रोज़ का भोजन (Everyday meals)
रोज़ का भोजन सामान्य दिनों का खाना है। वह सरल, जल्दी बनने वाला, कम खर्च और संतुलित होना चाहिए। मौसमी और स्थानीय चीज़ें लें, दिन में पाँचों खाद्य समूह रखें और पकाना छोटा रखें। पूरे परिवार के लिए एक बार पकाएँ और बचा खाना सुरक्षित रखें (ठंडी जगह, ढककर, खाने से पहले अच्छी तरह गरम करके)। हफ़्ते की योजना से बर्बादी और बाज़ार के चक्कर कम होते हैं।
त्योहार और दावत का भोजन
त्योहार का भोजन किसी त्योहार, शादी या पारिवारिक आयोजन के लिए होता है। दावत (आतिथ्य) का भोजन मेहमानों को परोसा जाता है। उसमें व्यंजन ज़्यादा, सजावट पर ज़्यादा ध्यान और अक्सर खास या प्रतीकात्मक खाना व मिठाइयाँ होती हैं।
- संख्या की योजना: मेहमान × प्रति व्यक्ति मात्रा = पकाने की मात्रा; 5 से 10% अतिरिक्त।
- क्रम की योजना: कोर्स या तय क्रम में परोसें (शुरुआत, मुख्य, मीठा)।
- संतुलन: रंग, स्वाद और बनावट मिलाएँ; सिर्फ़ तला या सिर्फ़ मीठा न रखें।
- काम की योजना: जो व्यंजन एक दिन पहले बन सकें, और समय ताकि परोसते समय खाना गरम हो।
- खाद्य सुरक्षा: गरम खाना 63 °C से ऊपर और ठंडा खाना 5 °C से नीचे रखें।
बीमारी में भोजन
बीमार व्यक्ति का पानी घटता है, भूख कम हो सकती है और पचाना कठिन हो सकता है। इसलिए:
- पहले तरल: उबला पानी, ओआरएस, साफ़ सूप, नारियल पानी, दाल का पानी।
- फिर नरम, हल्का खाना: खिचड़ी, दलिया, दही-चावल, केला, उबला अंडा।
- ठीक होने पर धीरे-धीरे सामान्य खाना।
थोड़ा-थोड़ा बार-बार दें (दिन में लगभग 6 बार), खाना साफ़ और अच्छी तरह पका हो, और बहुत तैलीय, तीखा और भारी खाना न दें। कुछ बीमारियों में खास डाइट चाहिए, जैसे मधुमेह में कम चीनी या उच्च रक्तचाप में कम नमक। इनके लिए हमेशा डॉक्टर या आहार-विशेषज्ञ की सलाह मानें।
छोटे बच्चों का भोजन
छोटे बच्चों का पेट छोटा पर बढ़त तेज़ होती है, इसलिए उन्हें पोषण से भरपूर खाना थोड़ी-थोड़ी मात्रा में, दिन में लगभग 5 बार (तीन भोजन और दो नाश्ते) चाहिए।
- नरम खाना छोटे टुकड़ों में दें; ज़रूरत हो तो मसलें या कद्दूकस करें।
- सुरक्षा: अंगूर, सॉसेज और दूसरी गोल चीज़ें काटकर दें; छोटे बच्चों को पूरे मेवे, सख़्त टॉफ़ी और पॉपकॉर्न न दें, क्योंकि वे गले में अटक सकते हैं। खाते समय बच्चे के पास बैठें।
- नमक, चीनी और मसाला कम। दूध, अंडे या दाल, सब्ज़ी और फल शामिल करें।
- खाना रंगीन बनाएँ और बच्चे को खुद खाने दें; ज़बरदस्ती न करें।
बुज़ुर्गों का भोजन
