लोग एक संसाधन: श्रम संसाधन
जंगल, नदियाँ और कोयला प्राकृतिक संसाधन हैं। लोग भी संसाधन हैं, क्योंकि वे काम कर सकते हैं और सोच सकते हैं। जो लोग काम कर सकते हैं उन्हें देश के श्रम संसाधन कहते हैं।
आम तौर पर हम कामकाजी आयु की जनसंख्या गिनते हैं: लगभग 15 से 59 या 64 वर्ष के लोग। हर देश अपनी सीमाएँ तय करता है। यह समूह शुरुआत है; फिर देखते हैं कि इनमें कितने सच में काम करते हैं।
श्रम बल, रोज़गार और बेरोज़गारी
श्रम बल कामकाजी उम्र के वे सभी लोग हैं जिनके पास काम है या जो काम ढूँढ रहे हैं। जो पढ़ रहे हैं, पूरे समय घर सँभाल रहे हैं या काम नहीं कर सकते, वे श्रम बल में नहीं आते।
श्रम बल के अंदर दो समूह हैं: रोज़गार में (काम है) और बेरोज़गार (काम चाहते और ढूँढते हैं पर पाते नहीं)।
बेरोज़गारी दर = बेरोज़गार ÷ श्रम बल × 100। हमारे खिलौना देश में यह 4 ÷ 52 × 100 = 7.7% है। भागीदारी दर = श्रम बल ÷ कामकाजी उम्र के लोग × 100 = 52 ÷ 63 × 100 = 82.5%।
मानव पूँजी: सिर, दिल और हाथ
मानव पूँजी लोगों की गुणवत्ता है: उनकी शिक्षा (सिर), स्वास्थ्य (दिल) और कौशल व अनुभव (हाथ)। स्वस्थ, पढ़ा-लिखा, प्रशिक्षित कामगार बेहतर मशीनें चला सकता है, समस्याएँ सुलझा सकता है और कम ग़लतियाँ करता है, इसलिए प्रति कामगार उत्पादन ज़्यादा होता है।
सरकारें, परिवार और कंपनियाँ मानव पूँजी में निवेश करती हैं: स्कूल, अस्पताल, प्रशिक्षण केंद्र बनाती हैं और छात्रवृत्तियाँ देती हैं। यह पैसा बाद में ऊँची आमदनी और मज़बूत अर्थव्यवस्था के रूप में लौटता है।
संख्या से ज़्यादा गुणवत्ता क्यों मायने रखती है
किसी देश में कामगार बहुत हो सकते हैं पर मानव पूँजी कम। तब हर कामगार थोड़ा बनाता है और बहुत से काम कम वेतन वाले होते हैं। दूसरे देश में कामगार कम पर कौशल ऊँचा हो सकता है; वह ऐसा सामान बनाता है जो ऊँचे दाम पर बिकता है।
उम्र के आकार को भी देखो: जिस देश में कामकाजी वर्ग चौड़ा और आश्रित कम हों वह तेज़ी से बढ़ सकता है, अगर उन लोगों के पास शिक्षा और रोज़गार हो। रोज़गार और प्रशिक्षण के बिना वही भीड़ बोझ बन जाती है। इसीलिए आयु-लिंग पिरामिड और श्रम बल को साथ पढ़ना ज़रूरी है।
करके देखो: अपने परिवार का श्रम-नक्शा
अपने बड़े परिवार के (कम से कम 10) लोग लो। हर व्यक्ति को एक खाने में रखो: बच्चा, विद्यार्थी, रोज़गार में, काम ढूँढ रहा, गृहिणी/गृहस्थ, सेवानिवृत्त। श्रम बल (रोज़गार में + काम ढूँढ रहे) और बेरोज़गारी दर निकालो। फिर सोचो: कौन-सा कौशल या कोर्स परिवार के किसी सदस्य की कमाई सबसे ज़्यादा बढ़ाएगा? यही मानव पूँजी की सोच है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- श्रम संसाधन = कामकाजी आयु की जनसंख्या (लगभग 15 से 59 या 64)
- श्रम बल = रोज़गार में + बेरोज़गार
- बेरोज़गारी दर = बेरोज़गार ÷ श्रम बल × 100
- श्रम बल भागीदारी दर = श्रम बल ÷ कामकाजी आयु की जनसंख्या × 100
- कुल उत्पादन = कामगारों की संख्या × प्रति कामगार उत्पादन
हल किए गए उदाहरण
1. एक कस्बे में कामकाजी उम्र के 2000 लोग हैं। 1500 श्रम बल में हैं। भागीदारी दर निकालो।
भागीदारी दर = 1500 ÷ 2000 × 100 = 75%।
2. 1500 के श्रम बल में 1380 रोज़गार में हैं। बेरोज़गार कितने हैं और बेरोज़गारी दर क्या है?
बेरोज़गार = 1500 − 1380 = 120। दर = 120 ÷ 1500 × 100 = 8%।
3. एक कार्यशाला में 20 कामगार हैं और हर एक हफ़्ते में 5 कुर्सियाँ बनाता है। प्रशिक्षण के बाद हर कोई 7 बनाता है। अतिरिक्त उत्पादन कितना है?
पहले: 20 × 5 = 100। बाद में: 20 × 7 = 140। केवल प्रशिक्षण से हफ़्ते में 40 कुर्सियाँ ज़्यादा।
4. देश P में 100 कामगार हैं, हर एक 3 इकाई बनाता है। देश Q में 60 कामगार हैं, हर एक 6 इकाई बनाता है। कौन ज़्यादा बनाता है और यह क्या दिखाता है?
P: 100 × 3 = 300। Q: 60 × 6 = 360। Q कम कामगारों से ज़्यादा बनाता है, क्योंकि उसके कामगार ज़्यादा कुशल हैं: गुणवत्ता (मानव पूँजी) संख्या से जीत सकती है।
5. 1000 की जनसंख्या वाले देश में 250 बच्चे, 100 बुज़ुर्ग हैं, और कामकाजी उम्र के लोगों में 560 श्रम बल में हैं। कामकाजी उम्र की संख्या और भागीदारी दर निकालो।
कामकाजी उम्र = 1000 − 250 − 100 = 650। भागीदारी = 560 ÷ 650 × 100 = 86.2% (लगभग 86%)।
6. एक श्रम बल में 400 लोग हैं। 36 बेरोज़गार हैं। नया कारख़ाना उनमें से 12 को काम देता है। नई बेरोज़गारी दर क्या है?
अब बेरोज़गार = 36 − 12 = 24। दर = 24 ÷ 400 × 100 = 6% (पहले 9% थी)।
आम गलतियाँ
- जिसके पास काम नहीं, उस हर वयस्क को बेरोज़गार गिनना। विद्यार्थी और गृहिणियाँ श्रम बल में नहीं आतीं।
- बेरोज़गारों को पूरी जनसंख्या से भाग देना। भाग श्रम बल से देना है।
- मानव पूँजी को पैसा समझना। यह लोगों का ज्ञान, स्वास्थ्य और कौशल है।
- यह मानना कि ज़्यादा लोग हमेशा ज़्यादा उत्पादन देते हैं। हर व्यक्ति कितना बनाएगा, यह कौशल और सेहत तय करते हैं।