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विकलांगता को समझें: बाधाएँ, सहारा और अधिकार

विकलांगता (disability) शरीर, इंद्रियों या मन में लंबे समय का फ़र्क़ है। जब यह फ़र्क़ दुनिया की बाधाओं (सीढ़ी, बिना कैप्शन की सूचना, बुरी सोच, साधनों की कमी) से मिलता है, तो कुछ काम कठिन हो जाते हैं। बाधा हटाओ और सही सहारा दो, तो व्यक्ति स्कूल, काम और परिवार में बराबरी से भाग ले सकता है। दिव्यांगजन के अधिकार बराबर हैं और अपने फ़ैसले वे खुद लें।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. यह आशा है। उसके पैर अलग तरह से काम करते हैं, इसलिए वह व्हीलचेयर इस्तेमाल करती है। उसके सामने एक भवन है।
  2. दरवाज़े के आगे सीढ़ियाँ हैं। आशा को रोकने वाली उसकी व्हीलचेयर नहीं, ये सीढ़ियाँ हैं। यही बाधा है।
  3. बाधाएँ चार तरह की हैं: सीढ़ी, बिना कैप्शन की सूचना, "तुम नहीं कर सकते" वाली सोच और ज़रूरी साधन का न होना।
  4. ढलान (रैंप) बन गई। आशा अपने आप अंदर पहुँच गई। बाधा हटी तो वह भाग ले सकी।
  5. रोज़ के काम हैं: खाना, चलना-फिरना, नहाना, कपड़े पहनना और बात करना। सही सहारा हो तो हर काम हो सकता है।
  6. अब बटन दबाएँ और हर बाधा हटाएँ। "भागीदारी" की पट्टी 0 से 100% तक बढ़ती देखें।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

क्या व्हीलचेयर समस्या है?

नहीं। कुर्सी तो आज़ादी देने वाला साधन है। समस्या सीढ़ियाँ और दूसरी बाधाएँ हैं।

हम क्यों कहते हैं कि कठिनाई सीढ़ी से है, व्यक्ति से नहीं?

आशा अंदर इसलिए नहीं जा सकी क्योंकि रास्ता सीढ़ियों का था। रैंप दो तो वह चली जाती है।

क्या सोच भी बाधा होती है?

हाँ। "तुम नहीं कर सकते" की दीवार लोगों को बुलाए जाने, नौकरी या पढ़ाई से रोकती है, भले इमारतें ठीक हों।

बाधा हटने पर क्या अक्षमता खत्म हो जाती है?

नहीं। आशा अब भी व्हीलचेयर इस्तेमाल करती है, पर अब वह भाग ले सकती है। फ़र्क़ बाधा ने डाला, उसके शरीर ने नहीं।

क्या दिव्यांगजन को हर काम में मदद चाहिए?

नहीं। ज़्यादातर काम वे खुद करते हैं। सहारा वहीं दिया जाता है जहाँ ज़रूरत हो। देखो, सिर्फ़ उन्हीं कामों की टाइलें हरी होती हैं जिन्हें साधन मिलता है।

कौन सा हल सबसे ज़रूरी है?

चारों ज़रूरी हैं। खुले खेल में एक-एक हटाओ और पट्टी को 25% की सीढ़ियों में बढ़ते देखो।

विकलांगता क्या है?

हर शरीर और मन थोड़ा अलग होता है। अक्षमता (impairment) शरीर, इंद्रियों या मन में लंबे समय का फ़र्क़ या कमी है। जैसे चल न पाना, देख या सुन न पाना, सीखने में ज़्यादा समय लगना या तेज़ भावनाओं को सँभालने में कठिनाई।

विकलांगता (disability) तब बनती है जब अक्षमता किसी बाधा (barrier) से टकराती है। इसे ऐसे याद रखें:

अक्षमता + बाधा = विकलांगता

उदाहरण: जो चल नहीं सकता, उसके सामने सीढ़ियाँ हैं। सीढ़ी बाधा है। रैंप बन जाए तो बाधा हट जाती है और वह आसानी से अंदर जाता है।

दोनों काम की हैं। दवा और अभ्यास मदद करते हैं, पर सामाजिक नज़र याद दिलाती है कि इमारतें, नियम और सोच भी बदली जा सकती हैं।

