National Year 13 Business
अध्याय: 4
1. 3.7 Analysing the strategic position of a business
3.7.1 Mission, corporate objectives and strategy · 3.7.2 Financial ratio analysis · 3.7.3 Overall internal performance · 3.7.4 Political and legal change · 3.7.5 Economic change · 3.7.6 Social and technological change · 3.7.7 Competitive environment · 3.7.8 Investment appraisal
- व्यावसायिक रणनीति (Business Strategy) – व्यावसायिक रणनीति एक लंबी अवधि की योजना है जो कंपनी को जहाँ वह है वहाँ से वहाँ ले जाती है जहाँ वह पहुँचना चाहती है। यह मिशन (कंपनी क्यों है) से शुरू होती है, उसे SMART उद्देश्यों में बदलती है, SWOT से अपनी स्थिति जाँचती है, एन्सॉफ़ मैट्रिक्स से तय करती है कि किस बाज़ार और उत्पाद में बढ़ना है, पोर्टर की रणनीति (लागत नेतृत्व, विशिष्टता या फ़ोकस) से तय करती है कि कैसे जीतना है, और फिर लोगों, पैसे और नियंत्रण से योजना लागू करती है।
- लेखांकन अनुपात: तरलता, शोधन क्षमता, क्रियाशीलता और लाभदायकता – अनुपात वित्तीय विवरणों की दो संबंधित संख्याओं की तुलना है। तरलता अनुपात बताते हैं अल्पकालीन क़र्ज़ चुक सकते हैं या नहीं; शोधन क्षमता अनुपात दीर्घकालीन सुरक्षा; क्रियाशीलता (आवर्त) अनुपात संपत्ति कितनी तेज़ी से उपयोग होती है; लाभदायकता अनुपात हर रुपये पर कितना लाभ।
- व्यावसायिक पर्यावरण: अर्थ, आयाम और विमुद्रीकरण – व्यावसायिक पर्यावरण उन सभी बाहरी शक्तियों, व्यक्तियों और संस्थाओं का योग है जो फ़र्म पर असर डालती हैं पर जिन पर उसका नियंत्रण नहीं। यह गतिशील, अनिश्चित, जटिल, सापेक्ष है और इसमें जुड़ी हुई विशिष्ट व सामान्य शक्तियाँ हैं। इसे समझकर फ़र्म अवसर पहचानती है, ख़तरे देखती है और योजना बनाती है। इसके पाँच आयाम हैं: आर्थिक, सामाजिक, तकनीकी, राजनीतिक और कानूनी। नवंबर 2016 का विमुद्रीकरण इसका बड़ा उदाहरण है।
- प्रतिस्पर्धी वातावरण: प्रतिद्वंद्वी, जोखिम और पाँच बल – प्रतिस्पर्धी वातावरण वह बाज़ार है जो व्यवसाय अपने प्रतिद्वंद्वियों के साथ बाँटता है। फ़र्म प्रतिद्वंद्वियों की ताक़त और कमज़ोरी (कीमत, गुणवत्ता, सेवा, जगह, ब्रांड) परखकर अपनी बढ़त खोजती है। हर व्यवसाय के सामने जोखिम होता है, जिसकी संभावना का अंदाज़ा लग सकता है, और अनिश्चितता, जिसका नहीं लग सकता। उद्यमी संभावित इनाम के लिए जोखिम उठाते हैं: लाभ, आज़ादी और गर्व। पोर्टर के पाँच बल बताते हैं कि उद्योग में कितना लाभ संभव है: आपसी होड़, नए प्रवेशकों का ख़तरा, विकल्पों का ख़तरा, आपूर्तिकर्ताओं की ताक़त और ख़रीदारों की ताक़त। बल जितने तेज़, लाभ उतना कम।
- निवेश मूल्यांकन (Investment Appraisal): पेबैक, ARR और NPV – निवेश मूल्यांकन का मतलब है जाँचना कि कोई बड़ा ख़र्च (मशीन, दुकान, नया उत्पाद) फ़ायदेमंद है या नहीं। पेबैक अवधि = आने वाला नकद कितने समय में लागत लौटा देगा। ARR = औसत वार्षिक लाभ ÷ शुरुआती लागत × 100। NPV = भविष्य के नकद का आज का मूल्य − लागत; धनात्मक NPV मूल्य जोड़ता है। कंपनियाँ संवेदनशीलता (अगर बिक्री गिरे तो?), जोखिम और ग़ैर-वित्तीय बातें भी देखती हैं।
