National Year 11 Computer Science
अध्याय: 5
1. 3.4 Computer systems
3.4.1 Hardware and software · 3.4.2 Boolean logic · 3.4.3 Software classification · 3.4.4 Programming languages and translators · 3.4.5 Systems architecture
- कंप्यूटर और संगणन: विकास, भाग और इनपुट-आउटपुट उपकरण – कंप्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन है जो इनपुट लेती है, प्रोग्राम के अनुसार उस पर काम करती है, डेटा सहेजती है और आउटपुट देती है। अबेकस से स्मार्टफ़ोन तक उपकरण बदलते गए। हर कंप्यूटर में इनपुट इकाई, CPU, मेमोरी और आउटपुट इकाई होती है, जो बस और पोर्ट से जुड़ी रहती हैं।
- बूलियन तर्क (Boolean Logic) – बूलियन तर्क में केवल दो मान हैं: 1 (सत्य) और 0 (असत्य)। लॉजिक गेट इन पर काम करते हैं: NOT मान उलटता है; AND तभी 1 जब सभी इनपुट 1; OR तब 1 जब कोई भी इनपुट 1; NAND और NOR, AND और OR के उल्टे हैं; XOR तब 1 जब इनपुट अलग हों। सत्य सारणी हर इनपुट संयोजन का आउटपुट बताती है (n इनपुट पर 2ⁿ पंक्तियाँ)। डी मॉर्गन: (A·B)' = A' + B' और (A + B)' = A'·B'। गेटों को जोड़कर लॉजिक सर्किट बनते हैं।
- सॉफ़्टवेयर: सिस्टम और एप्लिकेशन, सामान्य और विशिष्ट – सॉफ़्टवेयर प्रोग्रामों का समूह है। सिस्टम सॉफ़्टवेयर (ऑपरेटिंग सिस्टम, डिवाइस ड्राइवर, यूटिलिटी, भाषा अनुवादक) कंप्यूटर को चलाता और सँभालता है। एप्लिकेशन सॉफ़्टवेयर उपयोगकर्ता का काम करता है। एप्लिकेशन सॉफ़्टवेयर सामान्य उद्देश्य (बहुत लोगों के लिए तैयार) या विशिष्ट उद्देश्य (एक संस्था के लिए बनवाया) हो सकता है।
- प्रोग्रामिंग भाषाएँ और अनुवादक (Translators) – CPU सिर्फ़ मशीन कोड चला सकता है: बाइनरी निर्देश। निम्न-स्तरीय भाषाएँ हैं मशीन कोड और असेंबली (LOAD, ADD जैसे छोटे शब्द, हर एक मशीन निर्देश के बराबर)। Python, Java, C जैसी उच्च-स्तरीय भाषाएँ लोगों के लिए पढ़ने-लिखने में आसान हैं, और एक पंक्ति कई मशीन निर्देश बन सकती है। अनुवादक कोड बदलते हैं: असेंबलर असेंबली को मशीन कोड में; कंपाइलर पूरे प्रोग्राम को चलने से पहले एक्ज़ीक्यूटेबल में; इंटरप्रेटर एक-एक पंक्ति अनुवाद करके चलाता है। कुछ भाषाएँ बाइटकोड बनाती हैं, जिसे वर्चुअल मशीन चलाती है।
- कंप्यूटर आर्किटेक्चर (Computer Architecture) – कंप्यूटर आर्किटेक्चर यह योजना है कि कंप्यूटर के हिस्से मिलकर कैसे काम करते हैं। ज़्यादातर कंप्यूटर वॉन न्यूमन मॉडल पर चलते हैं: एक CPU और एक मुख्य मेमोरी, जिसमें प्रोग्राम और डेटा दोनों रहते हैं, और ये पता बस, डेटा बस और कंट्रोल बस से जुड़े हैं। CPU बार-बार फ़ेच-डिकोड-एक्ज़िक्यूट चक्र चलाता है, विशेष रजिस्टरों (PC, MAR, MDR, CIR, ACC), कंट्रोल यूनिट और ALU की मदद से। गति क्लॉक स्पीड, कोर की संख्या और कैश पर निर्भर है। निर्देश मशीन कोड (बाइनरी) में होते हैं; असेंबली उन्हें छोटे नाम देती है। हार्वर्ड, RISC/CISC और एम्बेडेड सिस्टम इसके अलग-अलग रूप हैं।
2. 3.5 Fundamentals of computer networks
Network types and connections · Protocols and layers · Network security