तथ्य: दुनिया में लगभग 6 में से 1 व्यक्ति किसी बड़ी विकलांगता के साथ जीता है (विश्व स्वास्थ्य संगठन)। कुछ जन्म से होती हैं, कुछ दुर्घटना या बीमारी से और कई बुढ़ापे में आती हैं। कुछ दिखती हैं, कुछ अदृश्य होती हैं, जैसे कम सुनाई देना, मिर्गी, लंबे समय का दर्द या मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति।

विकलांगता के प्रकार और रोज़ का जीवन

विकलांगताओं को इस आधार पर बाँटते हैं कि क्या प्रभावित है। एक व्यक्ति में एक से ज़्यादा भी हो सकती हैं।

रोज़ के काम (daily functioning)। विशेषज्ञ देखते हैं कि व्यक्ति रोज़ क्या कर पाता है। बुनियादी काम: खाना, चलना-फिरना, नहाना, कपड़े पहनना, शौच, बात करना। आगे के काम: खाना बनाना, खरीदारी, पैसे सँभालना, फ़ोन चलाना, यात्रा। जहाँ कोई काम कठिन हो, वहाँ पूछो: कौन सा साधन या सहायक इसे संभव बनाएगा? जैसे मोटे हैंडल वाला चम्मच, बाथरूम में पकड़ने की रेलिंग, बोलने वाला फ़ोन, खरीदारी में साथी।

लक्ष्य है सम्मान के साथ आत्मनिर्भरता: जितना खुद कर सको करो, मदद वहीं लो जहाँ चाहो।

बाधाएँ और सहारा

बाधाएँ आम तौर पर चार तरह की होती हैं।

  1. भौतिक: सीढ़ियाँ, तंग दरवाज़े, ऊँचे काउंटर, टूटे फ़ुटपाथ।
  2. जानकारी की: बिना कैप्शन की सूचना, ऐसी वेबसाइट जिसे स्क्रीन रीडर न पढ़ सके, बहुत छोटे अक्षरों वाले फ़ॉर्म।
  3. सोच की: दया, घूरना, कम उम्मीद, "यह नहीं कर पाएगा", बच्चे को खेल से बाहर रखना।
  4. नियम और व्यवस्था की: परीक्षा में अतिरिक्त समय नहीं, नौकरी में ऐसी शर्त जो असल में ज़रूरी नहीं, सहारे के लिए पैसा नहीं।

इन्हीं के मुताबिक चार तरह के सहारे हैं: रैंप और लिफ़्ट, कैप्शन, ब्रेल और सांकेतिक भाषा, सम्मान और ऊँची उम्मीद, और साधन व सहायक, जैसे व्हीलचेयर, श्रवण-यंत्र, स्क्रीन रीडर और निजी सहायक।

उचित समायोजन (reasonable accommodation) का मतलब किसी एक व्यक्ति के लिए उचित बदलाव, जैसे परीक्षा में अतिरिक्त समय। सार्वभौमिक डिज़ाइन (universal design) का मतलब शुरू से ऐसा बनाना कि सब इस्तेमाल कर सकें, जैसे रैंप जो बच्चा-गाड़ी वालों और भारी सामान वालों के भी काम आता है।

दिव्यांगजन का जीवन और अधिकार

दिव्यांगजन स्कूल जाते हैं, काम करते हैं, शादी करते हैं, खेलते हैं, कला बनाते हैं, वोट देते हैं और कारोबार चलाते हैं। बाधाएँ हटें तो उनका जीवन भी उतना ही भरा-पूरा होता है। आम कठिनाइयाँ हैं: स्कूल या काम तक न पहुँच पाना, कम वेतन, अकेलापन और बच्चे जैसा व्यवहार।

अधिकार। संयुक्त राष्ट्र का दिव्यांगजन अधिकार अभिसमय (CRPD, 2006) कहता है कि दिव्यांगजन को शिक्षा, काम, स्वास्थ्य सेवा, परिवार और अपने फ़ैसलों में बराबर अधिकार हैं। कई देशों के अपने कानून हैं: जैसे भारत का दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 (इसमें 21 प्रकार की दिव्यांगता गिनी गई हैं और शिक्षा व नौकरी में सहारा है) और जापान का 2016 का कानून जो विकलांगता के आधार पर भेदभाव रोकता है। कानून अलग हैं, पर बात एक है: बराबर मौका और भेदभाव नहीं।

