कथानक: क्या होता है और क्यों
कथानक (plot) कहानी की घटनाओं की वह कड़ी है जो कारण और प्रभाव से जुड़ी हो। लड़का चाबी भूला, इसलिए दरवाज़ा बंद रहा, इसलिए वह देर से पहुँचा।
कथानक समझने के लिए चरणों में पढ़िए:
- हर ज़रूरी घटना को छोटे वाक्यांश में लिखिए।
- हर घटना के बाद पूछिए: इससे क्या हुआ?
- वह मोड़ ढूँढ़िए जहाँ बात की दिशा बदलती है।
- पूरा कथानक दो-तीन वाक्यों में कहिए।
कथानक का सार बताता है क्या हुआ। वह हर ब्योरे को नहीं दोहराता।
वर्णन: चित्र जो कहानी को धीमा करते हैं
वर्णन (description) दिखाता है कि कोई चीज़ कैसी दिखती, सुनाई देती, महकती, चखी या छुई जाती है। वह आम तौर पर कार्य को रोक देता है। वह रुकना काम का है: पाठक दृश्य के भीतर खड़ा हो जाता है।
- इंद्रियों के शब्द खोजिए: "सीली मिट्टी", "खनकते गिलास", "तीखा नींबू"।
- तुलनाएँ देखिए: "टिन की छत पर सुइयों जैसी बरसात"।
- पूछिए: यह चित्र कैसा माहौल बनाता है?
कथानक और वर्णन दुश्मन नहीं हैं। सिर्फ़ कथानक वाली कहानी ढाँचे जैसी है; सिर्फ़ वर्णन वाली कहानी उस चित्र जैसी जो कभी हिलता नहीं। लेखक दोनों मिलाते हैं।
परिवेश: कहाँ, कब और कैसा माहौल
परिवेश (setting) कहानी की जगह और समय है, और उससे बनने वाला माहौल भी। दोपहर के समय भीड़ भरा रेलवे प्लेटफ़ॉर्म आधी रात के ख़ाली प्लेटफ़ॉर्म से अलग लगता है।
- जगह: गाँव का घर, शहर की बस, स्कूल की छत।
- समय: दिन का पहर, मौसम, या इतिहास का दौर।
- माहौल: जगह से बनी भावना: अकेलापन, चहल-पहल, सुरक्षा, तनाव।
परिवेश कथानक पर असर भी डाल सकता है। बाढ़ लोगों को घर से निकाल देती है; बिजली जाने से कोई राज़ संभव हो जाता है। पूछिए: यह कहानी कहीं और होती तो क्या बदलता?
पात्र: हम उन्हें कैसे जानते हैं
पात्र (character) कहानी का व्यक्ति (या जानवर या वस्तु) है। हम पात्रों को चार तरह से जानते हैं:
- वे क्या करते हैं: कर्म असली मूल्य दिखाते हैं। वह अपनी इकलौती छतरी दे देती है।
- वे क्या कहते हैं: शब्द, लहजा और बोलने का ढंग।
- वे क्या सोचते हैं: अगर वाचक उनका मन दिखाए।
- वे कैसे दिखते हैं और दूसरे उनके बारे में क्या कहते हैं।
अच्छे लेखक अक्सर गुण को नाम देने की जगह उसे दिखाते हैं। "वह दयालु थी" बताता है। "उसने अपनी इकलौती छतरी दे दी" दिखाता है। गुण (trait) टिकने वाली ख़ूबी है, जैसे साहसी, सावधान या स्वार्थी। जो भी गुण बताएँ, पाठ से एक उदाहरण दीजिए।
ब्योरे जो आगे फल देते हैं
शुरू का छोटा ब्योरा, जैसे चटका प्याला, बाद में तब लौटता है जब प्याला टूटता है और झगड़ा शुरू होता है। पढ़ते समय वे ब्योरे चिह्नित कीजिए जो अजीब या दोहराए लगें; वे अक्सर मायने रखते हैं।
करके देखें
अपनी पसंद की कहानी का एक पन्ना लीजिए। एक कथानक वाक्य नीले से और एक वर्णन वाक्य हरे से रेखांकित कीजिए। फिर मुख्य पात्र का एक गुण प्रमाण के साथ लिखिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- कथानक = कारण-प्रभाव से जुड़ी घटनाएँ
- वर्णन = इंद्रियों से चित्र (कहानी को धीमा करता है)
- परिवेश = जगह + समय + माहौल
- पात्र = वे क्या करते + कहते + सोचते + कैसे दिखते
- गुण + पाठ से प्रमाण
हल किए गए उदाहरण
1. छाँटिए: (क) "उसने फ़ोन उठाया और घर फ़ोन किया।" (ख) "रसोई में इलायची और गीली मिट्टी की गंध थी।" कौन कथानक है, कौन वर्णन?
(क) कथानक है: कर्म जो कुछ पैदा करता है। (ख) वर्णन है: गंध वाला चित्र।
2. कहानी में लड़की अपना आख़िरी बिस्कुट आवारा कुत्ते को दे देती है। कौन-सा गुण दिखता है और कैसे?
दयालुता (या उदारता)। यह उसके कर्म से दिखता है, वाचक नाम नहीं लेता।
3. परिवेश बताइए: "साँझ थी। बस-अड्डा ख़ाली था, बस टिमटिमाती ट्यूबलाइट थी और बरसात की आवाज़।"
जगह: ख़ाली बस-अड्डा। समय: साँझ, बरसात। माहौल: अकेला और बेचैन।
4. अध्याय 1 में एक पात्र हमेशा पुरानी घड़ी देखता है। अध्याय 9 में घड़ी दुर्घटना के समय रुक जाती है। शुरू में इसका ज़िक्र क्यों?
यह फल देने वाला ब्योरा है। शुरू का संकेत पाठक को तैयार करता है ताकि अध्याय 9 की रुकी घड़ी सार्थक लगे, बेतरतीब नहीं।
आम गलतियाँ
- हर वाक्य दोहराकर उसे "कथानक का सार" कहना। सार में सिर्फ़ मुख्य घटनाएँ और उनके कारण होते हैं।
- वर्णन को बेकार समझकर छोड़ देना। वर्णन माहौल और संकेत देता है, कभी-कभी अंत की चाबी भी।
- बिना प्रमाण के गुण का नाम ले देना। हमेशा पाठ से कर्म, शब्द या विचार से उसे सिद्ध कीजिए।
- परिवेश को सिर्फ़ जगह समझना। उसमें समय और माहौल भी हैं, और वह कथानक को धकेल सकता है।