परिभाषा क्या होती है?
परिभाषा बताती है कि किसी शब्द का मतलब क्या है। जब दो लोग एक ही शब्द अलग-अलग मतलब में बोलते हैं, तो बात नहीं बनती। साफ़ परिभाषा इसे ठीक करती है।
हर परिभाषा के तीन भाग होते हैं:
- परिभाषेय (definiendum): वह शब्द जिसे समझाना है, जैसे 'घन'।
- योजक (connector): जोड़ने वाला छोटा शब्द, जैसे 'है', 'का अर्थ है'।
- परिभाषक (definiens): समझाने वाले शब्द, जैसे 'छह बराबर वर्ग-फलकों वाला ठोस'।
वाक्य का रूप: परिभाषेय + योजक + परिभाषक।
परिभाषा के चार प्रकार
1. शास्त्रीय परिभाषा। पहले बड़ा समूह (जाति, genus) बताओ, फिर उस समूह में इस चीज़ की ख़ास बात (विभेदक, differentia)। 'त्रिभुज एक बंद आकृति (समूह) है जिसकी तीन भुजाएँ हैं (फ़र्क़)।'
2. दिखाकर (ostensive) परिभाषा। उदाहरण की ओर इशारा करना। 'लाल रंग यह है।' छोटा बच्चा 'कुत्ता' ऐसे ही सीखता है। इशारा साफ़ न हो तो कमज़ोर है: 'यह' का मतलब रंग है, आकार है या चीज़?
3. गिनाकर (enumerative) परिभाषा। सभी सदस्यों की सूची देना। 'भारत के राष्ट्रीय चिह्न हैं ध्वज, प्रतीक और गान।' यह तभी चलती है जब सूची छोटी और पूरी हो।
4. संदर्भ वाली (contextual) परिभाषा। शब्द को अकेले नहीं समझाते, बल्कि उस शब्द वाले पूरे वाक्य का मतलब बताते हैं। 'वह कुँवारा है' का मतलब 'वह अविवाहित पुरुष है'। विज्ञान में यह तब काम आती है जब शब्द किसी वाक्य या सूत्र के भीतर ही अर्थ पाता है।
परिभाषा की ग़लतियाँ
अपर्याप्तता (ग़लत नाप)। परिभाषा ग़लत चीज़ें पकड़ लेती है।
- बहुत चौड़ी: ऐसी चीज़ें अंदर आ जाती हैं जो नहीं होनी चाहिए। 'पक्षी वह जानवर है जो उड़ता है।' चमगादड़ और मधुमक्खी भी उड़ती हैं।
- बहुत तंग: असली सदस्य बाहर रह जाते हैं। वही परिभाषा, पेंगुइन और शुतुरमुर्ग पक्षी हैं पर उड़ते नहीं।
अज्ञात से अज्ञात की व्याख्या (ignotum per ignotum), लैटिन में 'अनजाने को अनजाने से'। समझाने वाले शब्द शब्द से भी कठिन हैं। 'दीपक यानी प्रकाशोत्सर्जक उपकरण।' अब दूसरा शब्दकोश चाहिए।
चक्रीयता (गोल-गोल)। शब्द अपनी ही परिभाषा में आ जाता है। 'शिक्षक वह है जो शिक्षा देता है।' या चक्कर: 'साहसी यानी जो डरपोक न हो', 'डरपोक यानी जो साहसी न हो'।
करके देखो: परिभाषा बनाओ और जाँचो
3D में बहुत चौड़ी, बहुत तंग और गोल-गोल बटन दबाओ और गिनो कितने आकार अंदर आते हैं। फिर घर पर: 'कुर्सी' की एक वाक्य में परिभाषा लिखो और उसे स्टूल, सोफ़े और पेड़ के ठूँठ पर जाँचो। क्या वह चौड़ी है या तंग? ठीक करो और फिर जाँचो। दार्शनिक भी इसी तरह, कठिन उदाहरण से परख कर परिभाषाएँ सुधारते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- परिभाषा = परिभाषेय + योजक + परिभाषक
- शास्त्रीय परिभाषा = जाति (बड़ा समूह) + विभेदक (ख़ास बात)
- बहुत चौड़ी: परिभाषक ऐसी चीज़ें भी पकड़ता है जो परिभाषेय नहीं हैं
- बहुत तंग: परिभाषक परिभाषेय के कुछ असली सदस्य छोड़ देता है
- चक्रीय: परिभाषेय (या उस पर निर्भर शब्द) परिभाषक में आ जाता है
हल किए गए उदाहरण
1. 'वर्ग वह आयत है जिसकी चारों भुजाएँ बराबर हैं' के तीन भाग बताओ।
परिभाषेय: वर्ग। योजक: 'है'। परिभाषक: 'वह आयत जिसकी चारों भुजाएँ बराबर हैं'। यह शास्त्रीय परिभाषा है: जाति = आयत, फ़र्क़ = चारों भुजाएँ बराबर।
2. 'स्वर हैं अ, इ, उ, ए, ओ' किस प्रकार की परिभाषा है?
गिनाकर (enumerative)। इसमें समूह के सभी सदस्यों की सूची दी गई है।
3. शिक्षक कहता है, 'आम वह फल है जो पीला होता है।' यह बहुत चौड़ी है या तंग? क्यों?
दोनों। चौड़ी: केला और नींबू पीले फल हैं पर आम नहीं। तंग: कच्चे आम हरे होते हैं, इसलिए असली आम छूट गए।
4. 'न्याय यानी न्यायी होने की अवस्था।' कौन-सी ग़लती है?
चक्रीयता। 'न्यायी' और 'न्याय' एक ही शब्द-परिवार के हैं, इसलिए परिभाषक को समझने के लिए परिभाषेय पहले से चाहिए।
5. बच्चे को बताया गया, 'प्रकाश-संश्लेषण यानी हरित-लवक वाले जीवों द्वारा कार्बन का स्वपोषी उपचयी स्वांगीकरण।' क्या दिक़्क़त है?
अज्ञात से अज्ञात। समझाने वाले शब्द शब्द से भी कठिन हैं। बेहतर: 'वह तरीका जिससे हरे पौधे धूप, पानी और कार्बन डाइऑक्साइड से अपना भोजन बनाते हैं'।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि परिभाषा सिर्फ़ शब्दकोश का वाक्य होती है। इशारा करना और सूची देना भी परिभाषाएँ हैं।
- उसी परिवार के शब्द से परिभाषा देना ('चलने वाला वह है जो चलता है')।
- परिभाषा को सिर्फ़ आसान उदाहरणों पर परखना। हमेशा कोई कठिन उदाहरण आज़माओ जो अंदर घुस सकता है या बाहर छूट सकता है।
- यह मानना कि छोटी परिभाषा हमेशा अच्छी होती है। परिभाषा उतनी लंबी हो जितनी चौड़ी या तंग होने से बचने के लिए ज़रूरी है।