बुज़ुर्ग आमतौर पर कम चलते हैं, इसलिए उन्हें थोड़ी कम ऊर्जा चाहिए, पर हड्डियों और माँसपेशियों की रक्षा के लिए प्रोटीन उतना ही और कैल्शियम व विटामिन डी ज़्यादा चाहिए। दाँत कमज़ोर हो सकते हैं, प्यास और स्वाद का एहसास घट सकता है।
- खाना नरम और चबाने में आसान रखें (अच्छी पकी दाल, मसली सब्ज़ी, नरम रोटी, दलिया)।
- थोड़ा-थोड़ा, ज़्यादा बार दें (दिन में 4 बार), हर भोजन में प्रोटीन के साथ।
- रेशा (फल, सब्ज़ी, साबुत अनाज) और खूब पानी जोड़ें।
- नमक कम रखें; स्वाद के लिए जड़ी-बूटी और नींबू इस्तेमाल करें।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- पकाने की मात्रा = मेहमान × प्रति व्यक्ति मात्रा (+ 5 से 10% अतिरिक्त)
- बीमारी की सीढ़ी: तरल → नरम खाना → सामान्य खाना
- छोटा बच्चा: दिन में लगभग 5 छोटे भोजन; बुज़ुर्ग: लगभग 4 छोटे भोजन
- गरम खाना 63 °C से ऊपर, ठंडा खाना 5 °C से नीचे
- बुज़ुर्ग: ऊर्जा थोड़ी कम, प्रोटीन उतना ही, कैल्शियम ज़्यादा
हल किए गए उदाहरण
1. एक शादी में 200 मेहमान हैं। हर एक को 150 ग्राम पका चावल परोसा जाता है। 10% अतिरिक्त के साथ कितने किलो पका चावल चाहिए?
200 × 150 = 30 000 ग्राम = 30 किलो। 10% अतिरिक्त = 3 किलो। कुल = 33 किलो।
2. बुखार वाले दिन की एक समझदार भोजन-योजना लिखें।
शुरू में: उबला पानी, ओआरएस और साफ़ सूप। फिर: खिचड़ी, दही-चावल, केला। थोड़ी मात्रा में लगभग 6 बार। बुखार उतरने पर सामान्य खाना।
3. एक 3 साल के बच्चे को दिन में लगभग 1200 kcal चाहिए, 5 भोजन में। औसतन हर भोजन में कितनी ऊर्जा?
1200 ÷ 5 = 240 kcal प्रति भोजन।
4. छोटे बच्चे के लिए अंगूर क्यों काटने चाहिए?
पूरा गोल अंगूर साँस की नली बंद कर सकता है और दम घुट सकता है। छोटे टुकड़े करने से वह सुरक्षित हो जाता है।
5. दादी को दिन में 1700 kcal चाहिए: 3 बराबर मुख्य भोजन और 200 kcal का एक नाश्ता। हर मुख्य भोजन में कितनी ऊर्जा?
1700 − 200 = 1500 kcal तीन भोजनों के लिए। 1500 ÷ 3 = 500 kcal प्रति मुख्य भोजन।
6. दावत में गरम व्यंजन 63 °C से ऊपर क्यों रखा जाता है?
5 से 63 °C के बीच कीटाणु तेज़ी से बढ़ते हैं। गरम खाना 63 °C से ऊपर रखने से वे नहीं बढ़ते, इसलिए मेहमानों को फ़ूड पॉइज़निंग नहीं होती।
आम गलतियाँ
- बीमार को "ताकत के लिए" भारी, तैलीय खाना देना। हल्का खाना और तरल बेहतर हैं।
- छोटे बच्चे को वयस्क जितनी बड़ी मात्रा देना। थोड़ी मात्रा, ज़्यादा बार।
- छोटे बच्चों को पूरे मेवे या सख़्त गोल टॉफ़ी देना। गले में अटक सकते हैं।
- बुज़ुर्ग का प्रोटीन घटा देना। ऊर्जा थोड़ी घटती है, प्रोटीन उतना ही रहता है।