विषय ढूँढना
विषय कलाकृति का मुख्य विचार है। वह प्रकृति से आ सकता है (तूफ़ान, शांत झील), भावना से (खुशी, चिंता) या कल्पना से (सपनों का शहर, पंखों वाला जानवर)।
विषय खोजने के तरीके
- खिड़की से बाहर देखिए और पूछिए: यह कैसा लगता है?
- आँखें बंद करके ऐसी जगह सोचिए जिसका कोई नाम नहीं।
- आज की तीन भावनाओं के शब्द लिखिए और एक चुनिए।
करके देखिए: 3D में सूची से एक भावना चुनिए। आज आपके मन के सबसे पास कौन-सी है?
रंग, आकार और संयोजन की योजना
रंग सबसे पहले बोलता है। नीला जैसा ठंडा रंग शांत लगता है। पीला और लाल जैसे गरम रंग जोशीले या तेज़ लगते हैं। गहरे रंग भारी या उदास लगते हैं।
आकार भाव बढ़ाता है। गोल आकार नरम और सुरक्षित लगते हैं। नुकीले आकार तनाव देते हैं। चौड़ी सपाट पट्टियाँ स्थिर लगती हैं। छोटे नीचे के आकार शांत लगते हैं।
संयोजन यानी चीज़ों को कहाँ रखना है। चित्र में ऊपर रखे आकार हल्के और खुश लगते हैं, नीचे रखे भारी या उदास। ज़्यादा आकार चित्र को व्यस्त बनाते हैं, कम आकार शांत। 3D में ऊर्जा स्लाइडर आकारों की संख्या बदलता है।
| भावना | रंग | आकार | स्थान |
|---|---|---|---|
| शांति | ठंडा नीला | चौड़े, सपाट | नीचे और बराबर |
| खुशी | पीला | गोल, उछलते | ऊपर |
| गुस्सा | लाल | नुकीले | भीड़ वाला, तिरछा |
| उदासी | गहरा स्लेटी | छोटे, गोल | नीचे |
मन की छवि को चित्र और मूर्ति में दिखाना
मन की छवि वह तस्वीर है जो आप मन में देखते हैं। उसे दिखाने के लिए पहले छोटे-छोटे जल्दी बने रेखाचित्र बनाइए। सबसे अच्छा चुनिए और फिर उसे रंगिए या मूर्ति के रूप में बनाइए।
चित्र सपाट (2D) होता है। गहराई आप आकार, एक-दूसरे पर चढ़ाव और रंग से दिखाते हैं।
मूर्ति ठोस (3D) होती है। लोग उसके चारों ओर घूम सकते हैं, इसलिए आगे, किनारे और पीछे, सबके बारे में सोचना पड़ता है। सामग्री मिट्टी, कागज़, तार, लकड़ी या बेकार सामान हो सकती है।
कोई भावना सही या ग़लत नहीं होती। आपका चित्र ईमानदार होना चाहिए। बाद में आप एक छोटा शीर्षक लिख सकते हैं जो बताए कि आपने क्या महसूस किया।
अपना काम बनाने के चरण
- भावना या विचार (विषय) चुनिए।
- उससे मेल खाते दो-तीन रंग चुनिए।
- एक मुख्य आकार चुनिए।
- अलग-अलग संयोजन के तीन छोटे रेखाचित्र बनाइए।
- एक चुनिए और उसे रंगिए या बनाइए।
- पीछे हटकर देखिए और एक चीज़ सुधारिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- विषय = मन की भावना या विचार
- रंग + आकार + स्थान = भाव
- चित्र = 2D; मूर्ति = 3D, हर तरफ़ से दिखती है
- विचार -> रेखाचित्र -> चुनाव -> निर्माण -> समीक्षा
हल किए गए उदाहरण
1. आप शांत, सुकून भरी शाम दिखाना चाहते हैं। रंग, आकार और आकारों की जगह चुनिए।
ठंडे नीले रंग, चौड़े सपाट आकार, नीचे और बराबर रखे हुए।
2. आप बहुत खुश मूर्ति बनाना चाहते हैं। वह कैसी दिखेगी?
चटख पीला, गोल आकार, ऊँचाई में एक के ऊपर एक रखे हुए, ताकि हल्की लगे।
3. आपका चित्र गुस्से वाला होना चाहिए। आप क्या लेंगे: नुकीले लाल आकार या छोटे नीले गोले?
नुकीले लाल आकार, क्योंकि तेज़ किनारे और गरम रंग तनाव दिखाते हैं।
4. आप किसी भावना के 3 रेखाचित्र बनाते हैं और 1 रंगने के लिए चुनते हैं। कितने रेखाचित्र काम में नहीं आए?
3 - 1 = 2 रेखाचित्र।
आम गलतियाँ
- सोचना कि कला असली जैसी दिखनी चाहिए। अभिव्यक्ति वाली कला दिखाती है कि कैसा लगता है, कैसा दिखता है नहीं।
- एक साथ बहुत सारे रंग लेना। दो-तीन रंग भाव को साफ़ रखते हैं।
- मूर्ति का पीछे का हिस्सा भूल जाना। लोग उसके चारों ओर घूम सकते हैं।
- किसी और का चित्र नकल करना। अपनी भावना और विचार लीजिए।