नस्ल की विशेषताएँ और चुनाव
नस्ल एक ही प्रकार के पशुओं का समूह है जिनके शरीर और उत्पादन के गुण समान होते हैं। दूध वाली नस्लें पतली होती हैं और थन बड़ा होता है। माँस वाली नस्लें चौड़ी और मांसल होती हैं और वज़न जल्दी बढ़ता है। मज़बूत देसी नस्लें दूध कम देती हैं पर गरमी, किलनी और कम चारे को सह लेती हैं। अपने लक्ष्य, मौसम और चारे की उपलब्धता से चुनें। जहाँ हरा चारा कम हो वहाँ ज़्यादा उपज वाली विदेशी नस्ल से देसी मज़बूत नस्ल बेहतर निकल सकती है।
पशुओं का नस्ल-सुधार
सुधार यानी अगली पीढ़ी को पिछली से बेहतर बनाना। दो तरीक़े: चयन (सबसे अच्छी माँ और पिता की संतान रखना, दूध या वज़न के रिकॉर्ड देखकर) हर पीढ़ी में धीमा, लगातार फ़ायदा देता है। संकरण (दो नस्लों का मेल) पहली पीढ़ी में बड़ी छलाँग देता है, जिसे संकर-ओज (हाइब्रिड विगर) कहते हैं, पर आगे की पीढ़ियों के लिए सोच-समझकर योजना चाहिए। हर पशु का रिकॉर्ड रखें: जन्म-तारीख़, माता-पिता, दूध, वज़न और बीमारियाँ।
प्रजनन की योजना और प्रबंधन
गाय तभी काम की है जब दूध दे, इसलिए उसे नियमित ब्याना चाहिए। अच्छी योजना: गाय लगभग हर 21 दिन पर हीट में आती है; ध्यान रखें; ब्याने के महीना 3 में गर्भाधान कराएँ; गर्भ लगभग 9 महीने का होता है; अगली ब्यांत से पहले 2 महीने का सूखा काल दें ताकि वह आराम करे; ब्यांत-अंतराल लगभग 12 महीने रखें। सबसे अच्छे साँड के वीर्य को सुरक्षित उपयोग करने के लिए कृत्रिम गर्भाधान (AI) अपनाएँ। हीट की तारीख़, गर्भाधान की तारीख़ और अनुमानित ब्यांत की तारीख़ लिखें।
पालन की योजना और प्रबंधन
पालन-योजना तय करती है कि पशु जन्म से बिक्री तक कैसे पाले जाएँगे: बछड़ा अवस्था (कुछ घंटों में खीस, यानी पहला दूध दें), बछिया या बढ़ती अवस्था, वयस्क उत्पादक अवस्था और सूखा काल। हर अवस्था के लिए आहार, आवास, प्रति पशु जगह, वज़न की तारीख़ें और स्वास्थ्य-जाँच तय करें। रोज़ का प्रबंधन: तय समय पर चारा, पूरे दिन साफ़ पानी, बाड़े की सफ़ाई, हर पशु की जाँच और रिकॉर्ड। 18 महीने में 250 किलो जैसा लक्ष्य बताता है कि योजना काम कर रही है या नहीं।
पशु और आहार
पशुफ़ार्म में सबसे बड़ा ख़र्च आहार है। राशन में रेशेदार चारा (हरा चारा, साइलेज, सूखा भूसा), दाना-मिश्रण (अनाज, खली, चोकर) और खनिज साफ़ पानी के साथ मिलाए जाते हैं। गाय जैसे जुगाली करने वाले पशुओं को स्वस्थ पेट के लिए खूब रेशेदार चारा चाहिए। थोड़ा दाना दूध बढ़ाता है, पर ज़्यादा दाना पेट बिगाड़ता है (एसिडोसिस), ख़र्च बढ़ाता है और दूध घटाता है। ज़्यादा दूध देने वाली और गाभिन गायों को ज़्यादा आहार दें। इस पाठ के मॉडल में लगभग 15 से 40 प्रतिशत दाना संतुलित राशन देता है।
पशुओं के रोग और रोकथाम
इलाज से रोकथाम सस्ती है। चार साधन: समय पर टीकाकरण (जैसे खुरपका-मुँहपका के लिए), स्वच्छता (साफ़ बाड़ा, साफ़ पानी-चारा, साफ़ दुहाई), क्वारंटीन (नए या बीमार पशु को दो-तीन हफ़्ते अलग रखना) और कृमिनाशन व किलनी नियंत्रण। बीमारी के लक्षण: खाना छोड़ना, सुस्त आँखें, बुखार, दूध कम, लँगड़ाना। पशु-चिकित्सक को जल्दी बुलाएँ। बिना सलाह दवा न दें और इलाज के बाद दूध रोकने की अवधि मानें।
पशु-उत्पादों की बिक्री और मूल्यांकन
