ट्रेडिंग प्रणाली: फ़्लोर से स्क्रीन तक
पहले व्यापारी ट्रेडिंग रिंग (फ़्लोर) में खड़े होकर भाव चिल्लाते थे (खुली बोली)। आज लगभग सभी एक्सचेंज स्क्रीन आधारित ट्रेडिंग इस्तेमाल करते हैं: ऑनलाइन, पूरी तरह स्वचालित प्रणाली।
- निवेशक ऐप, वेबसाइट या फ़ोन से ब्रोकर (एक्सचेंज का पंजीकृत सदस्य) को ऑर्डर देता है।
- ब्रोकर का टर्मिनल ऑर्डर एक्सचेंज के केंद्रीय कंप्यूटर को भेजता है।
- कंप्यूटर सभी इंतज़ार करते ऑर्डर ऑर्डर बुक में रखता है और अपने-आप मिलाता है। यह ऑर्डर-संचालित बाज़ार है।
- हर ऑर्डर और सौदा स्क्रीन पर दिखता है, तो प्रणाली पारदर्शी, तेज़ और किसी भी शहर के निवेशक के लिए निष्पक्ष है।
कुछ बाज़ारों में मार्केट मेकर भी होते हैं जो हमेशा ख़रीद और बिक्री भाव बताते हैं (भाव-संचालित बाज़ार)।
ऑर्डर बुक और ऑर्डर का मिलान
बिड वह भाव है जिस पर कोई ख़रीदना चाहता है; आस्क (ऑफ़र) वह भाव है जिस पर कोई बेचना चाहता है। सबसे ऊँची बिड और सबसे कम आस्क सर्वश्रेष्ठ बिड और सर्वश्रेष्ठ आस्क हैं। इनका अंतर स्प्रेड है।
भाव-समय प्राथमिकता
- पहले भाव: सबसे अच्छा भाव पहले (सबसे ऊँची ख़रीद, सबसे कम बिक्री)।
- फिर समय: एक ही भाव के ऑर्डरों में पहले लगा ऑर्डर पहले।
जब नए ख़रीद ऑर्डर का भाव सर्वश्रेष्ठ आस्क के बराबर या ज़्यादा हो, तो सौदा होता है। उस भाव को अंतिम सौदा भाव (LTP) कहते हैं।
ऑर्डर के प्रकार
भाव के आधार पर
- मार्केट ऑर्डर: उपलब्ध सबसे अच्छे भाव पर तुरंत ख़रीदना या बेचना। सौदा पक्का (अगर उलटे ऑर्डर हों), पर भाव पहले से पता नहीं।
- लिमिट ऑर्डर: आपके तय भाव या उससे कम पर ख़रीद, या उससे ज़्यादा पर बिक्री। भाव पर नियंत्रण, पर सौदा शायद न हो।
- स्टॉप-लॉस ऑर्डर: तभी सक्रिय होता है जब भाव ट्रिगर भाव तक पहुँचे। घाटा सीमित करने (या लाभ बचाने) के लिए। सक्रिय होकर यह मार्केट ऑर्डर (SL-M) या लिमिट ऑर्डर (SL-L) बन सकता है।
समय (वैधता) के आधार पर
- डे ऑर्डर: उस दिन ट्रेडिंग ख़त्म होने तक मान्य, फिर रद्द।
- IOC (तुरंत या रद्द): जितना तुरंत हो सके, बाक़ी रद्द।
- GTC / GTD: रद्द करने तक या किसी तारीख़ तक बना रहता है।
मात्रा के आधार पर
- प्रकट मात्रा (डिस्क्लोज़्ड क्वांटिटी): बड़े ऑर्डर का केवल कुछ हिस्सा बुक में दिखता है।
- सब या कुछ नहीं: पूरी मात्रा का सौदा या कुछ नहीं।
ट्रेडिंग समय, सर्किट और निपटान
- प्री-ओपन सत्र: बाज़ार खुलने से पहले का छोटा समय जिसमें ऑर्डर जमा होकर एक खुलने का भाव तय होता है।
