काष्ठीय पौधे: हिस्से और वर्गीकरण
काष्ठीय पौधे के तने हर साल लकड़ी के कारण मोटे होते हैं। तीन प्रकार: वृक्ष (एक ऊँचा तना, आमतौर पर 5 मी से ऊपर), झाड़ियाँ (जड़ से कई तने, 5 मी से कम) और काष्ठीय लताएँ (बेल जैसी)। पेड़ में मुकुट (शाखाएँ और पत्ते), तना (छाल, लकड़ी, मज्जा) और जड़ें होती हैं। तने के भीतर पतली कैम्बियम हर साल लकड़ी का नया छल्ला बनाती है। वनपाल काष्ठीय पौधों को पत्ती के प्रकार (सुई या चपटी), प्रजनन (शंकु या फूल), और सदाबहार या पर्णपाती होने से वर्गीकृत करते हैं।
वन वृक्ष प्रजातियाँ: शंकुधारी और चौड़ी पत्ती वाले
अनावृतबीजी (शंकुधारी) में बीज शंकुओं में खुले होते हैं और पत्तियाँ सुई जैसी। उदाहरण: स्प्रूस, फ़र, चीड़, लार्च। ज़्यादातर सदाबहार और नरम लकड़ी (softwood) वाले। आवृतबीजी (चौड़ी पत्ती वाले) में फूल और फलों के भीतर बीज, और चपटी पत्तियाँ। उदाहरण: ओक, बीच, हॉर्नबीम, मेपल, भोज। ज़्यादातर पर्णपाती और कठोर लकड़ी (hardwood) वाले, हालाँकि बाल्सा जैसे कुछ नरम होते हैं। उष्णकटिबंध में ज़्यादातर वन-वृक्ष चौड़ी पत्ती के सदाबहार हैं, जैसे सागौन और साल।
वन प्रजातियों की पारिस्थितिकी और विस्तार-क्षेत्र
हर प्रजाति का एक विस्तार-क्षेत्र (range) होता है: जहाँ उसकी रोशनी, गर्मी, पानी और मिट्टी की ज़रूरतें पूरी हों। हर 100 मी ऊँचाई पर तापमान लगभग 0.65 °C गिरता है, इसलिए पहाड़ पर ऊँचाई-पट्टियाँ होती हैं: निचले चौड़ी पत्ती के वन, बीच की मिश्रित पट्टी, ठंडी ढलानों पर शंकुधारी वन, फिर घास के मैदान और नंगी चट्टान। कुछ प्रजातियाँ छाँव पसंद करती हैं (बीच, फ़र), कुछ को तेज़ रोशनी चाहिए (चीड़, भोज, लार्च)। अग्रणी प्रजातियाँ नंगी ज़मीन पर सबसे पहले आती हैं; चरम प्रजातियाँ अंत में कब्ज़ा करती हैं।
मिट्टी: निर्माण, गुण, परिच्छेदिका और प्रकार
निर्माण। चट्टान मौसम से टूटती है (अपक्षय)। पौधे, जानवर और सूक्ष्म जीव मृत पदार्थ जोड़ते हैं जो सड़कर ह्यूमस बनता है। पानी खनिजों को नीचे ले जाता है। इसमें सैकड़ों से हज़ारों साल लगते हैं।
गुण। बनावट (रेत, गाद और चिकनी मिट्टी का अनुपात), संरचना (दाने या ढेले), जल धारण, अम्लता (pH) और उर्वरता।
परिच्छेदिका। O: ऊपर पत्तों की परत और ह्यूमस। A: ह्यूमस मिली गहरी ऊपरी मिट्टी। B: उपमृदा जहाँ खनिज जमते हैं। C: अपक्षयित चट्टान। R: ठोस आधार शैल। ये परतें मिलकर मृदा परिच्छेदिका बनाती हैं।
प्रकार। वन-मिट्टियों में चौड़ी पत्ती के नीचे की भूरी वन-मिट्टी (उपजाऊ, भुरभुरी), शंकुधारी के नीचे की पॉडज़ोल (अम्लीय, पीली धुली परत वाली), और पर्वतीय मिट्टी (पतली, पथरीली) हैं।
वायुमंडल, मौसम के तत्व और यंत्र
वायुमंडल पृथ्वी के चारों ओर हवा की परत है। मौसम के तत्व हैं तापमान, वायुदाब, आर्द्रता, हवा, बादल और वर्षा। यंत्र: थर्मामीटर (तापमान, छायादार पेटी में), बैरोमीटर (वायुदाब), हाइग्रोमीटर (आर्द्रता), एनीमोमीटर और पवन-दिशा सूचक (हवा की गति और दिशा), वर्षामापी (वर्षा मिमी में)। जंगल के भीतर खुले स्थान से ठंडक, ज़्यादा नमी और कम हवा होती है, इसे वन का सूक्ष्म जलवायु कहते हैं।
गैर-काष्ठ उत्पाद: भोजन, रसायन और उद्योग
