कंपास से दिशा पहचानना
कंपास (दिक्सूचक) में एक छोटा चुंबक यानी सुई होती है। पृथ्वी एक बड़े चुंबक जैसी है, इसलिए सुई घूमकर चुंबकीय उत्तर की ओर रुक जाती है। लाल सिरा उत्तर बताता है।
चार मुख्य दिशाएँ घड़ी की दिशा में हैं: उत्तर (N), पूर्व (E), दक्षिण (S), पश्चिम (W)। इनके बीच उत्तर-पूर्व, दक्षिण-पूर्व, दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पश्चिम आते हैं।
कंपास कैसे इस्तेमाल करें: उसे सपाट पकड़ो, धातु और फ़ोन से दूर। सुई का काँपना रुकने दो। डायल को तब तक घुमाओ जब N लाल सुई से मिल जाए। अब तुम कोई भी दिशा पढ़ सकते हो।
दिशा-कोण (bearing) वह कोण है जो उत्तर से घड़ी की दिशा में नापा जाता है, 0° से 360° तक। उत्तर 000°, पूर्व 090°, दक्षिण 180°, पश्चिम 270°। हमेशा तीन अंक बोलो, जैसे 070°।
GPS से अपनी जगह पता करना
GPS यानी ग्लोबल पोज़िशनिंग सिस्टम। कई उपग्रह पृथ्वी का चक्कर लगाते हैं और समय के साथ संकेत भेजते हैं। फ़ोन या GPS घड़ी नापती है कि हर संकेत को आने में कितना समय लगा, इसलिए उसे हर उपग्रह की दूरी पता चल जाती है। चार उपग्रहों से वह तुम्हारी जगह और ऊँचाई निकाल लेती है।
GPS बताता है तुम कहाँ हो। नक्शा या रूट ऐप बताता है कहाँ जाना है।
GPS की सीमाएँ हैं। उसे आसमान का खुला नज़ारा चाहिए। इमारत के अंदर, सुरंग, घने जंगल और गहरी घाटी में सिग्नल कमज़ोर हो सकता है या चला जा सकता है। फ़ोन की बैटरी भी ख़त्म हो सकती है। इसलिए काग़ज़ का नक्शा और कंपास हमेशा साथ रखो।
स्थल-चिह्नों का उपयोग
स्थल-चिह्न (landmark) वह चीज़ है जो आसानी से दिखती है और अपनी जगह रहती है: ऊँची मीनार, झील, पहाड़ी, पुल, मंदिर, बड़ी चट्टान।
- बड़े और न हिलने वाले स्थल-चिह्न चुनो। खड़ी गाड़ी या छोटी झाड़ी अच्छा स्थल-चिह्न नहीं है।
- उन्हें रास्ते के निशान बनाओ: 'मीनार तक चलो, झील बाईं ओर रखो, पुल पार करो'।
- स्थल-चिह्न की जगह बताने के लिए बाएँ, दाएँ, सामने और पीछे का प्रयोग करो। घूमने पर ये बदलते हैं, पर स्थल-चिह्न अपनी जगह रहता है।
- बीच-बीच में पीछे मुड़कर देखो। लौटते समय रास्ता अलग दिखता है।
अच्छा नक्शा-पाठक बार-बार नक्शे की चीज़ों को ज़मीन की चीज़ों से मिलाता रहता है।
बाहर अलग-अलग नक्शों का उपयोग
अलग काम के लिए अलग नक्शा चाहिए।
- पर्यटन नक्शा: दर्शनीय स्थल, रास्ते, दुकानें और शौचालय के सरल चित्र। शहर या पार्क में घूमने के लिए अच्छा।
- समोच्च रेखा (भू-आकृतिक) नक्शा: पतली रेखाएँ समान ऊँचाई के स्थान जोड़ती हैं। रेखाएँ पास-पास हों तो ढलान तेज़ होती है। पैदल यात्रा और ट्रेकिंग के लिए अच्छा।
- फ़ोन / डिजिटल नक्शा: तुम्हें नीले बिंदु से दिखाता है और रास्ता बता सकता है। उसे बैटरी और अक्सर सिग्नल चाहिए।
इस्तेमाल से पहले नक्शे को सेट करो: उसे सपाट रखो और तब तक घुमाओ जब नक्शे का उत्तर-तीर कंपास की सुई की दिशा में न आ जाए। अब नक्शे का बायाँ-दायाँ ज़मीन के बाएँ-दाएँ से मेल खाता है। दूरी जानने के लिए पैमाना (scale) देखो और चिह्न पढ़ने के लिए संकेत-सूची (key)।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- उत्तर 000°, पूर्व 090°, दक्षिण 180°, पश्चिम 270° (घड़ी की दिशा में)
- Bearing = उत्तर से घड़ी की दिशा में कोण (0° से 360°)
- GPS को 4 उपग्रह और खुला आसमान चाहिए
- नक्शा सेट करना: नक्शे का उत्तर = कंपास का उत्तर
हल किए गए उदाहरण
1. तुम पूर्व की ओर मुँह किए हो। तुम्हारा bearing क्या है?
पूर्व उत्तर से घड़ी की दिशा में चौथाई चक्कर है। पूरा चक्कर 360° है, तो चौथाई 90°। bearing 090° है।
2. तुम दक्षिण-पश्चिम की ओर देख रहे हो। bearing क्या है?
दक्षिण 180° और पश्चिम 270° है। दक्षिण-पश्चिम ठीक बीच में है: (180 + 270) ÷ 2 = 225°। bearing 225° है।
3. तुम 090° bearing की ओर देख रहे हो और फिर दाईं ओर 90° घूमते हो। नया bearing क्या होगा?
दाईं ओर घूमना यानी घड़ी की दिशा में, इसलिए जोड़ो: 90 + 90 = 180°। अब तुम दक्षिण की ओर हो।
4. एक मीनार तुमसे 350° bearing पर है। लगभग किस दिशा में है?
350°, 360° (उत्तर) से सिर्फ़ 10° पहले है। मीनार लगभग ठीक उत्तर में है, थोड़ी बाईं ओर (उत्तर-उत्तर-पश्चिम)।
5. मेट्रो सुरंग के अंदर फ़ोन GPS की जगह नहीं दिखाता। क्यों?
उपग्रहों के संकेत रेडियो तरंगें हैं। वे ऊपर की छत और चट्टान से ठीक से नहीं निकल पातीं। आसमान न दिखने पर फ़ोन कम से कम ज़रूरी उपग्रहों की दूरी नहीं नाप पाता।
आम गलतियाँ
- कंपास को फ़ोन, चाबी या लोहे की बेंच के पास रखना। सुई खिंच जाती है और दिशा ग़लत बताती है।
- bearing को घड़ी की उलटी दिशा में नापना। bearing हमेशा उत्तर से घड़ी की दिशा में नापते हैं।
- नक्शे को सेट किए बिना पढ़ना। तब ज़मीन पर बायाँ-दायाँ उलटा लगता है।
- सिर्फ़ GPS पर भरोसा करना। बैटरी ख़त्म हो सकती है या सिग्नल जा सकता है। नक्शा और कंपास भी रखो।