CBSE कक्षा 12 उद्यमिता
अध्याय: 6
1. उद्यमशीलता अवसर
उद्यमशीलता अवसर
- विचार सृजन: समस्या से अवसर तक – हर व्यवसाय एक विचार से शुरू होता है, पर हर विचार अवसर नहीं होता। उद्यमी पर्यावरण का अवलोकन करके (ग्राहक, तकनीक, नियम, अर्थव्यवस्था, समाज) अवसर पहचानता है, लोगों की समस्याएँ देखता है, और कौशल, स्थानीय संसाधन, लोगों की ज़रूरतें और कचरे जैसे विचार क्षेत्रों में खोजता है। लंबे चलने वाले रुझान बताते हैं कि किस विचार का भविष्य है। सृजनशीलता नए विचार देती है; नवप्रवर्तन उन्हें उपयोगी बनाता है। अंत में माँग, कौशल, पैसा, प्रतियोगिता और जोखिम पर जाँचकर सबसे अच्छा विचार अवसर के रूप में चुना जाता है।
2. उद्यमशीलता नियोजन
उद्यमशीलता नियोजन
- बिज़नेस प्लान: नया व्यवसाय कैसे प्लान करें – बिज़नेस प्लान (व्यवसाय योजना) एक लिखित दस्तावेज़ है। इसमें लिखा होता है कि व्यवसाय क्या बेचेगा, ग्राहक कौन हैं, उन तक कैसे पहुँचेंगे, कौन चलाएगा और पैसे का हिसाब कैसा होगा। मालिक इससे साफ़ सोच पाता है, खतरे पहले देख लेता है, और बैंक या निवेशक को पैसा देने के लिए राज़ी कर पाता है। आम तौर पर इसके हिस्से हैं: सार (एग्ज़ीक्यूटिव समरी), विचार और लक्ष्य, बाज़ार अनुसंधान, प्रतियोगी, मार्केटिंग (4 P), संचालन और टीम, और वित्त। वित्त में कुछ आसान हिसाब हैं। स्थिर लागत बिक्री से नहीं बदलती (किराया)। परिवर्ती लागत हर इकाई के साथ बढ़ती है (कच्चा माल)। कुल लागत = स्थिर + परिवर्ती। आय = कीमत × बिक्री। लाभ = आय − कुल लागत (उत्तर ऋण में हो तो हानि)। ब्रेक-ईवन बिंदु = स्थिर लागत ÷ (कीमत − प्रति इकाई परिवर्ती लागत)। योजना भविष्य का अनुमान है, इसलिए इसे बार-बार जाँचना और बदलना चाहिए।
3. उद्यम विपणन
उद्यम विपणन
- विपणन प्रबंध – विपणन का मतलब है ख़रीदारों की ज़रूरत पहचानना और मूल्य के बदले, लाभ के साथ, उसे पूरा करना। इसके कई कार्य हैं (अनुसंधान, योजना, ब्रांड, लेबल, पैकेजिंग, कीमत, संवर्धन, वितरण, सेवा) और पाँच विचारधाराएँ (उत्पादन, उत्पाद, विक्रय, विपणन, सामाजिक विपणन)। विपणन मिश्र 4P है: उत्पाद (ब्रांड, लेबल, पैकेजिंग के साथ), कीमत (लागत, माँग, प्रतियोगिता, सरकारी नियम, उद्देश्य और विपणन तरीकों से तय), स्थान (माध्यम और भौतिक वितरण) और संवर्धन (विज्ञापन, व्यक्तिगत विक्रय, विक्रय संवर्धन, जनसंपर्क)।
4. उद्यम विकास रणनीतियाँ
उद्यम विकास रणनीतियाँ
- व्यवसाय विकास रणनीतियाँ – व्यवसाय की जाँच के बाद मालिक चार में से एक रास्ता चुनता है: जारी रखना, बढ़ाना, विविधता लाना या बंद करना। विकास आंतरिक (अपने मुनाफ़े से नई शाखा, उत्पाद, कर्मचारी) या बाहरी (दूसरी कंपनियों के साथ मिलकर) हो सकता है। फ़्रैंचाइज़िंग में दूसरे लोग फ़ीस और रॉयल्टी देकर आपकी दुकान जैसी दुकान खोलते हैं। विलय में दो कंपनियाँ सहमति से एक बनती हैं; अधिग्रहण (टेकओवर) में एक कंपनी दूसरी पर नियंत्रण ख़रीद लेती है। विलय क्षैतिज, ऊर्ध्वाधर या समूह (कॉन्ग्लोमरेट) हो सकता है। हर रास्ते में गति, लागत, नियंत्रण और जोखिम का संतुलन है।
5. व्यावसायिक अंकगणित
अनेक उत्पादों के लिए व्यावसायिक अंकगणित
- सम-विच्छेद विश्लेषण (Break-Even Analysis) – जब कुल आय कुल लागत के बराबर हो, यानी लाभ शून्य, तो व्यवसाय सम-विच्छेद पर है। हर बिकी इकाई अंशदान देती है = कीमत − प्रति इकाई परिवर्ती लागत, जो पहले स्थिर लागत चुकाता है। सम-विच्छेद मात्रा = स्थिर लागत ÷ प्रति इकाई अंशदान। इससे ज़्यादा बिक्री पर लाभ, कम पर हानि। सुरक्षा सीमा = असली बिक्री − सम-विच्छेद बिक्री। लक्ष्य लाभ के लिए (स्थिर लागत + लक्ष्य लाभ) ÷ अंशदान इकाइयाँ बेचनी होंगी।
6. संसाधन जुटाना
पूँजी जुटाना
- पूँजी जुटाना: पूँजी बाज़ार, एंजेल और उद्यम पूँजी – व्यवसाय को बढ़ने के लिए लंबी अवधि का पैसा (पूँजी) चाहिए। पूँजी बाज़ार वह जगह है जहाँ शेयर और बॉन्ड के ज़रिए लंबी अवधि का पैसा बचतकर्ताओं से व्यवसायों तक जाता है। इसके प्राथमिक बाज़ार में कंपनी सार्वजनिक निर्गम (IPO), बिक्री का प्रस्ताव, निजी नियोजन, अधिकार निर्गम आदि से नई प्रतिभूतियाँ सीधे निवेशकों को बेचती है। नए स्टार्टअप इसके लिए बहुत छोटे होते हैं, इसलिए वे एंजेल निवेशकों (शुरुआत में पैसा और सलाह देने वाले धनी व्यक्ति) और उद्यम पूँजी (कई निवेशकों का पैसा जोखिम भरे, तेज़ बढ़ते स्टार्टअप में हिस्सेदारी के बदले लगाने वाले फ़ंड, जो बाद में IPO या बिक्री से निकलते हैं) के पास जाते हैं। हर नए निवेशक को नए शेयर मिलते हैं, तो संस्थापक का हिस्सा घटता है (डाइल्यूशन) जबकि कंपनी का मूल्य बढ़ सकता है।