रचना में भावनाएँ और दृष्टिकोण
कहानी या कविता में भावनाएँ (पात्र क्या महसूस करते हैं) और अकसर एक दृष्टिकोण (लेखक क्या सोचता या सोचवाना चाहता है) होता है। लेखक अकसर इन्हें सीधे नहीं कहते। हम व्याख्या करते हैं: सुरागों से इन्हें निकालते हैं। इसे अनुमान लगाना भी कहते हैं।
तीन तरह के सबूत
- बातें: पात्र क्या कहता है और किस लहजे में।
- हरकतें: पात्र क्या करता है, छोटी आदतें भी।
- माहौल: जगह, मौसम, समय, जो अकसर मन के भाव से मेल खाते हैं।
यह भी देखिए कि दूसरे उस पात्र के बारे में क्या कहते हैं, और लेखक ने कैसे शब्द चुने ("बड़बड़ाया" और "हँसा" अलग हैं)।
सबूत गिनिए, फिर फ़ैसला कीजिए
कदम: (1) कुछ संभावित भावनाएँ बनाइए। (2) सुराग जुटाइए। (3) हर भावना को उन सुरागों से अंक दीजिए जो उसे सहारा देते हैं। (4) सबसे पक्की चुनिए और सबूत बोलकर बताइए: "मुझे लगता है वे चिंतित हैं क्योंकि...।"
जब बातें और हरकतें अलग हों, तो अकसर हरकतें और माहौल सच बताते हैं। दो पाठक अलग सोच सकते हैं, पर दोनों को पाठ से सबूत दिखाना होगा।
खुद करके देखिए
किसी फ़िल्म का छोटा दृश्य बिना आवाज़ के देखिए। लिखिए कि पात्र क्या महसूस करता है और तीन सुराग (चेहरा, चाल, जगह)। फिर आवाज़ चालू कीजिए: क्या शब्द मेल खाते हैं? 3D में एक-एक सुराग चुनिए और बोलिए कि किस भावना को अंक मिले और क्यों।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- सबूत = बातें + हरकतें + माहौल
- सबसे पक्की व्याख्या = सबसे ज़्यादा सबूत
- बातें और हरकतें अलग हों तो हरकतों पर भरोसा
- ऐसे कहिए: "मुझे लगता है ... क्योंकि ..."
हल किए गए उदाहरण
1. एक लड़की कहती है "मुझे कोई परवाह नहीं" पर डाकिए के इंतज़ार में दरवाज़े पर नज़र रखती है। वह क्या महसूस करती है?
उसे परवाह है और वह उम्मीद या बेचैनी में है। शब्द "नहीं" कहते हैं, पर हरकत (दरवाज़े पर नज़र) "हाँ" कहती है। हरकत का सबूत ज़्यादा मज़बूत है।
2. गाँव अँधेरे में है, भारी बारिश है और बूढ़ा आदमी अकेला बैठा है। लेखक कैसा माहौल बनाता है?
अकेला और उदास माहौल। अँधेरा, बारिश और अकेलापन उदास नज़रिए का सबूत हैं।
3. दो पाठक असहमत हैं: एक कहता है लड़का शर्मीला है, दूसरा कहता है बदतमीज़ है। फ़ैसला कौन करे?
पाठ का सबूत। क्या वह नीचे देखता और धीरे बोलता है (शर्मीला) या दूसरों का अपमान करता है (बदतमीज़)? जिस व्याख्या को पाठ से ज़्यादा सहारा मिले, वही ठीक है।
आम गलतियाँ
- पाठ के सबूत के बिना भावना का अंदाज़ा लगाना।
- सिर्फ़ बातें देखना और हरकतें व माहौल छोड़ देना।
- पात्र की जगह अपनी कहानी जोड़ देना।
- भावना बता देना पर वह सुराग न बताना जो उसे सहारा देता है।