स्वतंत्र जीवन (independent living) का मतलब है ज़रूरी सहारे के साथ अपने फ़ैसले खुद लेना कि कहाँ और कैसे रहें। इस आंदोलन का नारा है: "हमारे बारे में हमारे बिना कुछ नहीं।"

अच्छे साथी या सहायक कैसे बनें।

खुद करके देखें

3D में: आख़िरी चरण में रैंप, कैप्शन, सम्मान और साधन के बटन एक-एक करके दबाएँ। कौन सा बटन आशा को आगे बढ़ाता है? कौन से बटन सिर्फ़ "भागीदारी" की पट्टी बढ़ाते हैं? देखें हर टाइल (खाना, चलना, नहाना, कपड़े, बात) हरी होने के लिए क्या माँगती है।

घर या स्कूल में: अपने स्कूल का "बाधा नक्शा" बनाओ। सीढ़ियाँ, तंग दरवाज़े, छोटे अक्षरों की सूचना और बैठने की जगह की कमी चिह्नित करो। फिर हर एक का एक हल लिखो। किसी की फ़ोटो बिना पूछे न खींचो।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. आपकी कक्षा में एक बधिर लड़की आई है। दो बाधाएँ और दो सहारे बताइए।

बाधाएँ: शिक्षक बोर्ड की तरफ़ मुँह करके बोलें (वह होंठ नहीं पढ़ पाती), बिना कैप्शन के वीडियो। सहारे: कैप्शन या सांकेतिक भाषा का सहायक, शिक्षक कक्षा की ओर मुँह करके बोलें और मुख्य बातें बोर्ड पर लिखें, साथी उसे कंधा थपथपाकर बुलाएँ।

2. भौतिक, जानकारी या सोच की बाधा में बाँटिए: (क) दुकान के दरवाज़े पर सीढ़ी, (ख) बस-स्टॉप जो समय सिर्फ़ आवाज़ से बताता है, (ग) "यह नौकरी नहीं कर पाएगा।"

(क) भौतिक, (ख) जानकारी की (बधिर सुन नहीं सकता, स्क्रीन भी लगाओ), (ग) सोच की।

3. श्री राव को लकवा (stroke) हुआ और अब कपड़े पहनना और खाना बनाना कठिन है। वे आत्मनिर्भर कैसे रहें?

पहले देखो कौन से काम कठिन हैं (कपड़े, खाना)। आसान साधन लो: बड़े बटन या वेल्क्रो वाली कमीज़, रसोई में स्टूल, बंद होने वाले हैंडल का बर्तन, भारी काम के लिए ही सहायक। चिकित्सक के साथ अभ्यास करें। उनसे पूछें कि कौन सी मदद चाहिए, क्योंकि जीवन उनका है।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. विकलांगता तब बनती है जब:
2. रैंप किस बाधा का सहारा है?
3. इनमें से रोज़ का काम कौन सा है?
4. किसी की मदद से पहले सबसे अच्छा पहला कदम है:
5. "हमारे बारे में हमारे बिना कुछ नहीं" का मतलब है:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अक्षमता (impairment) और विकलांगता (disability) में क्या फ़र्क़ है?

अक्षमता शरीर या मन का फ़र्क़ है। विकलांगता वह कठिनाई है जो उस फ़र्क़ के बाधा से मिलने पर बनती है। रैंप बाधा हटा सकता है, भले अक्षमता बनी रहे।

क्या सब विकलांगताएँ हमेशा के लिए होती हैं?

नहीं। कुछ जीवनभर की होती हैं, कुछ महीनों की (जैसे पैर की हड्डी टूटना) और कुछ आती-जाती रहती हैं। बुढ़ापे में कई लोगों को विकलांगता हो जाती है।

दिव्यांग सहपाठी का अच्छा दोस्त कैसे बनूँ?

उसे शामिल करो, पूछो कि क्या चाहिए, सीधे उससे बात करो, सम्मान के शब्द बोलो और माँगने पर ही मदद करो। कोई चिढ़ाए तो शिक्षक को बताओ।

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