जंगल देते हैं भोजन (जंगली बेरियाँ, खुम्भी, मेवे), औषधीय पौधे, राल (चीड़ से तारपीन और रोज़िन), टैनिन (ओक की छाल से, चमड़े के लिए), कॉर्क, बाँस और बेंत, क्रिसमस ट्री और हस्तकला की सामग्री। केवल वही इकट्ठा करो जिसकी अनुमति है, सही मौसम में, और इतना छोड़ो कि पौधे फिर उग सकें।
मधुमक्खियाँ और उनके उत्पाद
मधुमक्खियाँ रानी, श्रमिकों और नरों की कॉलोनी में रहती हैं। श्रमिक मकरंद और पराग इकट्ठा करके छत्ते तक लाते हैं। वे फूलों का परागण भी करती हैं, जिससे जंगल और खेत दोनों को लाभ होता है। उत्पाद: शहद, मोम, पराग, प्रोपोलिस (छत्ता बंद करने वाली चिपचिपी राल) और रॉयल जेली। मधुमक्खी-पालक छत्तों को फूलों वाले पेड़ों (बबूल, लिंडेन) के पास रखते हैं और फूलों के साथ उन्हें आगे ले जाते हैं।
वन्य जीव, उनका प्रबंधन और पर्वतीय जल की जीव-जातियाँ
शिकार योग्य जीव वे जंगली जानवर हैं जिनका शिकार कानून के अंतर्गत हो सकता है, जैसे हिरण, जंगली सूअर, खरगोश और कुछ पक्षी। वन्य जीव प्रबंधन संख्या को स्वस्थ रखता है: जानवर गिनो, सालाना कोटा तय करो, कठिन सर्दियों में चारा और पानी दो, और शिकारी जानवरों व बीमारी पर नज़र रखो। शिकार के नियमों में लाइसेंस, प्रजनन के समय बंद मौसम, प्रतिबंधित तरीके और संरक्षित प्रजातियाँ शामिल हैं। पर्वतीय जल में ट्राउट जैसी ठंडे पानी की मछलियाँ रहती हैं जिन्हें स्वच्छ, ऑक्सीजन-भरा पानी चाहिए, और ऊदबिलाव तथा जल-कीट जैसे जीव भी।
खुद करके देखो: पहाड़ चढ़ो
3D के आख़िरी चरण में ऊँचाई-स्लाइडर चलाओ। 0, 1,000 और 2,000 मी पर तापमान लिखो। नियम से जाँचो: गिरावट = 0.65 × (ऊँचाई ÷ 100)। घर पर सीधी दीवार की बोतल और पैमाने से सरल वर्षामापी बनाओ और बारिश के बाद वर्षा मिमी में नापो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ऊँचाई h पर तापमान = समुद्र तल का तापमान − 0.65 × (h ÷ 100) (°C, h मी में)
- वृक्ष घनत्व = पेड़ों की संख्या ÷ क्षेत्रफल (पेड़ प्रति हेक्टेयर)
- टिकाऊ कटाई ≤ सालाना वृद्धि × क्षेत्रफल
- मृदा परिच्छेदिका (ऊपर से नीचे): O, A, B, C, R
हल किए गए उदाहरण
1. समुद्र तल की घाटी में 15 °C है। 1,300 मी पर तापमान क्या होगा?
गिरावट = 0.65 × 13 = 8.45 °C। तापमान = 15 − 8.45 = 6.55 °C।
2. 2 हेक्टेयर में 600 पेड़ हैं। घनत्व क्या है?
600 ÷ 2 = 300 पेड़ प्रति हेक्टेयर।
3. एक जंगल प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष 4 m³ लकड़ी उगाता है। जंगल को घटाए बिना 50 हेक्टेयर से हर साल कितना काटा जा सकता है?
4 × 50 = 200 m³ प्रति वर्ष अधिकतम।
4. उस मिट्टी-परत का नाम बताओ जहाँ मृत पत्ते सड़कर ह्यूमस बनते हैं, और ठोस चट्टान की परत का।
मृत पत्ते क्षितिज O में हैं (ऊपर पत्तों की परत और ह्यूमस)। ठोस चट्टान R (आधार शैल) है, C परत के नीचे।
आम गलतियाँ
- सभी शंकुधारी को सदाबहार मानना। लार्च शंकुधारी है पर पतझड़ में सुइयाँ गिराता है।
- मिट्टी की परतें उलझाना। ऊपर से क्रम O, A, B, C, फिर आधार शैल है।
- यह मानना कि बड़ा छत्ता हमेशा ज़्यादा शहद देता है। यह फूलों, मौसम और देखभाल पर निर्भर है।
- मौसम और कोटा देखे बिना शिकार या संग्रह करना। नियम प्रजनन करते जानवरों और पौधों की रक्षा करते हैं।