कारक-विभक्ति: वाक्य में हर विभक्ति का काम
विभक्ति बताती है कि वाक्य में शब्द का क्या काम है। इन कामों को कारक कहते हैं। प्रश्न से याद करो:
| विभक्ति | काम | प्रश्न | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | कर्ता | कौन करता है? | बालकः पठति |
| द्वितीया | कर्म | क्या/किसे? | बालकः फलं खादति |
| तृतीया | करण | किससे? | छुरिकया छिनत्ति |
| चतुर्थी | सम्प्रदान | किसको/किसके लिए? | गुरवे फलं ददाति |
| पञ्चमी | अपादान | कहाँ से? | वृक्षात् पतति |
| सप्तमी | अधिकरण | कहाँ/कब? | उद्याने खेलति |
षष्ठी विभक्ति सम्बन्ध (का/की/के) बताती है: रामस्य पुस्तकम्। यह कारक नहीं है, क्योंकि यह क्रिया से नहीं जुड़ती।
उपपद विभक्ति: विभक्ति माँगने वाले शब्द
कुछ शब्द (जैसे "साथ", "बिना", "चारों ओर") अपने पास के शब्द को निश्चित विभक्ति में रखवाते हैं। इसे उपपद विभक्ति कहते हैं। छोटी सूची याद रखो:
- नमः, स्वस्ति + चतुर्थी: गुरवे नमः, बालकाय स्वस्ति।
- सह (साथ) + तृतीया: रामेण सह गच्छति।
- विना (बिना) + तृतीया (द्वितीया या पञ्चमी भी): जलेन विना जीवनं नास्ति।
- अभितः, परितः, सर्वतः (चारों ओर) + द्वितीया: ग्रामम् अभितः वनम् अस्ति।
- धिक् + द्वितीया: धिक् असत्यम्।
- कृते (के लिए) + षष्ठी: विद्यायाः कृते परिश्रमः।
वाच्य बदलना: कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य
कर्तृवाच्य: कर्ता मुख्य है। कर्ता प्रथमा में, कर्म द्वितीया में, और क्रिया कर्ता के अनुसार: बालकः मोदकं खादति।
कर्मवाच्य: कर्म मुख्य है। तीन कदम:
- कर्ता: प्रथमा से तृतीया (बालकः से बालकेन)।
- कर्म: द्वितीया से प्रथमा (मोदकम् से मोदकः)।
- क्रिया: धातु में -य- लगाओ, आत्मनेपद प्रत्यय लगाओ, और कर्म के वचन के अनुसार रूप बनाओ: खादति से खाद्यते।
परिणाम: बालकेन मोदकः खाद्यते।
कुछ कर्मवाच्य क्रियाएँ (वर्तमान, प्रथम पुरुष एकवचन): पठति से पठ्यते, लिखति से लिख्यते, पश्यति से दृश्यते, करोति से क्रियते, ददाति से दीयते, नयति से नीयते।
कर्म बहुवचन हो तो क्रिया भी बहुवचन: छात्रेण पत्राणि लिख्यन्ते।
अशुद्धि संशोधन: पाँच जाँच
गलत वाक्य ठीक करने के लिए पाँच प्रश्न एक-एक करके पूछो:
- लिङ्ग: क्या शब्द अपने लिङ्ग से मेल खाता है? सा बालकः गलत है। बालक पुल्लिङ्ग है: सः बालकः।
- वचन: क्या संज्ञा और क्रिया का वचन एक है? बालकाः पठति से बालकाः पठन्ति।
- पुरुष: क्या क्रिया कर्ता से मेल खाती है? अहं गच्छति से अहं गच्छामि।
- विभक्ति: क्या हर शब्द अपने काम की विभक्ति में है? बालकः विद्यालयः गच्छति से बालकः विद्यालयं गच्छति (जहाँ जाते हैं वह द्वितीया में)।
- काल (लकार): क्या समय का शब्द क्रिया से मेल खाता है? श्वः रामः अगच्छत् (कल, भूत) से श्वः रामः गमिष्यति।
करके देखो
पहले अनुमान, फिर जाँच। हर वाक्य को मन में विभक्ति-अंकों के साथ बोलो: "बालकः(1) उद्याने(7) फलं(2) खादति"। 3D में खाना चुनो, कर्मवाच्य पर निशान लगाओ और देखो कि कर्ता और लड्डू की जगह कैसे बदलती है। घर पर अपने दिन के बारे में एक वाक्य लिखो। फिर तीन कदमों से उसे कर्मवाच्य में बदलो और अपने ही वाक्य पर पाँच जाँच करो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- कर्ता 1 | कर्म 2 | करण 3 | सम्प्रदान 4 | अपादान 5 | सम्बन्ध 6 | अधिकरण 7
- नमः, स्वस्ति + चतुर्थी | सह, विना + तृतीया | अभितः, परितः, सर्वतः, धिक् + द्वितीया | कृते + षष्ठी
- कर्मवाच्य: कर्ता तृतीया + कर्म प्रथमा + क्रिया में -य- (आत्मनेपद), कर्म के अनुसार
- पाँच जाँच: लिङ्ग, वचन, पुरुष, विभक्ति, काल
हल किए गए उदाहरण
1. विभक्ति भरो: ___ सह गच्छति (राम के साथ)।
रामेण सह गच्छति। सह के साथ तृतीया आती है।
2. कर्मवाच्य बनाओ: बालकः पुस्तकं पठति।
कर्ता: बालकेन। कर्म: पुस्तकम् (नपुंसक, प्रथमा में वही रूप)। क्रिया: पठ्यते। उत्तर: बालकेन पुस्तकं पठ्यते।
3. कर्मवाच्य बनाओ: छात्रः पत्राणि लिखति।
छात्रेण पत्राणि लिख्यन्ते। कर्म बहुवचन है, इसलिए क्रिया बहुवचन (लिख्यन्ते)।
4. अशुद्धि सुधारो: अहं विद्यालयं गच्छति।
कर्ता अहम् (उत्तम पुरुष) है, इसलिए क्रिया भी उत्तम पुरुष: अहं विद्यालयं गच्छामि।
5. अशुद्धि सुधारो: बालिका फलं खादति सः।
बालिका स्त्रीलिङ्ग है, इसलिए सा। शुद्ध: सा बालिका फलं खादति (सर्वनाम बालिका के लिङ्ग से मिले)।
6. सही शब्द चुनो: गुरवे ___ (गुरु को प्रणाम)।
नमः। नमः के साथ चतुर्थी आती है: गुरवे नमः।
आम गलतियाँ
- कर्मवाच्य में कर्ता को प्रथमा में छोड़ देना। कर्मवाच्य में कर्ता तृतीया में जाता है: बालकेन, बालकः नहीं।
- कर्मवाच्य क्रिया को कर्ता के अनुसार बनाना। वह कर्म के अनुसार बनती है: बालकेन पत्राणि लिख्यन्ते।
- सह के साथ द्वितीया लगाना। सह के साथ तृतीया आती है: रामेण सह।
- सिर्फ़ क्रिया ठीक करना और लिङ्ग या विभक्ति की भूल भूल जाना। हमेशा पाँचों जाँच करो।