Netherlands HAVO 5 (eindexamenjaar) Visual arts (art, drawing, crafts, textile design)
अध्याय: 2
1. Art history periods (part 2)
Modernism (1900-1945) · Post-war art (1945-1990) · Art since 1990
- आधुनिक कला और आधुनिकतावाद – लगभग 1880 से 1945 के बीच कलाकारों ने यथार्थ की नकल छोड़कर पूछा कि कला खुद क्या कर सकती है। रंग और ब्रश ने भाव दिखाए (उत्तर-प्रभाववाद, अभिव्यंजनावाद); वस्तु कई ओर से दिखी (घनवाद); गति और मशीन का जश्न मना (भविष्यवाद); कला शुद्ध आकार और रंग बनी (अमूर्तन, डी स्टाइल, रचनावाद); संयोग और सपने आए (दादा, अतियथार्थवाद); और डिज़ाइन कार्य के पीछे चला (बाउहाउस, आधुनिक आंदोलन)। संगीत, रंगमंच और नृत्य में भी यही बदलाव हुआ, और आदान-प्रदान से आधुनिकता भारत समेत पूरी दुनिया में फैली।
2. CE theme: Art changes!
Theme "Art changes!": inclusive art world · Theme: art, science and technology · Theme: art in a changing context · Theme: changing idea of art
- कला और तकनीक: नए आविष्कार कला को कैसे बदलते हैं – नई तकनीक ने कला को बार-बार बदला है। छापाख़ाने (लगभग 1450) से एक चित्र की कई प्रतियाँ बनने लगीं, तो कला आम लोगों तक पहुँची। धातु की ट्यूब में रंग (1841) से चित्रकार बाहर जाकर पेंट करने लगे। फ़ोटोग्राफ़ी (1839) ने हूबहू नक़ल का काम ले लिया, तो चित्रकला रंग, भावना और देखने के नए तरीक़ों की ओर मुड़ी। सिनेमा (1895) ने समय और गति जोड़ी। कंप्यूटर (1960 से, 1980 के बाद आम) से डिजिटल, इंटरनेट और अब AI कला आई, जहाँ कॉपी मुफ़्त है और कलाकृति दर्शक के साथ बदल सकती है। कलाकार विज्ञान का भी उपयोग करते हैं: परिप्रेक्ष्य (ज्यामिति), रंग-सिद्धांत (प्रकाश और प्रिज़्म), नए पदार्थ, और आज 'कलात्मक शोध'। हर नया औज़ार सवाल उठाता है: मौलिक क्या है, लेखक कौन है, कला किसलिए है?
- सार्वजनिक कला: हम सबकी साझा जगहों की कला – सार्वजनिक कला वह कला है जो साझा जगहों पर हो — चौक, पार्क, सड़क, स्टेशन और दीवारें — जहाँ कोई भी बिना टिकट देख सके। इसमें स्मारक और मूर्तियाँ, भित्ति-चित्र (म्यूरल), भ्रम-चित्र (trompe-l'oeil, जो नक़ली गहराई से आँख को धोखा दे), स्ट्रीट आर्ट और ग्रैफ़िटी, किसी एक जगह के लिए बनी स्थल-विशेष कला, अस्थायी इंस्टॉलेशन और शहरी हस्तक्षेप, और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर बनी सामुदायिक कला आती है। सार्वजनिक कला इतिहास याद दिला सकती है, जगह को सुंदर बना सकती है, मोहल्ले की कहानी कह सकती है, बहस छेड़ सकती है या सामाजिक बदलाव ला सकती है। क्योंकि यह सबकी जगह पर है, सवाल उठते हैं: फ़ैसला कौन करे, पैसा कौन दे, क्या यह क़ानूनी है, और क्या लोग इसे अपना मानते हैं? कला को जगहें भी चाहिए: संग्रहालय, गैलरी और कला के लिए बनी इमारतें, साथ ही गलियाँ और इंटरनेट।
- कला का दर्शन: कला क्या है, और क्यों ज़रूरी है? – कला का दर्शन (सौंदर्यशास्त्र का हिस्सा) पूछता है: कला क्या है, सुंदरता क्या है, क्या रुचि सिर्फ़ निजी है, रचनाकार कौन है, और क्या कला सच दिखा सकती है? जवाब बदलते रहे हैं: "कला प्रकृति की नक़ल है" से "कला भावना है" तक और "विचार ही कला है" तक।