घर के (रिहायशी) बगीचे
घर का बगीचा आम तौर पर हिस्सों में बँटता है: आगे (स्वागत, रास्ता, फूल), बगल (आना-जाना, छाया के पेड़) और पीछे (बैठना, खेल, सब्ज़ी)। ऊँचे पेड़ दीवार और पाइप से दूर लगाइए। फाटक से दरवाज़े तक साफ़ रास्ता रखिए।
छत की हरियाली
छत का बगीचा सोच-समझकर बनाना पड़ता है। छत इतनी मज़बूत हो कि गीली मिट्टी का वज़न सह सके। नीचे से ऊपर परतें: जलरोधी परत, नाली की परत, हल्की मिट्टी, पौधे। कम गहरी जड़ वाले पौधे चुनिए। छत का बगीचा इमारत को ठंडा भी रखता है।
दीवार और घर के अंदर की हरियाली
हरी दीवारें तारों पर चढ़ती बेलों या मिट्टी भरे पैनलों से बनती हैं। इन्हें ज़मीन कम चाहिए, दीवार ठंडी रहती है और पानी नियमित चाहिए।
घर के पौधों को काफ़ी रोशनी, छेद वाला गमला और कम पानी चाहिए। इन्हें खिड़की के पास रखिए।
दूसरे तरह की हरियाली
हरियाली सड़क किनारे (सड़क के पेड़), स्कूल के मैदान, कारख़ानों के आसपास, पार्किंग और आँगनों में भी लग सकती है। नियम वही: पौधे रोशनी, मिट्टी, पानी और उपयोग से मिलाइए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मिट्टी का वज़न = क्षेत्रफल x मोटाई x घनत्व
- छत की परतें (नीचे से ऊपर): जलरोधी, नाली, मिट्टी, पौधे
- हरित आच्छादन (%) = हरा क्षेत्रफल / कुल क्षेत्रफल x 100
- बगीचे के हिस्से: आगे, बगल, पीछे
हल किए गए उदाहरण
1. छत के बगीचे में 10 m2 मिट्टी 0.15 m मोटी है। मिट्टी का घनत्व 1200 kg प्रति m3 है। मिट्टी का वज़न निकालिए।
आयतन = 10 x 0.15 = 1.5 m3। वज़न = 1.5 x 1200 = 1800 kg।
2. छत के बगीचे में जलरोधी परत क्यों चाहिए?
वरना पानी छत से रिसकर इमारत के अंदर आ जाएगा।
3. हरी दीवार लगाने के दो कारण बताइए।
इसे बहुत कम ज़मीन चाहिए और यह दीवार तथा पीछे के कमरों को ठंडा रखती है।
आम गलतियाँ
- छत की मज़बूती जाँचे बिना भारी मिट्टी डाल देना।
- नाली की परत छोड़ देना। रुका पानी जड़ें सड़ाता है और रिस सकता है।
- बड़ा पेड़ घर की दीवार या पाइप के पास लगाना।
- घर के पौधों को बहुत पानी देना या अँधेरे कोने में रखना।