- सामान्य सत्र: लगातार मिलान (जैसे भारत में सुबह 9:15 से दोपहर 3:30)।
- सर्किट ब्रेकर / भाव दायरा: एक दिन में भाव बहुत ज़्यादा हिले तो उस शेयर या पूरे बाज़ार में ट्रेडिंग रुकती है ताकि घबराहट न फैले।
- कॉन्ट्रैक्ट नोट: ब्रोकर निवेशक को हर सौदे का रिकॉर्ड भेजता है।
- समाशोधन और निपटान: क्लियरिंग कॉर्पोरेशन पक्का करता है कि ख़रीदार को शेयर (डीमैट खाते में) और विक्रेता को पैसा मिले। कई बाज़ार अब T+1 (सौदे के दिन T के एक कार्य दिवस बाद) या T+2 पर निपटाते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- स्प्रेड = सर्वश्रेष्ठ आस्क − सर्वश्रेष्ठ बिड
- मिलान नियम: पहले भाव प्राथमिकता, फिर समय प्राथमिकता
- सौदा तब होता है जब ख़रीद भाव ≥ बिक्री भाव
- औसत भाव = कुल चुकाया पैसा ÷ शेयरों की संख्या
हल किए गए उदाहरण
1. सर्वश्रेष्ठ बिड ₹249.50, सर्वश्रेष्ठ आस्क ₹250.25। स्प्रेड?
स्प्रेड = 250.25 − 249.50 = ₹0.75।
2. बुक में विक्रेता: ₹100 पर 5 शेयर, ₹101 पर 8। आप 7 शेयर का मार्केट ख़रीद ऑर्डर लगाते हैं। कुल और औसत कितना चुकाएँगे?
5 × 100 = 500 और 2 × 101 = 202। कुल ₹702। औसत = 702 ÷ 7 ≈ ₹100.29।
3. सर्वश्रेष्ठ आस्क ₹100 है और आप ₹98 पर ख़रीद लिमिट लगाते हैं। क्या होगा?
सौदा नहीं, क्योंकि ₹98 या कम पर कोई विक्रेता नहीं। ऑर्डर बिड कतार में तब तक इंतज़ार करेगा जब तक कोई विक्रेता ₹98 पर न आए या आप रद्द न करें।
4. ₹99 पर दो ख़रीद ऑर्डर: A 10:01 पर, B 10:03 पर। ₹99 पर 4 शेयर का विक्रेता आता है; A को 3, B को 5 चाहिए। किसे क्या मिलेगा?
भाव बराबर है, तो समय तय करेगा। A को 3 शेयर, B को बचा 1 शेयर।
5. आपने ₹500 पर ख़रीदा और ₹470 पर स्टॉप-लॉस लगाया। भाव ₹470 तक गिरा। क्या होगा और प्रति शेयर घाटा (शुल्क छोड़कर)?
ट्रिगर छुआ, तो बिक्री ऑर्डर गया। लगभग ₹470 पर बिका तो घाटा लगभग ₹30 प्रति शेयर, जबकि गिरावट जारी रहती तो ज़्यादा घाटा होता।
6. सौदा सोमवार को हुआ। मंगलवार कार्य दिवस है तो T+1 में निपटान कब होगा?
मंगलवार को (सौदे के दिन के एक कार्य दिवस बाद)।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि लिमिट ऑर्डर हमेशा होता है: यह तभी होता है जब बाज़ार आपके भाव तक पहुँचे।
- यह मानना कि मार्केट ऑर्डर स्क्रीन वाले भाव पर ही होगा: बड़ा मार्केट ऑर्डर कई भाव स्तर खा सकता है।
- यह सोचना कि स्टॉप-लॉस तुरंत सक्रिय है: यह ट्रिगर भाव छूने तक इंतज़ार करता है।
- समय प्राथमिकता भूलना: एक ही भाव पर पहले आया ऑर्डर पहले भरता है।