प्रभाव की जाँच: पाठक क्या महसूस करे?
लेखन पाठक को भेजा गया संदेश है। पाठ को परखने से पहले पूछिए: मैं कौन-सा प्रभाव चाहता/चाहती हूँ? जैसे शांति, चिंता, हास्य, विस्मय या उदासी। यही आपका चाहा गया प्रभाव है।
फिर मसौदे को अजनबी की तरह पढ़िए और पूछिए: यह मुझे सचमुच क्या महसूस कराता है? अगर मसौदा शांत होना चाहता था पर हड़बड़ी वाला लगता है, तो अंतर है। प्रभाव की जाँच उसी अंतर को खोजना है।
- शुरू करने से पहले लक्ष्य को एक छोटी पंक्ति में कहिए।
- मसौदे को धीरे-धीरे एक बार सिर्फ़ महसूस करने के लिए पढ़िए।
- जहाँ भावना टूटती या उलटी जाती है, वहाँ निशान लगाइए।
जाँच के चार लेंस
मसौदे को चार लेंस से देखिए। हर एक के लिए पूछिए: क्या यह मेरे चाहे प्रभाव में मदद करता है या उसके उलट जाता है?
- शब्द चयन: "चला" सादा है; "रेंगा" डर जैसा लगता है; "टहला" आराम जैसा। एक शब्द भावना बदल देता है।
- वाक्य की लंबाई: छोटे वाक्य तेज़ या तनाव भरे लगते हैं। लंबे वाक्य धीमे, शांत या सपनीले लगते हैं।
- चित्र (बिंब): जो साफ़ चित्र पाठक देख, सुन या सूँघ सके, वह सामान्य कथन से बेहतर काम करता है।
- विचारों का क्रम: जो पहले और आख़िर में आता है वह याद रहता है। सबसे मज़बूत विचार वहाँ रखिए जहाँ चोट सबसे ज़्यादा हो।
संशोधन: काटो, बदलो, क्रम बदलो
संशोधन (revising) यानी पाठ को चाहे गए प्रभाव के क़रीब लाने के लिए बदलना। यह वर्तनी ठीक करने से बड़ा काम है। तीन चालें अपनाइए:
- काटना: जो शब्द, पंक्ति या विचार मदद नहीं करते उन्हें हटाइए। "वह बहुत-बहुत उदास था" अक्सर "वह उदास था" बन जाता है।
- बदलना: कमज़ोर या अस्पष्ट शब्द की जगह मज़बूत, सटीक शब्द रखिए। "जल्दी गया" की जगह "लपका"।
- क्रम बदलना: किसी वाक्य या विचार को ऐसे खिसकाइए कि प्रभाव बनता जाए। चौंकाने वाली बात अंत में रखिए।
छूटा हुआ चित्र या कड़ी जोड़ भी सकते हैं। एक बार में एक ही चीज़ बदलिए और हर बदलाव के बाद फिर पढ़िए।
संशोधन बनाम संपादन, और नतीजे की जाँच
बड़ा काम पहले कीजिए। संशोधन प्रभाव, विचार, क्रम और शैली देखता है। संपादन और प्रूफ़-रीडिंग सबसे आख़िर में वर्तनी, व्याकरण और विराम-चिह्न ठीक करते हैं। जिस पंक्ति को आप काटने वाले हों उसके अल्पविराम ठीक करना समय की बर्बादी है।
जाँचिए
- ज़ोर से पढ़िए। आपके कान वे बेढंगे, लंबे या दोहराए हिस्से पकड़ लेते हैं जो आँखें छोड़ देती हैं।
- पाठक से एक सवाल पूछिए: "तुमने क्या महसूस किया?" पहले समझाइए नहीं।
- रख दीजिए। एक घंटे या एक दिन बाद ताज़ा आँखों से फिर पढ़िए।
अगर भावना आपके लक्ष्य से मिले तो संशोधन सफल रहा। नहीं तो एक चक्कर और लगाइए।
करके देखें
बरसात की शाम पर शांत भाव वाली तीन पंक्तियाँ लिखिए। ज़ोर से पढ़िए। एक शब्द काटिए, एक बदलिए और एक पंक्ति खिसकाइए। क्या अब अधिक शांति लगती है?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- प्रभाव की जाँच = मैंने जो चाहा - पाठक ने जो महसूस किया
- चार लेंस: शब्द, वाक्य-लंबाई, बिंब, क्रम
- संशोधन = काटना + बदलना + क्रम बदलना (ज़रूरत हो तो जोड़ना)
- पहले संशोधन, आख़िर में संपादन (वर्तनी, व्याकरण)
हल किए गए उदाहरण
1. चाहा गया प्रभाव: शांति। मसौदा: "वह दौड़कर शांत बाग़ में आई, झटके से कुर्सी पकड़ी और तेज़ी से बैठ गई।" क्या ग़लत है और कैसे सुधारेंगे?
"दौड़कर", "झटके से" और "तेज़ी से" हड़बड़ी लगाते हैं, इसलिए शांति के उलट जाते हैं। बदलिए: "वह शांत बाग़ में धीरे से आई और आराम से बैठ गई।" अब क्रियाएँ लक्ष्य से मेल खाती हैं।
2. अनुच्छेद कहता है "कमरा बहुत ही अत्यंत अँधेरा था।" कौन-सी चाल काम आएगी और नई पंक्ति क्या होगी?
काटना (और बदलना)। तीन कमज़ोर शब्दों से एक मज़बूत शब्द बेहतर है: "कमरा अँधेरा था।" या चित्र दीजिए: "उसे अपना हाथ तक नहीं दिखा।"
3. कहानी चौंकाने वाली बात पहली पंक्ति में छिपा देती है और अंत में मौसम का लंबा वर्णन करती है। कौन-सा लेंस ग़लत है और उपाय क्या है?
विचारों का क्रम। क्रम बदलिए ताकि चौंकाने वाली बात अंत में आए और मौसम पहले।
4. आपका दोस्त आपकी हास्य-कहानी पढ़कर कहता है "मुझे उदासी लगी"। आप क्या करेंगे?
इसे अंतर मानिए: लक्ष्य हास्य था पर भावना उदासी की रही। चार लेंस जाँचिए (शायद धीमे लंबे वाक्य और उदास शब्द), संशोधन कीजिए और दोस्त से फिर जँचवाइए।
आम गलतियाँ
- सिर्फ़ वर्तनी सुधारकर उसे संशोधन कहना। संशोधन पहले प्रभाव, विचार, क्रम और शैली बदलता है।
- कोई लक्ष्य न होना। चाहे गए प्रभाव के बिना आप नहीं कह सकते कि मसौदा बेहतर हुआ या बदतर।
- बड़ा दिखने के लिए और शब्द जोड़ना। फ़ालतू शब्द काटने से अक्सर प्रभाव बढ़ता है।
- जब पाठक कोई और भावना बताए तो मसौदे का बचाव करना। पाठक की भावना ही आँकड़ा है; उसका उपयोग कीजिए।