2. 3.8 Choosing strategic direction
3.8.1 Which markets and products · 3.8.2 Strategic positioning
- व्यावसायिक रणनीति (Business Strategy) – व्यावसायिक रणनीति एक लंबी अवधि की योजना है जो कंपनी को जहाँ वह है वहाँ से वहाँ ले जाती है जहाँ वह पहुँचना चाहती है। यह मिशन (कंपनी क्यों है) से शुरू होती है, उसे SMART उद्देश्यों में बदलती है, SWOT से अपनी स्थिति जाँचती है, एन्सॉफ़ मैट्रिक्स से तय करती है कि किस बाज़ार और उत्पाद में बढ़ना है, पोर्टर की रणनीति (लागत नेतृत्व, विशिष्टता या फ़ोकस) से तय करती है कि कैसे जीतना है, और फिर लोगों, पैसे और नियंत्रण से योजना लागू करती है।
3. 3.9 Strategic methods
3.9.1 Change in scale · 3.9.2 Innovation · 3.9.3 Internationalisation · 3.9.4 Digital technology
- व्यवसाय का विकास और पैमाने की मितव्ययिता – कंपनी आंतरिक रूप से (नई दुकानें, ऑनलाइन बिक्री, फ़्रैंचाइज़िंग, आउटसोर्सिंग) या बाहरी रूप से (विलय, अधिग्रहण) बढ़ती है। बढ़ने से औसत इकाई लागत (कुल लागत ÷ उत्पादन) पैमाने की मितव्ययिता से घटती है: क्रय (थोक छूट) और तकनीकी (बड़ी, अच्छी मशीनें)। बहुत बड़ी होने पर अमितव्ययिता आती है: संचार, तालमेल और प्रेरणा की कमी से लागत फिर बढ़ती है। तब कुछ कंपनियाँ छँटनी (retrenchment) करके छोटी होती हैं।
- व्यवसाय में नवाचार (Innovation) – नवाचार का मतलब है किसी नए विचार को ऐसे उत्पाद या प्रक्रिया में बदलना जो सच में इस्तेमाल हो या बिके। कंपनियाँ छोटे-छोटे लगातार सुधार (काइज़ेन) से या शोध और विकास (R&D) से नवाचार करती हैं, जो महँगा और जोखिम भरा है पर बड़ी छलांग दे सकता है। डिजिटल साधन इसे तेज़ करते हैं। पेटेंट, कॉपीराइट और ट्रेडमार्क विचारों की नक़ल रोकते हैं।
- वैश्वीकरण और वैश्विक शासन – वैश्वीकरण यानी सामान, पूँजी, सूचना और श्रम के प्रवाह का बढ़ना, जो जगहों को आपस में जोड़ता है। तकनीक, परिवहन और व्यापार समझौते इसे चलाते हैं। प्रवाह असमान हैं: अमीर देशों के पास ज़्यादा ताक़त है, ग़रीब देशों की बाज़ार तक पहुँच कमज़ोर है। TNC एक ही चीज़ को कई जगह बनवाती हैं। UN, WTO, IMF और विश्व बैंक जैसी संस्थाएँ इन प्रवाहों को संभालने की कोशिश करती हैं, और संधियाँ अंटार्कटिका जैसे साझा क्षेत्रों को बचाती हैं। वैश्वीकरण विकास और सस्ता सामान लाता है, पर असमानता, टकराव और पर्यावरण का नुक़सान भी।
- ई-व्यवसाय: अर्थ, क्षेत्र और लाभ – ई-व्यवसाय का अर्थ है व्यवसाय की सारी गतिविधियाँ (ख़रीद, बिक्री, उत्पादन, वित्त, कर्मचारी, आपूर्ति) कंप्यूटर नेटवर्क और इंटरनेट से करना। ई-कॉमर्स, यानी ऑनलाइन ख़रीद-बिक्री, इसका सिर्फ़ एक हिस्सा है। इसके क्षेत्र हैं B2B, B2C, C2C और इंट्रा-B। यह शुरू करने में सस्ता, 24 × 7 खुला, तेज़ और वैश्विक है, पर इसमें मानवीय संपर्क कम है और सुरक्षा का जोखिम है।
