CBSE कक्षा 11 भारत की ज्ञान परंपराएँ एवं प्रथाएँ
अध्याय: 9
1. भारत में खगोल विज्ञान
भारत में खगोल विज्ञान
- भारत में खगोल विज्ञान – भारतीय खगोलविद हज़ारों साल से सूर्य, चंद्रमा और ग्रहों को देखकर समय, त्योहार और खेती की तिथियाँ तय करते आए हैं। उन्होंने चंद्रमा के मार्ग को 13°20′ के 27 नक्षत्रों में बाँटा, चंद्रमा के सूर्य से हर 12° आगे बढ़ने को एक तिथि कहा, और ऐसा चांद्र-सौर पंचांग बनाया जो लगभग हर 3 साल में एक अधिक मास जोड़ता है। आर्यभट, ब्रह्मगुप्त, भास्कर द्वितीय और केरल स्कूल ने गणित से ग्रहण और ग्रहों की स्थिति निकाली। 1700 के दशक में जयसिंह द्वितीय ने जंतर मंतर के विशाल यंत्र बनवाए। आज दूरबीन, अंतरिक्ष यान और कंप्यूटर कहीं अधिक सटीक गणना करते हैं।
2. भारत में रसायन विज्ञान
भारत में रसायन विज्ञान
- भारतीय ज्ञान परंपरा – भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) वे विचार, कौशल और विधियाँ हैं जो भारतीय उपमहाद्वीप में हज़ारों वर्षों में गणित, खगोल, धातुकर्म, रसायन, चिकित्सा, वास्तु, भाषा और कलाओं में विकसित हुईं। मुख्य उदाहरण: शून्य सहित स्थानीय मान, जंग-रोधी लोहा, बड़े पैमाने पर जस्ते का आसवन, वुट्ज़ इस्पात, रंगबंधक के साथ प्राकृतिक रंग, आयुर्वेद और शल्य ग्रंथ, पाणिनि का व्याकरण, और बावड़ी, जाली व आँगन वाले घर जैसी जलवायु-अनुकूल डिज़ाइन। इसे पढ़ने का मतलब है दावों को प्रमाण से जाँचना और पुराने विचारों को आज के विज्ञान-डिज़ाइन से जोड़ना।
3. भारतीय साहित्य भाग-1
भारतीय साहित्य का परिचय
जल्द आ रहा है
4. भारतीय दार्शनिक प्रणालियाँ
भारतीय दार्शनिक प्रणालियाँ
- भारतीय दार्शनिक प्रणालियाँ – भारतीय दर्शन ("देखने का तरीका") पूछता है: क्या सच में है, हम कैसे जानते हैं, और अच्छा जीवन व दुःख से मुक्ति कैसे मिले। छह दर्शन वेदों का प्रामाण्य मानते हैं (आस्तिक): न्याय, वैशेषिक, सांख्य, योग, मीमांसा, वेदांत। तीन नहीं मानते (नास्तिक): बौद्ध, जैन, चार्वाक। संप्रदाय प्रमाणों (ज्ञान के साधन) की संख्या में अलग हैं: केवल प्रत्यक्ष (चार्वाक) से छह (मीमांसा, अद्वैत वेदांत) तक। हर संप्रदाय तर्क और शास्त्रार्थ से अपना मत रखता है।
5. पर्यावरण संरक्षण पर भारतीय पारंपरिक ज्ञान
पारंपरिक पर्यावरण संरक्षण
- पारंपरिक पारिस्थितिक ज्ञान: समुदाय प्रकृति की रक्षा कैसे करते हैं – पारंपरिक पारिस्थितिक ज्ञान वह ज्ञान है जो कोई समुदाय पीढ़ियों तक अपनी ज़मीन, पानी, पौधों और जीवों के बारे में सीखता है: देखकर, करके और कहानियों से। कई समुदायों ने इससे प्रकृति बचाई: देवबन जहाँ पेड़ नहीं कटते, पेड़ों और जीवों की रक्षा के नियम (जैसे बिश्नोई), बारिश रोकने वाले तालाब और बावड़ियाँ, खेत को आराम और मिश्रित फ़सलें, और मछली पकड़ने पर कुछ महीने रोक। आज वैज्ञानिक और सरकारें समुदायों के साथ काम करती हैं। यह ज्ञान सम्मान, श्रेय और समुदाय की सहमति से ही उपयोग होना चाहिए।
6. जीव विज्ञान-1: आयुर्वेद
जीवन, स्वास्थ्य और कल्याण के लिए आयुर्वेद