- कंप्यूटर नेटवर्क: प्रकार, उपकरण और टोपोलॉजी – कंप्यूटर नेटवर्क डेटा और साधन बाँटने के लिए जुड़े उपकरणों का समूह है। क्षेत्र के हिसाब से नेटवर्क PAN, LAN, MAN और WAN हैं। उपकरणों के काम अलग हैं: मॉडेम डिजिटल और एनालॉग सिग्नल बदलता है, रिपीटर कमज़ोर सिग्नल मज़बूत करता है, हब डेटा सभी पोर्ट पर भेजता है, स्विच सिर्फ़ सही उपकरण को भेजता है, राउटर नेटवर्क जोड़कर रास्ता चुनता है, और गेटवे अलग प्रोटोकॉल वाले नेटवर्क जोड़ता है। टोपोलॉजी जुड़ाव का ढाँचा है: स्टार, बस, ट्री और मेश, हर एक के अपने गुण-दोष।
- नेटवर्क प्रोटोकॉल और TCP/IP मॉडल – प्रोटोकॉल नियमों का एक तय सेट है, जिसे मानकर डिवाइस आपस में बात करते हैं। नेटवर्क का काम चार परतों (TCP/IP मॉडल) में बँटा है। एप्लिकेशन परत में ऐप के प्रोटोकॉल होते हैं: वेब पेज के लिए HTTP और HTTPS, ईमेल भेजने के लिए SMTP और सर्वर पर रखी ईमेल पढ़ने के लिए IMAP। ट्रांसपोर्ट परत (TCP) डेटा को नंबर वाले पैकेटों में तोड़ती है, जाँचती है और खोए पैकेट दोबारा भेजती है। इंटरनेट परत (IP) पता जोड़ती है और रास्ता चुनती है। लिंक परत बिट्स को तार (Ethernet) या रेडियो (Wi-Fi) से भेजती है। नीचे जाते समय हर परत एक हेडर जोड़ती है, ऊपर आते समय हटाती है। परतों से नेटवर्क बनाना और बदलना आसान होता है।
- साइबर सुरक्षा: ख़तरे और उनसे बचाव – साइबर सुरक्षा कंप्यूटर, नेटवर्क और डेटा की रक्षा करती है। इसके लक्ष्य हैं गोपनीयता, अखंडता और उपलब्धता (CIA त्रिक)। आम ख़तरे: मालवेयर, फ़िशिंग व सोशल इंजीनियरिंग, ब्रूट फ़ोर्स और डिनायल ऑफ़ सर्विस। बचाव: मज़बूत प्रमाणीकरण, कूटलेखन, फ़ायरवॉल, एंटी-मालवेयर, अपडेट, पहुँच नियंत्रण और बैकअप।
3. 3.6 Cyber security
3.6.1 Fundamentals of cyber security · 3.6.2 Cyber security threats · 3.6.3 Detecting and preventing threats
- साइबर सुरक्षा: ख़तरे और उनसे बचाव – साइबर सुरक्षा कंप्यूटर, नेटवर्क और डेटा की रक्षा करती है। इसके लक्ष्य हैं गोपनीयता, अखंडता और उपलब्धता (CIA त्रिक)। आम ख़तरे: मालवेयर, फ़िशिंग व सोशल इंजीनियरिंग, ब्रूट फ़ोर्स और डिनायल ऑफ़ सर्विस। बचाव: मज़बूत प्रमाणीकरण, कूटलेखन, फ़ायरवॉल, एंटी-मालवेयर, अपडेट, पहुँच नियंत्रण और बैकअप।
4. 3.7 Relational databases and SQL
3.7.1 Relational databases · 3.7.2 SQL
- डेटाबेस संकल्पनाएँ: DBMS, रिलेशन और की – अलग-अलग फ़ाइलों में डेटा रखने से दोहराव, असंगति और कमज़ोर सुरक्षा होती है। डेटाबेस संबंधित डेटा को एक व्यवस्थित जगह रखता है, और DBMS (जैसे MySQL) उसे सँभालने वाला सॉफ़्टवेयर है। रिलेशनल मॉडल में डेटा तालिकाओं (रिलेशन) में रहता है, जिनमें स्तंभ (एट्रिब्यूट) और पंक्तियाँ (टपल) होती हैं; डोमेन किसी स्तंभ के अनुमत मानों का समूह है। कैंडिडेट की हर पंक्ति को अलग पहचानती है; उनमें से एक प्राइमरी की चुनी जाती है और बाकी ऑल्टरनेट की होती हैं।
- MySQL के साथ SQL: तालिका बनाना, पंक्तियाँ बदलना और सवाल पूछना – SQL (स्ट्रक्चर्ड क्वेरी लैंग्वेज) MySQL जैसे रिलेशनल DBMS से बात करने की भाषा है। DDL कमांड (CREATE, ALTER, DROP) तालिकाएँ परिभाषित करते हैं; DML कमांड (INSERT, UPDATE, DELETE) पंक्तियाँ बदलते हैं; DQL (SELECT) डेटा पढ़ता है। हर स्तंभ का डेटा प्रकार होता है, जैसे INT, FLOAT, CHAR, VARCHAR या DATE। SELECT … WHERE संबंधात्मक ऑपरेटर, BETWEEN, AND/OR/NOT और IS NULL से पंक्तियाँ छाँटता है।
5. 3.8 Ethical, legal and environmental impacts
Impacts of digital technology on society
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