4. 3.10 Managing strategic change
3.10.1 Managing change · 3.10.2 Organisational culture · 3.10.3 Strategic implementation · 3.10.4 Why strategies fail
- परिवर्तन प्रबंधन: व्यवसाय क्यों बदलते हैं और बदलाव कैसे चलाएँ – टिके रहने के लिए व्यवसायों को बदलना पड़ता है। बदलाव के कारण बाहरी (तकनीक, क़ानून, अर्थव्यवस्था, ग्राहक, प्रतिद्वंद्वी) या आंतरिक (नए मालिक या नेता, वृद्धि, विलय, ख़राब प्रदर्शन, नई रणनीति) हो सकते हैं। बदलाव क्रमिक (छोटा, धीरे-धीरे) या विघटनकारी (अचानक और बड़ा) हो सकता है। कर्ट लेविन का तीन-चरण मॉडल कहता है कि नेता पहले पुरानी आदतें पिघलाएँ, फिर बदलाव करें, फिर नया तरीका जमा दें। लेविन का बल-क्षेत्र विश्लेषण बदलाव के पक्ष के प्रेरक बल और विपक्ष के अवरोधक बल लिखकर अंक देता है, और बताता है कि बदलाव सफल होगा या नहीं और किन बलों को बढ़ाना या घटाना है। लोग स्वार्थ, ग़लतफ़हमी व अविश्वास, अलग राय, या बदलाव के प्रति कम सहनशीलता के कारण विरोध करते हैं। प्रबंधक शिक्षा व संवाद, भागीदारी, सुविधा व सहायता, मोल-भाव, चालाकी व सह-चयन, या दबाव से विरोध घटा सकते हैं; ये नरम और धीमे से सख़्त और तेज़ तक हैं। लचीला संगठन, साफ़ संवाद और सम्मानित बदलाव-नेता बदलाव आसान बनाते हैं।
- संगठनात्मक संस्कृति: "यहाँ काम ऐसे होता है" – संगठनात्मक संस्कृति वे साझा मूल्य, विश्वास, दृष्टिकोण और आदतें हैं जो तय करती हैं कि व्यवसाय में लोग कैसे व्यवहार करते हैं। हिमशैल की तरह कुछ हिस्से दिखते हैं (पहनावा, दफ़्तर की बनावट, लोगो, कहानियाँ, रीतियाँ) और ज़्यादातर छिपे हैं (मूल्य और मान्यताएँ)। मज़बूत संस्कृति व्यापक रूप से साझा होती है और व्यवहार चलाती है; कमज़ोर नहीं। चार्ल्स हैंडी ने चार संस्कृतियाँ बताईं: शक्ति संस्कृति (एक ताकतवर केंद्र वाला जाल), भूमिका संस्कृति (नियमों से चलने वाले विभागों का मंदिर), कार्य संस्कृति (परियोजना टीमों की जाली जहाँ विशेषज्ञता मायने रखती है) और व्यक्ति संस्कृति (अपनी सेवा करने वाले बराबर विशेषज्ञों का समूह)। संस्कृति प्रेरणा, निर्णय की गति, ग्राहक सेवा, जोखिम लेने और विलय की सफलता पर असर डालती है। संस्कृति बदलना धीमा और कठिन है क्योंकि मूल्य गहरे हैं और लोग विरोध करते हैं; इसके लिए नेताओं का नया व्यवहार दिखाना, संरचना, पुरस्कार, भर्ती और प्रशिक्षण में बदलाव, और नए प्रतीक व कहानियाँ चाहिए।
- व्यावसायिक रणनीति (Business Strategy) – व्यावसायिक रणनीति एक लंबी अवधि की योजना है जो कंपनी को जहाँ वह है वहाँ से वहाँ ले जाती है जहाँ वह पहुँचना चाहती है। यह मिशन (कंपनी क्यों है) से शुरू होती है, उसे SMART उद्देश्यों में बदलती है, SWOT से अपनी स्थिति जाँचती है, एन्सॉफ़ मैट्रिक्स से तय करती है कि किस बाज़ार और उत्पाद में बढ़ना है, पोर्टर की रणनीति (लागत नेतृत्व, विशिष्टता या फ़ोकस) से तय करती है कि कैसे जीतना है, और फिर लोगों, पैसे और नियंत्रण से योजना लागू करती है।