France Terminale STAV (agronomy and life sciences) — Terminale specialties
अध्याय: 6
1. S1 Managing resources and food
Food products, farming methods and human needs · The agroecosystem as a managed system · Energy in work buildings · Energy in transport
- खाद्य विज्ञान: हमारे भोजन का रसायन – खाद्य विज्ञान पढ़ता है कि भोजन किससे बना है और खेत से थाली तक कैसे बदलता है। भोजन में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, पानी, विटामिन और खनिज होते हैं। पकाने से ये बदलते हैं: गर्मी प्रोटीन को खोलती है (विकृतीकरण), स्टार्च पानी में फूलता है (जिलेटिनीकरण), और सूखी गर्मी मेयार्ड अभिक्रिया व कैरामेलीकरण से भोजन भूरा करती है। सूक्ष्मजीव किण्वन से ब्रेड, दही और अचार बनाते हैं, पर भोजन ख़राब भी कर सकते हैं। प्रसंस्करण, परिरक्षण और सही तापमान भोजन को सुरक्षित और पौष्टिक रखते हैं।
- खनिज तथा ऊर्जा संसाधन – खनिज चट्टानों में मिलने वाले प्राकृतिक पदार्थ हैं। ये धात्विक (लौह या अलौह), अधात्विक या ऊर्जा खनिज होते हैं। ऊर्जा पारंपरिक स्रोतों (कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, बिजली) और गैर-पारंपरिक स्रोतों (सूर्य, पवन, परमाणु, बायोगैस, ज्वार, भूतापीय) से मिलती है। दोनों का संरक्षण ज़रूरी है।
2. S4 Territory and technology — services
Place and regulation of activities in a territory · Process and context interactions · Reasons behind socio-technical choices
- ग्रामीण भूगोल: गाँव और देहात कैसे जीते और बदलते हैं – ग्रामीण क्षेत्रों में हर वर्ग किलोमीटर पर कम लोग, ज़्यादा खुली ज़मीन और छोटी बस्तियाँ होती हैं। इन्हें खेती ने बनाया, पर मशीनों से खेती में काम घट गया। आज ग्रामीण ज़मीन के कई उपयोग हैं: शहर में काम करने वालों के घर, पर्यटन, प्रकृति संरक्षण और ऊर्जा। शहर के पास के इलाक़े बढ़ते हैं, जबकि दूर के इलाक़ों से लोग और सेवाएँ चली जाती हैं। किसान, निवासी, पंचायत/स्थानीय सरकार और कंपनियाँ अलग-अलग चीज़ें चाहते हैं, इसलिए भूमि उपयोग योजना नियम बनाती है।
- ग्रामीण क्षेत्र की सेवाएँ – सेवा वह काम है जो किसी के लिए किया जाता है; वह घर ले जाने वाली चीज़ नहीं होती: पशु-डॉक्टर की विज़िट, बस की सवारी, स्वास्थ्य जाँच, खेती की सलाह, मरम्मत, डिलीवरी। गाँव में लोग और खेत दूर-दूर होते हैं, इसलिए ज़रूरत का तकनीकी उत्तर (पक्की दुकान, चलती वैन, पिक-अप पॉइंट, फ़ोन परामर्श) संदर्भ पर टिका होता है: दूरी, उपयोगकर्ताओं की संख्या, सड़कें, मौसम, ख़र्च और नियम। किसान, निवासी, कंपनियाँ और सरकारी संस्थाएँ जैसे हर पक्ष की अपनी सोच होती है, और अंतिम चुनाव उन सबके बीच का समझौता होता है।
3. S4 Territory and technology — food processing
Place and regulation of activities in a territory · Process and context interactions · Reasons behind socio-technical choices
- ग्रामीण भूगोल: गाँव और देहात कैसे जीते और बदलते हैं – ग्रामीण क्षेत्रों में हर वर्ग किलोमीटर पर कम लोग, ज़्यादा खुली ज़मीन और छोटी बस्तियाँ होती हैं। इन्हें खेती ने बनाया, पर मशीनों से खेती में काम घट गया। आज ग्रामीण ज़मीन के कई उपयोग हैं: शहर में काम करने वालों के घर, पर्यटन, प्रकृति संरक्षण और ऊर्जा। शहर के पास के इलाक़े बढ़ते हैं, जबकि दूर के इलाक़ों से लोग और सेवाएँ चली जाती हैं। किसान, निवासी, पंचायत/स्थानीय सरकार और कंपनियाँ अलग-अलग चीज़ें चाहते हैं, इसलिए भूमि उपयोग योजना नियम बनाती है।
- खाद्य परिरक्षण, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन – भोजन तब खराब होता है जब उसमें सूक्ष्मजीव बढ़ते हैं और उसके अपने एंज़ाइम, हवा, रोशनी व कीट उसे नुकसान पहुँचाते हैं। परिरक्षण सूक्ष्मजीवों की ज़रूरत की चीज़ हटा देता है: पानी (सुखाना, नमक, चीनी), गर्माहट (फ्रिज, फ्रीज़र), हल्का pH (अम्ल, किण्वन) या स्वयं सूक्ष्मजीव (गर्मी, कैनिंग, पाश्चरीकरण, अनुमत परिरक्षक)। भोजन शीघ्र नाशवान, अर्ध-नाशवान या अनाशवान होते हैं, और कम, मध्यम या अधिक प्रसंस्कृत होते हैं। अच्छा भंडारण और प्रसंस्करण नुकसान घटाते हैं और मूल्य बढ़ाते हैं, जिससे किसान और खाद्य उद्योग ज़्यादा कमाते हैं।
