बार से कॉपी करके प्रोटोकॉल, डोमेन नेम और पाथ में बाँटिए। TLD बताइए और कहिए कि वह सामान्य है या देश-कोड। फिर पेज पर राइट-क्लिक करके "View page source" चुनिए: आप वही HTML देख रहे हैं जो वेब सर्वर ने भेजा। 3D के आख़िरी कदम में URL बनाकर उसकी यात्रा देखिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- URL = प्रोटोकॉल :// डोमेन नेम / पाथ
- DNS: डोमेन नेम → IP एड्रेस
- HTML डेटा दिखाए (तय टैग) · XML डेटा रखे/ले जाए (अपने टैग)
- ब्राउज़र माँगे (क्लाइंट) → वेब सर्वर दे · होस्टिंग = सर्वर की जगह किराए पर
हल किए गए उदाहरण
1. https://www.cbse.gov.in/results/index.html को भागों में बाँटिए।
प्रोटोकॉल: https। डोमेन नेम: www.cbse.gov.in (TLD .in)। पाथ: /results/index.html (फ़ोल्डर results, फ़ाइल index.html)।
2. कौन सामान्य और कौन देश-कोड: .org, .in, .edu, .jp, .gov?
सामान्य: .org, .edu, .gov। देश-कोड: .in (भारत), .jp (जापान)।
3. 'Python Basics' शीर्षक और 350 कीमत वाली किताब का XML लिखिए।
<book> <title>Python Basics</title> <price>350</price> </book> — टैग हमने बनाए, और हर टैग बंद है।
4. वेबसाइट खोलने पर होने वाली बातें क्रम से लगाइए: सर्वर HTML भेजता है, ब्राउज़र पेज दिखाता है, DNS IP ढूँढता है, आप URL लिखते हैं, ब्राउज़र HTTP अनुरोध भेजता है।
URL लिखना → DNS IP ढूँढे → ब्राउज़र HTTP अनुरोध भेजे → सर्वर HTML भेजे → ब्राउज़र पेज दिखाए।
5. एक छात्रा ने अपने लैपटॉप पर वेबसाइट बनाई। दोस्त उसे क्यों नहीं खोल पाते, और उसे क्या चाहिए?
उसका लैपटॉप हमेशा ऑनलाइन, तय सार्वजनिक पते वाला सर्वर नहीं है। उसे वेब होस्टिंग (वेब सर्वर पर जगह) और उससे जुड़ा डोमेन नेम चाहिए।
6. 'google.com' URL है या डोमेन नेम?
यह डोमेन नेम है। पूरे URL में प्रोटोकॉल (और शायद पाथ) भी होता है, जैसे https://google.com/maps।
आम गलतियाँ
- इंटरनेट और WWW को एक कहना; वेब इंटरनेट पर एक सेवा है।
- डोमेन नेम को URL कहना; डोमेन URL का केवल एक भाग है।
- सोचना कि XML, HTML की जगह लेता है; XML डेटा ले जाता है, HTML दिखाता है।
- वेब ब्राउज़र (क्लाइंट सॉफ़्टवेयर) और वेब सर्वर (पेज रखने-भेजने वाला कंप्यूटर) मिलाना।