पशु-उत्पादों में दूध, अंडे, माँस, ऊन और खाद आते हैं। गुणवत्ता जाँची जाती है: दूध की वसा और एसएनएफ़ (वसा-रहित ठोस), सफ़ाई और तापमान से; अंडे आकार और छिलके से; माँस वज़न और ग्रेड से। दूध जल्दी ठंडा करें और डेयरी सहकारी समिति या सीधे ग्राहकों को दें। फ़ार्म का मूल्यांकन सरल संख्याओं से करें: प्रति पशु रोज़ उपज, प्रति लीटर चारे का ख़र्च, ब्यांत-अंतराल, मृत्यु-दर और महीने की शुद्ध आमदनी। योजना से मिलाएँ और सबसे कमज़ोर संख्या पहले सुधारें।
बाड़ा, मशीन और सुविधाओं का उपयोग
अच्छा बाड़ा छाया, हवा, सूखा फिसलन-रहित फ़र्श, साफ़ पानी की जगह, चारे की नाँद और गोबर निकासी देता है। प्रति वयस्क गाय लगभग 3.5 से 4 वर्ग मीटर ढकी जगह और खूब खुली जगह रखें। मशीनों में चारा-कटर, दुहाई मशीन, बल्क मिल्क कूलर और गोबर प्रबंधन (बायोगैस) आते हैं। बड़े झुंड में दुहाई मशीन समय बचाती है और दूध साफ़ रखती है, पर उसे रोज़ साफ़ और जाँचना होता है। ब्लेड पर गार्ड रखें और बच्चों को दूर रखें।
करके देखो
किसी डेयरी या मुर्ग़ी-फ़ार्म पर जाएँ, या फ़ार्म का वीडियो देखें, और लिखें: नस्ल, पशु क्या खाते हैं, बाड़ा कैसे साफ़ रखा जाता है और कौन-से रिकॉर्ड लिखे जाते हैं। फिर एक गाय का 12 महीने का सरल कैलेंडर बनाएँ जिसमें हीट, गर्भाधान, सूखा काल और ब्यांत लिखे हों। 3D की प्रजनन-समय-रेखा से मिलाएँ।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ब्यांत-अंतराल (महीने) = एक ब्यांत से अगली तक के महीने; लक्ष्य लगभग 12
- प्रति लीटर चारे का ख़र्च = रोज़ का चारा-ख़र्च / रोज़ का दूध
- दुहने का समय = गायों की संख्या x प्रति गाय मिनट
- चयन का फ़ायदा: दूध = शुरुआती उपज x (1.08) की घात पीढ़ियाँ (इस मॉडल में)
- मृत्यु-दर (%) = मरे पशु / कुल पशु x 100
हल किए गए उदाहरण
1. गाय जनवरी में ब्याई और अप्रैल में उसे गर्भाधान कराया। ब्याने के कितने महीने बाद गर्भाधान हुआ? वह फिर कब ब्याएगी (9 महीने का गर्भ)?
जनवरी से अप्रैल 3 महीने। अप्रैल के लगभग 9 महीने बाद ब्यांत, यानी अगले साल जनवरी के आसपास (पिछली ब्यांत के 12 महीने बाद)।
2. झुंड शुरू में प्रति गाय रोज़ 8 लीटर देता है। चयन से हर पीढ़ी 8% फ़ायदा हो तो 3 पीढ़ी बाद उपज?
8 x 1.08 x 1.08 x 1.08 = 8 x 1.2597 = लगभग 10.1 लीटर प्रतिदिन।
3. राशन में 20% दाना है और 10 लीटर दूध मिलता है। चारे का ख़र्च रोज़ 160 रुपये है। प्रति लीटर चारे का ख़र्च?
160 / 10 = 16 रुपये प्रति लीटर।
4. तुलना करो: 40% दाना 14 लीटर देता है, ख़र्च 220 रुपये रोज़; 60% दाना 9 लीटर देता है, ख़र्च 280 रुपये रोज़। प्रति लीटर कौन सस्ता?
40%: 220 / 14 = 15.7। 60%: 280 / 9 = 31.1। 40% वाला राशन प्रति लीटर सस्ता है और दूध ज़्यादा देता है।
5. फ़ार्म में 12 गायें हैं। हाथ से दुहने में 6 मिनट प्रति गाय लगते हैं। मशीन से लगभग 2 मिनट प्रति गाय। दोनों में कितना समय?
हाथ: 12 x 6 = 72 मिनट = 1.2 घंटे। मशीन: 12 x 2 = 24 मिनट = 0.4 घंटा। मशीन 48 मिनट बचाती है।
6. 100 गायों के झुंड में एक साल में 3 मर गईं। मृत्यु-दर कितनी? टीकाकरण के बाद सिर्फ़ 1 मरी। कितने प्रतिशत अंक घटी?
पहले: 3 / 100 x 100 = 3%। बाद में 1%। कमी = 2 प्रतिशत अंक।
आम गलतियाँ
- पर्याप्त हरे चारे और छाया के बिना सबसे ज़्यादा उपज वाली विदेशी नस्ल चुन लेना।
- ज़्यादा दूध के लिए बहुत दाना देना। बहुत दाना पेट बिगाड़ता है और ख़र्च बढ़ाता है।
- हीट चूक जाना और देर से गर्भाधान कराना, जिससे ब्यांत-अंतराल 15 महीने या ज़्यादा हो जाता है।
- पशु बीमार होने के बाद ही इलाज करना, टीका और साफ़ बाड़ा न रखना।