- आयुर्वेद: स्वास्थ्य की एक भारतीय ज्ञान परंपरा – आयुर्वेद का अर्थ है "जीवन का ज्ञान"। यह 2000 साल से भी पुरानी भारतीय स्वास्थ्य पद्धति है, जिसके मुख्य ग्रंथ चरक (चिकित्सा) और सुश्रुत (शल्य चिकित्सा) के हैं। इसके दो लक्ष्य हैं: स्वस्थ को स्वस्थ रखना और रोगी को ठीक करना। इसके अनुसार सब कुछ पाँच तत्वों से बना है, जो शरीर में तीन दोष बनाते हैं: वात, पित्त और कफ। इनका संतुलन ही स्वास्थ्य है। आयुर्वेद दिनचर्या, ऋतुचर्या और जीवन के तीन सहारों (आहार, निद्रा, संयम) पर ज़ोर देता है। इसकी कई आदतें आधुनिक सलाह से मिलती हैं, पर दवाएँ केवल योग्य वैद्य की सलाह से लें, और गंभीर बीमारी में डॉक्टर ज़रूरी है।
7. जीव विज्ञान-2: चिकित्सा परंपरा
प्राचीन भारत में चिकित्सा परंपरा का विकास
- चिकित्सा का इतिहास – लगभग 1000 से 1500 तक ज़्यादातर डॉक्टर प्राचीन यूनानी विचार मानते थे: शरीर के चार द्रवों का संतुलन बिगड़ने से बीमारी होती है, इलाज खून निकालना, जड़ी-बूटी और प्रार्थना। पुनर्जागरण (1500–1700) में शरीर की सही रचना (वेसेलियस), खून का घूमना (हार्वे) और पहला टीका (जेनर, 1796) आया। 1800 के दशक में रोगाणु सिद्धांत (पाश्चर, कोख) ने बताया कि कीटाणु बीमारी करते हैं; सर्जरी में दर्द, संक्रमण और खून बहना हल हुए। 1900 के बाद एंटीबायोटिक, एक्स-रे, डीएनए, युद्ध, तकनीक और सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था ने चिकित्सा बदल दी। बदलाव में व्यक्ति, विज्ञान, तकनीक, युद्ध, सरकार और संचार ने मदद की; परंपरा और ज्ञान की कमी ने रोका।
8. भारत में गणित
भारत में गणित
- गणित का इतिहास – गणित हज़ारों सालों में कई जगहों पर बढ़ा। लोगों ने पहले निशान लगाकर गिनती की। मिस्र और बेबीलोन ने ज़मीन और निर्माण के लिए ज्यामिति इस्तेमाल की, और बेबीलोन 60-60 में गिनता था। थेल्स, पाइथागोरस, यूक्लिड और हाइपेशिया जैसे यूनानी विद्वानों ने ज्यामिति को प्रमाण दिए। भारत ने शून्य वाला स्थानीय मान दिया, बग़दाद के विद्वानों ने बीजगणित बनाया, और ये विचार यूरोप पहुँचे। हर महाद्वीप की महिलाओं और पुरुषों ने, अक्सर अन्यायपूर्ण रुकावटों के बावजूद, गणित को आकार दिया।
9. भारत में रंगमंच और नाटक
रंगमंच और नाटक
- भारतीय रंगमंच: नाट्यशास्त्र से नुक्कड़ नाटक तक – भारतीय रंगमंच का इतिहास बहुत लंबा है। नाट्यशास्त्र, भरत मुनि का माना जाने वाला संस्कृत ग्रंथ, अभिनय, संगीत, नृत्य, मंच और रस (दर्शक जो भाव अनुभव करते हैं) समझाता है। अभिनय के चार प्रकार हैं: आंगिक (शरीर), वाचिक (वाणी), आहार्य (वेशभूषा, श्रृंगार) और सात्त्विक (भीतर का भाव)। भास, कालिदास और शूद्रक के संस्कृत नाटक नाट्यगृह में खेले जाते थे। यक्षगान, जात्रा, तमाशा, नौटंकी, भवाई और तेरुकूत्तु जैसे लोक नाट्य खुली जगह में, दर्शकों के पास, गीत-नृत्य-संवाद मिलाकर होते हैं। आधुनिक रंगमंच में फ़्रेम मंच, पारसी थियेटर, जन नाट्य आंदोलन और सामाजिक मुद्दों पर नुक्कड़ नाटक आए।