शैली क्या है?
शैली (style) लेखक के भाषा बरतने का ढंग है: कौन-से शब्द, कैसे वाक्य, कैसे चित्र और कैसा रुख़। यह बात कैसे कही गई है, क्या कही गई नहीं।
दो लेखक एक ही कहानी सुनाकर भी अलग सुनाई दे सकते हैं। शैली हस्तलिपि जैसी है: नाम बिना भी अक्सर पता चल जाता है कि पन्ना किसने लिखा।
शैली लेखक के समय, जगह और उद्देश्य से भी बनती है। एक ही बारिश पर समाचार, पत्र और कविता की तीन अलग शैलियाँ होती हैं क्योंकि तीनों के काम अलग हैं।
शैली की चार विशेषताएँ
दो पाठों की तुलना में ये चार विशेषताएँ जाँचिए:
- शब्द चयन: सादे या सजे, रोज़मर्रा के या औपचारिक, पुराने या नए, कठोर या कोमल।
- वाक्य: छोटे या लंबे, सरल या जटिल, एक विचार या कई। अंदाज़े के लिए कुछ वाक्यों के शब्द गिनिए।
- बिंब और अलंकार: तुलनाएँ, इंद्रियों के चित्र, प्रतीक। लेखक इन्हें ज़्यादा लेता है या कम?
- लहजा (tone): लेखक का रुख़: गंभीर, चंचल, कोमल, कड़वा, शांत।
वाचक (उत्तम या अन्य पुरुष) और संरचना (छोटे या लंबे अनुच्छेद) भी देखिए। ये उन्हीं चार विशेषताओं को सहारा देते हैं।
दो अंशों की तुलना
तुलना के लिए दोनों अंश साथ रखिए और दोनों से वही सवाल पूछिए। तालिका अच्छा काम करती है।
| विशेषता | अंश A | अंश B |
|---|---|---|
| वाक्य | छोटे (लगभग 1 से 3 शब्द) | लंबे (लगभग 5 या ज़्यादा) |
| शब्द | कठोर, सादी क्रियाएँ | कोमल, वर्णनात्मक शब्द |
| बिंब | कम | बहुत-सी तुलनाएँ |
| लहजा | उतावला | सपनीला |
तुलना वाले शब्द इस्तेमाल कीजिए: जबकि, इसके विपरीत, दोनों, इसी तरह। अंतर के साथ समानता भी लिखिए। अलग देशों की दो रचनाएँ एक भावना, जैसे प्रकृति-प्रेम, साझा कर सकती हैं पर उसे बहुत अलग शैली में कहती हैं।
शैली का प्रभाव और उत्तर लिखने का तरीक़ा
शैली के हर चुनाव का पाठक पर प्रभाव पड़ता है।
- छोटे वाक्य तेज़, तीखे या तनाव भरे लगते हैं।
- लंबे वाक्य धीमे, बहते, शांत या सपनीले लगते हैं।
- सादे शब्द सच्चे और सीधे लगते हैं; सजे शब्द रंगीन।
- बहुत से बिंब जीवंत लगते हैं; कम बिंब ठंडे और दूर।
कोई शैली अपने आप में बेहतर नहीं। पीछा करने के दृश्य को छोटे वाक्य चाहिए; शांत शाम को लंबे। शैली तब अच्छी है जब वह लेखक के इरादे में फिट बैठे।
चार चरणों का तरीक़ा
- हर पाठ में विशेषताएँ खोजिए।
- उनकी तुलना कीजिए: एक-सी या अलग?
- पाठक पर प्रभाव बताइए।
- प्रभाव को रचना के अर्थ से जोड़िए, प्रमाण के लिए छोटा उद्धरण देकर।
करके देखें
भीड़ भरे बाज़ार पर एक वाक्य दो तरह से लिखिए: एक बार छोटे वाक्यों में, एक बार एक लंबे वाक्य में। दोनों ज़ोर से पढ़िए। एहसास कैसे अलग है?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- शैली = बात कैसे कही गई
- चार विशेषताएँ: शब्द, वाक्य, बिंब, लहजा
- छोटे वाक्य = तेज़ और तनाव भरे; लंबे वाक्य = धीमे और सपनीले
- तरीक़ा: खोजो, तुलना करो, प्रभाव बताओ, अर्थ से जोड़ो
हल किए गए उदाहरण
1. अंश A: "बारिश टूटी। दरवाज़े बजे। हम भागे।" अंश B: "धूसर कोमल बारिश चुपचाप शांत गली पर उतरने लगी, और पड़ोसियों ने अपने परदे खींच लिए।" शैली की तुलना कीजिए।
A बहुत छोटे वाक्य और कठोर क्रियाएँ लेता है: तेज़, तनाव भरा प्रभाव। B एक लंबा वाक्य और कोमल शब्द लेता है: धीमा, शांत प्रभाव। वही घटना, अलग एहसास।
2. कौन-सी विशेषता देखी जा रही है: "लेखक वहाँ 'फुसफुसाया' और 'बहा' लिखता है जहाँ दूसरा 'बोला' और 'गया' लिखता है"?
शब्द चयन। कोमल, सटीक शब्द नरम लहजा देते हैं।
3. हाइकु और उपन्यास दोनों बर्फ़ का वर्णन करते हैं। हाइकु में तीन छोटी पंक्तियाँ हैं; उपन्यास में लंबा अनुच्छेद। हर एक का एक प्रभाव बताइए।
हाइकु तेज़, तीखा चित्र देता है और बाक़ी भावना पाठक पर छोड़ता है। उपन्यास धीमा ब्योरा और माहौल बनाता है। दोनों ठीक हैं; उनके उद्देश्य अलग हैं।
4. दो शैलियों की तुलना का एक वाक्य लिखिए: एक सपाट और एक अलंकृत।
जहाँ पहला लेखक सादे शब्दों और छोटे वाक्यों से सीधा और सच्चा लगता है, वहीं दूसरा समृद्ध बिंब और लंबे वाक्यों से सपनीला लहजा बनाता है।
आम गलतियाँ
- शैली को विषय-वस्तु से मिला देना। शैली बात कहने का ढंग है, क्या हुआ यह नहीं।
- प्रभाव बताए बिना सिर्फ़ विशेषताएँ गिनाना। हर विशेषता के बाद कहिए कि वह पाठक पर क्या करती है।
- कहना कि एक शैली बेहतर है। देखिए कि हर एक अपने उद्देश्य में फिट है या नहीं।
- प्रमाण के बिना तुलना करना। हर बात के साथ छोटा उद्धरण या उदाहरण जोड़िए।