4. S4 Territory and technology — agricultural equipment
Place and regulation of activities in a territory · Process and context interactions · Reasons behind socio-technical choices
- ग्रामीण भूगोल: गाँव और देहात कैसे जीते और बदलते हैं – ग्रामीण क्षेत्रों में हर वर्ग किलोमीटर पर कम लोग, ज़्यादा खुली ज़मीन और छोटी बस्तियाँ होती हैं। इन्हें खेती ने बनाया, पर मशीनों से खेती में काम घट गया। आज ग्रामीण ज़मीन के कई उपयोग हैं: शहर में काम करने वालों के घर, पर्यटन, प्रकृति संरक्षण और ऊर्जा। शहर के पास के इलाक़े बढ़ते हैं, जबकि दूर के इलाक़ों से लोग और सेवाएँ चली जाती हैं। किसान, निवासी, पंचायत/स्थानीय सरकार और कंपनियाँ अलग-अलग चीज़ें चाहते हैं, इसलिए भूमि उपयोग योजना नियम बनाती है।
- कृषि यंत्र: मशीनें खेत कैसे तैयार करती, बोती, बचाती और काटती हैं – कृषि यंत्र खेती का काम तेज़, बराबर और कम मेहनत से करते हैं। ट्रैक्टर ताकत देने वाली मशीन है; हर काम के लिए उसके साथ औज़ार जोड़ा जाता है: हल और हैरो मिट्टी तैयार करते हैं, ड्रिल और प्लांटर बोते हैं, स्प्रेयर और ड्रोन फ़सल बचाते हैं, कंबाइन काटती है। चुनाव खेत के आकार, मिट्टी, फ़सल, लागत और पर्यावरण पर निर्भर है, और सुरक्षित इस्तेमाल जान बचाता है।
5. S4 Territory and technology — farm production
Place and regulation of activities in a territory · Process and context interactions · Reasons behind socio-technical choices
- ग्रामीण भूगोल: गाँव और देहात कैसे जीते और बदलते हैं – ग्रामीण क्षेत्रों में हर वर्ग किलोमीटर पर कम लोग, ज़्यादा खुली ज़मीन और छोटी बस्तियाँ होती हैं। इन्हें खेती ने बनाया, पर मशीनों से खेती में काम घट गया। आज ग्रामीण ज़मीन के कई उपयोग हैं: शहर में काम करने वालों के घर, पर्यटन, प्रकृति संरक्षण और ऊर्जा। शहर के पास के इलाक़े बढ़ते हैं, जबकि दूर के इलाक़ों से लोग और सेवाएँ चली जाती हैं। किसान, निवासी, पंचायत/स्थानीय सरकार और कंपनियाँ अलग-अलग चीज़ें चाहते हैं, इसलिए भूमि उपयोग योजना नियम बनाती है।
- कृषि – कृषि यानी फ़सलें उगाना और पशु पालना। भारत में छोटे पारिवारिक खेतों से लेकर बड़े वाणिज्यिक खेत और बाग़ान तक हैं। फ़सलें तीन ऋतुओं में उगती हैं: ख़रीफ़, रबी और ज़ायद। हर मुख्य फ़सल को अपनी बारिश, तापमान और मिट्टी चाहिए। सरकार ने किसानों की मदद के लिए सुधार किए हैं।
6. S4 Territory and technology — land and landscape management
Place and regulation of activities in a territory · Process and context interactions · Reasons behind socio-technical choices
- ग्रामीण भूगोल: गाँव और देहात कैसे जीते और बदलते हैं – ग्रामीण क्षेत्रों में हर वर्ग किलोमीटर पर कम लोग, ज़्यादा खुली ज़मीन और छोटी बस्तियाँ होती हैं। इन्हें खेती ने बनाया, पर मशीनों से खेती में काम घट गया। आज ग्रामीण ज़मीन के कई उपयोग हैं: शहर में काम करने वालों के घर, पर्यटन, प्रकृति संरक्षण और ऊर्जा। शहर के पास के इलाक़े बढ़ते हैं, जबकि दूर के इलाक़ों से लोग और सेवाएँ चली जाती हैं। किसान, निवासी, पंचायत/स्थानीय सरकार और कंपनियाँ अलग-अलग चीज़ें चाहते हैं, इसलिए भूमि उपयोग योजना नियम बनाती है।
- भू और भूदृश्य प्रबंधन – भू-प्रबंधन का मतलब है ज़मीन की सोच-समझकर देखभाल। इसमें जंगल, बाग-बगीचे और पार्क, प्रकृति के इलाके और जल-स्रोतों की देखभाल आती है। हर परियोजना के चरण होते हैं: साइट की जाँच, लोगों की ज़रूरतें, नियम और पैसे की जाँच, तकनीकी हल, क्रम से निर्माण और फिर देखभाल। ढलान, मिट्टी, पानी और पड़ोसी जैसी बातें परियोजना को आकार देती हैं, और सामाजिक, कानूनी और आर्थिक कारण हर निर्णय को।